जनमत मितान : मित्रता की समृद्ध छत्तीसगढ़ी लोक परंपरासमकालीन जनमतAugust 4, 2019 by समकालीन जनमतAugust 4, 201905272 पीयूष कुमार मित्रता वह शै है, जिसके आगे सारे रंग बेनूर हैं। मनुष्य को सारे रिश्ते जन्म के साथ मिल जाते हैं पर मित्रता का...
कविताजनमत स्मृति और प्रेम का कवि कुंदन सिद्धार्थसमकालीन जनमतAugust 4, 2019August 4, 2019 by समकालीन जनमतAugust 4, 2019August 4, 201903687 जैसे पूरा गांव ही कमरे में समा गया हो! जब भी कोई शहर से लौटकर गाँव आता तो सारे लोग उसे घेरकर घण्टों शहर की...
ख़बरजनमत ‘ पत्रकारिता अपना सबसे आदर्श लक्ष्य तब हासिल करती है, जब वो सच को साहस से बोलती है ’समकालीन जनमतAugust 2, 2019August 2, 2019 by समकालीन जनमतAugust 2, 2019August 2, 201902342 रवीश कुमार को ‘ रैमॉन मैगसेसे ‘ पुरस्कार मशहूर पत्रकार एनडीटीवी के रवीश कुमार को प्रतिष्ठित ‘ रैमॉन मैग्सेसे ‘ पुरस्कार 2019 देने की...
जनमतसाहित्य-संस्कृति अमर नदीम : हिन्दी ग़ज़ल का नया अंदाज़आशुतोष कुमारAugust 1, 2019August 1, 2019 by आशुतोष कुमारAugust 1, 2019August 1, 201903423 आज कॉमरेड Amar Nadeem का जन्मदिन है. यों तो वे हमारे शहर अलीगढ़ के रहने वाले थे, लेकिन जान पहचान उनसे फेसबुक पर ही...
जनमत हतभागे किसान: प्रेमचन्दसमकालीन जनमतJuly 31, 2019December 9, 2019 by समकालीन जनमतJuly 31, 2019December 9, 20194 3180 (प्रेमचन्द ने यह लेख 19 दिसम्बर 1932 में लिखा था। उनके इस लेख के साथ समकालीन जनमत प्रेमचंद पर अपनी यह शृंखला समाप्त करता है। इस...
जनमतशख्सियतस्मृति नायक विहीन समय में प्रेमचंदसमकालीन जनमतJuly 31, 2019July 31, 2019 by समकालीन जनमतJuly 31, 2019July 31, 201904402 प्रो. सदानन्द शाही कुछ तारीखें कागज के कैलेण्डरों पर दर्ज होती हैं और याद रखी जाती हैं या पर कुछ तारीखें ऐसी भी होती हैं...
जनमतशख्सियतस्मृति प्रेमचंद की दलित स्त्रियाँ: वैभव सिंहसमकालीन जनमतJuly 31, 2019July 31, 2019 by समकालीन जनमतJuly 31, 2019July 31, 201904873 वैभव सिंह प्रेमचंद जितना पुरुष-जीवन का अंकन करने वाले कथाकार हैं, उतना ही स्त्रियों के जीवन के भी विविध पक्षों को कथा में व्यक्त करते...
जनमतशख्सियतस्मृति प्रेमचंद के स्त्री पात्र: प्रो.गोपाल प्रधानगोपाल प्रधानJuly 31, 2019July 31, 2019 by गोपाल प्रधानJuly 31, 2019July 31, 201904458 प्रेमचंद का साहित्य प्रासंगिक होने के साथ साथ ज़ेरे बहस भी रहा है । दलित साहित्य के लेखकों ने उनके साहित्य को सहानुभूति का साहित्य...
जनमतशख्सियतस्मृति किसान आत्म-हत्याओं के दौर में प्रेमचंद – प्रो. सदानन्द शाहीसमकालीन जनमतJuly 30, 2019July 30, 2019 by समकालीन जनमतJuly 30, 2019July 30, 201902150 प्रो.सदानन्द शाही किसानों की आत्म हत्यायें हमारे समाज की भयावह सचाई है। भारत जैसे देश में किसान आत्महत्यायें कर रहे हैं यह शर्मशार कर देने...
जनमत ‘ बुद्धिजीवी और कलाकार की खाल ओढ़े हत्या-सत्ता-समर्थकों की हम भर्त्सना करते हैं ’समकालीन जनमतJuly 30, 2019 by समकालीन जनमतJuly 30, 201902084 चार लेखक संगठनों का साझा बयान लेखक-कलाकार हमेशा से सत्ता के विरोध में रहे हैं, लेकिन मोदीराज में सत्ता के विरोध का विरोध एक स्थायी...
जनमतशख्सियतस्मृति सदगति : ‘ग़म क्या सिर के कटने का’*समकालीन जनमतJuly 29, 2019July 29, 2019 by समकालीन जनमतJuly 29, 2019July 29, 201906273 प्रो. सदानन्द शाही सदगति दलित पात्र दुखी की कहानी है। दुखी ने बेटी की शादी तय की है। साइत विचरवाने के लिए पं0. घासीराम को बुलाने...
जनमतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति बच्चों की निगाह में प्रेमचंदसमकालीन जनमतJuly 29, 2019July 29, 2019 by समकालीन जनमतJuly 29, 2019July 29, 201901403 [2016 में 31 जुलाई को जसम के कार्यक्रम ‘मशाल-ए-प्रेमचंद’ में बच्चों द्वारा बनाए गए चित्रों की प्रदर्शनी से कुछ तस्वीरें ]...
जनमतशख्सियतस्मृति मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया : गजानन माधव मुक्तिबोधसमकालीन जनमतJuly 29, 2019July 29, 2019 by समकालीन जनमतJuly 29, 2019July 29, 201903849 एक छाया-चित्र है । प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं । प्रसाद गम्भीर सस्मित । प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य । विभिन्न विचित्र प्रकृति...
जनमतशख्सियतस्मृति प्रेमचंद ने ‘अछूत की शिकायत’ को कथा-कहानी में ढालाडॉ रामायन रामJuly 28, 2019July 29, 2019 by डॉ रामायन रामJuly 28, 2019July 29, 20193 4105 1914 में हिंदी की प्रतिष्ठित पत्रिका सरस्वती में हीरा डोम की कविता अछूत की शिकायत प्रकाशित हुई थी,जिसमे कवि ने अछूतों के साथ होने...
जनमतशख्सियतस्मृति नई पीढ़ी को भी उम्दा साहित्य के संस्कार देने वाले प्रेमचंदअभिषेक मिश्रJuly 28, 2019July 28, 2019 by अभिषेक मिश्रJuly 28, 2019July 28, 201902516 कहा जाता है ‘साहित्य समाज का दर्पण है’। साहित्यकारों से भी यही अपेक्षा रखी जाती है। पर धीरे-धीरे आजादी मिलने से पूर्व और इसके बाद...
जनमतज़ेर-ए-बहस मिया काव्यः चक्रव्यूह में फंसे समुदाय की आवाज़राम पुनियानीJuly 28, 2019July 28, 2019 by राम पुनियानीJuly 28, 2019July 28, 201902010 गत 10 जुलाई 2019 को दस असमिया कवियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इनमें से अधिकांश मुसलमान हैं और उस साहित्यिक धारा के...
जनमतशख्सियतस्मृति रेलवे स्टेशन पर प्रेमचन्दसमकालीन जनमतJuly 28, 2019July 28, 2019 by समकालीन जनमतJuly 28, 2019July 28, 201902255 डॉ. रेखा सेठी अभी हाल ही में नयी दिल्ली के रेलवे स्टेशन पर मुझे प्रेमचन्द की लोकप्रियता का नया अनुभव हुआ। स्टेशन के लगभग हर...
कविताजनमत प्रतिरोध का रसायन तैयार करती उस्मान ख़ान की कविताएँसमकालीन जनमतJuly 28, 2019July 28, 2019 by समकालीन जनमतJuly 28, 2019July 28, 201902912 खुशियाँ अच्छी हैं बहुत, मगर इसमें भी अतिश्योक्ति है! उस्मान की कविताओं का संसार, एक ऐसा संघन संसार है जहाँ एक हाथ को नहीं सूझता दूसरा...
जनमतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति साहित्य का उद्देश्य: प्रेमचंदसमकालीन जनमतJuly 26, 2019July 26, 2019 by समकालीन जनमतJuly 26, 2019July 26, 2019014016 [1936 में प्रगतिशील लेखक संघ के प्रथम अधिवेशन लखनऊ में प्रेमचंद द्वारा दिया गया अध्यक्षीय भाषण] यह सम्मेलन हमारे साहित्य के इतिहास में स्मरणीय घटना है।...
जनमतस्मृति प्रेमचंद के फटे जूते: हरिशंकर परसाईसमकालीन जनमतJuly 25, 2019July 26, 2019 by समकालीन जनमतJuly 25, 2019July 26, 201905493 प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फोटो खिंचा रहे हैं। सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने...