समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविताजनमत

अंधेरे के ख़िलाफ़ ज़माने को आगाह करती हैं मुकुल सरल की कविताएँ

समकालीन जनमत
गीतेश सिंह अभी कुछ सप्ताह पहले जब हम त्रिलोचन को याद कर रहे थे, तो उनकी एक कविता लगातार ज़ेहन में चलती रही -कविताएँ रहेंगी तो/ सपने...
पुस्तक

सिनेमा के बारे में जावेद अख्तर से नसरीन मुन्नी कबीर की बातचीत

समकालीन जनमत
गीतेश सिंह भारतीय सिनेमा पर हिंदी में या तो बहुत कम साहित्य उपलब्ध है, या मेरी खोज की ही सीमा रही होगी कि बहुत दिनों से...
जनमतशख्सियतस्मृति

गांधी और उनके हत्यारे

इन्द्रेश मैखुरी
आज जब महात्मा गांधी की पैदाइश के 150 साल पूरे हो रहे हैं,तब लगता है कि एक चक्र पूरा हो कर दुष्चक्र की ओर बढ़...
स्वाद के बहाने

रानीवाड़ा के टुक्कड़

संजय जोशी
(‘प्रतिरोध का सिनेमा’ के राष्ट्रीय संयोजक संजय जोशी अपनी सिनेमा यात्राओं के सिलसिले में देश भर में घूमते रहते हैं । खाने-खिलाने के शौकीन संजय...
कविताजनमत

प्रज्ञा की कविता व्यक्ति पर समाज और सत्ता के प्रभाव से उठने वाली बेचैनी है

समकालीन जनमत
निकिता नैथानी ‘कविताएँ  आती हैं आने दो थोड़ी बुरी निष्क्रिय और निरीह हो तो भी..’ इस समय जब लोग आवाज़ उठाने और स्पष्ट रूप से...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति

वीरेन डंगवाल की याद: अचानक यह हुआ कि मैं रिसेप्शन में अकेला पड़ गया

समकालीन जनमत
अशोक पाण्डे जब उनसे पहली बार मिला वे नैनीताल के लिखने-पढ़ने वालों के बीच एक सुपरस्टार का दर्जा हासिल चुके थे. उनकी कविताओं की पहली...
जनमतपुस्तक

सुभाष राय की चिंताओं, सरोकार और लेखकीय दृष्टि से परिचित कराती एक पुस्तक ‘ जाग मछन्दर जाग’

समकालीन जनमत
प्रोफ़ेसर अरुण होता मिथक के अनुसार शिवजी पार्वती को योग एवं ज्ञान के गूढ तत्व बता रहे थे तो एक मत्स्य ने सब कुछ सुन लिया...
कहानी

उत्पीड़न के विरुद्ध उम्मीदों की ‘सुलगन’

समकालीन जनमत
आलोक रंजन कैलाश वानखेड़े की किताब ; सुलगन ! नौ कहानियों वाले इस संग्रह में इस नाम की कोई कहानी नहीं है लेकिन ‘सुलगन’ हर...
साहित्य-संस्कृति

‘जनता का अर्थशास्त्र ’ एक जरूरी किताब – प्रो रमेश दीक्षित

लखनऊ। आवारा पूंजी साम्राज्यवादी पूंजी का नया चेहरा है। वह राजनीति पर कब्जा जमाती है, उसे अपना गुलाम बनाती है। वह जिस अर्थशास्त्र को निर्मित...
जनमतपुस्तक

‘बड़ी कविता को वक्त के सवालों और सन्दर्भों से जोड़कर उसका एक नया पाठ करना होगा’

योगेंद्र आहूजा
अवधेश त्रिपाठी की इस आलोचना पुस्तक में हिंदी की आधुनिक कविता के पांच प्रमुख कवियों के कृतित्व की विवेचना है । वे हमारे देश के...
पुस्तकसाहित्य-संस्कृति

अवधेश त्रिपाठी की पुस्तक ‘कविता का लोकतंत्र’ पर परिचर्चा

समकालीन जनमत
अनुपम सिंह जन संस्कृति मंच की घरेलू गोष्ठी में अवधेश त्रिपाठी की पुस्तक “कविता का लोकतंत्र” पर परिचर्चा संपन्न हुई . यह परिचर्चा दिनांक 21...
नाटकसाहित्य-संस्कृति

ट्रॉल्स के महाजाल को भेदता है राजेश कुमार का नाटक ‘ खेल खतम ’

लखनऊ। राजेश कुमार राजनीतिक और ज्वलन्त विषयों पर अपने नाटक के लिए ख्यात है। उनका नया नाटक है ‘खेल खतम’। इस नाटक का पाठ उन्होंने...
ख़बरसिनेमा

आइसा और संगवारी ने की छात्रों के लिए फ़िल्म स्क्रीनिंग

समकालीन जनमत
  दिल्ली विश्वविद्यालय से सटे कल्याण विहार इलाके में आज छात्र संगठन आइसा और सांस्कृतिक संगठन संगवारी ने मिलकर एक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया।...
कविता

एकांत और संवेदना की नमी में आकंठ डूबा कवि प्रभात मिलिंद

समकालीन जनमत
रंजना मिश्र प्रभात मिलिंद की कविताओं से गुज़रना संवेदनशील आधुनिक मानव मन की निरी एकांत यात्रा तो है ही साथ ही परिवार समाज और देश...
साहित्य-संस्कृति

तश्ना आलमी की शायरी में श्रम का सौंदर्य – कौशल किशोर

तश्ना आलमी की याद में लखनऊ में हुआ कार्यक्रम लखनऊ। तश्ना आलमी की शायरी प्रेम, संघर्ष व श्रम से मिलकर बनी है। इसमें श्रम का...
जनमतशख्सियतसिनेमा

‘अपनी तारीख़ का उन्वान बदलना है तुझे’

समकालीन जनमत
गीतेश सिंह फ़िल्म, टेलीविजन और थिएटर की जानी मानी अभिनेत्री और अनेक अन्तर्राष्ट्रीय फिल्मों में काम कर चुकी शबाना आज़मी का आज जन्म दिन है...
चित्रकलाशख्सियत

एम एफ हुसैन की कला में मुक्ति, संघर्ष और प्रगतिशीलता प्रधान स्वर हैं

समकालीन जनमत
(17 सितम्बर जाने माने चित्रकार, पद्म विभूषण से सम्मानित मकबूल फिदा हुसैन का जन्म दिन होता है । हुसैन साहब की याद में प्रस्तुत है...
ख़बरशख्सियतस्मृति

पाकिस्तान के साम्यवादी और ट्रेड यूनियन नेता तुफ़ैल अब्बास की मृत्यु पर शोक संदेश

समकालीन जनमत
विजय सिंह तुफ़ैल अब्बास (1927 – 9/9/2019) 9 सितंबर को काराची मे काॅमरेड तुफ़ैल अब्बास का निधन हो गया। वे 92 वर्ष के थे। वे...
कविताजनमत

आत्‍मीयता का रंग और लोक का जीवट : इरेन्‍द्र की कविताएँ

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल आत्‍मीयता इरेन्‍द्र बबुअवा की कविताओं का मुख्‍य रंग है। इस रंग में पगे होने पर दुनियावी राग-द्वेष जल्‍दी छू नहीं पाता। भीतर बहती...
जनभाषाशिक्षा

राजभाषा का उद्देश्य जनता के कल्याण में निहित होना चाहिए

समकालीन जनमत
अम्बरीश त्रिपाठी ऐतिहासिक भूलों को भूल जाने में आम भारतीयों का कोई सानी नहीं है। उपनिवेश बनने की कहानी को कितनी जल्दी और आसानी से...
Fearlessly expressing peoples opinion