समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविता

अरुण देव की कविताएँ मृत्‍यु की लौकिकता का संसार रचती हैं

समकालीन जनमत
पंकज चौधरी मृत्‍यु के बाद जीवन को समाप्‍त मान लिया जाता है। माना जाता है कि मृत्‍यु के बाद जीवन की तमाम गतिविधियाँ और कारोबार...
पुस्तक

पवन करण के कविता संग्रह ‘स्त्री मुग़ल’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
अलका बाजपेयी ‘स्त्री मुगल’ ( राधाकृष्ण प्रकाशन, 2023) पवन करण जी की 100 कविताओं का एक संग्रह है जो कि मुग़ल साम्राज्य के भीतर रहने...
साहित्य-संस्कृति

फासीवाद को सांस्कृतिक चुनौती : जसम सम्मेलन की पांच बड़ी उपलब्धियां

आशुतोष कुमार
ऐसी कई बातें हैं जिनके लिए जन संस्कृति मंच का 17वां राष्ट्रीय सम्मेलन याद किया जाएगा। यह सम्मेलन 12 और 13 जुलाई 2025 को रांची...
साहित्य-संस्कृति

जसम का राष्ट्रीय सम्मेलन : फासीवाद की विभाजनकारी संस्कृति के खिलाफ एकता, सृजन और संघर्ष का संकल्प

समकालीन जनमत
मशहूर रंगकर्मी जहूर आलम अध्यक्ष तथा लेखक व पत्रकार मनोज कुमार सिंह महासचिव चुने गए रॉंची। जन संस्कृति मंच का 17वां राष्ट्रीय सम्मेलन 12 व...
पुस्तक

विमल कुमार के काव्य संग्रह ‘मृत्यु की परिभाषा बदल दो’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
पवन करण इस दौर में कवि विमल कुमार की सक्रिय रचनात्मक निरंतरता उल्लेखनीय और आश्वस्तिकारी है। ‘सपने में एक औरत’ से बातचीत से बरास्ते ‘जंगल...
कविता

उद्देश्य कुमार की कविताएँ मध्यवर्गीय जीवन की एकरसता से जूझती हैं

समकालीन जनमत
अनुराग यादव एक रचनाकार अगर वास्तव में समाज को एक नया नज़रिया, सोचने समझने का एक नया तरीका प्रदान करना चाहता है उसे अपनी दृष्टि...
स्मृति

‘ जौनपुर के रसूल हमजातोव ’ अजय कुमार नहीं रहे

कौशल किशोर
‘ मेरा दागिस्तान ‘ से जो रिश्ता रसूल हमजातोव का है, वही अजय कुमार का जौनपुर से है। यह शहर, इसके गांव-कस्बे, गलियां-चौराहे, सेवा प्रेस-रास...
पुस्तक

सुमेर सिंह राठौर की डायरी ‘बंजारे की चिठ्ठियाँ’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
पवन करण चिट्ठियाँ जो ख़ुद को भेजनी थीं, अपने डरों से लड़ने की कोशिश में, बंजारे की चिट्ठियाँ बन गईं- ‘बंजारे की चिट्ठियाँ’ पढ़ने के...
कविता

रोशन टोप्पो की कविताएँ आदिवासी परम्परा और विरासत के स्वर हैं

सन्ध्या नवोदिता रोशन टोप्पो आदिवासी जमीन के कवि हैं. आज भी आदिवासियों को अपनी बात अपने ही देशवासियों तक पहुँचाने के लिये अपनी भाषा की...
कविता

संघमित्रा राएगुरू की कविताएँ सामाजिक और सांस्कृतिक संचेतना से सराबोर हैं

शिरोमणि महतो उड़ीसा की युवाकवि संघमित्रा राएगुरू उड़िया व हिंदी साहित्य से जुड़ी हुई हैं। दोनों भाषाओं में उनका समानाधिकार है। वह मुख्य रूप से...
पुस्तक

मुस्तफ़ा ख़ान के काव्यसंग्रह ‘पत्थरों की भाषा’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
पवन करण भाषा पत्थरों की मगर आहत नहीं करती किसी को: मुस्तफ़ा ख़ान की कविताएँ मुस्तफ़ा ख़ान लंबे समय से कविताएँ लिख रहे हैं। समय-समय...
पुस्तक

ललन चतुर्वेदी के कविता संग्रह ‘आवाज़ घर’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
 अष्टभुजा शुक्ल ललन चतुर्वेदी छोटी – छोटी कविताओं के ऐसे प्रौढ़ कवि हैं जो घोषित तौर पर ‘ बड़ी कविताएँ ‘ नहीं लिख सकते। कारण...
कविता

प्रेम और प्रकृति को भाषा में बचाने की कोशिश करता एक कवि

समकालीन जनमत
प्रज्ञा गुप्ता ” जिंदगी में कुछ ‘बनने’ की चाहत में पहाड़ पीछे छूटते गए नदियों को गाड़ी की खिड़की से जी भर के देख पाता...
कविता

अपूर्वा दीक्षित की कविताएँ मन की डोर को थामे रहने की समझ से निर्मित हैं

समकालीन जनमत
पीयूष कुमार संभावनाओं से भरी अपूर्वा की कविताएँ.. समकालीन कविता जहाँ साहित्यिक लोकतंत्र के विस्तार से सम्पन्न हुई है, वहीं विचारहीन युवाओं के इस स्वर्णकाल...
संस्मरण

नागफ़नी का दोस्त (7)

दिनेश अस्थाना
( भानु कुमार दुबे ‘मुंतज़िर मिर्ज़ापुरी’ एक तरक्कीपसंद शायर रहे हैं। उनका जन्म 26 सितंबर 1953 को हुआ था। आज से दो साल पहले 28...
स्मृति

जसम ने साहित्यकार नीलकांत को श्रद्धांजलि दी 

समकालीन जनमत
लखनऊ, 15 जून। हिन्दी के प्रसिद्ध मार्क्सवादी आलोचक , कहानीकार और आलोचक नीलकांत के निधन पर जन संस्कृति मंच (जसम) ने शोक व्यक्त किया है।...
साहित्य-संस्कृति

मध्यप्रदेश के अशोक नगर में जन संस्कृति मंच की इकाई गठित, हरगोविंद पुरी अध्यक्ष और जसपाल बांगा सचिव बने

सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए मशहूर मध्यप्रदेश के अशोक नगर में रविवार को जन संस्कृति मंच की पहली इकाई का गठन हुआ।  अशोक नगर जसम के...
पुस्तक

शांति नायर के कविता संग्रह ‘ज्यामिति’ की पुस्तक समीक्षा

उमा राग
पवन करण जिनके पास जितने नुकीले कोण हैं वे उतने ही अधिक पुरुष हैं। शांति नायर की कविताएँ बातचीत में भाग लेने पहुँचती हैं, ज़रा...
कविता

सबीहा रहमानी की कविताओं में सामाजिक सच्चाई से टकराने का साहस है

समकालीन जनमत
मयंक खरे डॉ. सबीहा रहमानी की कविताएँ केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे एक वैचारिक प्रतिरोध, सामाजिक दृष्टि और सांस्कृतिक पुनर्पाठ की कोशिशें...
पुस्तक

संविधान, कानून और जनता

गोपाल प्रधान
2018 में प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी प्रेस से रोहित डे की किताब ‘ ए पीपुल’स कनस्टीच्यूशन : द एवरीडे लाइफ़ आफ़ ला इन द इंडियन रिपब्लिक ’...
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