समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

पुस्तक

सरकार का अपने ही नागरिकों से युद्ध

गोपाल प्रधान
लेख के शीर्षक से भ्रम सम्भव है कि यह किताब नागरिकता संबंधी कानूनों के बारे में है लेकिन दुर्भाग्य से हमारे देश की सरकार लम्बे...
पुस्तक

वैश्विकता और स्‍थानीयता को जोड़ने वाली आत्‍मालोचना युक्‍त भावना

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल ताइवान के वरिष्ठ कवि, आलोचक ली मिन-युंग की कविताएँ आजादी, प्रेम और स्‍वप्‍न की भावनाओं को सहज और सचेत ढंग से स्‍वर देती...
कविता

सोनू यशराज की कविताएँ किताबों से एक स्त्री का संवाद हैं

समकालीन जनमत
आलोक रंजन सोनू यशराज की अधिकांश कविताएँ किताबों को समर्पित हैं और शेष स्त्री प्रश्नों से जुड़ी हुई । किताबों के माध्यम से रचनाकार ने...
कविता

प्रेम की अँजोरिया फैलाती हैं नीरज की कविताएँ

समकालीन जनमत
रमण कुमार सिंह अवधी पृष्ठभूमि के कवि नीरज की कविताएँ किसान जीवन और संस्कृति से हमारा साक्षात्कार कराती हैं। सबसे ज्यादा आकर्षित करती है उनकी...
पुस्तक

जाति-मुक्ति का प्रश्न, उसकी राजनीति और पूंजी-लोक (नवीन जोशी के उपन्यास के बहाने कुछ बातें)

के के पांडेय
(एक दलित नौजवान के अंतर्द्वंद की कथा के भीतर से उत्तराखंडी समाज के भीतर की जातिगत विषमताओं, कारपोरेट की गुलामगीरी और राजनैतिक आंदोलनों के सामाजिक...
कविता

शिवनंदन कवि आ उनकर दूगो गीत

बलभद्र
भोजपुर के बड़हरा ब्लॉक में एगो गाँव बा मौजमपुर। एहिजा के रहलें एगो शिवनंदन कवि। उनकर एगो कविता बा जवना में पत्थल-पानी परला के चलते...
पुस्तक

कितने बहानों के बीच देश काल: अरुणाभ सौरभ का काव्य संग्रह ‘किसी और बहाने से’

समकालीन जनमत
रोमिशा  जाने कितने बहानों से कवि अपने ईर्द -गिर्द के समाज, देश, काल में क्या सब देख लेता है और उसी देखने के क्रम में...
कविता

जसिंता केरकेट्टा की कविताएँ सत्ता की भाषा के पीछे छुपी मंशा को भेद कर उसके कुटिल इरादों को बेनकाब करती हैं

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय युवा कवयित्री जसिंता केरकेट्टा की कविताओं को महज जनजातीय स्मृतियों अथवा चेतना की कविताएँ कहना न्यायसंगत न होगा। अपने पर्यावरण और जातीय स्मृतियों...
कविता

‘मोह’ के कवि हरिराम द्विवेदी

बलभद्र
हरिराम द्विवेदी भोजपुरी कविता का एक सुपरिचित नाम है। 12 मार्च 1936 को जन्मे 85 पार के द्विवेदी जी भोजपुरी साहित्य-जगत में किसी परिचय के...
साहित्य-संस्कृति

सहरा करीमी जैसी तमाम आवाजों के साथ खड़े होने की जरूरत : प्रतिरोध का सिनेमा

समकालीन जनमत
“हमें अफ़ग़ान महिलाओं, बच्चों, कलाकारों और फ़िल्म निर्माताओं की ओर से आपके समर्थन और आवाज़ की ज़रूरत है। यह सबसे बड़ी मदद है, जिसकी हमें...
सिने दुनिया

सिने दुनिया: पैरसाइट (दक्षिण कोरियाई) और द प्लैटफॉर्म (स्पैनिश): अमीरों के लिए जो मौसम सुहाना, गरीबों की वह त्रासदी है..

फ़िरोज़ ख़ान
दक्षिण कोरिया में कई अमीर लोगों ने ऐसे घर बना रखे हैं कि जहां अगर ऐटमी हमला हो, तो उनके तहखानों में कुछ समय तक...
कविता

ज़ु लिज़ी की कविताएँ पाठक वर्ग के बीच अपनी समझ को डी-क्लास करने की मांग करती हैं

समकालीन जनमत
तनुज  समाजवाद के उत्तर-संक्रांति काल के दौरान विश्व बाज़ार से प्रभावित होकर चीन की बदली आर्थिक नीतियाँ और पूंजीवादी दक्षिणपंथी भटकाव ने देश की भीतरी...
स्मृति

 ‘ डेजी नारायण लोकतंत्र की लड़ाई में सामूहिक ऊर्जा की स्रोत हैं ’

समकालीन जनमत
पटना. आइसा, इनौस, एआइपीएफ व ऐपवा की ओर से आज माले विधायक दल कार्यालय में प्रो. डेजी नारायण की याद में  श्रद्धाजंलि सभा का आयोजन...
साहित्य-संस्कृति

कथाकार फ़रज़ाना महदी जसम के संयोजक और संस्कृतिकर्मी कलीम खान सह संयोजक बने 

लखनऊ। जन संस्कृति मंच (जसम) की लखनऊ इकाई का पुनर्गठन किया गया है। कथाकार फ़रज़ाना महदी संयोजक और संस्कृतिकर्मी कलीम खान सह संयोजक बनाए गए।...
कविता

किसने आखिर ऐसा समाज रच डाला है

सुधीर सुमन
सुधीर सुमन  “नहीं निकली नदी कोई पिछले चार-पाँच सौ साल से/ एकाध ज्वालामुखी ज़रूर फूटते दिखाई दे जाते हैं/ कभी कभार/ बाढ़ें तो आईं ख़ैर...
कहानी

‘ हिंदुत्व की राजनीति और काॅरपोरेट के गठजोड़ को चित्रित करने वाले कहानीकार हैं संजीव ’

आसनसोल में संजीव अमृत महोत्सव के दूसरे दिन 8 अगस्त को संजीव के कथा-साहित्य के महत्त्व पर केंद्रित दो सत्रों- ‘ बदलता हुआ भारत और...
पुस्तक

कुर्सी के लिए कत्ल: गोपाल प्रधान

गोपाल प्रधान
2019 में शब्दलोक प्रकाशन से छपी किताब ‘सत्ता की सूली’ को तीन पत्रकारों ने मिलकर लिखा है । इस किताब ने वर्तमान पत्रकारिता को चारण...
कविता

मेहजबीं की कविताएँ अपने समय की अंतहीन बेचैनी का बयान हैं

समकालीन जनमत
संजय कुमार कुंदन मेहजबीं की कविताएँ और नज़्में बातें करती हैं, दुनिया-जहान की बातें. कविताएँ और नज़्में बस हिन्दी और उर्दू के शब्दों की उल्लेखनीय...
साहित्य-संस्कृति

संजीव का साहित्य समकालीन भारत का आदमकद आईना है : रविभूषण

सुधीर सुमन
आसनसोल में कथाकार संजीव के 75वें वर्ष पर दो दिवसीय आयोजन आज आसनसोल, पश्चिम बंगाल में कथाकार संजीव के 75वें वर्ष पर होने वाले आयोजनों...
स्मृति

मानवाधिकार कार्यकर्ता, इतिहासविज्ञ प्रो. डेजी नारायण का निधन अपूरणीय क्षति

समकालीन जनमत
पटना । भाकपा-माले की बिहार राज्य कमिटी ने देश की जानी मानी इतिहासविज्ञ, पटना विश्वविद्यालय इतिहास विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष, प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता, पीयूसीएल की...
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