कविता आधुनिक जीवन की विसंगतियों के मध्य मानवीय संवेदना की पहचान की कवितायेंसमकालीन जनमतJuly 15, 2018July 15, 2018 by समकालीन जनमतJuly 15, 2018July 15, 201802791 विनय दुबे की कविताओं में सहजता और दृश्य की जटिलताओं का जो सहभाव नज़र आता है, वह उन्हें अपनी पीढ़ी का अप्रतिम कवि बनाता है....
कविता एक कविता: हिंग्लिश [शुभम श्री]मृत्युंजयJuly 14, 2018July 14, 2018 by मृत्युंजयJuly 14, 2018July 14, 201803297 शुभम श्री हमारे साथ की ऐसी युवा कवि हैं जिनकी कविताओं में बाँकपन की छब है। एक ख़ास तंज़ भरी नज़र और भाषा को बरतने...
स्मृति कबूतरी देवीः पहाड़ी बेगम अख़्तर का मज़दूर चेहरासमकालीन जनमतJuly 12, 2018July 12, 2018 by समकालीन जनमतJuly 12, 2018July 12, 20186 2161 बुलन्द आवाज़ और खनकदार गले की मलिका स्वर कोकिला लोक गायिका कबूतरी देवी 7 जुलाई की सुबह दुनिया से विदा हो गईं और फ़िज़ाओं में...
सिनेमा लस्ट स्टोरीज : अपनी राह तलाशती स्त्रियाँसमकालीन जनमतJuly 11, 2018July 11, 2018 by समकालीन जनमतJuly 11, 2018July 11, 201803226 ‘लस्ट स्टोरीज’ पिछले तीन दशकों में हुए सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक गहमागहमी से बनती गई नयी स्त्री और उसके पुरुष के साथ संबंधों को एक्सप्लोर करती है. यह...
चित्रकला विन्सेंट वॉन गॉग के ‘आलू खाते लोग ’अशोक भौमिकJuly 11, 2018December 9, 2019 by अशोक भौमिकJuly 11, 2018December 9, 201902914 चित्र में एक लालटेन की रौशनी में हम पांच लोगों को खाने की मेज़ पर बैठे देख पाते हैं. वॉन गॉग ने इस चित्र में...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति प्रेम के निजी उचाट से लौटती स्त्री की कविता : विपिन चौधरी की कवितायेँउमा रागJuly 8, 2018July 8, 2018 by उमा रागJuly 8, 2018July 8, 20182 3345 विपिन की कवितायेँ लगातार बाहर-भीतर यात्रा करती हुईं एक ऐसी आंतरिकता को खोज निकालती हैं जो स्त्री का अपना निजी उचाट भी है और दरख्तों,...
सिनेमा संजू: इसे बायोपिक की तरह न देख कर देखिएआशुतोष कुमारJuly 4, 2018July 5, 2018 by आशुतोष कुमारJuly 4, 2018July 5, 20185 2347 फ़िल्म संजय दत्त की ज़िंदगी की तमाम सचाइयों को दिखाती हो या नहीं, जिस कहानी को वह सचमुच दिखाती है, वह भरोसेमंद, मार्मिक और इतिहास-संगत...
चित्रकला चित्रों में कला बाज़ार का शुरूआती चेहराअशोक भौमिकJuly 3, 2018December 9, 2019 by अशोक भौमिकJuly 3, 2018December 9, 20195 2674 डेविड टेनियर द्वारा 1651 में बनाया यह चित्र कला-व्यापार के आरंभिक दौर का एक दस्तावेजी चित्र है. इस चित्र में ब्रसेल्स के एक कला व्यापारी...
साहित्य-संस्कृतिस्मृति प्रो तुलसीराम का चिन्तन अम्बेडकरवाद और मार्क्सवाद के बीच पुल – वीरेन्द्र यादवसमकालीन जनमतJuly 2, 2018July 2, 2018 by समकालीन जनमतJuly 2, 2018July 2, 201802854 प्रो तुलसी राम ने जहां मार्क्सवाद के रास्ते दलित आंदोलन का क्रिटिक रचा, वहीं उन्होंने वामपंथ के अन्दर मौजूद जातिवादी प्रवृतियों का भी विरोध किया....
शख्सियतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति पठनीयता का संबंध वास्तविकता से होता हैसमकालीन जनमतJuly 1, 2018July 1, 2018 by समकालीन जनमतJuly 1, 2018July 1, 201802870 (प्रेमचंद की परंपरा को नये संदर्भ और आयाम देने वाले हिंदी भाषा के कहानीकारों में अमरकांत अव्वल हैं। अमरकांत से शोध के सिलसिले में सन्...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति संजीव कौशल की कविताएँ : प्रतिगामी विचारों का विश्वसनीय प्रतिपक्षउमा रागJuly 1, 2018October 13, 2019 by उमा रागJuly 1, 2018October 13, 201903778 जागृत राजनीतिक चेतना, समय और समाज की विडम्बनाओं की गहरी समझ और भाषा की कलात्मक पारदर्शिता के कारण संजीव कौशल की कवितायेँ नयी सदी की युवा...
शख्सियतस्मृति भुलाए नहीं भूलेगा यह दिनसमकालीन जनमतJune 30, 2018June 30, 2018 by समकालीन जनमतJune 30, 2018June 30, 201802931 कमरे में चौकी पर बैठे थे नागार्जुन. पीठ के पीछे खुली खिड़की से जाड़े की गुनगुनी धूप आ रही थी. बाहर गौरैया चहचहा रही थी....
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति कबीर और नागार्जुन की जयंती से जन एकता सांस्कृतिक यात्रा आरम्भसमकालीन जनमतJune 28, 2018June 29, 2018 by समकालीन जनमतJune 28, 2018June 29, 20185 3862 बेगूसराय. आज ज्येष्ठ पूर्णिमा दिनांक 28/06/2018 को जन संस्कृति मंच की ओर से कबीर और आधुनिक कबीर नागार्जुन की सम्मिलित जयंती मनायी गयी। इस जयंती...
कविताग्राउन्ड रिपोर्टजनमतसाहित्य-संस्कृति अनुपम सिंह की कविताओं पर जसम की घरेलू गोष्ठी की रपटराम नरेश रामJune 26, 2018June 26, 2018 by राम नरेश रामJune 26, 2018June 26, 201802091 अनुपम की कविताएँ अपने वक्त, अपने समाज और अपनी काया के अनुभव से उपजी हुई कविताएँ हैं- योगेंद्र आहूजा पिछली 23 जून 2018 को जसम...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति ‘समय है सम्भावना का’ : सत्ता के मौन की पहचान हैराम नरेश रामJune 25, 2018June 25, 2018 by राम नरेश रामJune 25, 2018June 25, 20186 2732 जगदीश पंकज जी का कविता संग्रह ‘समय है सम्भावना का’ इसी वर्ष आया है. जगदीश पंकज जी नवगीतकार हैं. दलित साहित्य में नवगीत की कोई...
कविता महेश्वर स्मृति आयोजन में युवा कवि अदनान कफ़ील दरवेश और विहाग वैभव का काव्य पाठसमकालीन जनमतJune 25, 2018June 26, 2018 by समकालीन जनमतJune 25, 2018June 26, 201804113 महेश्वर चाहते थे कि कवि-लेखकों और जनता के बीच कम से कम दूरी हो: आलोक धन्वा महेश्वर की लड़ाई को आगे बढ़ाने की जरूरत है:...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति पराजय को उत्सव में बदलती अनुपम सिंह की कविताएँसमकालीन जनमतJune 24, 2018June 19, 2019 by समकालीन जनमतJune 24, 2018June 19, 20192 3480 (अनुपम सिंह की कविताओं को पढ़ते हुए ऐसा लगता है जैसे वे अपने साथ हमें पितृसत्ता की एक बृहद प्रयोगशाला में लिए जा रहीं हैं...
स्मृति विष्णु प्रभाकर : उनके पैरों में गति और कंठ में संगीत थासमकालीन जनमतJune 21, 2018June 21, 2018 by समकालीन जनमतJune 21, 2018June 21, 20185 4030 एक बार किसी ने पूछा था--‘ विष्णु जी, तुम्हें दो वरदान मांगने का अवसर मिले तो क्या मांगोगे ? ’ तुरन्त उत्तर दिया उन्होंने--‘ पैरों...
शख्सियतसिनेमा जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है !समकालीन जनमतJune 19, 2018 by समकालीन जनमतJune 19, 20184 2848 इस ख़त की कोई भूमिका नहीं हो सकती। इरफ़ान, जिनके सिरहाने की एक तरफ़ ज़िंदगी है और दूसरी तरफ़ अंधेरा, ने आत्मा की स्याही से...
चित्रकला कला बाजार का एक ऐतिहासिक दस्तावेज़अशोक भौमिकJune 19, 2018December 9, 2019 by अशोक भौमिकJune 19, 2018December 9, 20195 3350 यह चित्र हालाँकि अपने ऐतिहासिकता के लिए चर्चित रहा है और अमरीका में दासप्रथा का दस्तावज है , पर साथ ही यह बिना किसी लाग...