समकालीन जनमत

Category : जनमत

जनमत

भीड़ हमला-हत्या की घटनाएँ निर्देशित घटनाएँ हैं

समकालीन जनमत
इन निर्देशित गिरोहों को बाकायदे हत्या की मशीन में तब्दील किया जा रहा है. गौरी लंकेश के हत्यारे का बयान इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिसमें...
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फासीवाद का परीक्षण पूरे सवाब पर है

"अभी पूरी दुनिया में क्या चल रहा है इसे समझने के लिए हमें दो चीजों पर गौर करने की जरूरत है। पहला यह है कि...
जनमत

जाति, धर्म और व्यवस्था की कोख से पैदा हो रही मॉब लिंचिंग जैसी बर्बर संस्कृति

गरीब और कमजोर पर जुल्म करने की प्रवृत्ति का फैलाव इसलिए बढ़ा है कि न्यायिक व्यवस्था ठीक से काम नहीं कर रही है. जब तक...
जनमत

बथानी टोला जनसंहार : न्याय का इंतजार कब तक ?

चंदन
22 साल पहले 11 जुलाई, 1996 को दो बजे दिन में रणवीर सेना के कोई 50-60 हथियारबन्द लोगों ने बथानी टोला को घेर कर हमला...
जनमत

पेप्सी को सण्डीला में पानी लूटने की छूट क्यों

ऐसा अनुमान है कि पेप्सी संयंत्र 5 से 15 लाख लीटर पानी रोजाना जमीन के नीचे से निकाल रहा है. एक लीटर शीतल पेय बनाने...
जनमत

सारण के स्कूल में छात्रा के साथ सात महीने से गैंग रेप

समकालीन जनमत
सारण जिले के एकमा थाने क्षेत्र के परसागढ़ स्थित एक प्राइवेट स्कूल में 10 वीं क्लास की एक छात्रा के साथ सात महीने से लगातार...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति

प्रेम के निजी उचाट से लौटती स्त्री की कविता : विपिन चौधरी की कवितायेँ

उमा राग
  विपिन की कवितायेँ लगातार बाहर-भीतर यात्रा करती हुईं एक ऐसी आंतरिकता को खोज निकालती हैं जो स्त्री का अपना निजी उचाट भी है और दरख्तों,...
जनमतशिक्षा

देशी-विदेशी पूँजी के मुनाफे को बढ़ाने के लिए उच्च शिक्षा के ऊपर लगातार हमले होंगे

समकालीन जनमत
उच्च शिक्षा में हो रहे बदलावों को मात्र भाजपा-कांग्रेस के नजरिए से नहीं, बल्कि शासक वर्ग के नजरिए से देखना ही ठीक होगा. तभी हम...
जनमत

हजारीबाग : बागों से कंक्रीट में बदलता शहर

समकालीन जनमत
हजारीबाग के पर्यावरण की बात है, अब पहले जैसी बात नहीं रही. यह शहर कंक्रीट में बदलता जा रहा है. इस बार की यात्रा में...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति

संजीव कौशल की कविताएँ : प्रतिगामी विचारों का विश्वसनीय प्रतिपक्ष

उमा राग
जागृत राजनीतिक चेतना, समय और समाज की विडम्बनाओं की गहरी समझ और भाषा की कलात्मक पारदर्शिता के कारण संजीव कौशल की कवितायेँ नयी सदी की युवा...
जनमत

देवदरबार जागीर मठ और पाकिस्तानी मुरीद

समकालीन जनमत
बणदेवनाथ जी का कहना था कि आमतौर पर दोनों मुल्क के लोग बहुत प्रेमी है बस बहुत कम लोग है जो हमलोगों के बीच नफरत...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति

कबीर और नागार्जुन की जयंती से जन एकता सांस्कृतिक यात्रा आरम्भ

समकालीन जनमत
बेगूसराय. आज ज्येष्ठ पूर्णिमा दिनांक 28/06/2018 को जन संस्कृति मंच की ओर से कबीर और आधुनिक कबीर नागार्जुन की सम्मिलित जयंती मनायी गयी। इस जयंती...
कविताग्राउन्ड रिपोर्टजनमतसाहित्य-संस्कृति

अनुपम सिंह की कविताओं पर जसम की घरेलू गोष्ठी की रपट

राम नरेश राम
अनुपम की कविताएँ अपने वक्त, अपने समाज और अपनी काया के अनुभव से उपजी हुई कविताएँ हैं- योगेंद्र आहूजा पिछली 23 जून 2018 को जसम...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति

‘समय है सम्भावना का’ : सत्ता के मौन की पहचान है

राम नरेश राम
जगदीश पंकज जी का कविता संग्रह ‘समय है सम्भावना का’ इसी वर्ष आया है. जगदीश पंकज जी नवगीतकार हैं. दलित साहित्य में नवगीत की कोई...
जनमतशख्सियत

खैनी खिलाओ न यार! /उर्फ / मौत से चुहल (सखा, सहचर, सहकर्मी, कामरेड महेश्वर की एक याद)

रामजी राय
अपने प्रियतर लोगों- कृष्णप्रताप (के.पी.), गोरख, कामरेड विनोद मिश्र, महेश्वर पर चाहते हुए भी आज तक कुछ नहीं लिख सका। पता नहीं क्यों? इसकी वज़ह...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति

पराजय को उत्सव में बदलती अनुपम सिंह की कविताएँ

समकालीन जनमत
(अनुपम सिंह की कविताओं को पढ़ते हुए ऐसा लगता है जैसे वे अपने साथ हमें पितृसत्ता की एक बृहद प्रयोगशाला में लिए जा रहीं हैं...
जनमत

योग दिवस, प्रधानमंत्री और पहाड़

पहाड़ में लोग जब अपने रोजमर्रा के जीवन के लिए ऐसी विकट जद्दोजहद में लगें हों तो उनके सामने कोई भी योग और योग दिवस...
जनमत

क्या चर्च, मोदी सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहा है ?

समकालीन जनमत
आर्चबिशपों की मात्र इसलिए निंदा करना क्योंकि उन्होंने अपनी राय व्यक्त की, अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. आखिर वे भी इस देश के नागरिक हैं और उन्हें...
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भारत-पाकिस्तान सीमा पर अभी भी सैनिक क्यों मर रहे हैं ?

समकालीन जनमत
भारत व पाकिस्तान की सरकारों ने दुश्मनी बना कर रखने की नीति अपनाई है जिसमें अब कई निहित स्वार्थ पैदा हो गए हैं जबकि व्यापारी...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति

सहज काव्‍य‍कथाओं सी हैं अदनान की कविताएँ

समकालीन जनमत
अदनान की कविताओं से गुजरना अपने समय के लोक से गुज़रना और उसकी त्रासदियों को जानते हुए उसकी लाचारी को अपनी लाचारी में बदलते देखना...
Fearlessly expressing peoples opinion