समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविता

प्रियंका यादव की कविताएँ प्रेम में स्त्री-मन की उधेड़बुन से रूपाकार ग्रहण करती हैं

समकालीन जनमत
अनुराग यादव कविता भावों का एक संसार निर्मित करने की संभावना स्वयं में समेटे रहती है, उसे आवश्यकता होती है एक सहृदय पाठक की |...
जनमतपुस्तकसाहित्य-संस्कृति

सामाजिक सरोकारों, संवेदनाओं और काव्य-रसों से सराबोर उपन्यासिका ‘माई रे’  

समकालीन जनमत
आलोक कुमार श्रीवास्तव   उपन्यास को जीवन का महाकाव्य कहा गया है। काव्यशास्त्र कहता है कि जीवन के रस ही कविता में आकर पाठक या...
साहित्य-संस्कृति

जन संस्कृति मंच का 40वां स्थापना दिवस घुटूवा शहीद स्मारक में संपन्न

30 अक्टूबर, 2025 को रामगढ़ जिले के घुटूवा 1नंबर गेट स्थित शहीद स्मारक में घुटूवा गोलीकांड के शहीदों रिझनी देवी, बलकहिया देवी और रामप्रसाद महतो...
पुस्तक

रूसी क्रांति का लाल तारा

गोपाल प्रधान
लेफ़्टवर्ड, विजय प्रसाद, रेड स्टार ओवर द थर्ड वर्ल्ड ,...
साहित्य-संस्कृति

अभिव्यक्ति के खतरे उठाने के आह्वान के साथ मना जसम का 40वां स्थापना दिवस

लखनऊ, 26 अक्टूबर। जन संस्कृति मंच (जसम) की लखनऊ इकाई ने संगठन का 40वां स्थापना दिवस ‘उठाने ही होंगे अभिव्यक्ति के खतरे’ के आह्वान के...
कविता

कुमार लव की कविताएँ शब्दों तथा दृश्यों का सुंदर समन्वय हैं

समकालीन जनमत
चित्रा पंवार ‘कविता वह सुरंग है जिसके भीतर से मनुष्य एक विश्व को छोड़कर दूसरे विश्व में प्रवेश करता है’ यकीनन हिंदी के महान कवि...
कविता

सुधीर सुमन की प्रेम कविताएँ अकेलेपन से संवाद हैं

समकालीन जनमत
राजेश कमल सुधीर सुमन हमारे समय के उन महत्त्वपूर्ण कवियों में हैं, जिनकी उपस्थिति गहरी है, पर जिनका प्रॉपर रेखांकन अब तक नहीं हुआ ।...
कविता

सुरेश जिनागल की कविताएँ वंचना और उत्पीड़न के विरुद्ध प्रतिरोध की चिनगारी की तरह हैं

समकालीन जनमत
अरुण आदित्य सुरेश जिनागल गहन मानवीय संवेदना और सामाजिक सरोकारों वाले कवि हैं। उनकी ये कविताएँ वंचना और उत्पीड़न के विरुद्ध प्रतिरोध की चिनगारी की...
कविता

पल्लवी की कविताएँ संवेदना की परिपक्व भाव-भूमि पर रची गई हैं।

समकालीन जनमत
प्रज्ञा गुप्ता पल्लवी की कविता स्त्री-स्वातंत्र्य, विद्रोह और सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया को रूपक और प्रतीकों के माध्यम से बहुत ही प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत...
साहित्य-संस्कृति

आलोचना की सामाजिकता

जिस क्रियापद से लोचन बनता है उसी से आलोचना भी। इसका मतलब कि आलोचना के लिए देखने की शक्ति होनी चाहिए। मनुष्य की सभी ज्ञानेंद्रियों...
कविता

मानसी मिश्र की कविताएँ जन विरोधी व्यवस्था वाली दुनिया में एक स्त्री नागरिक का अधिकारपूर्ण दखल हैं।

समकालीन जनमत
एकता वर्मा मानसी संभावनाओं की कवयित्री हैं। इनकी कविताओं में युवा हृदय की उत्तेजनाएँ हैं। उनकी कविताएँ एक आधुनिक हुई, शिक्षित, शहरीकृत हुई कामगार महिला...
कविता

सुमन कुमार सिंह की कविताएँ वंचित तबकों का यथार्थ बयान करती हैं

अवंतिका सिंह सुमन कुमार सिंह की कविताएँ समकालीन भारतीय समाज का दर्पण हैं। इन कविताओं के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक विडंबनाओं, आम आदमी की...
साहित्य-संस्कृति

हम असली मुद्दे और विरासत भूल जाएं, इसके लिए स्मृतियां मैन्युफैक्चर की जा रही हैं- प्रणय कृष्ण

समकालीन जनमत
लखनऊ, 15 सितंबर। ” देश में स्मृतियों का गृह युद्ध चल रहा है। सत्ता चाहती है कि उमर खालिद जैसे लोग, जो बरसों से जेल...
कवितास्मृति

इज़ाडोरा डंकन को उनकी पुण्यतिथि पर के. मंजरी श्रीवास्तव की काव्यात्मक श्रद्धांजलि

समकालीन जनमत
विश्व के महान व्यक्तित्वों (ख़लील जिब्रान, ग़ालिब, मीर, रूमी, इक़बाल, पाब्लो नेरुदा, इज़ाडोरा) के जीवन और विचारों को भारत के समकालीन परिप्रेक्ष्य में स्थापित करते...
कविता

संतोष पटेल की कविताएँ मानवीय संघर्ष और अस्मिता के विस्तार तक ले जाती हैं

समकालीन जनमत
नीलाम्बुज सरोज संतोष पटेल की कविताएँ हिंदी कविता में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप हैं। उनका कविता संग्रह ‘कारक के चिह्न’ केवल साहित्यिक सौंदर्य का उत्सव नहीं, बल्कि...
संस्मरण

नागफ़नी का दोस्त (11)

समकालीन जनमत
( भानु कुमार दुबे ‘मुंतज़िर मिर्ज़ापुरी’ एक तरक्कीपसंद शायर रहे हैं। उनका जन्म 26 सितंबर 1953 को हुआ था।  दो साल पहले 28 जनवरी 2023...
साहित्य-संस्कृति

विघ्नकर्ता से विघ्नहर्ता, शूद्र गणनायक से देवता बनने का सफ़र

सुशील मानव
दलितों के बीच गणेशोत्सव मनाने, मूर्तियां स्थापित करने के लिये सत्ताधारी पार्टी व संगठन द्वारा फंडिंग के आरोपों के बीच गणेश कौन हैं, इसे लेकर...
कविता

गौरव सिंह की कविताएँ नेपथ्य में खो गए जीवन-रागों को आवाज़ देती हैं

समकालीन जनमत
प्रो. रामेश्वर राय कविता समय से तटस्थ नहीं होती, लेकिन समय के साथ उसका रिश्ता इतिहास और सूचना-तंत्र से भिन्न होता है। कविता में दर्ज़...
पुस्तक

स्मिता सिन्हा के कविता संग्रह ‘रूंधे कंठ की अभ्यर्थना’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
जावेद आलम ख़ान छलकती पीड़ा को रोककर बेआवाज़ प्रार्थना है ‘रूंधे कंठ की अभ्यर्थना’। स्मिता सिन्हा का यह संग्रह अपने नाम को सार्थक करता है।...
संस्मरण

नागफ़नी का दोस्त (10)

समकालीन जनमत
( भानु कुमार दुबे ‘मुंतज़िर मिर्ज़ापुरी’ एक तरक्कीपसंद शायर रहे हैं। उनका जन्म 26 सितंबर 1953 को हुआ था।  दो साल पहले 28 जनवरी 2023...
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