समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

पुस्तक

कोमिंटर्न के इतिहास का खाका

1996 में मैकमिलन प्रेस से केविन मैकडर्मट और जेरेमी एग्न्यू की किताब ‘द कोमिंटर्न: ए हिस्ट्री आफ़ इंटरनेशनल कम्युनिज्म फ़्राम लेनिन टु स्तालिन’ का प्रकाशन...
साहित्य-संस्कृतिस्मृति

अलविदा कामरेड मीना राय : सहजता और कर्मठता विचार से आती है और संघर्षों में हासिल होती है

के के पांडेय
17 दिसंबर 2023 को इलाहाबाद का अंजुमन रूहे अदब जो इलाहाबाद के हिंदी उर्दू अदब के न जाने कितने जलसों का गवाह रहा है लेकिन...
कविता

कविता नए दुखों की पहचान करती है- आशुतोष कुमार

समकालीन जनमत
नई दिल्ली। सिद्धांत फाउंडेशन द्वारा 23 दिसंबर को दिल्ली में वल्लभ के काव्य-संकलन ‘पोतराज’ पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा में वरिष्ठ आलोचक आशुतोष...
संस्मरण

जोश मलीहाबादी की आत्मकथा “यादों की बारात” से पंडित जवाहर लाल नेहरू

समकालीन जनमत
यह अंश उर्दू शायर जोश मलीहाबादी की आत्मकथा “यादों की बरात” से लिया गया है। जोश मलीहाबादी का जन्म 5 दिसंबर 1898 में लखनऊ के...
पुस्तक

कोमिंटर्न और स्त्री आंदोलन

गोपाल प्रधान
2023 में ब्रिल से माइक ताबेर और दारिया द्याकोनोवा के संपादन में ‘द कम्युनिस्ट वीमेन’स मूवमेंट, 1920-1922: प्रोसीडिंग्स, रेजोल्यूशंस, ऐंड रिपोर्ट्स’ का प्रकाशन हुआ ।...
कविता

ख़ुदेजा ख़ान की कविताएँ सिस्टम की मार सहते नागरिक की आवाज़ हैं

उमा राग
मेहजबीं ख़ुदेजा ख़ान की कविताएँ अपने वर्तमान समय का दस्तावेज़ हैं। उनकी कविता के केन्द्र में आम लोग हैं, मतदाता हैं, बूढ़े हैं, बच्चे हैं,...
साहित्य-संस्कृति

निराला का वैचारिक लेखनः राष्ट्र निर्माण और हिंदू-मुस्लिम एकता का सवाल

दुर्गा सिंह
निराला ने रचनात्मक साहित्य के साथ साहित्यिक पत्रकारिता भी की है। अपने समय में प्रेमचंद के अलावा निराला ही थे, जो रचनात्मक साहित्य और साहित्यिक...
स्मृति

मीना राय का साधारण जीवन असाधारणता का उदाहरण – वंदना मिश्र

सियाराम शर्मा
लखनऊ। ‘समकालीन जनमत’ की प्रबंध संपादक और जसम उत्तर प्रदेश की वरिष्ठ उपाध्यक्ष कामरेड मीना राय का अचानक जाना उनके साथ के लोगों को नि:शब्द कर...
स्मृति

‘समकालीन जनमत’ की प्रबंध संपादक मीना राय नहीं रहीं

कौशल किशोर
उनमें गोर्की की ‘माँ’ का रूप दिखता है    ‘समकालीन जनमत’ की प्रबंध संपादक, जन संस्कृति मंच उत्तर प्रदेश की वरिष्ठ उपाध्यक्ष तथा हम सब...
कहानी

व्यक्ति और समाज की मानसिक बुनावट को सामने लाती है फरजाना महदी की कहानी ‘ उल्टा जमाना ’

समकालीन जनमत
लखनऊ। जन संस्कृति मंच (जसम) की ओर से 19 नवंबर को आयोजित कहानी पाठ कार्यक्रम में युवा कथाकार फ़रज़ाना महदी ने ‘हंस’ के नवम्बर अंक...

हाशिये के यथार्थ को व्यक्त करती कहानियाँ

समकालीन जनमत
रामनरेश राम  लालबहादुर जी से मेरा परिचय तब हुआ जब 2019 में विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग में शिक्षक के रूप में नियुक्त हुआ . शुरू...
कहानी

डॉ इशरत नाहीद की कहानियां वर्तमान समाज का आईना – डॉ. वज़ाहत हुसैन रिज़वी

समकालीन जनमत
लखनऊ। जन संस्कृति मंच की ओर से एकेडमी ऑफ़ मास कम्युनिकेशन कैसर बाग, लखनऊ में महफ़िल ए अफसाना का आयोजन किया गया जिसमें कहानीकार डॉ....
कहानी

सदय के कहानी-संग्रह ‘ मनसा ‘ प कुछ बात 

बलभद्र
किताब चाहे कवनो भाषा के होखे, पढ़े के जरूरत हमेशा बनल रहेला। जब जब पढ़ल जाई, कुछ ना कुछ बात जरूर कहे जोग निकल आई।...
कविता

कविता संग्रह ‘पोतराज’ : समकाल के क्रूर यथार्थ को रचने वाली कविताएं

समकालीन जनमत
लखनऊ। जन संस्कृति मंच की ओर से 28 अक्टूबर को यूपी प्रेस क्लब में कवि वल्लभ के तीसरे कविता संग्रह ‘पोतराज’ पर परिचर्चा का आयोजन...
कविता

पायल भारद्वाज की कविताएँ स्त्री-विमर्श के अनेक पक्षों को बेबाकी के साथ उजागर करती हैं

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय पायल भारद्वाज की कविताएँ स्त्री-विमर्श, इन्सानी रिश्तों और समाज के दोहरे मानदंडों पर मुखर और जागरूक अभिव्यक्ति हैं। वे अपने कहन में जहाँ...
कविता

मौमिता की झकझोरती कविताएँ : सीधी, गहरी और सवाल करती हैं

समकालीन जनमत
अमिता शीरीं ‘इस वक्त जब दुनिया लहूलुहान है ऐसे में चाँद की खूबसूरती पर कवितायें लिखना गुनाह है….’ मौमिता आलम पूरी ज़िम्मेदारी से कविताएँ लिखती...
साहित्य-संस्कृति

सत्ता और व्यवस्था के सामने आईना की तरह होता है लेखक : सुरेश काँटक

समकालीन जनमत
‘सहयोग’ पत्रिका ने कथाकार-नाटककार सुरेश काँटक को सम्मानित किया काँट/ ब्रह्मपुर। ‘सहयोग’ पत्रिका ने 19 अक्टूबर को सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुरेश काँटक को उनके गाँव ‘काँट’...
कविता

नेहल शाह की कविताएँ मन के विभिन्न संस्तरों के ट्रांस्फॉर्मेशन की पड़ताल हैं

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय नेहल शाह की इन कविताओं का मूल स्वभाव विद्रोही है जो अंततः दरअसल कवि का ही है। वे किसी भी तरतीब के ख़िलाफ़...
कविता

‘ क्षितिज से उगेगा चंद्रमा ’ : परिवर्तन के पक्ष में मनुष्यता का गान

कौशल किशोर
जितेन्द्र कुमार कविता की दुनिया के सजग और सचेत नागरिक हैं। इनकी पहली कविता पुस्तक ‘रात भर रोई होगी धरती’ करीब 25 साल पहले आई...
पुस्तक

पूंजीवाद की वर्तमान स्थिति

गोपाल प्रधान
2023 में वर्सो से कोस्तास लापाविस्तास और एरेन्सेप राइटिंग कलेक्टिव की किताब ‘द स्टेट आफ़ कैपिटलिज्म: इकोनामी, सोसाइटी, ऐंड हेजेमनी’ का प्रकाशन हुआ । इस...
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