समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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सिनेमा

फ़िल्म ‘द सोर्स’ : ‘से नो टू सेक्स फॉर वाटर’

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प्रतिभा कटियार मेरे घर के ठीक सामने एक कुआँ था. कुआँ अपनी सामन्य भव्यता के साथ मुस्कुराता था. यानी वो पक्का कुआँ था. उसकी जगत...
कविता

देवयानी की कविताएँ ग़लती करने की ख़ुदमुख्तारी को हासिल करने की जद्दोजहद हैं

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हिमांशु पण्ड्या प्रारंभिक दौर के स्त्री लेखन में परम्परा के नाम पर बनी शृंखला की अदृश्य कड़ियों को नज़र के सामने लाने पर बल रहा,...
कविता

शिव कुशवाहा की कविताएँ अपने समय के संघर्षों को दर्ज करती हैं

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कौशल किशोर युवा कवियों ने कविता को नया तेवर दिया है। यह कथ्य तथा शिल्प दोनों स्तर पर देखा जा सकता है। कविता के क्षेत्र...
कविता

वासुकि प्रसाद ‘उन्मत्त’ की कविता जीवन की प्रतिक्रिया से कविता की प्रक्रिया तक ज़रूरी और नैसर्गिक यात्रा है

समकालीन जनमत
आलोक कुमार श्रीवास्तव इस कठिन और चुनौतीपूर्ण समय में साहित्यिक हस्तक्षेप कैसा हो, यह बात हर लोकतंत्र-प्रेमी साहित्यिक सोचता है। धूर्त सत्ता द्वारा जनता के...
पुस्तक

‘बलमा जी का स्टूडियो’ लोक की लय से लबरेज़ कहानी संग्रह है

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गति उपाध्याय ‘यशपाल कथा सम्मान’ से सम्मानित कहानी संग्रह ‘बलमा जी का स्टूडियो’ लोक साहित्य और लोक भाषा की महत्वपूर्ण दस्तावेजी कृति है | भविष्य...
कविता

रूपाली सिन्हा की कविताओं में स्त्री जीवन की नई राह गढ़ती दिखाई पड़ती है

समकालीन जनमत
कामिनी पिछले दिनों आथर्स प्राइड पब्लिकेशन से रूपाली सिन्हा का कविता संग्रह ‘असुविधा के लिए खेद नहीं है’ प्रकाशित हुआ है | इस संग्रह में...
कविताशख्सियत

कविता में अनामिका की उपस्थिति का अर्थ, प्रसंगः साहित्य अकादमी सम्मान-2020

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रमेश ऋतंभर   प्रतिष्ठित कवयित्री-कथा लेखिका व स्त्री विमर्शिका अनामिका को हिन्दी कविता के लिए 2020 का ‘साहित्य अकादमी सम्मान’ दिये जाने की घोषणा अपने-आप...
कविता

प्रभात प्रणीत की कविताएँ अपने समय की विडंबनाओं की परख हैं

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कुमार मुकुल जिस तरह चंद्र किसान जीवन के नये कवि हैं उसी तरह प्रभात प्रणीत नागर जीवन की नूतन आवाज हैं। चंद्र की कविताएँ अगर...
कविता

मनुज देपावत भारतीय कविता परम्परा का कम पहचाना गया बेहद ज़रूरी नाम है

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सतीश छिम्पा   कवि मनुज देपावत हिंदी और राजस्थानी के ही नहीं बल्कि भारतीय भाषाओं के क्रांतिकारी कवि और गीतकार थे। विप्लव के इस कवि...
कविता

हमारी दुनिया की परतें उघाड़ती हैं अविनाश की कविताएँ 

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अंचित कविता का एक काम यह है कि वह हमारे भीतर के तनावों को, हमारी निराशाओं को जगह दे, वह सब कहने का माध्यम बने...
कविता

स्मिता सिन्हा की कविताएँ जिजीविषा का जीवंत दस्तावेज है

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निरंजन श्रोत्रिय स्मिता सिन्हा की इन कविताओं से गुजरना अपने उदास समय को गहराई से देखने, महसूसने और अंततः उससे जूझने की प्रक्रिया है। इस...
ख़बर

रिंकू शर्मा हत्या की निष्पक्ष जांच हो, इसे साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिशों पर रोक लगे

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वामपंथी पार्टियों और मंगोलपुरी इलाक़े के नागरिकों के संयुक्त प्रतिनिधि मंडल ने पुलिस से मिलकर रिंकू शर्मा हत्याकांड के बहाने इलाके में साम्प्रदायिक तनाव बनाने...
ज़ेर-ए-बहस

आपके पाँव देखे..बहुत हसीन हैं, इन्हें ज़मीन पर मत उतारिएगा…क्यों?

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रूपाली सिन्हा उनके पाँव….. आपके पाँव देखे..बहुत हसीन हैं….इन्हें ज़मीन पर मत उतारिएगा…मैले हो जाएँगे…नायिका कागज़ के पुर्ज़े की लिखाई को बार-बार पढ़ती, सुर्ख़ होकर...
कविता

विशाखा मुलमुळे की कविताएँ स्त्री मुक्ति के सवालों को बारीक़ी से रेखांकित करती हैं

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सोनी पाण्डेय स्त्री जीवन का सबसे कठिन सवाल है “मुक्ति”, उसे मुक्ति चाहिए बेमानी वर्जनाओं से, पितृसत्तात्मक समाज के दोहरे मापदंड से, उसके रास्ते में...
कहानी

‘रोटी के चार हर्फ़’ सामायिक घटनाओं और सामाजिक विभेद की सरोकारी रचना है

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गति उपाध्याय “रोटी के चार हर्फ़ ” सिर्फ एक कहानी ही नहीं बल्कि एक कथाचित्र है | कहानी पाठकों के दिलदिमाग़ में चित्र खींचती है...
कविता

सुधाकर रवि की कविता अपने समय से जुड़ने की एक ईमानदार कोशिश है

समकालीन जनमत
अंचित अच्छी कविताओं की निर्मिति में तीन चीज़ें लगती हैं – विचारधारा, भाषा, और जीवन दृष्टि. अच्छी कविताएँ हमेशा वैसी होती हैं, जिनसे अपना दुःख,...
कविता

अभिनव निरंजन की कविताएँ एक घर्षण हैं जिसके ताप से कवि अपने समय का बुख़ार नापता है

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय युवा कवि अभिनव निरंजन अपनी कविताओं में रूपकों, स्थितियों एवं दृश्यों का विभेदन कर उसमें से कविता अर्जित करते हैं। उनके लिए ये...
जनमत

गोरख पाण्डेय की कविता ‘समझदारों का गीत’

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  समकालीन जनमत पर आज सुनिये जनकवि गोरख पाण्डेय(1945-29 जनवरी 1989) के स्मृति दिवस पर उनकी लिखी कविता ‘समझदारों का गीत’ वीडियो सम्पादन और आवाज़:...
कविता

गोरख पाण्डेय की कविता ‘बन्द खिड़कियों से टकराकर’ 

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समकालीन जनमत पर आज सुनिये जनकवि गोरख पाण्डेय(1945-29 जनवरी 1989) के स्मृति दिवस पर उनकी लिखी कविता ‘बन्द खिड़कियों से टकराकर’         ...
कविता

उम्मीद की दूब के ज़िंदा रहने की कामना से भरी ज्योति रीता की कविताएँ

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कुंदन सिद्धार्थ   “जब धरती पर सारी संवेदनाएँ समाप्ति पर होंगी तब बचा लेना प्रेम अपनी हथेली पर कहीं जब धरती बंजरपन की ओर अग्रसर...
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