समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

जनमतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति

प्रेमचंद जी:  महादेवी वर्मा

समकालीन जनमत
प्रेमचंदजी से मेरा प्रथम परिचय पत्र के द्वारा हुआ. तब मैं आठवीं कक्षा की विद्यार्थिनी थी. मेरी “दीपक” शीर्षक एक कविता शायद “चाँद” में प्रकाशित...
जनमतशख्सियतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति

‘सांप्रदायिकता और संस्‍कृति’ : प्रेमचंद (प्रेमचंद पर शृंखला की शुरुआत)

समकालीन जनमत
31 जुलाई को कथाकार प्रेमचंद का जन्‍मदिन है। समकालीन जनमत अपने पाठकों के लिए आज से 31 जुलाई तक प्रेमचंद पर एक विशेष शृंखला की शुरुआत...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

व्यक्तित्व में सरल और विचार में दृढ़: राजेन्द्र कुमार

समकालीन जनमत
विनोद तिवारी पचहत्तर पार : राजेंद्र कुमार राजेंद्र सर हमारे प्रिय अध्यापकों में रहे हैं । वह अपने व्यक्तित्व में नितांत सहज, सरल और साधारण...
जनमतपुस्तक

आक्सफ़ोर्ड की मार्क्स सहायिका

गोपाल प्रधान
2019 में आक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस से मैट विडाल, टोनी स्मिथ, तोमास रोट्टा और पाल प्रेव के संपादन में ‘द आक्सफ़ोर्ड हैंडबुक आफ़ कार्ल मार्क्स’ का...
कविताशख्सियत

यथार्थ के अन्तर्विरोधों को उदघाटित करते कवि राजेन्द्र कुमार

कौशल किशोर
( जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष, कवि और आलोचक राजेन्द्र कुमार (24/7/1943) आज  76 साल के हो गए. एक शिक्षक, कवि, आलोचक और एक ...
साहित्य-संस्कृति

एका : किसान आन्दोलन और आजादी की लड़ाई में वर्ग हितों की टकराहट का दस्तावेज

1920 से 1928 के बीच अवध के दो महान किसान नेताओं बाबा रामचंद्र और मदारी पासी के नेतृत्व में चले किसान संघर्षों के बारे में...
कहानी

अनकहा आख्यान: जया जादवानी

समकालीन जनमत
डॉ. हर्षबाला शर्मा कहानी और कविता के भीतर बहते इन्तज़ार की नदी कहानी पढ़ते हुए अगर कविता भीतर जन्म लेने लगे और आप उसमें बहते...
कविताजनमत

अरमान आनंद की कविताएँ भावुक बयान ही नहीं प्रतिबद्धता और बदलाव की छटपटाहट भी हैं

डॉ रामायन राम
कविता के क्षेत्र में आये हर युवतर और नए कवि का मौलिक स्वर रोमांस होता है।रुमानियत उनकी संवेदना का मूल सेंसर होता है।अपने समय की...
ज़ेर-ए-बहसव्यंग्य

वाह-वाह,वाह जी वाह,हमने सरकार क्या चुनी,चमत्कार चुने हैं

समकालीन जनमत
इन्द्रेश मैखुरी वाह-वाह,वाह जी वाह,हमने सरकार क्या चुनी,चमत्कार चुने हैं. पहले लोग कहते थे कि सरकार के पास कोई जादू की छड़ी थोड़े है,जो पल...
साहित्य-संस्कृति

असम के मियाँ कवियों के साथ एकजुटता में दिल्ली में प्रेस वार्ता

समकालीन जनमत
प्रेस कॉन्फ्रेंस 18 जुलाई, 2019 दोपहर 1 से 2:30 बजे, प्रेस क्लब, नई दिल्ली यद्यपि ‘मियाँ’ शब्द का शाब्दिक अर्थ उर्दू में सज्जन है, बंगाली...
साहित्य-संस्कृति

असम के कवियों पर दर्ज मुक़दमा वापस लो !

समकालीन जनमत
  जन संस्कृति मंच का बयान 31 जुलाई को असम में नागरिकता रजिस्टर जारी होने वाला है। असम में इस मुद्दे पर भेदभाव के ख़िलाफ़...
सिनेमा

फ़िल्म समीक्षा- स्पाइडर मैन: फ़ार फ्रॉम होम

अभिषेक मिश्र
स्पाइडर मैन मेरा पसंदीदा कॉमिक चरित्र है, लाखों करोड़ों अन्य लोगों का भी। पीढ़ी-दर-पीढ़ी इसके प्रशंसकों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। बच्चों और...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

नरेन्द्र सिंह नेगी की गीत यात्रा:व्यावसायिकता पर भारी जनसरोकार

(2018 के संगीत नाटक अकादमी सम्मान की घोषणा में उत्तराखंड की दो शख्सियतों के नाम भी हैं. ये नाम हैं लोकगायक,कवि,गीतकार नरेन्द्र सिंह नेगी और...
सिनेमा

मासूमियत भरी उम्मीद जगाती: फ़िल्म हामिद

अभिषेक मिश्र
कश्मीर, कश्मीर की स्थिति, वहाँ के लोगों आदि को लेकर विभिन्न माध्यमों ने आपकी सोच को विभिन्न नजरिये से प्रभावित किया होगा। इसके बारे में...
जनमतपुस्तक

‘बैठकर काशी में अपना भूला काशाना’ : मिर्ज़ा ग़ालिब

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल ‘चिराग़-ए-दैर (मंदिर का दीया)’ मिर्ज़ा ग़ालिब की बनारस पर केंद्रित कविताओं का संकलन है जिसका मूल फारसी से सादिक ने अनुवाद किया है। चिराग़-ए-दैर की...
कहानीशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

आखिरी दौर की डायरी और एक कहानी -मधुकर सिंह

(मधुकर जी ने अपने आखिरी दिनों में अपनी डायरी में राजनीति, खेल, फिल्म आदि पर कुछ टिप्पणियां और साहित्य-संस्कृति से जुड़ी यादों के साथ-साथ कुछ...
कहानी

एक राजा था जो सीताफल से डरता था: प्रवीण कुमार

समकालीन जनमत
योगेंद्र आहूजा हिंदी कहानी के लिये पिछले तीन दशक रोमांचक रहे हैं । इस दौरान कहानी की दुनिया में ऐसी खलबली, उत्तेजना और बेचैनी देखी...
कविताजनमत

विनोद विट्ठल की कविताएँ: स्मृति के कोलाज में समय का चेहरा

उमा राग
लीना मल्होत्रा प्रथम दृष्टया विनोद विट्ठल की कविताएँ सूचनाओं से भरपूर दिखती हैं, किन्तु गहरे उतरने पर उन सूचनाओं से लिपटी स्मृतियाँ, स्मृतियों में छिपे...
पुस्तकसाहित्य-संस्कृति

अवध किसान आंदोलन की स्मृतियों को ताज़ा करती हुई राजीव कुमार पाल की पुस्तक “एका” का विमोचन

समकालीन जनमत
लखनऊ। एक सदी पूर्व जनमानस को झकझोर देने वाले अवध किसान आंदोलन की स्मृतियाँ अब जनमानस में धुंधली सी पड़ती जा रही हैं। इन्ही स्मृतियों...
कविताजनमत

‘जीवन की सरलता का प्रतिनिधित्व करती हैं रविंदर की कविताएँ’

समकालीन जनमत
आलोक रंजन रविंदर कौर सचदेवा की कविताएँ सरलता को स्थापित करने के संघर्ष की कविताएँ हैं जो पहचान , प्रेम और दुनियादारी के अलग अलग...
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