समकालीन जनमत

Category : जनमत

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हजारीबाग : बागों से कंक्रीट में बदलता शहर

समकालीन जनमत
हजारीबाग के पर्यावरण की बात है, अब पहले जैसी बात नहीं रही. यह शहर कंक्रीट में बदलता जा रहा है. इस बार की यात्रा में...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति

संजीव कौशल की कविताएँ : प्रतिगामी विचारों का विश्वसनीय प्रतिपक्ष

उमा राग
जागृत राजनीतिक चेतना, समय और समाज की विडम्बनाओं की गहरी समझ और भाषा की कलात्मक पारदर्शिता के कारण संजीव कौशल की कवितायेँ नयी सदी की युवा...
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देवदरबार जागीर मठ और पाकिस्तानी मुरीद

समकालीन जनमत
बणदेवनाथ जी का कहना था कि आमतौर पर दोनों मुल्क के लोग बहुत प्रेमी है बस बहुत कम लोग है जो हमलोगों के बीच नफरत...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति

कबीर और नागार्जुन की जयंती से जन एकता सांस्कृतिक यात्रा आरम्भ

समकालीन जनमत
बेगूसराय. आज ज्येष्ठ पूर्णिमा दिनांक 28/06/2018 को जन संस्कृति मंच की ओर से कबीर और आधुनिक कबीर नागार्जुन की सम्मिलित जयंती मनायी गयी। इस जयंती...
कविताग्राउन्ड रिपोर्टजनमतसाहित्य-संस्कृति

अनुपम सिंह की कविताओं पर जसम की घरेलू गोष्ठी की रपट

राम नरेश राम
अनुपम की कविताएँ अपने वक्त, अपने समाज और अपनी काया के अनुभव से उपजी हुई कविताएँ हैं- योगेंद्र आहूजा पिछली 23 जून 2018 को जसम...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति

‘समय है सम्भावना का’ : सत्ता के मौन की पहचान है

राम नरेश राम
जगदीश पंकज जी का कविता संग्रह ‘समय है सम्भावना का’ इसी वर्ष आया है. जगदीश पंकज जी नवगीतकार हैं. दलित साहित्य में नवगीत की कोई...
जनमतशख्सियत

खैनी खिलाओ न यार! /उर्फ / मौत से चुहल (सखा, सहचर, सहकर्मी, कामरेड महेश्वर की एक याद)

रामजी राय
अपने प्रियतर लोगों- कृष्णप्रताप (के.पी.), गोरख, कामरेड विनोद मिश्र, महेश्वर पर चाहते हुए भी आज तक कुछ नहीं लिख सका। पता नहीं क्यों? इसकी वज़ह...
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पराजय को उत्सव में बदलती अनुपम सिंह की कविताएँ

समकालीन जनमत
(अनुपम सिंह की कविताओं को पढ़ते हुए ऐसा लगता है जैसे वे अपने साथ हमें पितृसत्ता की एक बृहद प्रयोगशाला में लिए जा रहीं हैं...
जनमत

योग दिवस, प्रधानमंत्री और पहाड़

पहाड़ में लोग जब अपने रोजमर्रा के जीवन के लिए ऐसी विकट जद्दोजहद में लगें हों तो उनके सामने कोई भी योग और योग दिवस...
जनमत

क्या चर्च, मोदी सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहा है ?

समकालीन जनमत
आर्चबिशपों की मात्र इसलिए निंदा करना क्योंकि उन्होंने अपनी राय व्यक्त की, अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. आखिर वे भी इस देश के नागरिक हैं और उन्हें...
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भारत-पाकिस्तान सीमा पर अभी भी सैनिक क्यों मर रहे हैं ?

समकालीन जनमत
भारत व पाकिस्तान की सरकारों ने दुश्मनी बना कर रखने की नीति अपनाई है जिसमें अब कई निहित स्वार्थ पैदा हो गए हैं जबकि व्यापारी...
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सहज काव्‍य‍कथाओं सी हैं अदनान की कविताएँ

समकालीन जनमत
अदनान की कविताओं से गुजरना अपने समय के लोक से गुज़रना और उसकी त्रासदियों को जानते हुए उसकी लाचारी को अपनी लाचारी में बदलते देखना...
जनमतसिनेमा

काला : फ़ासीवाद की पहचान कराती फ़िल्म

आशुतोष कुमार
सुपरस्टार रजनीकांत की जानी पहचानी शैली की फ़िल्म होते हुए भी महज एक कल्ट फ़िल्म नहीं है. यह देश के वर्तमान राजनीतिक माहौल का नाटकीय...
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कुमार मुकुल की कविताएँ : लोकतंत्र के भगवाकरण की समीक्षा

समकालीन जनमत
30 वर्षों से रचनारत कुमार मुकुल के कविता परिदृश्य का रेंज विशाल और वैविध्य से भरा है , प्रस्तुत कविताओं में आज के समय को...
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नफरत के खिलाफ अदब का प्रोटेस्ट है ‘मै मुहाजिर नहीं हूं ’ – शारिब रुदौलवी

समकालीन जनमत
कथाकार-उपन्यासकार बादशाह हुसैन रिजवी के उपन्यास ‘मै मुहाजिर नहीं हूं’ के उर्दू संस्करण का 9 जून को यूपी प्रेस क्लब में विमोचन हुआ. इस उपन्यास...
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पत्थलगड़ी के बहाने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर चोट ?

समकालीन जनमत
झारखंड के आदिवासी बहुल गांवों में किया गया पत्थलगड़ी राज्य सरकार के लिए सिर दर्द बन चुका है. इन गांवों के लोग सरकार के खिलाफ...
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दक्षिणपंथ की कीलें

जावेद अनीस
भगवा खेमे के लिये अपने मंसूबो को पूरा करने के लिए 2019 का चुनाव निर्णायक है और इसके लिये वे कुछ भी करेंगे. यह चुनाव...
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क्या पत्थलगड़ी असंवैधानिक है ?

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[author] [author_image timthumb=’on’]http://samkaleenjanmat.in/wp-content/uploads/2018/05/gladson-dungdung.jpg[/author_image] [author_info]ग्लैडसन डुंगडुंग [/author_info] [/author] झारखंड के आदिवासी इलाकों में हो रही पत्थलगड़ी से सरकार की नींद हराम हो गई है. झारखंड के...
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सीख़चों के बाहर कैद पुलिस

पुलिस कर्मियों की कार्यस्थितियों में समुचित सुधार का एजेंडा न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने उत्तराखंड सरकार के सामने रख दिया...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति

विहाग वैभव की कविताएँ : लोक जीवन के मार्मिक संवेदनात्मक ज्ञान की कविताएँ हैं- मंगलेश डबराल

समकालीन जनमत
  युवा कवि विहाग वैभव की कविताओं में क्रांति, विद्रोह, विरोध, निषेध के तीखे स्वर हैं और वह प्रेम भी है जिसे संभव करने के...
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