समकालीन जनमत

Category : ज़ेर-ए-बहस

ज़ेर-ए-बहस

हिंदी कविता में हिंदुत्व का प्रिस्क्रिप्शन

राजन विरूप
“दुर्भाग्यवश, हिंदी-साहित्य के अध्ययन और लोक-चक्षु-गोचर करने का भार जिन विद्वानों ने अपने ऊपर लिया है, वे भी हिंदी साहित्य का संबंध हिंदू जाति के...
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सभी आवाज़ों को मजबूत करना, सभी गीतों को ताकत देना तथा सवाल खड़े करना ही कला का सच्चा काम है: टी.एम. कृष्णा

समकालीन जनमत
टी. एम. कृष्णा (अवधेश जी द्वारा मुझे हिन्दी में बोलने के लिए बोला गया है लेकिन मेरा हिन्दी तो बहुत खराब है मैं हिंगलिश बोलूँगा।...
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क्या सरकार ने कोविड-19 को गंभीरता से लेना छोड़ दिया है ?

सुशील मानव
लॉकाडाउन का एक तरह से खात्मा हो गया है. दुकान, बाज़ार, संस्थान, प्रतिष्ठान सब खुल गए हैं. मंदिर- मस्जिद भी खुल गए हैं. गंगा समेत...
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उत्तराखंड में रोजगार पर रोक क्यों ?

उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2020-21 में  नियुक्तियों पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है. नियुक्तियों पर रोक लगाने के पीछे वही घिसा-पिटा तर्क है...
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जिंदगी मायने रखती है !

जनार्दन
इस समय पूरी दुनिया कोरोना संकट से गुजर रही है। कोरोना ने पूरी दुनिया को प्रयोगशाला में बदल दिया है। हर शय लिटमस टेस्ट से...
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मोदी सरकार के 6 साल- देश के लिए बड़ी विपदा साबित हुई है यह सरकार

कोरोना संकट से निपटने में मोदी सरकार पूरी तरह फेल साबित हुई है...
ज़ेर-ए-बहसस्मृति

नेहरू और फासीवाद : संघ विरोध के मायने

मुकेश आनंद
स्मृति दिवस पर विशेष 1917 ईस्वी में रूस में सम्पन्न हुई मजदूरों की क्रांति ने सारी दुनिया के समाजों के प्रतिक्रियावादी तत्वों को भयभीत, चौकन्ना...
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दिल्ली पुलिस ने बदला ‘आपदा’ को ‘अवसर’ में

समकालीन जनमत
संजीव कुमार हत्यारों के लिए, हत्यारों के साथ, सदैव! दिल्ली पुलिस ने जिस तरह आपदा को अवसर में बदला है, वह अभूतपूर्व है. कल ‘पिंजरा...
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मजदूरों की यातना का समाधान है-भूमि सुधार !

समकालीन जनमत
डॉ. आर. राम   महामारी और तालाबंदी से बेरोजगार होकर सड़कों पर बदहाल हालत में पैदल अपने घरों को जाते हुये मरते-खपते   मजदूरों की तस्वीरें...
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क्या शराब की बिक्री से ही सम्भव होती है कर्मचारियों की तनख्वाह ?

एक जमाने में पंकज उदास की गायी यह गज़ल काफी लोकप्रिय हुई थी : हुई मंहगी बहुत शराब थोड़ी-थोड़ी पिया करो लॉकडाउन में शराब की...
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“ सभी मॉडल व्यर्थ साबित हुए हैं, अलबत्ता उनमें कुछ उपयोगी हैं ”

समकालीन जनमत
‘केरल मॉडल’ अगर कामयाब हुआ तो ज़रूरी नहीं कि सारे मॉडल पास होंगे। आख़िर जॉर्ज बॉक्स ने कहा भी तो है “सभी मॉडल व्यर्थ साबित...
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भूख, भोजन, चोरी, आत्महत्या और अपराध बोध

सुशील मानव
क्या आपने किसी अडानी, अंबानी, माल्या, मोदी, टाटा, बिड़ला को किसी अपराधबोध या ग्लानिबोध से भरे देखा, सुना है क्या ?...
ज़ेर-ए-बहस

महाजनी सभ्यता और महामारी के सबक

समकालीन जनमत
डॉ. दीना नाथ मौर्य सभ्यता के विकासक्रम में मानव जाति पर समय-समय पर आयी प्राकृतिक आपदाओं के ऐतिहासिक अनुभव से यह सीख ली जा सकती...
ज़ेर-ए-बहस

डराने के बजाय स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने पर ध्यान दे उत्तराखंड सरकार

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पिछले दिनों उत्तराखंड में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ने का जो अनुमान जाहिर किया,वह भयावह है. मुख्यमंत्री तो...
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आर्थिक पैकेज-लघु व मध्यम उद्योगों को शीर्षासन कराती मोदी सरकार

भारत एक गहरे आथिक संकट के जाल में फंसा है. यह आर्थिक संकट का जाल कोरोना की ही देन नहीं है, बल्कि कोरोना पूर्व का...
ज़ेर-ए-बहस

वे लौट रहे हैं…

डॉ रामायन राम
वे लौट रहे हैं, खुद को घसीटते हुए। अपनी गठरी, मोटरी, बच्चे समेत रेल की पटरियों पर, सड़कों पर, साइकिलों पर, ट्रकों में आलू के...
ज़ेर-ए-बहस

रोटी, दवा, सुरक्षा जरूरी है या पुष्प वर्षा ?

रीता शर्मा ऐसे समय जबकि हम “कोरोना महामारी” से जूझ रहे हैं और 21 मार्च से लगातार देश बंदी के चलते श्रमिक वर्ग, प्राइवेट नौकरी...
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वन्यजीवों के व्यापार का चौंकाने वाला इतिहास और कोविड-19

ब्रायन बार्थ विगत 40 वर्षों में, चीन की सरकार ग्रामीण आर्थिक विकास के तौर पर वन्यजीव व्यापार को बढ़ावा देती आई है। लेकिन इस सर्दी...
ज़ेर-ए-बहस

 लॉक डाउन में बंद घरों में हिंसा की शिकार होती महिलाएं

समकालीन जनमत
सरोजिनी बिष्ट एक तरफ दुनिया करोना से लड़ रही है तो वहीं इसके वजह से पैदा हुए लॉक डाउन ने प्रत्येक मनुष्य के जीवन को...
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