समकालीन जनमत

Category : जनमत

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हिटलर और फ़ासीवाद का नया उभार

गोपाल प्रधान
सोवियत संघ के पतन और विश्व अर्थतंत्र में आए बदलावों के चलते तेजी से उभरी नवफ़ासीवादी सक्रियता फिलहाल अंतर्राष्ट्रीय राजनीति की सबसे खतरनाक प्रवृत्ति बन...
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पत्थलगड़ी आंदोलन की जड़ें

समकालीन जनमत
आदिवासियों के साथ प्रगति, विकास, जनहित, राष्ट्रहित एवं आर्थिक तरक्की के नाम पर धोखा किया गया है। इसलिए अब वे किसी भी कीमत पर अपनी...
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त्रासदी बनते इतिहास का आख्यानः मदन कश्यप का काव्य

समकालीन जनमत
प्रणय कृष्ण (कवि मदन कश्यप को जनमत टीम की ओर से जन्मदिन की हार्दिक बधाई। इस अवसर पर पढ़िए ‘नीम रोशनी में’ संग्रह पर लिखा...
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20 साल से नियम-कानून की धज्जियाँ उड़ाती रही है वेदांता

वेदांता समूह की कंपनी स्टरलाइट कॉपर ने 20 साल तक नियम-कानून की धज्जियाँ उड़ायी. इन 20 सालों में केंद्र और राज्य में कई पार्टियां सत्ता...
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नक्सलबाड़ी विद्रोह का सांस्कृतिक पक्ष : प्रणय कृष्ण

समकालीन जनमत
(नक्सलबाड़ी आन्दोलन  की  51 वीं वर्षगांठ (25/5/18) के अवसर पर नक्सलबाड़ी आन्दोलन के सांस्कृतिक पक्ष पर रौशनी डाल रहें हैं, इलाहा बाद विश्वविद्यालय  में प्राध्यापक...
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मार्क्स और हमारा समय

समकालीन जनमत
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने नयी दिल्ली स्थित उर्दू घर में 19 मई के दिन ‘ मार्क्स और हमारा समय ’ शीर्षक से...
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सामंती और पुलिस गठजोड़ का नतीजा है गगहा में दलितों पर पुलिस गोलीबारी : भाकपा माले

समकालीन जनमत
अस्थौला के दलितों पर पुलिस फायरिंग, लाठीचार्ज, गिरफ्तारी पर भाकपा माले जाँच दल की रिपोर्ट गोरखपुर। भाकपा माले ने गोरखपुर के गगहा थाना क्षेत्र के...
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कर्नाटक : लोकतंत्र को कैद

जावेद अनीस
भारत में चुनाव अब नाटक-नौटंकी की तरह हो गये हैं जहां हार-जीत का फैसला जीवन के वास्तविक मुद्दों से नहीं बल्कि मैनेजमेंट, मनी और ध्रुवीकरण...
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बनारस में मौत की चीखें

समकालीन जनमत
जिस तरह से यह बीम गिरने का हादसा हुआ है इसे पूरी तरह से सरकारी हत्याकांड कहा जाए तो गलत ना होगा. जब हजारों टन...
ख़बरजनमत

इज़राइल द्वारा सोमवार नर-संहार फिलीस्तीनियों की आज़ादी की लड़ाई को कमज़ोर नहीं कर सकता

समकालीन जनमत
वी. अरुण कुमार   यह खूनी था, और यह हमेशा से खूनी रहा था- इज़राइली सेना के लिए, फिलिस्तीनी व्यक्ति के जीवन का मूल्य बुलेट...
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दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को क्या स्वतंत्र चेतना से डर लगने लगा है

समकालीन जनमत
यह मसला सिर्फ एक व्यक्ति के अपमान का नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को क्या स्वतंत्र चेतना...
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यह सब हमारे ही समयों में होना था

समकालीन जनमत
मोनीजा हाशमी इस सम्मेलन में महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर अपनी बात रखने वाली थीं. ऐसे समय में जब बलात्‍कारों की सुर्खियां भारत की छवि...
जनमतसिनेमा

राज़ी : नागरिकता और मनुष्यता का अन्तर्द्वन्द्

आशुतोष कुमार
नेशन फर्स्ट भूमण्डलित दुनिया का नया फैशन है। अमरीका से लेकर रूस तक इसी नारे पर चुनाव जीते जा रहे हैं। भारत में भी इन...
जनमतज़ेर-ए-बहसशख्सियत

माँ तुझे सलाम !

कविता कृष्णन
(माँ केवल ममता का ही खज़ाना नहीं है बल्कि समझदारी का भी स्रोत होती है.  समाज के बारे में, नैतिकता, यौनिकता, सही और गलत के...
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पहली जंगे आज़ादी और मार्क्स

भारतीय संदर्भ में मार्क्सवाद के बारे में चर्चा करते हुए आम तौर पर यह कहा जाता है कि मार्क्स तो भारत को नहीं समझते थे,...
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आज़ादी के बाद के भारत की तस्वीर देखनी है, तो कैफ़ी आज़मी की शायरी से बेहतर कुछ नहीं

समकालीन जनमत
आज कैफ़ी आज़मी की पुण्यतिथि है. यह महज़ संयोग ही है कि आज ही के दिन ‘1857’ में बगावत का बिगुल बजा था. लेकिन अगर...
जनमतज़ेर-ए-बहस

दलितों के घर भोजन: मकसद क्या है, वोट या कुछ और?

जिस समय दलितों के घर भोजन की यह नौटंकी चल रही है उसी समय एससी/एसटी एक्ट को कमजोर किया जा रहा है।उसी समय विश्वविद्यालयों के...
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डीएम दिवाकर के साथ भाजपा एमएलसी द्वारा दुर्व्यवहार की साहित्यिक-सांस्कृतिक संगठनों ने भर्त्सना की

समकालीन जनमत
पटना. बिहार के प्रगतिशील-जनवादी साहित्यिक-सांस्कृतिक संगठनों ने एएन सिन्हा इंस्टीच्यूट आॅफ सोशल स्टडीज, पटना में आयोजित सेमिनार ‘इंटरजेशनेल मोबिलिटी आॅफ कास्ट’ के दौरान भाजपा के...
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वोल्गा पर जहाज खींचने वाले लोग

अशोक भौमिक
( तस्वीरनामा में आज रूसी चित्रकार इलिया एफिमोविच रेपिन द्वारा 1870 में बनाये गए चित्र  ‘ वोल्गा पर जहाज खींचने वाले लोग ‘ (Barge Haulers...
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मार्क्स की द्विशतवार्षिकी : मानव मुक्ति का लांग मार्च जारी है

वे सभी लोग जो समानता और न्याय, स्वतंत्रता और भाईचारे के पक्षधर हैं और उसके लिये लड़ते हैं, उन्हें हमेशा मार्क्स से प्रेरणा मिलती रहेगी;...
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