Tag : media

ज़ेर-ए-बहस

मीडिया और बाज़ार

समकालीन जनमत
कोरस के फेसबुक लाइव की शृंखला में बीते रविवार 4 अक्टूबर को स्वतंत्र पत्रकार नेहा दीक्षित से ‘मीडिया और बाज़ार ‘ जैसे महत्वपूर्ण विषय पर...
शिक्षा

बच्चों की रचनात्मकता को ऑनलाइन विकसित करता “जश्न ए बचपन”

समकालीन जनमत
उत्तराखण्ड के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के फोरम “रचनात्मक शिक्षक मण्डल” ने लॉक डाउन के दिनों में बच्चों की रचनात्मकता को बनाये रखने के...
जनमत

मोदी सरकार के 1.7 लाख करोड़ के पैकेज को समझे बगैर पैकेजिंग में लग गया मीडिया

रवीश कुमार
1 लाख 70 हज़ार करोड़ के पैकेज का एलान हुआ है। यह पैकेज में बहुत बड़े सामाजिक वर्ग को लाभ मिलने जा रहा है। सूचना,...
मीडिया साहित्य-संस्कृति

संपादक महोदय, वे विकास नहीं, विनाश पुरुष हैं. आप मोदीभक्ति करते रहिए

कुमार परवेज़
मीडिया की मोदीभक्ति अब दलाली के घृणित स्तर पर गिर गई है. भोजपुर में उन्हें लड़ाई ‘ विकास बनाम जातिवाद ‘ की दिखती है. मतलब,...
जनमत मीडिया

72 दिनों के लिए गोदी मीडिया के डिबेट का बहिष्कार करे और उससे लड़ कर दिखाए विपक्ष

रवीश कुमार
  मीडिया हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं का एक अग्रणी चेहरा है। इन पांच सालों में गोदी मीडिया बनने की प्रक्रिया तेज़ ही हुई है, कम नहीं...
जनमत मीडिया

क्या आप इन ढाई महीने के लिए चैनल देखना बंद नहीं कर सकते ? कर दीजिए

रवीश कुमार
अगर आप अपनी नागरिकता को बचाना चाहते हैं तो न्यूज़ चैनलों को देखना बंद कर दें। अगर आप लोकतंत्र में एक ज़िम्मेदार नागरिक के रूप...
जनमत मीडिया

कार्पोरेट न्यूज मीडिया : धनतंत्र के लिए और धनतंत्र-फासीवाद की सेवा में

आनंद प्रधान
अधिकांश न्यूज चैनलों पर इन दिनों 24×7 अहर्निश “बहस”, “महाबहस”, “दंगल”, “ताल ठोंक के” और इस जैसे और कई चर्चाओं के प्राइम टाइम कार्यक्रमों में...
जनमत मीडिया

राजनीति बदलेगी तो मीडिया बदलेगा वरना वह और दुर्दांत हो जायेगा

अनिल यादव
* प्रमुख क्या है कर्म या भाग्य ! * उत्तम क्या है खेती या नौकरी ! * असल क्या है प्रेम या वासना ! *...
मीडिया

गुरिल्ला इमरजेंसी के दौर में मीडिया : मध्यप्रदेश की कहानी

जावेद अनीस
  भारत में मीडिया की विश्वसनीयता लगातार गिरी है, 2018 विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 180 देशों की सूची में 2 अंक नीचे खिसकर...
इतिहास

उनसे झुकने को कहा गया वो रेंगने लग गए

शालिनी बाजपेयी
मार्च 1971 में हुए चौथी लोकसभा के चुनाव अपने आप में खासे महत्वपूर्ण थे। कांग्रेस इंदिरामयी हो चुकी थी। तब मार्गदर्शक-मण्डल शब्द तो गढ़ा नहीं...

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