सिनेमा संजू: इसे बायोपिक की तरह न देख कर देखिएआशुतोष कुमारJuly 4, 2018July 5, 2018 by आशुतोष कुमारJuly 4, 2018July 5, 20185 2345 फ़िल्म संजय दत्त की ज़िंदगी की तमाम सचाइयों को दिखाती हो या नहीं, जिस कहानी को वह सचमुच दिखाती है, वह भरोसेमंद, मार्मिक और इतिहास-संगत...
चित्रकला चित्रों में कला बाज़ार का शुरूआती चेहराअशोक भौमिकJuly 3, 2018December 9, 2019 by अशोक भौमिकJuly 3, 2018December 9, 20195 2673 डेविड टेनियर द्वारा 1651 में बनाया यह चित्र कला-व्यापार के आरंभिक दौर का एक दस्तावेजी चित्र है. इस चित्र में ब्रसेल्स के एक कला व्यापारी...
साहित्य-संस्कृतिस्मृति प्रो तुलसीराम का चिन्तन अम्बेडकरवाद और मार्क्सवाद के बीच पुल – वीरेन्द्र यादवसमकालीन जनमतJuly 2, 2018July 2, 2018 by समकालीन जनमतJuly 2, 2018July 2, 201802852 प्रो तुलसी राम ने जहां मार्क्सवाद के रास्ते दलित आंदोलन का क्रिटिक रचा, वहीं उन्होंने वामपंथ के अन्दर मौजूद जातिवादी प्रवृतियों का भी विरोध किया....
शख्सियतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति पठनीयता का संबंध वास्तविकता से होता हैसमकालीन जनमतJuly 1, 2018July 1, 2018 by समकालीन जनमतJuly 1, 2018July 1, 201802868 (प्रेमचंद की परंपरा को नये संदर्भ और आयाम देने वाले हिंदी भाषा के कहानीकारों में अमरकांत अव्वल हैं। अमरकांत से शोध के सिलसिले में सन्...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति संजीव कौशल की कविताएँ : प्रतिगामी विचारों का विश्वसनीय प्रतिपक्षउमा रागJuly 1, 2018October 13, 2019 by उमा रागJuly 1, 2018October 13, 201903776 जागृत राजनीतिक चेतना, समय और समाज की विडम्बनाओं की गहरी समझ और भाषा की कलात्मक पारदर्शिता के कारण संजीव कौशल की कवितायेँ नयी सदी की युवा...
शख्सियतस्मृति भुलाए नहीं भूलेगा यह दिनसमकालीन जनमतJune 30, 2018June 30, 2018 by समकालीन जनमतJune 30, 2018June 30, 201802929 कमरे में चौकी पर बैठे थे नागार्जुन. पीठ के पीछे खुली खिड़की से जाड़े की गुनगुनी धूप आ रही थी. बाहर गौरैया चहचहा रही थी....
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति कबीर और नागार्जुन की जयंती से जन एकता सांस्कृतिक यात्रा आरम्भसमकालीन जनमतJune 28, 2018June 29, 2018 by समकालीन जनमतJune 28, 2018June 29, 20185 3862 बेगूसराय. आज ज्येष्ठ पूर्णिमा दिनांक 28/06/2018 को जन संस्कृति मंच की ओर से कबीर और आधुनिक कबीर नागार्जुन की सम्मिलित जयंती मनायी गयी। इस जयंती...
कविताग्राउन्ड रिपोर्टजनमतसाहित्य-संस्कृति अनुपम सिंह की कविताओं पर जसम की घरेलू गोष्ठी की रपटराम नरेश रामJune 26, 2018June 26, 2018 by राम नरेश रामJune 26, 2018June 26, 201802089 अनुपम की कविताएँ अपने वक्त, अपने समाज और अपनी काया के अनुभव से उपजी हुई कविताएँ हैं- योगेंद्र आहूजा पिछली 23 जून 2018 को जसम...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति ‘समय है सम्भावना का’ : सत्ता के मौन की पहचान हैराम नरेश रामJune 25, 2018June 25, 2018 by राम नरेश रामJune 25, 2018June 25, 20186 2731 जगदीश पंकज जी का कविता संग्रह ‘समय है सम्भावना का’ इसी वर्ष आया है. जगदीश पंकज जी नवगीतकार हैं. दलित साहित्य में नवगीत की कोई...
कविता महेश्वर स्मृति आयोजन में युवा कवि अदनान कफ़ील दरवेश और विहाग वैभव का काव्य पाठसमकालीन जनमतJune 25, 2018June 26, 2018 by समकालीन जनमतJune 25, 2018June 26, 201804109 महेश्वर चाहते थे कि कवि-लेखकों और जनता के बीच कम से कम दूरी हो: आलोक धन्वा महेश्वर की लड़ाई को आगे बढ़ाने की जरूरत है:...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति पराजय को उत्सव में बदलती अनुपम सिंह की कविताएँसमकालीन जनमतJune 24, 2018June 19, 2019 by समकालीन जनमतJune 24, 2018June 19, 20192 3477 (अनुपम सिंह की कविताओं को पढ़ते हुए ऐसा लगता है जैसे वे अपने साथ हमें पितृसत्ता की एक बृहद प्रयोगशाला में लिए जा रहीं हैं...
स्मृति विष्णु प्रभाकर : उनके पैरों में गति और कंठ में संगीत थासमकालीन जनमतJune 21, 2018June 21, 2018 by समकालीन जनमतJune 21, 2018June 21, 20185 4029 एक बार किसी ने पूछा था--‘ विष्णु जी, तुम्हें दो वरदान मांगने का अवसर मिले तो क्या मांगोगे ? ’ तुरन्त उत्तर दिया उन्होंने--‘ पैरों...
शख्सियतसिनेमा जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है !समकालीन जनमतJune 19, 2018 by समकालीन जनमतJune 19, 20184 2846 इस ख़त की कोई भूमिका नहीं हो सकती। इरफ़ान, जिनके सिरहाने की एक तरफ़ ज़िंदगी है और दूसरी तरफ़ अंधेरा, ने आत्मा की स्याही से...
चित्रकला कला बाजार का एक ऐतिहासिक दस्तावेज़अशोक भौमिकJune 19, 2018December 9, 2019 by अशोक भौमिकJune 19, 2018December 9, 20195 3349 यह चित्र हालाँकि अपने ऐतिहासिकता के लिए चर्चित रहा है और अमरीका में दासप्रथा का दस्तावज है , पर साथ ही यह बिना किसी लाग...
स्मृति ………तो क्या कामरेड जफ़र हुसैन की हत्या किसी ने नहीं की ?समकालीन जनमतJune 17, 2018June 17, 2018 by समकालीन जनमतJune 17, 2018June 17, 201801652 कामरेड जफ़र हुसैन की हत्या को आज एक साल हो गया. पिछले वर्ष 16 जून को उनकी हत्या कमिश्नर अशोक जैन के नेतृत्व में नगरपालिका...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति सहज काव्यकथाओं सी हैं अदनान की कविताएँसमकालीन जनमतJune 17, 2018June 17, 2018 by समकालीन जनमतJune 17, 2018June 17, 201802016 अदनान की कविताओं से गुजरना अपने समय के लोक से गुज़रना और उसकी त्रासदियों को जानते हुए उसकी लाचारी को अपनी लाचारी में बदलते देखना...
जनमतसिनेमा काला : फ़ासीवाद की पहचान कराती फ़िल्मआशुतोष कुमारJune 15, 2018June 16, 2018 by आशुतोष कुमारJune 15, 2018June 16, 201801647 सुपरस्टार रजनीकांत की जानी पहचानी शैली की फ़िल्म होते हुए भी महज एक कल्ट फ़िल्म नहीं है. यह देश के वर्तमान राजनीतिक माहौल का नाटकीय...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति कुमार मुकुल की कविताएँ : लोकतंत्र के भगवाकरण की समीक्षासमकालीन जनमतJune 10, 2018June 10, 2018 by समकालीन जनमतJune 10, 2018June 10, 20187 3380 30 वर्षों से रचनारत कुमार मुकुल के कविता परिदृश्य का रेंज विशाल और वैविध्य से भरा है , प्रस्तुत कविताओं में आज के समय को...
पुस्तक राजनीति में अतिवादी मध्य मार्गगोपाल प्रधानJune 6, 2018June 5, 2018 by गोपाल प्रधानJune 6, 2018June 5, 201802455 2015 में वर्सो से तारिक अली की पतली सी किताब ‘ द एक्सट्रीम सेन्टर: ए वार्निंग’ का प्रकाशन हुआ । पतली होने के बावजूद किताब...
स्मृति मेरी स्वतंत्रता किसके पास हैसमकालीन जनमतJune 5, 2018June 5, 2018 by समकालीन जनमतJune 5, 2018June 5, 20183 2907 राजकिशोर एक प्रखर आधुनिक चिंतक थे. मनुष्य मात्र की स्वतंत्रता का अधिकार उनका सबसे प्यारा सरोकार था. स्वतंत्रता की उनकी अवधारणा व्यापक और मूलगामी थी....