Monday, October 3, 2022
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नाइजीरियाई कवि बेन ओकरी की कविताएँ

विपिन चौधरी


 

नाजीरियाई कवि और उपन्यासकार बेन ओकरी आज के समय में दुनिया भर के साहित्यिक पटल पर लोकप्रिय नाम है. बेन का जन्म पश्चिम मध्य नाइजीरिया में मिन्ना में 15 मार्च 1959 में हुआ. बेन ओकरी को उत्तर-आधुनिक और उत्तर औपनिवेशिक परम्पराओं में अग्रणी अफ्रीकी लेखकों में से एक माना जाता है और उनकी तुलना गार्सिया मार्केज जैसे लेखकों से की गहै.

1980 में प्रकाशित उनके पहले ही उपन्यास, फ्लावर्स एंड शैडो ने ही उन्हें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति दिलवा दी थी.  बेन ओकरी ने सामाजिक और राजनीतिक अराजकता को व्यक्त करने के लिए जादुई यथार्थवाद का बखूबी इस्तेमाल किया है. उनकी कविताओं में राजनैतिक स्वर की प्रधानता है. उनका काम 26 भाषाओं में प्रकाशित हो चुका है.

बेन ओकरी की कविताएँ/ अनुवाद : विपिन चौधरी

 

1. सियासत का एक नया सपना

ऐसा माना लिया गया है कि

राजनीति,

इस निष्ठुर संसार को अपनी कड़ी नज़रों से भाँप लेती है

सत्ता को प्रशंसा, समर्थन और वोट से माप लेने के

पश्चात,

अपनी शासकीय-धार पर संसार को

गढ़ती है

 

 

जनता की ज़रूरतों को पूरा न कर,

उसके डर को पोषित करती है

सत्ताधारियों के विचार,

उनके शासन काल के दौरान किए गए कामों से

जनता को पता चल जाते हैं

 

पुराने दौर के शासक

संतोष,

कला,

हँसी,

शांति,

न्याय और स्वास्थ्य के धन से संसार को परख लिया करते थे

 

जब भाट उनके शासन की आलोचना करते थे

तब वे उन्हें सुना करते थे

चुपचाप

 

वर्तमान दौर में

ख़ूबसूरत सपने देखने का जो टेढ़ा मामला है

वह कहीं खो गया है

लोगों को उनकी प्रगति के बारे में

राजनीतिज्ञ नहीं,

निंदक और कयामत का पता देने वाले

बताते हैं

 

जब जनता बेहतर शासन के बारे में विचार करती है

तब

कोई ओछा या अप्रत्याशित नेता,

सत्ता में काबिज़ हो जाता है और

जनता के सारे सपने

राख में तब्दील हो जाते हैं

 

यह स्थिति बदल सकती है

अगर

जनता के पास ज़ुबान हो

और

वह माने अपने हृदय की बात

 

 

क्या हम

गरीबी और

युद्धों को समाप्त कर,

सुकून प्राप्त कर सकते हैं

क्या अपने अफ्रीका से निकलकर

किसी दूसरे देश में बसने की बाध्यता को रोका जा सकता है?

 

 

हालांकि संदेहास्पद निगाहों का काम

हर नए रास्ते को अस्वीकार करना है

मगर राजनीति के पास है

नया

और बेहतर सपना

 

 

 

 

2. जिंदा रहना सलीब पर टंगने जैसा है

जीना,

मानो सलीब पर टंग जाना,

चट्टानी चेहरे और

कठोर मन वाला

कोई

इस बात को समझ सकता है

 

 

संघर्षों में मिली विफलताओं के

कई दरिया,

पूरी तरह से हमारे डूब जाने का

इंतजार कर रहे हैं

 

बारिश हमारे दरवाज़े की सीढ़ियों को भीगो रही है

उसका हमारी मासूम भोली इच्छाओं और

उनके लुट जाने से रत्ती भर ज़रा भी

लेना-देना नहीं है

 

हम तो जैसे

जीवन के सबसे टटपुंजिया कामों के लिए

इस दुनिया में आएँ हैं

 

 

टूटे-फूटे तंग रास्ते पर चलता बच्चा

हमारी भूख की पुकार सुन रहा है

मगर उसे इस पुकार की कुछ समझ नहीं

 

हम अपने प्रेम की प्रतिध्वनियों को,

पहले मिली अवहेलना की गूंज की तरफ धकेल कर

चल रहे हैं

 

 

छोटी सी दुर्घटना,

से डर लगता है

जो कभी सुना नहीं,

वह गूँजने लगता है

 

माएँ, हल्का सा खटका होने पर नींद से जाग

उठती हैं

और पिता

पूरी रात धूम्रपान करते रहते हैं

और बाकी संसार

अपनी व्यथित नींद में राक्षसों की निगरानी करता हैं

सुबह होने पर उसकी घबराहट के अक्स

साफ़ दिखाई देते हैं

यहाँ तक कि सबसे अच्छी चीजें भी

अज्ञान के भार के नीचे

खत्म हो जाती हैं

 

 

यह जीवन

आग जैसा है

जिसकी चिंगारी

किसी को भी बना सकती है

अपना शिकार

 

 

3. भविष्य के मुहाने पर

सैनिकों का बंदूकों और

राजनेताओं का  ब्रीफकेसों को लेकर

आ धमकना,

और शहर के रात्रिकालीन

जश्नों के इतिहास को मैं

अच्छे से जानता हूँ

 

 

उन्होंने बेतरतीबी को खंगालते हुए

इतिहास की समीक्षा की,

सुबह लगाई जाने वाली फांसी को देखा,

फिर गुप्त पुलिसकर्मियों के साथ

हस्ताक्षर किए

और कुछ किए जाने का

फैसला लिया

 

 

गड़बड़ियों को पोंछ कर

शातिर समय की मूल योजनाओं को

पुनर्जीवित कर

सिकुड़ते हुए शहर की पगडंडियों को खोजा

 

 

और आखिर में यह समझा

कि कुछ भी बचाया नहीं जा सकता

इसलिए उन्होंने सब कुछ रफ़ा-दफ़ा कर दिया

ऐसे इतिहास को मैं अच्छे से जानता हूँ

 

                                                                 2

 

जिस प्रकार गर्मियों में हवा

नृत्य करती है

उसी तरह से

आकाश के दृश्यों को खोजते हुए

हम

कचरों के ढेर से निकल आते हैं

 

 

आग की लपटों में फंसे शहर के दृश्य के जरिए

समुद्र तटों पर फांसी के दंड के समय को बदल दिया गया

हमारे भौंहों के नीचे

नमक बहता रहा

 

हर जगह चुनावों की धांधली से भयभीत,

पीड़ित सड़कों पर विशाल दुर्घटनाएँ

जातीय राजनीति का कभी का खत्म होने वाला जाल

सत्ता के सपनों की बीमार आंधी

 

भविष्य की देह को हथियाने के लिए

देश के नक्शे की सिलाई की गई

और

ऐतिहासिक कीचड़ के जरिए

उसको मटियामेट किया गया

 

जलती हुई मीनारों के उजले धुएँ के साथ

हम भविष्य के किनारे पर उभर आया

 

इस धुएं ने राजनीतिक रैलियों को आग दी

युद्धों की शुरुआत की

उन्हें खत्म किया

और अपने अवसरों के लिए सपने देखे

 

मोटी मछली, छोटी मछली को निगल लेती है

बड़ी मछ्ली फांसी,

और सशस्त्र डकैतियों की व्यवस्था करती है

हमारा****** कचरा हमें बनाता है

 

 

मुझे इतिहास अच्छे से याद है

बाघ को,

मौन की मुद्राओं से फंसाया जाता है

अंडे बड़े होते जाते हैं:

 

 

भविष्य के छोर पर

अंडे से निकलता है

एक भद्दा चेहरा

मैं,

रिसते हुए घावों वाला एक लड़का

 

 

जिसे इतिहास याद है

जो गर्म हवाओं में

ज्वालामुखी की हँसी की प्रतीक्षा करते हुए,

अपने टाँकों को चौड़ा होते हुए देखता है

 

 

नई मूल योजनाओं के साथ

शक्तिशाली प्रवेश द्वार से आकर

ओस की मोहर और

और लगातार भभकती आग के साथ,

पिछली बार की पगडंडियों के निशान के जरिए

हमारे साथ जुड़ गए लोगों की दाँतों की कड़कड़ाहट को सुनता हूँ

 

 

कौन इतिहास को अच्छे से याद रखता है ?

हम लाल रंग पर शब्द बुनते हैं

और अपनी जलती हुई तंत्रिकाओं से

नीले रंग के किनारों पर गाते हैं

 

कचरे से हम कातेंगे

रेशम

और अपने संकल्पों से

समय का

चौखटा करेंगे तैयार

 

 

 

 

4.अवांछित मिठास

कचरे के बिस्तर पर बैठे भिखारी को हवा करने

और खाली पड़े पब पर प्रहार करते रहने के बाद,

सड़क के आखिरी छोर तक

बस शांति है,

भोर से पहले और पेड़ों के एकांत का है

यह संसार

 

 

रहस्यमयी ढब का मंचीय

व्यापार

मलेरिया से भरी मलिन बस्तियों,

ठोस मंदिरों के बीच,

विशाल समुद्र के किनारे,

बचपन में काटी गई

लम्बी गर्म रातें

याद हैं मुझे

 

भूतकाल के सपने

भविष्य की आवाज़ में गा रहे हैं

वह जिसके लायक नहीं

उस मिठास को साथ लेकर वह

संसार पर हमला कर रहा है

फूल, अनुपस्थित मधुमक्खियों की आवाज़ में गा रहे हैं

हवा, दुनिया पर फिर से आक्रमण करने के लिए कानाफूसी करते

पेड़ों के जीवित एकांत के साथ चहक रही है

रात मेरे सपनों के पेड़ों को झुका देती है

और तारे अपने फलों के साथ

गिरते हैं

मेरे एकाकी संसार के

झुलसे हुए हाथों में

 

 

5. अफ़्रीकी मर्सिया

हम आत्मिक रूप से मूल्यवान अफ्रीकी

लोग

ईश्वर के बंदे

हम बड़ी और डरावनी परिस्थितियों से लड़ सकते हैं

एक दिन हमारे जीवन की पीड़ा

हमारी जिंदगी को किसी महान काम के लिए

बदल देगी

 

कुछ भावनाएँ हैं जो अब मुझमें पीड़ा भर देती हैं

खुश होने पर ये दुर्लभ कीमती पल मुझमें परिपक्वता दिखाते हैं

क्या आप हमारे दर्द के रहस्यों को देख पाते हो?

हमारी खुशी हमारी सहनशीलता का

आनंद उठाते हो और मधुर चीजों का सपना देखने में सक्षम हैं

 

इतना ही नहीं हवा में गर्मी बढ़ जाने पर कभी हम हवा को कोसते नहीं

अपनी पीड़ा के मौन में भी हम

मीठे फल

या धीमे से पानी पर उछलती रोशनी को

आशीर्वाद देते हैं

 

यही कारण है कि

हमारा मधुर संगीत हवा को स्मरण करता है

मेहनत करते समय रहस्यमयी चमत्कार होते हैं

यही समय सामने लाएगा

मृत लोगो को भी मैंने गुनगुनाते हुए सुना है

 

उन्होंने मुझे बताया कि यह जीवन शानदार है

वे हमेशा मुझे लगन और उम्मीद के साथ

जीने को कहते हैं

यहीं पर अचरज होता है

 

हैरानी होती है जब हर चीज़ में हमारी अनदेखी चलती है

सागर गीतों से भरा है

आकाश नहीं है शत्रु भाग्य हमारा दोस्त है

 

6. कवि घोषणा करता है

अलग-अलग दौर में यह हम सभी के साथ होता है

किसी अज़ीब से मौसम में धातु की तरह कँपकँपाती हुई हवा

नवंबर माह का

बर्फ़ीला स्पर्श

साहस जब कहीं दूर भाग जाता है

निष्ठुर सफ़ेद मुकद्दर का नुकीलापन

संसार के बड़े-बड़े सपनों को तोड़ देता है

और उन सितारों,

जिनकी आग बस आत्मा की रोशनी जैसी है

के साथ यात्रा पर निकलता है

 

ऐसा हम सभी के साथ कई बार होता है

हमारी आत्मा की नींव की यह शंका

आदिम शक्तियों का यह विस्फोट

हमारे स्वर्गीय भय की यह सचेत घुसपैठ

 

लाल आँखों और जली हुई आकृतियों से

बर्फ़ के इस जंग लगे महीने में

मैं पुराने सपने की चिंगारी को जोड़ता हूँ

संगीत से अपनी आत्मा को रौशन करता हूँ

नए प्रकाश के उपहार को खोजने के लिए

मैं अनुमति से कहीं ज़्यादा यात्राएँ करूंगा

 

 

7. चौराहे पर तुम्हें थामना 

चौराहे पर तुम्हें गले लगाते हुए

मैंने,

तुम्हारी मुस्कान के नज़दीक सिलसिलेवार होती शाम को

महसूस किया

 

वे ख़्वाब तुम्हारी देह जैसे थे

मैं जिनके करीब कभी जा

नहीं सका

 

तुम्हारी कोमलता से

मेरी रातें

मुलायम हो गईं

 

भले ही हमें अपनी मंजिल का पता न हो

न ही हमें आगे कौन सी गली पकड़नी है

इसका भान हो

या किस बेंच पर हम बैठेंगे

या कौन सा कमरा हमें हमारे दैहिक आनंद को सौंपने के लिए

प्रतीक्षारत है

 

मैं तुम्हारी आत्मा में

यात्रा की तड़प को महसूस कर सकता हूँ

जिसकी ख़ूबसूरती

हर आने वाले

चाहत के पलों में है

 

शाम के अहाते में

तुम्हें थाम कर,

मैंने एक सपने को किसी गुप्त संधि की तरह

तुम्हारी मुस्कान के साथ

सीलबंद कर दिया है

 

टिप्पणीकार और अनुवादक विपिन चौधरी समकालीन स्त्री कविता का जाना-माना नाम हैं। वह एक कवयित्री होने के साथ-साथ कथाकार, अनुवादक और फ्रीलांस पत्रकार भी हैं.

 

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