समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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जनमत

बहु-परतीय जीवन दर्शन की फिल्म : कड़ाइसी विवसायी

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आलोक रंजन एम मनीकंडन ऐसे फ़िल्मकार हैं जिनकी अभिव्यक्ति का तरीका हमेशा आम ढर्रे से अलहदा रहा है । काका मुट्टाई , किरुमी और आनंदवन...
पुस्तक

आधुनिक स्त्री जीवन का दस्तावेज : मिट्टी का दुःख

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डॉ. वंशीधर उपाध्याय बीसवीं सदी के अंतिम दशक में हिंदी काव्य परम्परा के भीतर जो स्वर उभरे उनमें स्त्री रचनाकारों की लेखनी का स्वर मुकम्मल...
कविता

रक्षा की कविताएँ भारतीय समाज में स्त्री जीवन का बेबाक और साहसिक बयान हैं

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निरंजन श्रोत्रिय कविता सिर्फ वाक्यावलियों, पंक्ति विन्यास या किसी विचार के शब्दबद्ध होने से ही संभव नहीं होती। अपने समय-समाज में घट रहे दृश्यों, दृष्टांतों...
कहानीजनमतशख्सियत

नौ सौ रुपये और एक ऊँट दाना

समकालीन जनमत
(आजादी के बाद की हिन्दी कहानी में  चर्चित रहे लेखक मार्कण्डेय की आज पुण्यतिथि है। इस अवसर पर समकालीन जनमत के पाठकों के लिए  प्रस्तुत...
पुस्तक

इंजीकरी: सहेली सा संवाद करतीं, समय की भाषा गढ़तीं बिल्ब पत्र सरीखी कविताएँ

समकालीन जनमत
अर्चना लार्क कवि अनामिका अनु का कविता संग्रह ‘इंजीकरी’। बिल्वपत्र’ सरीखी इस संग्रह की कविताओं को पढ़ते हुए महसूस कर सकते हैं कि पाठक का...
कविता

आदर्श भूषण की कविताएँ युवा पीढ़ी की बेकली की अभिव्‍यक्ति हैं

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कुमार मुकुल लोहा पकड़कर लोहा बनने और कपास छूकर कपास हो जाने की अनुवांशिक अक्लमंदी से भरे हाथ रगड़ खाते हुए भी बचे रहते हैं...
ख़बर

शहीद कॉमरेड गोविन्द पानसरे को किया याद

समकालीन जनमत
इन्दौर। कॉमरेड गोविंद पानसरे तर्कशील, वैज्ञानिक सोच वाले विवेकवान लेखक और वामपंथी आंदोलनकारी थे। उनका सच बोलने का साहस और शोषितों-दमितों को संगठित करने की...
जनमत

अनुराधा ओस की कविताएँ: वर्जित इच्छाओं की सड़क पर स्त्री मन की मुखर और सहज अभिव्यक्ति

समकालीन जनमत
अनिल करमेले हिन्दी कविता में इस समय में जितनी कवयित्रियाँ सक्रिय हैं उतनी पहले कभी नहीं रहीं। इस समय लगभग पाँच पीढ़ियाँ सक्रिय हैं। वे...
जनमतसाहित्य-संस्कृतिसिनेमा

साहित्य और सिनेमा अपने समय को प्रतिबिंबित करते हैं- डाॅ. विजय शर्मा

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11फरवरी 2022 को ‘भारतीय साहित्य, समाज और सिनेमा’ विषय पर एक ऑनलाइन परिचर्चा का आयोजन हुआ। इस आयोजन की मुख्य  वक्ता वरिष्ठ लेखिका डॉ. विजय...
ज़ेर-ए-बहस

सामाजिक न्याय दिवस पर अन्याय कथा

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पीयूष कुमार 2007 में 20 फरवरी को UN द्वारा ‘विश्व सामाजिक न्याय दिवस’ घोषित किया गया था। हर किसी व्यक्ति को, बिना किसी भेदभाव के...
कविता

अरुण शीतांश की कविताएँ: विषयों के अनंत में अपने कवि की खोज

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भरत प्रसाद यदि दृष्टि की दिशाएं बहुदिशात्मक हों, यदि भावनाओं की गति अनेक आयामी हो, यदि हम व्यक्तित्वांतरण कर पाने के साहस से परिपूर्ण हों,...
कविता

रोशनी वर्मा की कविताएँ चीज़ों के पार देखने की उत्सुकता से भरपूर हैं

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निरंजन श्रोत्रिय युवा कवयित्री रोशनी वर्मा की कविताएँ सधे हाथों से लिखी ऐसी कविताएँ हैं जो एक हौले स्वर में पाठकों से संवाद करती हैं।...
कहानीजनमतसाहित्य-संस्कृति

हलयोग: कहानी का समाज और समतामूलक समाज निर्माण की अड़चनें

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मोहम्मद उमर  मार्कण्डेय ग्राम कथाकार हैं। वह जीवन से सीधे साक्षात्कार करने वाले कथाकार हैं। ग्राम जीवन का चित्रण अपनी कथाओं में मार्कण्डेय पूरी सजीवता...
जनमत

“तुम्हारे होने से होता है सब” मायामृग की कविताएँ

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गणेश गनी राजस्थान के कवि माया मृग की कविताएँ अपनी ओर एक गहरे आकर्षण से खींचती हैं। उनकी कविताओं में कल्पना यथार्थ को और मार्मिक...
जनमत

खोई चीज़ों का शोक: जीवन की स्मृतियों से झकझोर खायी कविताएँ

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अनुपम सिंह समकालीन हिंदी कविता में सविता सिंह प्रकृति के क़रीब रहने वाली कवियों में से हैं। सविता सिंह प्रकृति के प्रत्येक क्रियाकलाप को अनिवार्य...
जनमत

वसंत तुम कहाँ हो ?

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पीयूष कुमार   इस साल कैलेंडर पर वसंत जल्द आ गया लगता है क्योंकि जाड़े को भी इस वर्ष ‘मैं झुकेगा नई’ का स्वैग चढ़ा...
कविता

नई कलम: प्रशांत की कविताएँ अकेलेपन की यातना से जूझते हुए युवा मन की अभिव्यक्ति हैं

समकालीन जनमत
राग रंजन   अपने किसी मित्र की कविताओं पर कुछ लिखते हुए तटस्थ रह पाना मुश्किल होता है। यह सतर्कता बरतनी होती है कि आपकी...
पुस्तक

पार्वती: कवि-कहानीकार शेखर जोशी की अपनी धरती और अपने लोगों से बहुत गहरे प्यार की कविताएँ हैं

समकालीन जनमत
सदाशिव श्रोत्रिय मैं देखता हूं कि हमारे अधिकांश लेखक “ नौस्टाल्जिया” शब्द का प्रयोग अक्सर इसके नकारात्मक अर्थ में ही करते हैं । मेरे ख्याल...
कविता

पुष्पराग की कविताएँ संवेदना और पर्यावरण को सहेजने की कोशिश हैं

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निरंजन श्रोत्रिय   पुष्पराग की कविताओं का मूल स्वर एक ऐसे युवा एक्टिविस्ट का वह तेवर है जो अपने परिवेश में व्याप्त विषमताओं को लेकर...
साहित्य-संस्कृति

गरीब-भूमिहीन किसानों के मौजूदा हालात को स्पष्टता से प्रस्तुत करती है हेमन्त कुमार की कहानी ‘धर्मदास की गाय’

समकालीन जनमत
ओमप्रकाश सिंह अपनी कहानी “धर्मदास की गाय” के जरिए कहानीकार हेमन्त कुमार ने मौजूदा दौर में गरीब भूमिहीन किसानों की सामाजिक आर्थिक स्थिति, उनके संकटों-समस्याओं...
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