समकालीन जनमत

Category : जनमत

ग्राउन्ड रिपोर्टजनमत

जहानाबाद : चुनाव में गरीबों-महिलाओं की बुलंद आवाज़ के मायने

के के पांडेय
 आठवें और नवें दशक में कभी अरवल, लक्ष्मणपुर बाथे और शंकर बिगहा जैसे नररसंहारों के लिए चर्चित जहानाबाद उसके जबरदस्त प्रतिरोध के लिए भी जाना...
जनमतज़ेर-ए-बहस

क्या आपने यह ख़बर पढ़ी है?

समकालीन जनमत
 एल. एस. हरदेनिया जब संपूर्ण देश में लोकतंत्र का यज्ञ चल रहा था उस दरम्यान हमने दो महत्वपूर्ण आहुतियां दीं। एक आहुति दी गई देश के चौकीदार...
ग्राउन्ड रिपोर्टजनमत

फ़ीस है बहुत, स्कूल-कॉलेज हैं कम, कैसे पढ़ें बेटियाँ

( गरीबी के कारण पढ़ नहीं पा रही कुशीनगर जिले की बेटियों की दास्तां ) 16 वर्षीय वंदना भारती कुशीनगर जिले के कसया ब्लाक के...
कविताजनमत

‘मिथिलेश की कविताएँ हमारे समय के आसन्न खतरों के प्रति आगाह करती हैं’

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय  युवा कवि मिथिलेश कुमार राय की कविताएँ छोटे-छोटे वाक्य विन्यास के जरिये कविता का वह संसार रचती है जो बहुत सहज और आत्मीय...
जनमतशख्सियत

नौशाद की याद में

अभिषेक मिश्रा “रंग नया है लेकिन घर ये पुराना है ये कूचा मेरा जाना पहचाना है क्या जाने क्यूं उड़ गए पंछी पेड़ों से भरी बहारों...
कविताजनमत

‘गगन गिल ‘मातृमूलक’ दुःखों और उदासियों को रचने वाली कवयित्री हैं’

अनुपम सिंह गगन गिल ने कविता में अपने ज़िम्मे जो काम लिया है, वह है स्त्री की पारम्परिक नियति को उद्घाटित करना. प्रकृति में इतने...
जनमतस्मृति

‘पूंजी’ की लेखन प्रक्रिया और व्यवधान

( कार्ल मार्क्स के जन्म दिन पर विशेष )   मार्क्स ने ग्रुंड्रिस की लिखाई को अंतिम रूप मानचेस्टर में एंगेल्स के पास रहकर दिया...
जनमतसिनेमा

फायरब्रांड :एक और पॉइंट ऑफ व्यू प्रस्तुत करती फ़िल्म

अम्बरीश त्रिपाठी प्रियंका चोपड़ा के प्रोडक्शन और अरुणाराजे के निर्देशन में बनी फिल्म ‘फायरब्रांड’ नेटफ्लिक्स पर फ़रवरी में प्रदर्शित हुई थी। मराठी फ़िल्म ‘धग’ के...
जनमतशख्सियत

सत्यजित रे का वैज्ञानिक स्वरुप

अभिषेक मिश्र साहित्य और सिनेमा की अविस्मरणीय विभूति सत्यजित रे (2 मई 1921–23 अप्रैल 1992 ) का आज 98 वाँ जन्मदिन है. इस मौके पर उन्हें याद...
जनमतशख्सियत

पहली महिला कुली, दलित महिला आंदोलन नेत्री जाई बाई चौधरी

अनिता भारती दलित समाज की एक महान समाज-सुधारिका व लेखिका ‘जाईबाई चौधरी’ का नाम बहुत कम लोगों ने सुना होगा। उनका जन्म ‘महार’ जाति में...
जनमतशख्सियत

मार्कण्डेय की कहानियों में बनते हुए राष्ट्र की तस्वीर

दुर्गा सिंह
मार्कण्डेय (2 मई 1930 – 18 मार्च 2010) हिंदी के जाने-माने कहानीकार थे। आज उनके जन्मदिवस पर अपने एक लेख के माध्यम से उन्हें याद कर रहे हैं...
जनमत

शेल्टर गृहों में महिलाओं-बच्चियों के यौन उत्पीड़न-बलात्कार में सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग शामिल : कविता कृष्णन

पटना. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी चुनावी सभाओं में कन्या उत्थान सरीखे योजनाओं की चर्चा करते अघाते नहीं, महिलाओं के सशक्तीकरण की लगातार दुहाइयां...
जनमत

बेगूसराय का चुनाव सबसे अलग है

रवि भूषण
इस चुनाव में पूरे देश के संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में से सर्वाधिक महत्वपूर्ण क्षेत्र बिहार का बेगूसराय है। जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष और भाकपा...
जनमत

पूंजीवादी मानदंड से आदिवासी जीवन को नहीं समझा जा सकता: रणेन्द्र

समकालीन जनमत
डॉ.कामिनी ( कथाकार रणेंद्र द्वारा ‘ आदिवासी जीवन तथा मुख्यधारा का समाज’ विषय पर शासकीय एम.एम. कॉलेज खडगवां, छत्तीसगढ़ में दिये गये व्याख्यान का किंचित...
जनमत

देश राग

समकालीन जनमत
डॉ0 हरिओम देश या राष्ट्र का जिक्र आते ही हम अक्सर जज्बाती हो जाते हैं। हम सभी चाहते हैं कि हमारा देश सुरक्षित रहे,खुशहाल रहे...
जनमतपुस्तक

विश्व पुस्तक दिवस: किताबों से रिश्ता कमज़ोर न पड़े!

समकालीन जनमत
अभिषेक मिश्र ‘किताबें झांकती हैं बंद अलमारी के शीशों से, बड़ी हसरत से तकती हैं, महीनों अब मुलाकातें नहीं होतीं, जो शामें इनकी सोहबत में...
जनमतज़ेर-ए-बहस

गांधी और आरएसएसः विरोधाभासी राष्ट्रवाद

राम पुनियानी
राम पुनियानी आरएसएस लगातार यह प्रदर्शित करने का प्रयास कर रहा है कि महात्मा गांधी, संघ को सम्मान की दृष्टि से देखते थे। इसी संदर्भ...
जनमत

पृथ्वी दिवस: विश्व बंधुत्व के भाव से पृथ्वी के संरक्षण के लिए ठोस पहल की ज़रूरत है!

समकालीन जनमत
अभिषेक मिश्र अस्तित्व में आने के बाद से कई भौतिक, रासायनिक, जैविक अभिक्रियाओं से गुजरते पृथ्वी जीवन के लिए अनुकूल हुई। एक कोशिकीय से बहुकोशिकीय...
जनमत

मोदीराग का अर्थ और उसकी दिशाएं

रवि भूषण
अन्तःमिश्रण के इस दौर में जैसी मिलावटी-घुलावट है, वैसी पहले कभी नहीं थी। कला और साहित्य के रूपों में ही नहीं, उससे इतर इधर विविध...
जनमतसिनेमा

‘ताशकंद फाईल्स’: जैसे खुली वैसे ही बंद…

समकालीन जनमत
अभिषेक मिश्र भारत में राजनीतिक विषयों पर फिल्म बनाना कठिन रहा है, शायद इसीलिए निर्माता-निर्देशकों ने प्रेम कहानी, पारिवारिक फिल्मों जैसे सामान्य और सुरक्षित विषयों...
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