पीयूष कुमार संभावनाओं से भरी अपूर्वा की कविताएँ.. समकालीन कविता जहाँ साहित्यिक लोकतंत्र के विस्तार से सम्पन्न हुई है, वहीं विचारहीन युवाओं के इस स्वर्णकाल...
मयंक खरे डॉ. सबीहा रहमानी की कविताएँ केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे एक वैचारिक प्रतिरोध, सामाजिक दृष्टि और सांस्कृतिक पुनर्पाठ की कोशिशें...
जौनपुर में जश्न-ए-किताब का आयोजन, पुस्तकालय संचालक, लाइब्रेरी एक्टिविस्ट और लेखक-कलाकार जुटे जौनपुर। जौनपुर के ऐतिहासिक हिंदी भवन में 10-11 मई को जन संस्कृति मंच...