समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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स्मृति

मेरी मातृभूमि का कोई मुआवज़ा नहीं हो सकता: सुंदरलाल बहुगुणा

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मई 1995 में वर्तमान में उत्तराखण्ड में शिक्षक नवेंदु मठपाल टिहरी बांध आंदोलन और वहाँ के डूब क्षेत्र के गाँवों की स्थितियों को नज़दीक से...
स्मृति

प्रो. लाल बहादुर वर्मा: वे एक साथ अध्यापक और दोस्त दोनों थे

समकालीन जनमत
धर्मेंद्र सुशांत लाल बहादुर वर्मा नहीं रहे.. करीब 20–21 साल पहले पटना में उनसे पहली बार मुलाकात हुई थी गोकि जान उन्हें पहले चुका था....
स्मृति

प्रो. लाल बहादुर वर्मा: एक प्रोफ़ेसर जिसने विविधता का मतलब बताया

समकालीन जनमत
सविता पाठक ये माना जिन्दगी है चार दिन की बहुत होते हैं यारों ये चार दिन भी -फ़िराक़  प्रो लालबहादुर वर्मा नहीं रहे। ये ख़बर...
स्मृति

मेरी नींद मत लो मेरे सपने लो: मंगलेश स्मृति

समकालीन जनमत
मिथिलेश श्रीवास्तव दिल्ली शहर मंगलेश डबराल की कविता ‘मत्र्योश्का’ की तरह है ( मत्र्योश्का रूस की एक लोकप्रिय गुड़िया है जिसमें लकड़ी की बनी क्रमशः...
कविता

रवि निर्मला सिंह की कविताएँ जातिवाद की जड़ों और उसकी चोट की तल्ख़ पहचान हैं

समकालीन जनमत
हीरालाल राजस्थानी आज के युवा रचनाकार मार्क्स के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी भली भांति समझते हैं और जाति के सवालों तथा समतामूलक समाज के निर्माण...
ज़ेर-ए-बहस

भाजपा सदस्यों के नाम संगीतकार टी. एम. कृष्णा का ख़त

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प्रसिद्ध संगीतकार टी एम कृष्णा ने आज ‘इंडियन एक्स्प्रेस’ में Dear Members of BJP शीर्षक से यह लेख/ख़त लिखा है। यहाँ उस ख़त का डॉ....
कविता

दिलीप दर्श की कविताएँ सामाजिक द्वन्द्व को उकेरती हैं

कौशल किशोर दिलीप दर्श की रचनात्मक स्थितियां वर्तमान के द्वन्द्व से तैयार होती हैं। इनमें सामाजिक संघर्ष, अतीत की सीखें, शोषक-शासक शक्तियों की पहचान, वर्ग...
स्मृति

प्यारे भाई अरुण पाण्डेय को सादर श्रद्धांजलि!

समकालीन जनमत
उर्मिलेश   दिल्ली से बंगाल-चुनाव कवर करने गये कई पत्रकार मित्रों से वहां की राजनीतिक स्थिति को लेकर मेरी फोन पर बातचीत होती रहती थी....
स्मृति

अलविदा अरुण भाई! आपके अरमान, हमारे अरमानों में ज़िंदा रहेंगे, हमेशा !

समकालीन जनमत
पंकज श्रीवास्तव इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 1980-90 के बीच सक्रिय रहे तमाम लोगों के लिए 5 मई बुधवार की सुबह बेतरह उदासी में डूबी हुई थी।...
स्मृति

अरुण पाण्डेय को इस तरह नहीं जाना था

प्रियदर्शन अरुण पाण्डेय के कोविडग्रस्त होने और ठीक हो जाने की सूचना मुझे थी। मंगलवार सुबह उनकी पत्नी पुतुल से बात भी हुई- उन्होंने बताया...
स्मृति

मानस बिहारी वर्मा : समाज-चेतस विज्ञान की खोज

समकालीन जनमत
कमलानंद झा लंबे समय तक पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के साथ काम करने करने वाले वैज्ञानिक डॉ मानस बिहारी वर्मा वैज्ञानिक-दृष्टि सम्पन्न  समाज की...
स्मृति

कॉमरेड रमेश सरीन को ख़िराज़-ए-अक़ीदत

अर्जुमंद आरा कॉमरेड रमेश सरीन का जीवन एक लंबा संघर्ष था। दो-तीन साल के थे जब किसी बीमारी में उनकी आँखें चली गईं। लेकिन बड़े...
स्मृति

स्मृति शेष कांतिकुमार जैन: अपने लेखन में एक पूरे क़द का आदमी!

प्रकाश कान्त उनसे पहली बार मिलना क़रीब पेैंतालीस साल पहले हुआ था। वे उन दिनों शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गुना में थे। मैं अपनी एक नौकरी...
सिने दुनिया

सिने दुनिया: सिंडलर्स लिस्ट (अमेरिकन): उसकी क़ब्र पर मुहब्बत के गुल दहकते हैं

  सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद हिंदुस्तान ही नहीं, दुनिया के तमाम देश आजाद हुए। हिटलर की सनक के चलते फ्रांस और ब्रिटेन ने जर्मनी...
कविता

प्रमोद पाठक की कविताओं में काव्य ध्वनियाँ संगीत की तरह सुनाई देती हैं

प्रभात इस तरह मेरा झुकना अधर में लटका हुआ छूट गया है.. प्रमोद एन्द्रिकता के कवि हैं। जब वे कविता लिखते हैं उनकी इन्द्रियाँ साँस...
स्मृति

हमीदिया रोड की उस बिल्डिंग से उठकर हमारे दिल में बस गये मंज़ूर सर

समकालीन जनमत
पुष्यमित्र इन दिनों अपने देश में पतझड़ का मौसम है। इस पतझड़ में जो बसंत के बाद आया है, सिर्फ सूखे पत्ते ही नहीं बड़े-बड़े...
जनमत

ख़ुदाबख़्श लाइब्रेरी: ज्ञान के एक और केंद्र पर हमला

समकालीन जनमत
जीतेन्द्र वर्मा बिहार में ख़ुदाबख़्श खां ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी को तोड़ने की तैयारी हो रही है। ओवरब्रिज के निर्माण के लिए सरकार देर – सवेर...
कविता

कविता कादम्बरी की कविताएँ अपने समय के संघर्षों के आब और ताब को दर्ज करती हैं

समकालीन जनमत
विशाखा मुलमुले एक तारे के होने भर से नहीं रहता खाली आसमान , हमारी खोजी नजरें आसमान में खोज ही लेती है वह तारा ।...
स्मृति

शंख घोष को याद करते हुए

समकालीन जनमत
 मीता दास   बांग्ला साहित्य का एक युग अचानक ख़त्म हो गया । कोरोना महामारी एक मूर्धन्य साहित्यकार को निगल गई। वे बांग्ला साहित्य में...
कविता

राकी गर्ग की कविताएँ उदासी से जूझती हैं

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय युवा कवयित्री राकी गर्ग की ये कविताएँ नितांत निजी एवं उनके अनुभव संसार की कोमलतम अभिव्यक्तियाँ हैं। इन अनुभवों में जातीय स्मृतियाँ हैं,...
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