समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविता

संध्या नवोदिता की कविताओं में जिजीविषा और यथार्थ की कड़वाहट के स्वर प्रमुख हैं

निरंजन श्रोत्रिय युवा कवयित्री संध्या नवोदिता की ये कविताएँ थिर तापमान की हैं। उनकी कविताओं में अमूर्तता, रागात्मकता, राजनीतिक चेतना और जनसंघर्ष के स्वर स्पष्ट...
स्मृति

जनमुक्ति के संघर्ष व स्वप्न का कवि विजेन्द्र

कौशल किशोर
स्मृति दिवस 29 अप्रैल   पिछले साल आज के दिन 29 अप्रैल को हमने अपना अग्रज साथी, सहयोद्धा, लोकधर्मी कवि और साहित्य चिन्तक विजेन्द्र को...
स्मृति

रामनिहाल गुंजन : मेरा जीवन और मेरा परिवेश

( रामनिहाल गुंजन जी ने अपने जीवन की यह दास्तान समकालीन जनमत के संपादक मंडल के सदस्य सुधीर सुमन के बहुत अनुरोध पर लिखी थी।...
स्मृति

रामनिहाल गुंजन : कभी खत्म नहीं होती हैं शब्द यात्राएँ

सुधीर सुमन
रामनिहाल गुंजन हिन्दी की प्रगतिशील-जनवादी आलोचना के सुपरिचित नाम थे। उनका जन्म 9 नवंबर 1936 को हुआ था। वे हिन्दी के ऐसे आलोचक थे, जो...
स्मृति

संगठन और आन्दोलन के व्यक्ति थे सुरेश पंजम

कौशल किशोर
प्रथम स्मृति दिवस 25 अप्रैल ‘ वे नष्ट कर सकते हैं/तमाम फूलों को पर बसंत को आने से/वे रोक नहीं पायेंगे ’  यह सुरेश पंजम...
स्मृति

‘ लेखन व जीवन की समरूपता के प्रतीक थे रामनिहाल गुंजन ’

आरा। जाने माने आलोचक, कवि रामनिहाल गुंजन की स्मृति में जन संस्कृति मंच , भोजपुर-आरा की ओर से स्थानीय बाल हिंदी पुस्तकालय में रविवार की...
पुस्तक

समकाल की आवाज़ – कुछ कवि, कुछ नोट्स

उमा राग
कुमार मुकुल   आँखें आशंकित थीं हाथों ने कर दिखाया अजेय की कविताएँ ठोस ढंग से विवेक की ताकत को अभिव्‍यक्‍त करती श्रम की संस्‍कृति...
कविता

भास्कर चौधुरी की कविताएँ: यहाँ कोई सरहद नहीं है

समकालीन जनमत
कौशल किशोर समकालीन रचनाशीलता दबाव में है। रचनाकार के निजी जीवन, अनुभव संसार, भाव-संवेदना,  लय-ध्वनि सभी अतिरिक्त दबाव में हैं। यह उसके अन्तर्य पर बाह्य...
स्मृति

जीवन के रंग और राग में सराबोर है लालसा लाल तरंग का साहित्य

कौशल किशोर
12 अप्रैल स्मृति दिवस पर कोरोना महामारी के दौरान हमने साहित्य व समाज के ऐसे महत्वपूर्ण लोगों को खोया है जिनकी बेहद जरूरत थी। दूसरी...
कविता

प्रियंवदा की कविताएँ हिंदी कविता के आँचल में ग़ज़ल के फूल टाँकने का फ़न हैं

समकालीन जनमत
अजमल सिद्दीक़ी  प्रियंवदा के अब तक के साहित्यिक सफ़र को मैं ने बहुत क़रीब से देखा है , मैं इस सफ़र के हर उतार चढ़ाव...
साहित्य-संस्कृति

‘ जितेंद्र कुमार की कहानियाँ भोजपुर के संग्रामी जमीन का बहुस्तरीय स्वरूप प्रस्तुत करती हैं ’

आरा। स्थानीय बाल हिंदी पुस्तकालय में वरिष्ठ कहानीकार जितेंद्र कुमार के सद्य: प्रकाशित कहानी संग्रह ‘अग्निपक्षी’ का लोकार्पण व परिचर्चा का कार्यक्रम जन संस्कृति मंच,...
कविता

महेश पुनेठा की कविताएँ जीवन, प्रकृति और परिवेशगत विडंबनाओं को धारदार रूप में अभिव्यक्त करती हैं

समकालीन जनमत
कल्पना पंत   ’भवानी प्रसाद मिश्र” की ’कवि’ शीर्षक कविता की आरंभिक पंक्तियाँ हैं  “जिस तरह हम बोलते हैं   उस तरह तू लिख  और इसके बाद...
व्यंग्य

राज दरबार में मायूसी!

जयप्रकाश नारायण  बादशाह ने हड़बड़ाहट में मंत्रियों की बैठक बुलायी। प्रधान अमात्य से  चिंता की मुखमुद्रा में पूछा, कि महामात्य यह बताएं कि  चारों दिशाओं...
कविता

प्रदीप सैनी की कविताएँ अपने समय में फैलाई जा रही अविश्वसनीयता के ख़िलाफ़ प्रतिरोध दर्ज करती हैं

समकालीन जनमत
अनुपम त्रिपाठी एक छोटी सी कहानी से बात शुरू करूँ। एकबार जंगल के सभी जानवर पुराने राजा यानी शेर से बहुत तंग आ गए। तो...
नाटक

मऊ के राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ में ‘ गगन दमामा बाज्यो ‘ का मंचन

मऊ। शहीदे आजम भगत सिंह के शहादत दिवस की पूर्व संध्या 22 मार्च को भगत सिंह और उनके क्रांतिकारी साथियों के जीवन पर आधारित सुप्रसिद्ध...
पुस्तक

आधुनिक स्त्री जीवन का दस्तावेज : मिट्टी का दुःख

समकालीन जनमत
डॉ. वंशीधर उपाध्याय बीसवीं सदी के अंतिम दशक में हिंदी काव्य परम्परा के भीतर जो स्वर उभरे उनमें स्त्री रचनाकारों की लेखनी का स्वर मुकम्मल...
कविता

रक्षा की कविताएँ भारतीय समाज में स्त्री जीवन का बेबाक और साहसिक बयान हैं

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय कविता सिर्फ वाक्यावलियों, पंक्ति विन्यास या किसी विचार के शब्दबद्ध होने से ही संभव नहीं होती। अपने समय-समाज में घट रहे दृश्यों, दृष्टांतों...
कहानीजनमतशख्सियत

नौ सौ रुपये और एक ऊँट दाना

समकालीन जनमत
(आजादी के बाद की हिन्दी कहानी में  चर्चित रहे लेखक मार्कण्डेय की आज पुण्यतिथि है। इस अवसर पर समकालीन जनमत के पाठकों के लिए  प्रस्तुत...
सिनेमा

फिल्म ‘झुंड’ किताब की तरह पढ़े जाने की मांग करती है

जनार्दन
फ़िल्म – झुंड निर्देशक – नागराज पोपटराव मंजुले कलाकार – अमिताभ बच्चन, अंकुश गेडाम, आकाश थोसर, रिंकु राजगुरु छायांकन – सुधाकर रेड्डी गीत-संगीत – साकेत...
कहानीजनमतसाहित्य-संस्कृति

देवी: साधारणता में देवत्व का दर्शन तथा नये रचनात्मक मूल्य का संघर्ष

दुर्गा सिंह
‘देवी’ निराला की बहु प्रशंसित कहानी है। यह प्रशंसा इस कहानी की संवेदना को लेकर अधिक है। कोई भी रचना बड़ी तो प्रथमतः अपनी संवेदना...
Fearlessly expressing peoples opinion