समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

ख़बरपुस्तकसाहित्य-संस्कृति

कोई दिया तो जला दो ज़रा उजाला हो

समकालीन जनमत
कौशल किशोर  आज़मगढ़, 21मई, 2023 जितेन्द्र कुमार ‘नूर’ के ग़ज़ल संग्रह ‘यादों के बहाने’ का लोकार्पण शहर के ठण्डी सड़क स्थित गरुण होटल के सभागार...
कविता

देवव्रत डंगवाल की कविताएँ प्रतिरोध और उम्मीद की खोज हैं

समकालीन जनमत
विपिन चौधरी युवावस्था मनुष्य के जीवन की सबसे बेचैन अवस्था है. इसी दौर में भी प्रतिरोध के स्वर अधिक तेज़ होने लगते हैं और नकार...
स्मृति

राकेश दिवाकर: जिसमें चांद की शीतलता और सूरज का ताप था

सुधीर सुमन
स्मृति दिवस 18 मई के अवसर पर वह रंगों की दुनिया में जीता था। लिखित शब्द भी उसे जैसे खुद को रंग देने के लिए...
सिनेमा

सिनेमा : शिक्षा का एक नया आयाम

समकालीन जनमत
अतुल कुमार ‘सिनेमा इन स्कूल’ अभियान लगातार अपना कार्य क्षेत्र बढ़ा रहा है. इस अभियान की शुरुआत नानकमत्ता पब्लिक स्कूल के साथ शुरू हुई थी...
कविता

अमरजीत कौंके की कविताओं में आम आदमी का जीवन और संघर्ष प्रमुखता से झलकता है।

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय अमरजीत कौंके मूलतः पंजाबी भाषा के कवि हैं। उन्होंने पंजाबी-हिन्दी के बीच अनुवाद की महत्वपूर्ण आवाजाही की है। इन सबके साथ वे हिन्दी...
कविता

सरिता संधू की कविताएँ व्यवस्था की आँखों में झाँकती संवेदनाएँ हैं

हीरालाल राजस्थानी सरिता संधू पिछले दो सालों से दलित लेखक संघ से जुड़ी हुई हैं। उनकी विशेषता है कि संगठन के प्रति अपने कर्तव्यों का...
साहित्य-संस्कृति

खनकने लगी हैं गुल की मोहरें

पीयूष कुमार फिर से दिन आ गए खिल के खिलखिलाते गुलमोहर के। वसंत की अगवानी में सेमल और पलाश की ललाई कम हो गयी थी...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

आम किसान की पक्षधरता के कहानीकार हैं मार्कण्डेय

दुर्गा सिंह
(हिन्दी के प्रसिद्ध कहानीकार मार्कण्डेय के जन्मदिन, 2 मई पर विशेष) आज जबकि गांव और किसान दोनों पूंजी और बाजारवादी प्रसार के बीच बेतरह पीछे...
साहित्य-संस्कृति

मुकुल सरल की ग़ज़लें और नज़्म लोकतंत्र की स्थिति, मानवता और प्रेम को व्याख्यायित और पुनर्व्याख्यायित करती हैं

राज वाल्मीकि नई दिल्ली। “इस किताब में बहुतों की आवाज़ शामिल है। इसमें मुल्क के आज के हालात को शामिल किया गया है। मुकुल सरल...
कविता

फ़रीद इस समय की कविता के प्रखर स्वर हैं : आलोक धन्वा

पटना। “फ़रीद इस समय की कविता के प्रखर स्वर हैं। इधर अच्छी कविताएँ लिखीं जा रहीं हैं, कविताएँ लिखी जानी चाहिए। ये कविताएँ सामने आ...
कविता

आनंद बहादुर की कविताएँ जीवन की अंतर्यात्रा को उकेरती हैं

समकालीन जनमत
विनय सौरभ   नहीं होने ने जो थोड़ी सी जगह खाली की है वह मैं हूँ एक दिन नहीं होना किसी जगह से आएगा और...
कविता

पुरू मालव की कविताएँ एक आत्मीय आग्रह के साथ बड़े सवालों पर बात करती हैं

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय   युवा कवि पुरू मालव की आसान-सी दिखने वाली ये कविताएँ हमारे भीतर एक फोर्स के साथ खुलती हैं। वह चाहे विस्थापन का...
स्मृति

नक्सलबाड़ी विद्रोह, भोजपुर आंदोलन और कवि-आलोचक रामनिहाल गुंजन

सुधीर सुमन
  (पहले स्मृति दिवस पर) रामनिहाल गुंजन के पूर्वज पटना जिले के बिहटा थाने के भरतपुरा गांव से आकर आरा में बसे थे। गांव में...
कविता

मोहन कुमार डहेरिया की कविताएँ व्यक्तिगत और सामूहिक अभिव्यक्ति को सशक्त और बेचैन होकर ज़ाहिर करती हैं

समकालीन जनमत
पीयूष कुमार आत्मा के पेड़ पर बैठा कवि मोहन कुमार डहेरिया की कविताओं में मनुष्यविरोधी समय का अतियथार्थ अपनी विकलताओं और भावसघनाओं के साथ आता...
साहित्य-संस्कृति

गज़लें लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में खड़ी हैं – डॉ जीवन सिंह

समकालीन जनमत
लखनऊ। जन संस्कृति मंच के सहयोग से ‘रेवान्त’ पत्रिका की ओर से चर्चित जनवादी गजलकार डी एम मिश्र (सुल्तानपुर) के नवीनतम ग़ज़ल संग्रह ‘समकाल की...
पुस्तक

अशोक चन्द्र की किताब ‘ स्वर्ग की यातना ’ : जन्नत के ज़ख़्म पर जिरह करती एक किताब

समकालीन जनमत
लखनऊ। ‘ कश्मीर जो कभी धरती का स्वर्ग माना जाता था, वह आज यातना शिविर में बदल चुका है। उसे अंग भंग कर लहूलुहान किया...
कविता

जोगेन चौधुरी की कविताएँ चित्रकला सा वितान रचती हैं

समकालीन जनमत
मीता दास मैंने ‘उजाले और अँधेरे में एक फूल’  नाम से एक पुस्तक का अनुवाद किया जिसमें शीर्षस्थ समकालीन भारतीय कलाकार जोगेन चौधरी की मूल...
स्मृति

पाश : सपने हर किसी को नहीं आते

कौशल किशोर
शहादत दिवस (23 मार्च) पर  ‘भगत सिंह ने पहली बार पंजाब/जंगलीपन, पहलवानी व जहालत से/बुद्धिवाद की ओर मोड़ा था/जिस दिन फांसी दी गई/उनकी कोठरी में...
साहित्य-संस्कृति

नयी कहानी आन्दोलन में हाशिये पर धकेल दिया गया ग्राम समाज

सुशील मानव
इलाहाबाद। गाँधी जी ने कहा था, कि असली भारत गांवों में बसता है। मेरे सपनों का स्वराज्य और ग्राम स्वराज्य का मॉडल देते हुए उन्होंने...
कविता

विमल किशोर की कविताओं में स्त्री मुक्ति की आकांक्षा – उषा राय

लखनऊ। लखनऊ पुस्तक मेले में , 18 मार्च को विमल किशोर के कविता संग्रह ‘पंख खोलूं उड़ चलूं’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन...
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