समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

साहित्य-संस्कृति

“  फ़ैज़ और मुक्तिबोध हमारे दिशावाहक हैं ”

समकालीन जनमत
लखनऊ। जन संस्कृति मंच (जसम) की ओर से 24 नवम्बर को एमबीए लाइब्रेरी, जगत नारायण रोड के सभागार में ‘ यादें फैज व मुक्तिबोध ‘...
कविता

कंचन सिंह की कविताएँ स्त्री-मन, स्त्री-पीड़ा की मौलिक अभिव्यक्ति हैं।

समकालीन जनमत
अजय दुर्ज्ञेय   कंचन सिंह की कविताओं से यह मेरी संभवत पहली मुलाक़ात है और पहली ही मुलाक़ात में उनकी कविताओं के विषय और विषयगत...
स्मृति

कवि, कथाकार, संस्कृतिकर्मी अरविन्द कुमार का जाना जन सांस्कृतिक आंदोलन की बड़ी क्षति -जन संस्कृति मंच

समकालीन जनमत
‘आओ कोई ख्वाब बुने’ के रचनाकार कवि, कथाकार और संस्कृतिकर्मी अरविंद कुमार नहीं रहे। 15 नवंबर को गुरुग्राम में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह काफी...
साहित्य-संस्कृति

बिरसा मुंडा के विचारों पर चलने और उलगुलान की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प

महान क्रांतिकारी बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और झारखंड राज्य के 25वें स्थापना दिवस पर उलगुलान सभा उलगुलान के महानायक धरती आबा बिरसा मुंडा की...
कविता

विनोद कुमार ‘हंस’ की कविताएँ सामाजिक रूढ़ियों के प्रति विद्रोह दर्ज करती हैं

हरे प्रकाश उपाध्याय विनोद कुमार ‘हंस’ कविता की दुनिया में बिलकुल अभी-अभी दाखिल हो रहे कवि हैं। फ़िलहाल उनका स्वागत और स्वीकार इसी रूप में...
जनमतपुस्तकसाहित्य-संस्कृति

उर्दू इसी देश की बोली-भाषा है

दुर्गा सिंह
  भाषा का सवाल मानव सभ्यता के इतिहास में हमेशा अहम रहा है। एक तो भाषा में ही कोई संस्कृति ज्यादा स्थायित्व पाती है, दूसरे...
कविता

पूर्णिमा साहू की कविताएँ दृष्टि संपन्नता की पूंजी लेकर आई हैं

समकालीन जनमत
अणु शक्ति सिंह पूर्णिमा साहू की कविताओं पर पहली दृष्टि पड़ते ही उनकी राजनीतिक समझ की झलक आ जाती है। ऐसे समय में जब स्त्री...
जनमतसाहित्य-संस्कृति

छत्तीसगढ़ में जन संस्कृति मंच ने मनाया स्थापना समारोह

समकालीन जनमत
छत्तीसगढ़ में जन संस्कृति मंच ने किसानों-मजदूरों और ग्रामीण बच्चों के बीच मनाया स्थापना समारोह बंगोली गांव में बच्चों के बीच वितरित की गई साहित्यिक...
पुस्तक

ज्योति कलश : इतिहास और साहित्य को एक सूत्र में पिरोने की कोशिश

समकालीन जनमत
सुजीत कुमार   ज्योति कलश : ज्योति बा फुले और सावित्रीबाई फुले की क्रांतिकारी जीवन गाथा (संजीव कृत उपन्यास ‘ज्योति कलश’ की पुस्तक समीक्षा) ‘ज्योति...
कविता

प्रियंका यादव की कविताएँ प्रेम में स्त्री-मन की उधेड़बुन से रूपाकार ग्रहण करती हैं

समकालीन जनमत
अनुराग यादव कविता भावों का एक संसार निर्मित करने की संभावना स्वयं में समेटे रहती है, उसे आवश्यकता होती है एक सहृदय पाठक की |...
जनमतपुस्तकसाहित्य-संस्कृति

सामाजिक सरोकारों, संवेदनाओं और काव्य-रसों से सराबोर उपन्यासिका ‘माई रे’  

समकालीन जनमत
आलोक कुमार श्रीवास्तव   उपन्यास को जीवन का महाकाव्य कहा गया है। काव्यशास्त्र कहता है कि जीवन के रस ही कविता में आकर पाठक या...
साहित्य-संस्कृति

जन संस्कृति मंच का 40वां स्थापना दिवस घुटूवा शहीद स्मारक में संपन्न

30 अक्टूबर, 2025 को रामगढ़ जिले के घुटूवा 1नंबर गेट स्थित शहीद स्मारक में घुटूवा गोलीकांड के शहीदों रिझनी देवी, बलकहिया देवी और रामप्रसाद महतो...
पुस्तक

रूसी क्रांति का लाल तारा

गोपाल प्रधान
लेफ़्टवर्ड, विजय प्रसाद, रेड स्टार ओवर द थर्ड वर्ल्ड ,...
साहित्य-संस्कृति

अभिव्यक्ति के खतरे उठाने के आह्वान के साथ मना जसम का 40वां स्थापना दिवस

लखनऊ, 26 अक्टूबर। जन संस्कृति मंच (जसम) की लखनऊ इकाई ने संगठन का 40वां स्थापना दिवस ‘उठाने ही होंगे अभिव्यक्ति के खतरे’ के आह्वान के...
कविता

कुमार लव की कविताएँ शब्दों तथा दृश्यों का सुंदर समन्वय हैं

समकालीन जनमत
चित्रा पंवार ‘कविता वह सुरंग है जिसके भीतर से मनुष्य एक विश्व को छोड़कर दूसरे विश्व में प्रवेश करता है’ यकीनन हिंदी के महान कवि...
कविता

सुधीर सुमन की प्रेम कविताएँ अकेलेपन से संवाद हैं

समकालीन जनमत
राजेश कमल सुधीर सुमन हमारे समय के उन महत्त्वपूर्ण कवियों में हैं, जिनकी उपस्थिति गहरी है, पर जिनका प्रॉपर रेखांकन अब तक नहीं हुआ ।...
कविता

सुरेश जिनागल की कविताएँ वंचना और उत्पीड़न के विरुद्ध प्रतिरोध की चिनगारी की तरह हैं

समकालीन जनमत
अरुण आदित्य सुरेश जिनागल गहन मानवीय संवेदना और सामाजिक सरोकारों वाले कवि हैं। उनकी ये कविताएँ वंचना और उत्पीड़न के विरुद्ध प्रतिरोध की चिनगारी की...
कविता

पल्लवी की कविताएँ संवेदना की परिपक्व भाव-भूमि पर रची गई हैं।

समकालीन जनमत
प्रज्ञा गुप्ता पल्लवी की कविता स्त्री-स्वातंत्र्य, विद्रोह और सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया को रूपक और प्रतीकों के माध्यम से बहुत ही प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत...
साहित्य-संस्कृति

आलोचना की सामाजिकता

जिस क्रियापद से लोचन बनता है उसी से आलोचना भी। इसका मतलब कि आलोचना के लिए देखने की शक्ति होनी चाहिए। मनुष्य की सभी ज्ञानेंद्रियों...
कविता

मानसी मिश्र की कविताएँ जन विरोधी व्यवस्था वाली दुनिया में एक स्त्री नागरिक का अधिकारपूर्ण दखल हैं।

समकालीन जनमत
एकता वर्मा मानसी संभावनाओं की कवयित्री हैं। इनकी कविताओं में युवा हृदय की उत्तेजनाएँ हैं। उनकी कविताएँ एक आधुनिक हुई, शिक्षित, शहरीकृत हुई कामगार महिला...
Fearlessly expressing peoples opinion