समकालीन जनमत

Category : कविता

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विनोद कुमार ‘हंस’ की कविताएँ सामाजिक रूढ़ियों के प्रति विद्रोह दर्ज करती हैं

हरे प्रकाश उपाध्याय विनोद कुमार ‘हंस’ कविता की दुनिया में बिलकुल अभी-अभी दाखिल हो रहे कवि हैं। फ़िलहाल उनका स्वागत और स्वीकार इसी रूप में...
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पूर्णिमा साहू की कविताएँ दृष्टि संपन्नता की पूंजी लेकर आई हैं

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अणु शक्ति सिंह पूर्णिमा साहू की कविताओं पर पहली दृष्टि पड़ते ही उनकी राजनीतिक समझ की झलक आ जाती है। ऐसे समय में जब स्त्री...
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प्रियंका यादव की कविताएँ प्रेम में स्त्री-मन की उधेड़बुन से रूपाकार ग्रहण करती हैं

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अनुराग यादव कविता भावों का एक संसार निर्मित करने की संभावना स्वयं में समेटे रहती है, उसे आवश्यकता होती है एक सहृदय पाठक की |...
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कुमार लव की कविताएँ शब्दों तथा दृश्यों का सुंदर समन्वय हैं

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चित्रा पंवार ‘कविता वह सुरंग है जिसके भीतर से मनुष्य एक विश्व को छोड़कर दूसरे विश्व में प्रवेश करता है’ यकीनन हिंदी के महान कवि...
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सुधीर सुमन की प्रेम कविताएँ अकेलेपन से संवाद हैं

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राजेश कमल सुधीर सुमन हमारे समय के उन महत्त्वपूर्ण कवियों में हैं, जिनकी उपस्थिति गहरी है, पर जिनका प्रॉपर रेखांकन अब तक नहीं हुआ ।...
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सुरेश जिनागल की कविताएँ वंचना और उत्पीड़न के विरुद्ध प्रतिरोध की चिनगारी की तरह हैं

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अरुण आदित्य सुरेश जिनागल गहन मानवीय संवेदना और सामाजिक सरोकारों वाले कवि हैं। उनकी ये कविताएँ वंचना और उत्पीड़न के विरुद्ध प्रतिरोध की चिनगारी की...
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पल्लवी की कविताएँ संवेदना की परिपक्व भाव-भूमि पर रची गई हैं।

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प्रज्ञा गुप्ता पल्लवी की कविता स्त्री-स्वातंत्र्य, विद्रोह और सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया को रूपक और प्रतीकों के माध्यम से बहुत ही प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत...
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मानसी मिश्र की कविताएँ जन विरोधी व्यवस्था वाली दुनिया में एक स्त्री नागरिक का अधिकारपूर्ण दखल हैं।

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एकता वर्मा मानसी संभावनाओं की कवयित्री हैं। इनकी कविताओं में युवा हृदय की उत्तेजनाएँ हैं। उनकी कविताएँ एक आधुनिक हुई, शिक्षित, शहरीकृत हुई कामगार महिला...
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सुमन कुमार सिंह की कविताएँ वंचित तबकों का यथार्थ बयान करती हैं

अवंतिका सिंह सुमन कुमार सिंह की कविताएँ समकालीन भारतीय समाज का दर्पण हैं। इन कविताओं के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक विडंबनाओं, आम आदमी की...
कवितास्मृति

इज़ाडोरा डंकन को उनकी पुण्यतिथि पर के. मंजरी श्रीवास्तव की काव्यात्मक श्रद्धांजलि

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विश्व के महान व्यक्तित्वों (ख़लील जिब्रान, ग़ालिब, मीर, रूमी, इक़बाल, पाब्लो नेरुदा, इज़ाडोरा) के जीवन और विचारों को भारत के समकालीन परिप्रेक्ष्य में स्थापित करते...
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संतोष पटेल की कविताएँ मानवीय संघर्ष और अस्मिता के विस्तार तक ले जाती हैं

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नीलाम्बुज सरोज संतोष पटेल की कविताएँ हिंदी कविता में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप हैं। उनका कविता संग्रह ‘कारक के चिह्न’ केवल साहित्यिक सौंदर्य का उत्सव नहीं, बल्कि...
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गौरव सिंह की कविताएँ नेपथ्य में खो गए जीवन-रागों को आवाज़ देती हैं

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प्रो. रामेश्वर राय कविता समय से तटस्थ नहीं होती, लेकिन समय के साथ उसका रिश्ता इतिहास और सूचना-तंत्र से भिन्न होता है। कविता में दर्ज़...
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रत्नेश कुमार की कविताएँ सामाजिक सरोकारों और मानव मूल्यों का यथार्थ चित्रण हैं

रौशन कुमार रत्नेश की कविताएँ मानव जीवन में होने वाली उथल-पुथल समेत समकालीन वक्त की समस्याओं एवं चुनौतियों को ज़रूरी ढंग से रेखांकित करतीं हैं।...
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नीलाम्बुज सरोज की कविताएँ जन आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति हैं

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सुमन कुमार सिंह समकालीन हिंदी कविता का स्वर बहुरंगी है। यह रंग ठीक ‘हिंदी-सा’ है। यह इसलिए भी कि यह देश के हर कोने, हर...
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धर्मेश चौबे की कविताएँ दो दुनियाओं के बीच क्षरित होने की मार्मिक अभिव्यक्ति हैं

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विपिन चौधरी   “घर केवल ईंट पत्थर और गारे का जोड़ भर नहीं होते जो ईश्वर की कोई भी चुनी हुई कौम ढहा दे तो...
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पवन कुमार वर्मा की कविताएँ समकालीनता का स्वीकार प्रस्तुत करती हैं

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आलोक रंजन   युवा कवि पवन कुमार वर्मा की कविताएँ सामने हैं और सामने है हमारे समय की असलियतों की अभिव्यक्ति भी। इन कविताओं को...
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रौशन कुमार की कविताएँ जेएनयू से अर्जित सामाजिक परिवर्तन की उम्मीद से निर्मित हैं

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नीलम युवा कवि रौशन कुमार की कविताएँ ‘ भूख हड़ताल ‘, ‘ नजीब तुम ज़िंदा हो ‘…,  ‘ क्या है जे एन यू ‘, ‘...
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अवंतिका सिंह की कविता यात्रा संभावनाओं भरी नई सुबह की तलाश में है।

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प्रज्ञा गुप्ता अवंतिका सिंह की कविताएँ सामाजिक यथार्थ एवं उसकी विडंबनाओ का बोध कराती हुई हमसे संवाद करती है। अवंतिका एक ऐसा संसार रचना चाहती...
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अरुण देव की कविताएँ मृत्‍यु की लौकिकता का संसार रचती हैं

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पंकज चौधरी मृत्‍यु के बाद जीवन को समाप्‍त मान लिया जाता है। माना जाता है कि मृत्‍यु के बाद जीवन की तमाम गतिविधियाँ और कारोबार...
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उद्देश्य कुमार की कविताएँ मध्यवर्गीय जीवन की एकरसता से जूझती हैं

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अनुराग यादव एक रचनाकार अगर वास्तव में समाज को एक नया नज़रिया, सोचने समझने का एक नया तरीका प्रदान करना चाहता है उसे अपनी दृष्टि...
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