समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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कविता

उज्ज्वल भट्टाचार्य की कविताएँ जनविरोधी व्यवस्था में ख़ुद के होने की शिनाख़्त हैं

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संजय कुंदन हिंदी कविता की सुपरिचित मुख्यधारा के भीतर कई नियमित-अनियमित अंतर्धाराएं हैं, जो बिना मुखर हुए हिंदी कविता को विस्तृत कर रही हैं। उज्ज्वल...
कविता

लाल्टू की दो कवितायें

समकालीन जनमत
(कवि लाल्टू की  कविता में  समकालीन विषय प्रमुखता से जगह पाते हैं . पिछले एक महीने से दिल्ली के  सीमांत  पर चल रहे किसान आन्दोलन...
कविता

अंचित की कविताएँ मौजूदा दौर के संकटों की शिनाख़्त करती हैं

समकालीन जनमत
रमण कुमार सिंह हाल के समय में हिंदी कविता में जिन कुछ नए युवा कवियों ने अपनी कविता से ध्यान आकृष्ट किया है, उनमें अंचित...
पुस्तक

जनविरोधी सत्ता के ख़िलाफ़ नाटक का हथियार

समकालीन जनमत
सुधाकर रवि बचपन से दो गीत सुनता आ रहा हूँ। दोनों गीत काफी महशूर हैं. पहला है- पढ़ना लिखना सीखो ओ मेहनत करने वालों। दूसरा...
ख़बर

“कलाओं के बीच अबोलेपन को दूर करते हैं मंगलेश” – राजेंद्र कुमार

समकालीन जनमत
हिंदी के जाने-माने कवि मंगलेश डबराल का 9 दिसंबर 2020 को कोरोना संक्रमित होने के कारण दिल्ली के एम्स में निधन हो गया मंगलेश डबराल...
कविता

आलोक की कविताएँ यथार्थ के धरातल पर उम्मीद के फूल हैं

समकालीन जनमत
अच्युतानंद मिश्र   कविता लिखना, दुनिया को देखने जानने और समझने का एक संजीदा और जरूरी काम है। ऐसे में किसी युवा  कवि से यह...
स्मृति

ज़िंदा शहीद कॉमरेड दर्शन दुसांझ – किसान आंदोलन के बहाने स्मरण

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सतीश छिम्पा शहीदों की चिंताओं पर लगेंगे हर वर्ष मेले…… मुझे खंजर से मारो या सूली पर लटका दो मैं मरकर भी चारों तरफ बिखर...
ख़बर

‘  ये तीन काले कानून किसानों को मार देंगे, हम इस कानून को नहीं मानते ’

समकालीन जनमत
आकाश पांडेय   तारीख 5 दिसम्बर , दिल्ली तीन तरफ से किसानों से घिरी हुई. केंद्र सरकार लगातार मीटिंग पर मीटिंग कर रही है लेकिन...
कविता

रेखा चमोली की कविताएँ हाशिए की आवाज़ हैं

समकालीन जनमत
आशीष कुमार कविता अपने बचाव में हथियार उठाने का विचार है साहस की सीढ़ियां है कविता उमंग है उत्साह है खुद में एक बच्चे को...
जनमत

सरकार प्रायोजित अफ़वाहों का सामना करता किसान आन्दोलन

समकालीन जनमत
जगन्नाथ केंद्र सरकर द्वारा हालिया बनाये गए तीन कानूनों – किसान उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) क़ानून-2020, कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन...
कविता

भारत की कविताएँ कोमलता को कुचल देने वाली तानाशाही कठोरता का प्रतिकार हैं

समकालीन जनमत
 विपिन चौधरी अपना रचनात्मक स्पेस अर्जित करने के बाद हर युवा रचनाकार पहले अपनी देखी, समझी हुई उस सामाजिक समझ को पुख्ता करता है जिससे...
कविता

हर्ष की कविताएँ रचनात्मक आश्वस्ति देती हैं

समकालीन जनमत
हर्ष अपनी कविताओं के जरिए एक रचनात्मक आश्वस्ति देते हैं बेहतर भविष्य को बुनने का. उनका दखल केवल विषयों के सटीक चयन तक ही नहीं...
ख़बर

बिहार चुनाव में जनता का एजेंडा आया सामने, बंगाल और अन्य चुनावों के लिए बनेगा उदाहरण: दीपंकर भट्टाचार्य

समकालीन जनमत
    ◆ चुनाव परिणाम की तुलना भाजपा-जदयू 2015 की बजाए 2010 से करे, साफ दिखेगा एनडीए के खिलाफ है यह जनादेश. ◆ जनता ने...
भाषा

उर्दू की क्लास : मुलज़िम और मुजरिम का फ़र्क़

( युवा पत्रकार और साहित्यप्रेमी महताब आलम की शृंखला ‘उर्दू की क्लास’ की बारहवीं          क़िस्त में मुलज़िम और मुजरिम के फ़र्क़...
कविता

रोमिशा की कविताओं में मैथिल स्त्री का अंतर्जगत बहुत मुखर है

समकालीन जनमत
रमण कुमार सिंह हाल के वर्षों में जिन युवा कवयित्रियों ने मैथिली साहित्य के क्षितिज पर अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज की है, उनमें रोमिशा प्रमुख...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

मुक्तिबोध की कविताः जमाने का चेहरा भी, भविष्य का नक्शा भी

समकालीन जनमत
प्रणय कृष्ण मुक्तिबोध ने बहुत तरह से अपनी कविता को व्याख्यायित करने की कोशिश की है. वह कालयात्री है, वह जन चरित्री है, लेकिन मेरी...
कविता

दीपक जायसवाल की कविताएँ अतीत और वर्तमान की तुलनात्‍मक प्रतिरोधी विवेचना हैं

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल अतीत और वर्तमान के तुलनात्‍मक प्रतिरोधी विवेचन और वैचारिक जद्दोजहद दीपक जायसवाल की कविताओं में आकार पाते हैं। समय के अभेद्य जिरहबख्‍तर को भेद...
स्मृति

एक नाराज़ सूरज डूब गया

समकालीन जनमत
अच्युतानंद मिश्र प्रगतिशील धारा से सम्बद्ध वरिष्ठ लेखक विष्णुचंद्र शर्मा(1/4/1933-2/11/2020) का 2 नवम्बर को निधन हो गया। सोचता हूँ वे अगर इस वाक्य को सुनते...
कविता

जोराम यालाम नाबाम की कविताएँ जीवन की आदिम सुंदरता में शामिल होने का आमंत्रण हैं

समकालीन जनमत
बसन्त त्रिपाठी जोराम यालाम नाबाम की कविताओं में आतंक, भय, राजनीतिक दाँव-पेंच, खून-खराबे से त्रस्त जीवन को आदिम प्रकृति की ओर आने का आत्मीय आमंत्रण...
जनमत

मियों का मोहल्ला- एक

समकालीन जनमत
मोहम्मद उमर ‘उखड़ी हुई खोड़हीं सी सड़कें, ये बारिशों में नदी होने का हुनर रखती हैं। चौराहे के एक तरफ गोश्त की दुकान तो एक...
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