समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

साहित्य-संस्कृति

‘ जन संस्कृति के नायक राजबली यादव ‘ पुस्तक का लोकार्पण

लखनऊ/फैजाबाद। अंबेडकर नगर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, जन संस्कृति के नायक राजबली यादव के स्मृति दिवस के अवसर पर उनके पैतृक गांव अरई में 9...
कविता

नरेश गुर्जर की कविता दृश्य की पृष्ठभूमि पर ठहरी हुई निगाह है

समकालीन जनमत
बबली गुर्जर कविताओं की सरलता उनकी ख़ूबसूरती का पैमाना होती है। कुछ कविताएँ किसी पदबंध के अधीन नहीं होती। उन्हें सुनते पढ़ते समय जिया भी...
पुस्तक

 गांधी की सोच : हिंद स्वराज के बहाने

गोपाल प्रधान
आजादी के पचहत्तर साल पूरे होने पर उचित होगा कि भारत की स्वाधीनता के साथ जुड़े प्रसंगों और व्यक्तियों तथा विचारों की जांच परख नये...
साहित्य-संस्कृति

आजादी के 75 वर्ष और प्रेमचंद के सपने

समकालीन जनमत
कल्पनाथ यादव  प्रेमचंद के समूचे लेखन में उनका तत्कालीन समय किस रंग में प्रतिभासित होता है,  अपने समय के सवालों से कैसे सामना करते हैं...
कविता

वसु गन्धर्व की कविताएँ मन्द्र उपस्थिति के मुखर स्वर हैं

समकालीन जनमत
रंजना मिश्र कुछ स्वर अपनी मन्द्र उपस्थिति में अधिक सुन्दर, अधिक मुखर होते हैं। वे कोमल, गझिन और एकान्तिक होते हुए भी अपनी ज़मीन पर...
कविता

शुभम नेगी की कविताएँ इंद्रधनुषी चेतना का प्रसार एवं मनुष्यता की फिसलन की चिंता हैं

समकालीन जनमत
देवेश पथ सारिया युवा कवि शुभम नेगी की कलम नई है, शुभम अपनी लेखनी के माध्यम से समाज के लिए कुछ सकारात्मक रचना चाहते हैं।...
पुस्तक

अमेरिका में अहिंसक प्रतिरोध

गोपाल प्रधान
2019 में सिटी लाइट्स बुक्स से माइकेल जी लांग के संपादन में ‘वी द रेजिस्टेन्स: डाकुमेंटिंग ए हिस्ट्री आफ़ नानवायलेन्ट प्रोटेस्ट इन द यूनाइटेड स्टेट्स’...
कविता

देवेंद्र आर्य का कविता पाठ : ‘भाषा को माचिस होना होगा’

लखनऊ। ‘ लिखावट ‘ की ओर से हमारे समय के महत्वपूर्ण कवि देवेंद्र आर्य के एकल कविता पाठ के कार्यक्रम का आयोजन हुआ। यह 19...
सिनेमा

शांतिलाल और तितली का रहस्य

समकालीन जनमत
प्रशांत विप्लवी प्रतिम डी गुप्त उभरते बांग्ला फिल्मकार हैं। ठीक तीन साल पहले उनकी एक फ़िल्म बंगाल के सिनेमाघरों में हाउसफुल का बोर्ड लटकवाने में...
कविता

प्रवीण परिमल की कविताओं में प्रेम है तो अन्याय का प्रतिकार भी

समकालीन जनमत
कौशल किशोर प्रवीण परिमल की कविताओं पर आलोचक प्रो रविभूषण का कहना है ‘जो प्रेम नहीं करता, वह मनुष्य ही नहीं है।…..प्रेम ही जीवन है।...
कविता

अदनान कफ़ील दरवेश के संग्रह ‘ठिठुरते लैम्प पोस्ट’ का काव्यपाठ एवं समीक्षा गोष्ठी

समकालीन जनमत
जसम दिल्ली की ओर से घरेलू गोष्ठी श्रृंखला में भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित युवा कवि अदनान कफ़ील दरवेश के पहले काव्य-संग्रह ‘ठिठुरते लैम्प...
साहित्य-संस्कृति

‘ गूंगी रुलाई का कोरस ’ हिन्दुस्तानी तहजीब की रक्षा के लिए लिखा गया उपन्यास है: रविभूषण

सुधीर सुमन
एक दीये से काम नहीं चलेगा, सबके हाथों में दीया होना चाहिए:  रणेंद्र ‘‘गूंगी रुलाई का कोरस’ हिन्दी आलोचकों के लिए एक चुनौती की तरह...
स्मृति

ऐसा कहाँ से लाऊँ कि तुझ सा कहें जिसे

मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी   ( उर्दू के महान हास्य-व्यंग्य लेखक मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी द्वारा लिखित यह लेख (संस्मरण) उनकी अंतिम किताब “शाम-ए-शेर-ए-याराँ (1914) से लिया...
पुस्तक

‘कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र’ की लेखन प्रक्रिया

गोपाल प्रधान
इसके लेखकद्वय घोषणापत्र के लेखन से पहले ही क्रांतिकारियों के बीच चर्चित हो चुके थे । इसके कारण ही लीग ने उन्हें यह दायित्व सौंपा...
कविता

प्रकृति प्रेमी और अन्याय के विरुद्ध  संकल्पबद्ध कवि चंद्रकुँवर बर्त्वाल

समकालीन जनमत
कल्पना पंत ‘प्राची से झरने वाली आशा का तो अंत नहीं’ एक पूरा दिन चंद्रकुँवर बर्त्वाल से संबंधित क्षेत्रों के भ्रमण में बीता. वह स्थान...
कविता

देश और कविता : संदर्भ गोरख पाण्डेय की कविता ‘उठो मेरे देश’

स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी कविता और जनांदोलनों की जब भी बात उठती है तो गोरख पांडेय का नाम अनिवार्य रूप से जुड़ जाता है, पर यह दुर्भाग्य...
स्मृति

“ मैं जिन्दा हूँ, जिन्दा रहूँगा/भेष बदल सकता हूँ/उद्देश्य नहीं/चित्र बदल सकता हूँ,/चरित्र नहीं ”

कौशल किशोर
पांच जुलाई को जब लखनऊ के बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता चिन्हट क्षेत्र में एकत्र होकर 1857 में अवध खासतौर से लखनऊ की जनता के बहादुराना संघर्ष...
पुस्तक

कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र की कहानी

गोपाल प्रधान
2022 में हेड आफ़ जीयस से चाइना मेविल की किताब ‘ए स्पेक्टर, हांटिंग: चाइना मेविल आन द कम्युनिस्ट मेनिफ़ेस्टो’ का प्रकाशन हुआ। उन्नीसवीं सदी के...
कविता

मरहूम कवयित्री शहनाज़ इमरानी की कविताएँ उम्मीद का हाथ थामे रास्ता दिखाएंगी

समकालीन जनमत
मेहजबीं मरहूम कवयित्री शहनाज़ इमरानी की कविताएँ अपने वर्तमान समय की राजनीतिक सामाजिक आर्थिक परिस्थितियों का दस्तावेज़ हैं। समाज का कोई कोना उनकी सूक्ष्म दृष्टि...
साहित्य-संस्कृति

‘ शोषित-पीड़ित अवाम की आत्मपीड़ा व प्रतिरोध के बड़े साहित्यकार हैं ओमप्रकाश वाल्मीकि ’

समकालीन जनमत
दरभंगा। आज मशहूर इंक़लाबी कवि ओमप्रकाश वाल्मीकि की जयंती के अवसर पर प्राक परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र, दरभंगा पर जनसंस्कृति मंच दरभंगा के तत्वावधान में कार्यक्रम...
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