समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविता

प्रिया वर्मा की कविताएँ शुचितावादी धारणाओं को धता बताती हैं

समकालीन जनमत
जोशना बैनर्जी आडवानी “आम्रपाली की कथा बांचो परिव्राजक! और अब कहो कि तुम्हारे डर को मिट जाना चाहिए। उस गलफंद को कहूँ मैं धन्यवाद? मुझे...
कविता

प्रेम नन्दन की कविताएँ लोकजीवन और उसके संघर्ष की कविताएँ हैं

समकालीन जनमत
कौशल किशोर   प्रेम नन्दन की कविताओं से गुजरते हुए लगता है कि लोकजीवन और उसका संघर्ष अपनी गरिमा के साथ उपस्थित है। यहां ‘पथराई...
जनमतसाहित्य-संस्कृतिसिने दुनिया

पूंजी और सत्ता द्वारा रचित ताकत, दम्भ तथा मानवीय भावों, सद्गुणों  के बीच तनाव व संघर्ष की श्रृंखला है ‘पंचायत-2’

दुर्गा सिंह
‘पंचायत’ अमेजन प्राइम वीडियो पर प्रदर्शित वेब श्रृंखला है। इसका दूसरा सीजन अभी जारी हुआ है। यह ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सर्वाधिक पसंद की जाने वाली...
साहित्य-संस्कृति

मध्यकालीन हिंदी साहित्य के अनुभव परिसर को विस्तार देती हैं मुगल बादशाहों की हिंदी कविताएँ 

डॉ.संगीता मौर्य                                                             दैनिक समाचार पत्र अमर उजाला के 26 अप्रैल 2022 संस्करण में  अमित शर्मा की छपी एक रिपोर्ट के अनुसार सीबीएसई के नये...
स्मृति

‘ चाँद की बातें चलती रहेंगी, सूरज की बातें चलती रहेंगी ’

समकालीन जनमत
युवा चित्रकार राकेश दिवाकर की याद में लिया गया संकल्प आरा: स्थानीय रेडक्रॉस सभागार में 29 मई को जन संस्कृति मंच की ओर से चित्रकार,...
कविता

पंखुरी सिन्हा की कविताएँ: तबाही के बरख़िलाफ़ स्मृतियों की पुकार

समकालीन जनमत
विपिन चौधरी जब कोई कविता, संसार के किसी भी शहर के भीतर बसी सामूहिक स्मृतियों के साथ उस शहर के इतिहास और वहाँ के सामाजिक...
स्मृति

‘ दुनिया को ख़ूबसूरत बनाने के लिए देखे जा रहे सपने और संघर्ष मेरे चित्र के विषय हैं ’

समकालीन जनमत
( हाल में दिवंगत युवा चित्रकार, कवि, रंगकर्मी, समीक्षक और कला-शिक्षक राकेश कुमार दिवाकर ने पाँच वर्ष पहले 7 सितंबर 2016 अपनी चित्रकला के बारे...
कविता

शुक्ला चौधुरी : मैं लिखूँ कविता पेड़ों की/चिड़ियों की/ ख़ौफ़ नहीं/प्रेम की…..

समकालीन जनमत
कौशल किशोर शुक्ला चौधुरी ऐसी कवयित्री हैं जिन्हें आकाश की ऊँचाई का पता है। वे जानती हैं कि हाथ से आकाश को नहीं छू सकती...
कविता

पुस्तक ” ग़ज़ल एकादश ”  हुआ विमोचन

लखनऊ। लोक प्रिय जनवादी ग़ज़लकार डॉ डी एम मिश्र द्वारा संपादित ग़ज़ल पुस्तक ” ग़ज़ल एकादश ” का ‘हिंदी श्री’ के पटल पर ऑनलाइन विमोचन...
स्मृति

राकेश दिवाकर ने चित्रकला को जनता के सवालों से जोड़ा

समकालीन जनमत
जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय पार्षद और ‘कला कम्यून’ के संस्थापक चित्रकार राकेश दिवाकर का सड़क दुर्घटना में निधन राकेश दिवाकर आधुनिक चित्रकला, खासकर जनपक्षीय...
कविता

हम सभी के घर में गणित के जादूगर हैं: ऊषा दशोरा की कविताएँ

समकालीन जनमत
अरुण शीतांश स्त्री जीवन की विडंबनाओं पर बहुत सारी कविताएँ हमने पढ़ी हैं और उनके माध्यम से उस जीवन की तमाम कही अनकही जटिलताओं से...
चित्रकला

समकालीन चित्रकला को उसकी कहानियों और बनावटी संदर्भों से मुक्त कराना होगा : अशोक भौमिक

नई दिल्ली। साहित्य अकादमी नई दिल्ली में सात मई को जाने माने चित्रकार, कला समीक्षक अशोक भौमिक की पुस्तक “भारतीय चित्रकला का सच” का लोकार्पण...
कविता

सुजाता गुप्ता की कविताएँ समाज की कुरूप सच्चाइयों से उपजी अकुलाहट हैं।

सौम्या सुमन कवि केदारनाथ सिंह ने कहा है कि कविता के पास अपना विचार होना चाहिए और जीवन जगत के बारे में उसका विचार जितना...
सिनेमा

धूप की दीवार : मोर दैन अ रिव्यू   

मीनल
कुछ समय हुआ मुझे ज़ी फाइव ओटीटी प्लेटफार्म पर पाकिस्तानी सीरीज़ ‘धूप की दीवार’ देखे हुए और इस सीरीज़ के हर एपिसोड के साथ ज़हन...
कविता

संध्या नवोदिता की कविताओं में जिजीविषा और यथार्थ की कड़वाहट के स्वर प्रमुख हैं

निरंजन श्रोत्रिय युवा कवयित्री संध्या नवोदिता की ये कविताएँ थिर तापमान की हैं। उनकी कविताओं में अमूर्तता, रागात्मकता, राजनीतिक चेतना और जनसंघर्ष के स्वर स्पष्ट...
स्मृति

जनमुक्ति के संघर्ष व स्वप्न का कवि विजेन्द्र

कौशल किशोर
स्मृति दिवस 29 अप्रैल   पिछले साल आज के दिन 29 अप्रैल को हमने अपना अग्रज साथी, सहयोद्धा, लोकधर्मी कवि और साहित्य चिन्तक विजेन्द्र को...
स्मृति

रामनिहाल गुंजन : मेरा जीवन और मेरा परिवेश

( रामनिहाल गुंजन जी ने अपने जीवन की यह दास्तान समकालीन जनमत के संपादक मंडल के सदस्य सुधीर सुमन के बहुत अनुरोध पर लिखी थी।...
स्मृति

रामनिहाल गुंजन : कभी खत्म नहीं होती हैं शब्द यात्राएँ

सुधीर सुमन
रामनिहाल गुंजन हिन्दी की प्रगतिशील-जनवादी आलोचना के सुपरिचित नाम थे। उनका जन्म 9 नवंबर 1936 को हुआ था। वे हिन्दी के ऐसे आलोचक थे, जो...
स्मृति

संगठन और आन्दोलन के व्यक्ति थे सुरेश पंजम

कौशल किशोर
प्रथम स्मृति दिवस 25 अप्रैल ‘ वे नष्ट कर सकते हैं/तमाम फूलों को पर बसंत को आने से/वे रोक नहीं पायेंगे ’  यह सुरेश पंजम...
स्मृति

‘ लेखन व जीवन की समरूपता के प्रतीक थे रामनिहाल गुंजन ’

आरा। जाने माने आलोचक, कवि रामनिहाल गुंजन की स्मृति में जन संस्कृति मंच , भोजपुर-आरा की ओर से स्थानीय बाल हिंदी पुस्तकालय में रविवार की...
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