समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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शख्सियत

वह आग मार्क्स के सीने में जो हुई रौशन

आज 5 मई को कार्ल मार्क्स के जन्मदिन पर दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी की प्राध्यापिका उमा राग की आवाज़ में प्रस्तुत हैं दो कविताएँ ।...
कवितापुस्तक

जीवन, मानवीय संबंध और संघर्षों की निरंतरता की कविताएँ

डॉ. अली इमाम खाँ बलभद्र का कविता-संग्रह ” समय की ठनक ” को पढ़ने, समझने और महसूस करने का मौक़ा मिला। इन कविताओं से गुज़रते...
ज़ेर-ए-बहस

रोटी, दवा, सुरक्षा जरूरी है या पुष्प वर्षा ?

रीता शर्मा ऐसे समय जबकि हम “कोरोना महामारी” से जूझ रहे हैं और 21 मार्च से लगातार देश बंदी के चलते श्रमिक वर्ग, प्राइवेट नौकरी...
कविता

कथाओं में जीवन को बुनता कवि वसंत सकरगाए

संजीव कौशल कविता कुछ ना कुछ बचाने की कोशिश है कोई आँसू कोई मुस्कान कुछ उम्मीद कुछ निराशा कुछ दर्द ताकि मुश्किल वक्त में कुछ...
ज़ेर-ए-बहस

वन्यजीवों के व्यापार का चौंकाने वाला इतिहास और कोविड-19

ब्रायन बार्थ विगत 40 वर्षों में, चीन की सरकार ग्रामीण आर्थिक विकास के तौर पर वन्यजीव व्यापार को बढ़ावा देती आई है। लेकिन इस सर्दी...
जनमतस्मृति

सफ़र अभी मुक़म्मल नहीं हुआ !

समकालीन जनमत
आशीष कुमार क्या उन सब्ज आंखों को भुलाया जा सकता है ? क्या उस बेतकल्लुफ़ और बेपरवाह हंसी को समेटा जा सकता है ?क्या कला...
सिनेमास्मृति

मुझे लगा कि मैं एक्टिंग में अपने आपको एक्सप्लोर कर सकता हूँ – इरफ़ान खान 

समकालीन जनमत
राज्य सभा टी वी के मशहूर प्रोगाम 'गुफ़्तगू' में  एक्टर इरफ़ान खान के साथ इरफ़ान की बातचीत...
ख़बर

छात्रों, बुद्धिजीवियों, प्रतिरोध की आवाज़ों को खामोश करने की सत्ता की कोशिशें जारी हैं

समकालीन जनमत
देश भर में छात्रों, बुद्धिजीवियों, प्रतिरोध की आवाज़ों को धमकाने की, खामोश करने की सत्ता की कोशिशों और कार्यवाही की ही कड़ी में 27 अप्रैल...
जनमत

कोरोना वायरस और नवउदारवादी अर्थव्यवस्था का संकट

समकालीन जनमत
नवउदारवादी अर्थव्यवस्था जब आज वैचारिक संकट में है तब इसकी सबसे बड़ी क़ीमत मज़दूरों से ली जा रही है. ये क़ीमत उनके मौत तक जाती...
ख़बर

नफ़रत, भूख और महिलाओं पर हिंसा के ख़िलाफ़ ऐपवा का एक दिवसीय अनशन

समकालीन जनमत
राधिका वेमुला, फातिमा नफीस, पत्रकार, कलाकार और अभिनेता घृणा और भूख के खिलाफ एक दिवसीय उपवास के लिए AIPWA कॉल में शामिल हुए 23 अप्रैल...
स्मृति

सत्‍यजीत राय – आत्‍मबोध की विश्‍वजनीनता

समकालीन जनमत
 कुमार मुकुल जब कोई प्रतिभा उद्बोधन के नये स्‍तरों को अपने कलात्‍मक संघर्ष से उद्घाटित करने की कोशिश करती है तो समय और प्रकृति अपने...
ख़बर

जल्द आ रहा है समकालीन जनमत का नया कॉलम ‘ये चिराग़ जल रहे हैं’

समकालीन जनमत
प्रिय पाठकों,  आप सबसे यह साझा करते हुए ख़ुशी हो रही है कि समकालीन जनमत वेब पोर्टल की सामग्री में महत्वपूर्ण इजाफ़ा करते हुए जल्द...
कविता

दिव्या की कविताएँ काव्य जगत के आपसी संचार की टूटन को जोड़ने का प्रयास करती हैं

समकालीन जनमत
सुघोष मिश्र _________________________________________ अभिव्यक्ति किसी रचना का पहला सोपान है। हम अपने सुख, दुःख, आशा, निराशा, भय, क्रोध, स्वप्न और संदेश विभिन्न माध्यमों से अभिव्यक्त...
कविताशख्सियत

मुझें मसीहाई में यक़ीन है ही नहीं, मैं मानता ही नहीं कि कोई मुझसे बड़ा होगा

समकालीन जनमत
ममता मुझें मसीहाई में यक़ीन है ही नहीं, मैं मानता ही नहीं कि कोई मुझसे बड़ा होगा, जनकवि  रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ का जन्म 5 दिसम्बर...
ख़बर

थाली बजा और उपवास रख लॉकडाउन में भूख के विरुद्ध भात के लिए आवाज उठाई

समकालीन जनमत
नई दिल्ली/पटना/ लखनऊ. लॉकडाउन में गरीबों को राशन समेत जरूरी वस्तुएं निःशुल्क मुहैया कराने के लिए भाकपा (माले) के देशव्यापी आह्वान पर रविवार को देश...
कविता

राग रंजन की कविताएँ सूक्ष्म अंतर्दृष्टि और ज़मीनी यथार्थ के ताने बाने की निर्मिति हैं

समकालीन जनमत
रंजना मिश्र बकौल राग रंजन वे ‘साहित्यकारों के मोहल्ले के ऐसे बच्चे हैं जो कभी कभी किसी दरवाज़े की घंटी बजाकर भाग जाते हैं.’ मेरा...
कविता

सत्‍य को उसकी बहुआयामिता में जानने का जीवट और धैर्य हैं देवेश की कविताएँ

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल वरिष्‍ठ कवि ज्ञानेन्‍द्रपति ने करीब पच्‍चीस साल पहले मेरी कुछ कविताओं से गुजरते लिखा था – … आपकी ये कविताएं मुझे आपकी अगली...
पुस्तक

टिकटशुदा रुक्का – जातीय विभेद पर टिके उत्तराखंडी समाज का पाखण्ड

समकालीन जनमत
टिकटशुदा रुक्का :   जातीय विभेद पर टिके उत्तराखंडी समाज का पाखण्ड चन्द्रकला*   ‘नवारुण’ से प्रकाशित नवीन जोशी के नवीनतम उपन्यास ‘टिकटशुदा रुक्का’ को पढ़ते...
ख़बर

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लॉक डाउन में कछार में फंसे सौ प्रवासी मजदूर परिवारों तक राशन पहुँचाया

समकालीन जनमत
प्रयागराज. शहर के अशोकनगर मोहल्ले के पास गंगानगर नेवादा के कछार में करीब सौ परिवार प्रवासी मजदूरों के हैं । येे लोग पिछले कई वर्षों...
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