समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविता

शुभम नेगी की कविताएँ इंद्रधनुषी चेतना का प्रसार एवं मनुष्यता की फिसलन की चिंता हैं

समकालीन जनमत
देवेश पथ सारिया युवा कवि शुभम नेगी की कलम नई है, शुभम अपनी लेखनी के माध्यम से समाज के लिए कुछ सकारात्मक रचना चाहते हैं।...
पुस्तक

अमेरिका में अहिंसक प्रतिरोध

गोपाल प्रधान
2019 में सिटी लाइट्स बुक्स से माइकेल जी लांग के संपादन में ‘वी द रेजिस्टेन्स: डाकुमेंटिंग ए हिस्ट्री आफ़ नानवायलेन्ट प्रोटेस्ट इन द यूनाइटेड स्टेट्स’...
कविता

देवेंद्र आर्य का कविता पाठ : ‘भाषा को माचिस होना होगा’

लखनऊ। ‘ लिखावट ‘ की ओर से हमारे समय के महत्वपूर्ण कवि देवेंद्र आर्य के एकल कविता पाठ के कार्यक्रम का आयोजन हुआ। यह 19...
सिनेमा

शांतिलाल और तितली का रहस्य

समकालीन जनमत
प्रशांत विप्लवी प्रतिम डी गुप्त उभरते बांग्ला फिल्मकार हैं। ठीक तीन साल पहले उनकी एक फ़िल्म बंगाल के सिनेमाघरों में हाउसफुल का बोर्ड लटकवाने में...
कविता

प्रवीण परिमल की कविताओं में प्रेम है तो अन्याय का प्रतिकार भी

समकालीन जनमत
कौशल किशोर प्रवीण परिमल की कविताओं पर आलोचक प्रो रविभूषण का कहना है ‘जो प्रेम नहीं करता, वह मनुष्य ही नहीं है।…..प्रेम ही जीवन है।...
कविता

अदनान कफ़ील दरवेश के संग्रह ‘ठिठुरते लैम्प पोस्ट’ का काव्यपाठ एवं समीक्षा गोष्ठी

समकालीन जनमत
जसम दिल्ली की ओर से घरेलू गोष्ठी श्रृंखला में भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित युवा कवि अदनान कफ़ील दरवेश के पहले काव्य-संग्रह ‘ठिठुरते लैम्प...
साहित्य-संस्कृति

‘ गूंगी रुलाई का कोरस ’ हिन्दुस्तानी तहजीब की रक्षा के लिए लिखा गया उपन्यास है: रविभूषण

सुधीर सुमन
एक दीये से काम नहीं चलेगा, सबके हाथों में दीया होना चाहिए:  रणेंद्र ‘‘गूंगी रुलाई का कोरस’ हिन्दी आलोचकों के लिए एक चुनौती की तरह...
स्मृति

ऐसा कहाँ से लाऊँ कि तुझ सा कहें जिसे

मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी   ( उर्दू के महान हास्य-व्यंग्य लेखक मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी द्वारा लिखित यह लेख (संस्मरण) उनकी अंतिम किताब “शाम-ए-शेर-ए-याराँ (1914) से लिया...
पुस्तक

‘कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र’ की लेखन प्रक्रिया

गोपाल प्रधान
इसके लेखकद्वय घोषणापत्र के लेखन से पहले ही क्रांतिकारियों के बीच चर्चित हो चुके थे । इसके कारण ही लीग ने उन्हें यह दायित्व सौंपा...
कविता

प्रकृति प्रेमी और अन्याय के विरुद्ध  संकल्पबद्ध कवि चंद्रकुँवर बर्त्वाल

समकालीन जनमत
कल्पना पंत ‘प्राची से झरने वाली आशा का तो अंत नहीं’ एक पूरा दिन चंद्रकुँवर बर्त्वाल से संबंधित क्षेत्रों के भ्रमण में बीता. वह स्थान...
कविता

देश और कविता : संदर्भ गोरख पाण्डेय की कविता ‘उठो मेरे देश’

स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी कविता और जनांदोलनों की जब भी बात उठती है तो गोरख पांडेय का नाम अनिवार्य रूप से जुड़ जाता है, पर यह दुर्भाग्य...
स्मृति

“ मैं जिन्दा हूँ, जिन्दा रहूँगा/भेष बदल सकता हूँ/उद्देश्य नहीं/चित्र बदल सकता हूँ,/चरित्र नहीं ”

कौशल किशोर
पांच जुलाई को जब लखनऊ के बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता चिन्हट क्षेत्र में एकत्र होकर 1857 में अवध खासतौर से लखनऊ की जनता के बहादुराना संघर्ष...
पुस्तक

कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र की कहानी

गोपाल प्रधान
2022 में हेड आफ़ जीयस से चाइना मेविल की किताब ‘ए स्पेक्टर, हांटिंग: चाइना मेविल आन द कम्युनिस्ट मेनिफ़ेस्टो’ का प्रकाशन हुआ। उन्नीसवीं सदी के...
कविता

मरहूम कवयित्री शहनाज़ इमरानी की कविताएँ उम्मीद का हाथ थामे रास्ता दिखाएंगी

समकालीन जनमत
मेहजबीं मरहूम कवयित्री शहनाज़ इमरानी की कविताएँ अपने वर्तमान समय की राजनीतिक सामाजिक आर्थिक परिस्थितियों का दस्तावेज़ हैं। समाज का कोई कोना उनकी सूक्ष्म दृष्टि...
साहित्य-संस्कृति

‘ शोषित-पीड़ित अवाम की आत्मपीड़ा व प्रतिरोध के बड़े साहित्यकार हैं ओमप्रकाश वाल्मीकि ’

समकालीन जनमत
दरभंगा। आज मशहूर इंक़लाबी कवि ओमप्रकाश वाल्मीकि की जयंती के अवसर पर प्राक परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र, दरभंगा पर जनसंस्कृति मंच दरभंगा के तत्वावधान में कार्यक्रम...
पुस्तक

अंबेडकर और समाजवाद

गोपाल प्रधान
2021 में पालग्रेव मैकमिलन से वी गीता की किताब ‘भीमराव रामजी अंबेडकर ऐंड द क्वेश्चन आफ़ सोशलिज्म इन इंडिया’ का प्रकाशन हुआ। लेखिका अंबेडकर के...
कविता

नेहा नरुका की कविताएँ समझ और साहस के संतुलन की अभिव्यक्ति हैं

समकालीन जनमत
मदन कश्यप युवा कवि नेहा नरूका का यथार्थ को देखने का दृष्टिकोण इतना अलग और मौलिक है कि वह आकर्षित ही नहीं करता, बल्कि कई...
पुस्तक

पीटर ग्रे की दृष्टि में शिक्षा का प्रतिदर्श

समकालीन जनमत
राम विनय शर्मा शिक्षा मनुष्य के चहुँमुखी विकास का सबसे प्रमुख माध्यम है। विद्वानों ने शिक्षा को तरह-तरह से परिभाषित करने का प्रयास किया है।...
कविता

मनीष आज़ाद की कविताएँ क्रांति की कामना को बचाए रखती हैं

समकालीन जनमत
प्रियदर्शन मूलतः अपनी सामाजिक सक्रियता और मानवाधिकारों के पक्ष में अपनी लड़ाई की वजह से सत्ता की आंखों की किरकिरी बने और जेल तक जा...
कविता

‘मन एव मनुष्याणां-सृष्टि-चक्र: एक लम्बी कविता’ के बहाने कविता में सभ्यता समीक्षा

गोपाल प्रधान
प्रसन्न कुमार चौधरी की एकमात्र कविता ‘सृष्टि-चक्र’ के बारे में हिंदी बौद्धिकों के बीच बहुत कम बातचीत हुई । इसका कारण यह भी था कि...
Fearlessly expressing peoples opinion