समकालीन जनमत

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कोरोना से युद्ध में इस्लामोफोबिया ने भारत के वार को भोथरा बना दिया है

समकालीन जनमत
( मशहूर पत्रकार राणा अयूब का यह लेख वाशिंगटन पोस्ट में 7 अप्रैल को प्रकाशित हुआ है. समकालीन जनमत के पाठकों के लिए इसका हिंदी...
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मजदूरों की पहचान ‘माईग्रेंट’ के रूप में करना मेहनतकश वर्ग के खिलाफ साजिश 

समकालीन जनमत
शिवाजी राय   हम जिस गाँव में रहते हैं वहाँ मेरी दस पीढ़ियाँ गुजर गयी होंगी। उस गाँव में मेरे खानदान के आने वाले पहले...
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उन्नीस दिनों को दूसरा लाॅक डाउन

रवि भूषण
14 अप्रैल को सुबह 10 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कोरोना से ‘बहुत मजबूती के साथ’ ‘भारत की लड़ाई’ के...
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भारत में फासीवादी राज्य की तैयार होती जमीन

भारत में संसदीय लोकतंत्र के खात्मे और फासीवादी राज्य की जमीन लगभग तैयार है। कोरोना संकट की आड़ में आरएसएस-भाजपा अपने फासीवादी कारपोरेट हिंदू राष्ट्र...
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यह  मनुष्य होने का समय है

रवि भूषण
संभव है, इस शीर्षक से कइयों को आपत्ति हो क्योंकि इसकी अर्थ ध्वनि में हमारे ‘मनुष्य’ होने पर प्रश्न है। दशकों से एक हिंदी फिल्म...
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कोविड-19 और मोदी का लॉकडाउन : चारों ओर अफ़रा-तफ़री, प्‍लानिंग कहीं नहीं

(यह लेख भाकपा (माले) महासचिव कॉमरेड दीपंकर भट्टाचार्य द्वारा लिखित है जिसे अंग्रेज़ी में नेशनल हेराल्ड ने 30 मार्च 2020 को प्रकाशित किया है। समकालीन...
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कोरोना महामारी, लाॅक डाउन और रोजी-रोटी का महासंकट

रवि भूषण
चारों ओर कोरोना का शोर हैं. बच्चा-बच्चा अब इस शब्द से जो मात्र शब्द नहीं एक महामारी है, परिचित हो चुका है। कोरोना एक वायरस...
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मोदी सरकार के 1.7 लाख करोड़ के पैकेज को समझे बगैर पैकेजिंग में लग गया मीडिया

रवीश कुमार
1 लाख 70 हज़ार करोड़ के पैकेज का एलान हुआ है। यह पैकेज में बहुत बड़े सामाजिक वर्ग को लाभ मिलने जा रहा है। सूचना,...
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न्यायपालिका से जुड़ी कुछ चिन्ताएं

रवि भूषण
कुछ समय से न्यायपालिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों में कुछ अधिक चिंताएं देखने-सुनने को मिल रही है । यह घटने के बजाय...
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विनय कुमार की कविताएँ ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से संवलित हैं

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल यक्षिणी की भूमिका में विनय लिखते हैं – ‘…अतीत का बोध मुझे न तो गौरवान्वित करता है, न दुखी और न ही असहाय;...
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असहयोग आन्दोलन की याद

रवि भूषण
100 वर्ष पहले के असहयोग आंदोलन को याद करने की आज अधिक जरूरत है। असहयोग आंदोलन की शतवार्षिकी के अवसर पर इतिहास के उन पुराने...
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‘रंजना के नवगीत और ग़ज़लें सृजन की धरती पर एक विराट संवेदना बो रहे हैं’

समकालीन जनमत
कल्पना मनोरमा वर्तमान के खुरदरे जीवन व्यापारों के यथार्थ से जूझती एक अकेली स्त्री का गरिमा पूर्ण आत्म परिचय इन पंक्तियों से बेहतर क्या होगा? ...
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नवनीत की ग़ज़लें यथास्थितिवाद का प्रतिकार हैं

समकालीन जनमत
प्रभात मिलिंद मेरी नज़र में एक ग़ज़लगो होना और एक शायर होना दो मुख़्तलिफ़ इल्म हैं. ग़ज़लगोई एक हुनर (स्किल) है और शायरी एक तेवर...
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एक नयी राजनीति का शुभारम्भ

रवि भूषण
दिल्ली विधानसभा में आम पार्टी की बड़ी जीत के बाद एक नई राजनीति का शुभारंभ हुआ है। यह नई राजनीति ध्रुवीकरण और राष्ट्रवाद की राजनीति...
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प्रमोशन में आरक्षण पर फैसला : कुछ सवाल

इन्द्रेश मैखुरी
प्रमोशन में आरक्षण के मसले पर उच्चतम नयायालय ने जो फैसला दिया,वह सामाजिक न्याय के प्रति सत्ताधारियों और अदालत के रुख को लेकर नए सिरे...
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मौन में जीवन की साधना करता कवि जगतारजीत सिंह

समकालीन जनमत
संजीव कौशल जिस तरह पेड़ साल भर सारे मौसम सोखकर अगले साल फूल और फल देता है, कविता भी उसी तरह न जाने कितना जीवन...
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लोकतंत्र और संविधान को बचाना आज के भारत की सबसे बड़ी जरूरत है

रवि भूषण
आज दिल्ली विधानसभा का चुनाव हैं। दिल्ली को आपमुक्त करने के लिए भाजपा ने केवल कमर ही नहीं कसी है, किसी प्रकार चुनाव जीतने के...
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गंगा की चिंता कीजिए

समकालीन जनमत
विमल भाई, पूरन सिंह राणा   23 वर्षीया साध्वी पद्मावती को 20 घंटे बाद दून अस्पताल द्वारा पूरी तरह स्वस्थ घोषित किए जाने पर प्रशासन...
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बजट 2020-21: आर्थिक संकट से कोई निजात नहीं

(बजट 2020-21पर भाकपा माले का बयान ) इस साल का बजट मोदी सरकार की तबाही फैलाने वाली नीतियों का ही अगला चरण है। इसमें बेरोजगारी,...
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सुषमा की कविताएँ प्रेम के विविध शेड्स को उभारती हैं

समकालीन जनमत
रत्नेश विश्वकसेन सुषमा गुप्ता की कविताएँ जिन्हें वह क्षणिकाएँ कहती हैं अनुभूतियों की कौंध है जिसे ठीक ठीक पकड़ कर अभिव्यक्त करने में सुषमा सफल...
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