समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविता

ख़ुदेजा ख़ान की कविताएँ सिस्टम की मार सहते नागरिक की आवाज़ हैं

उमा राग
मेहजबीं ख़ुदेजा ख़ान की कविताएँ अपने वर्तमान समय का दस्तावेज़ हैं। उनकी कविता के केन्द्र में आम लोग हैं, मतदाता हैं, बूढ़े हैं, बच्चे हैं,...
साहित्य-संस्कृति

निराला का वैचारिक लेखनः राष्ट्र निर्माण और हिंदू-मुस्लिम एकता का सवाल

दुर्गा सिंह
निराला ने रचनात्मक साहित्य के साथ साहित्यिक पत्रकारिता भी की है। अपने समय में प्रेमचंद के अलावा निराला ही थे, जो रचनात्मक साहित्य और साहित्यिक...
स्मृति

मीना राय का साधारण जीवन असाधारणता का उदाहरण – वंदना मिश्र

सियाराम शर्मा
लखनऊ। ‘समकालीन जनमत’ की प्रबंध संपादक और जसम उत्तर प्रदेश की वरिष्ठ उपाध्यक्ष कामरेड मीना राय का अचानक जाना उनके साथ के लोगों को नि:शब्द कर...
स्मृति

‘समकालीन जनमत’ की प्रबंध संपादक मीना राय नहीं रहीं

कौशल किशोर
उनमें गोर्की की ‘माँ’ का रूप दिखता है    ‘समकालीन जनमत’ की प्रबंध संपादक, जन संस्कृति मंच उत्तर प्रदेश की वरिष्ठ उपाध्यक्ष तथा हम सब...
कहानी

व्यक्ति और समाज की मानसिक बुनावट को सामने लाती है फरजाना महदी की कहानी ‘ उल्टा जमाना ’

समकालीन जनमत
लखनऊ। जन संस्कृति मंच (जसम) की ओर से 19 नवंबर को आयोजित कहानी पाठ कार्यक्रम में युवा कथाकार फ़रज़ाना महदी ने ‘हंस’ के नवम्बर अंक...

हाशिये के यथार्थ को व्यक्त करती कहानियाँ

समकालीन जनमत
रामनरेश राम  लालबहादुर जी से मेरा परिचय तब हुआ जब 2019 में विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग में शिक्षक के रूप में नियुक्त हुआ . शुरू...
कहानी

डॉ इशरत नाहीद की कहानियां वर्तमान समाज का आईना – डॉ. वज़ाहत हुसैन रिज़वी

समकालीन जनमत
लखनऊ। जन संस्कृति मंच की ओर से एकेडमी ऑफ़ मास कम्युनिकेशन कैसर बाग, लखनऊ में महफ़िल ए अफसाना का आयोजन किया गया जिसमें कहानीकार डॉ....
कहानी

सदय के कहानी-संग्रह ‘ मनसा ‘ प कुछ बात 

बलभद्र
किताब चाहे कवनो भाषा के होखे, पढ़े के जरूरत हमेशा बनल रहेला। जब जब पढ़ल जाई, कुछ ना कुछ बात जरूर कहे जोग निकल आई।...
कविता

कविता संग्रह ‘पोतराज’ : समकाल के क्रूर यथार्थ को रचने वाली कविताएं

समकालीन जनमत
लखनऊ। जन संस्कृति मंच की ओर से 28 अक्टूबर को यूपी प्रेस क्लब में कवि वल्लभ के तीसरे कविता संग्रह ‘पोतराज’ पर परिचर्चा का आयोजन...
कविता

पायल भारद्वाज की कविताएँ स्त्री-विमर्श के अनेक पक्षों को बेबाकी के साथ उजागर करती हैं

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय पायल भारद्वाज की कविताएँ स्त्री-विमर्श, इन्सानी रिश्तों और समाज के दोहरे मानदंडों पर मुखर और जागरूक अभिव्यक्ति हैं। वे अपने कहन में जहाँ...
कविता

मौमिता की झकझोरती कविताएँ : सीधी, गहरी और सवाल करती हैं

समकालीन जनमत
अमिता शीरीं ‘इस वक्त जब दुनिया लहूलुहान है ऐसे में चाँद की खूबसूरती पर कवितायें लिखना गुनाह है….’ मौमिता आलम पूरी ज़िम्मेदारी से कविताएँ लिखती...
साहित्य-संस्कृति

सत्ता और व्यवस्था के सामने आईना की तरह होता है लेखक : सुरेश काँटक

समकालीन जनमत
‘सहयोग’ पत्रिका ने कथाकार-नाटककार सुरेश काँटक को सम्मानित किया काँट/ ब्रह्मपुर। ‘सहयोग’ पत्रिका ने 19 अक्टूबर को सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुरेश काँटक को उनके गाँव ‘काँट’...
कविता

नेहल शाह की कविताएँ मन के विभिन्न संस्तरों के ट्रांस्फॉर्मेशन की पड़ताल हैं

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय नेहल शाह की इन कविताओं का मूल स्वभाव विद्रोही है जो अंततः दरअसल कवि का ही है। वे किसी भी तरतीब के ख़िलाफ़...
कविता

‘ क्षितिज से उगेगा चंद्रमा ’ : परिवर्तन के पक्ष में मनुष्यता का गान

कौशल किशोर
जितेन्द्र कुमार कविता की दुनिया के सजग और सचेत नागरिक हैं। इनकी पहली कविता पुस्तक ‘रात भर रोई होगी धरती’ करीब 25 साल पहले आई...
पुस्तक

पूंजीवाद की वर्तमान स्थिति

गोपाल प्रधान
2023 में वर्सो से कोस्तास लापाविस्तास और एरेन्सेप राइटिंग कलेक्टिव की किताब ‘द स्टेट आफ़ कैपिटलिज्म: इकोनामी, सोसाइटी, ऐंड हेजेमनी’ का प्रकाशन हुआ । इस...
कविता

अरबाज़ खान की कविताएँ प्रेम, प्रतिरोध और पीड़ा की बानगी हैं

समकालीन जनमत
पुरु मालव अरबाज़ ख़ान और उनकी कविताओं से पहला परिचय हाल ही में आए ’समय के साखी’ पत्रिका के कविता विशेषांक से हुआ। जिसका सम्पादन...
कविता

वल्लभ की कविताओं में सच का ताप है

समकालीन जनमत
जन संस्कृति मंच की ओर से 30 सितंबर 2023 को फूड इंडिया, आरा के मीटिंग हॉल में कवि वल्लभ के तीसरे कविता संग्रह ‘पोतराज’ का...
कविता

नीरज नीर की कविताएँ विडबंनात्मक बोध को उजागर करती हैं

समकालीन जनमत
शिरोमणि राम महतो कुछ लोग कविता बनाते हैं और कुछ लोग कविता रचते हैं। जो कविता बनाते हैं, उनकी कविताओं में बनावटीपन ज्यादा होता है...
कविता

संध्या यादव की कविताएँ समकालीन समाज की अनेक विसंगतियों से एक स्त्री की बहसें हैं

समकालीन जनमत
अमरजीत कौंके फेसबुक पर जिन कवियों की कविता मुझे बहुत पसंद है और मैं जिन्हें ढूंढ कर पढ़ता हूँ, संध्या यादव उन चंद कवियों में...
कविता

जावेद आलम की कविताएँ मानवता के पक्ष में निर्भीकता से खड़ी हैं

समकालीन जनमत
अशोक कुमार “स्याह वक्त कि इबारतें” युवा कवि जावेद आलम खान का पहला संग्रह है, जिसे दीपक अरोड़ा स्मृति सम्मान के तहत बोधि प्रकाशन ने...
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