समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविताजनमत

बबली गुज्जर की कविताएँ ‘औरत के मन की राह’ को एसर्ट करती हैं

समकालीन जनमत
अमरेंद्रनाथ त्रिपाठी प्रेम इन कविताओं में आवर्ती विषयवस्तु की तरह है। इसी के जरिये रचनाकार अन्य जरूरी संवेदनात्मक पक्षों पर भी मुखर हुआ है। एक...
जनमतशख्सियतस्मृति

अलविदा शौक़त आपा

समकालीन जनमत
अली जावेद कैफी़ ने कहा था: एलान-ए-हक़ में ख़तर-ए-दार-ओ-रसन तो है लेकिन सवाल ये है कि दार-ओ-रसन के बाद? याद कीजिये तरक़्की़पसंद अदबी तहरीक का...
जनमतपुस्तक

स्त्री रचनाशीलता को समझने की एक कोशिश

समकालीन जनमत
रेखा सेठी स्त्री लेखन, स्त्री की चिंतनशील मनीषा के विकास का ही ग्राफ है जिससे सामाजिक इतिहास का मानचित्र गढ़ा जाता है और जेंडर तथा...
कविता

अर्पिता राठौर की कविताएँ लघुता की महत्ता की अभिव्यक्ति हैं

समकालीन जनमत
साक्षी सिंह अर्पिता की कलम एकदम नई है और ख़ुद को अभिव्यक्त करने की बेचैनी से ज़्यादा जो अभिव्यक्त है उसके हर सम्भव आयाम को...
जनमतशख्सियतस्मृति

“यह थी भूमिका हम-तुम मिले थे जब” मुक्तिबोध स्मरण (जन्मदिन 13 नवम्बर)

रामजी राय
मुक्तिबोध और उनकी कविता के बारे में लोग कहते हैं कि वो विकल-बेचैन, छटपटाते कवि हैं. लेकिन देखिये तो दरअसल, मुक्तिबोध कविता की विकलता के...
कविता

नबनीता देब सेन की कविताओं में प्रेम और रिश्तों की अभूतपूर्व संवेदनाओं और द्वंद्वों को स्वर मिला है

समकालीन जनमत
मीता दास बंगाली साहित्य की प्रमुख लेखिका नबनीता देब सेन 81 साल की थीं। पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित लेखिका ने 7/11/19 गुरुवार की शाम 7.30...
नाटकसाहित्य-संस्कृति

आज के समय में बेहद ज़रूरी नाटक है ‘ चम्पारण ने कहा है ’

समकालीन जनमत
राजेश मल्ल महात्मा गांधी की150वीं जयन्ती के अवसर पर रुपातंर नाट्य मंच द्वारा दी.द.उ.गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के संवाद भवन में एक अद्भुत नाटक ‘ चम्पारण...
साहित्य-संस्कृति

आरा में विजेंद्र अनिल की स्मृति में आयोजन

समकालीन जनमत
विजेंद्र अनिल के जन्म की 75वीं वर्षगाँठ पर 21 जनवरी को आरा में एक बड़ा आयोजन होगा विजेंद्र अनिल के रचना-समग्र का प्रकाशन होगा 3...
पुस्तकसाहित्य-संस्कृति

‘ मोदीनामा ’ : हिन्दुत्व का उन्माद

कौशल किशोर
  मोदी सरकार दूसरी बार सत्तासीन हुई है। पिछली बार की तुलना में उसका मत प्रतिशत बढ़ा है। उसकी सीटों में भी इजाफा हुआ है।...
कविताजनमत

वीरेनियत 4: सन्नाटा छा जाए जब मैं कविता सुनाकर उठूँ

समकालीन जनमत
पंकज चतुर्वेदी ‘वीरेनियत-4’ के अन्तर्गत इंडिया हैबिटेट सेण्टर, नयी दिल्ली में शुभा जी का कविता-पाठ सुना। उनकी कविताएँ समकालीन परिस्थितियों से उपजे इतने गहन तनाव...
कविताजनमत

वीरेनियत 4: अनसुनी पर ज़रूरी आवाज़ों का मंच

समकालीन जनमत
अदनान कफ़ील ‘दरवेश’ कल ‘वीरेनियत’ के चौथे संस्करण में जाने का मौक़ा मिला। दिल्ली की आब-ओ-हवा में इस वक़्त ज़हर की तासीर घुली हुई है।कुहेलिका...
कविताजनमत

वीरेनियत 4: जहाँ कविता के बाद का गहन सन्नाटा बजने लगा

समकालीन जनमत
आशुतोष कुमार दिन वैसे अच्छा नहीं था। दिल्ली आसपास का दम काले धुंए में घुट रहा था। छुट्टियों के कारण बहुत से दोस्त शहर से...
कविता

विनय सौरभ लोक की धड़कती हुई ज़मीन के कवि हैं

समकालीन जनमत
प्रभात मिलिंद कवि अपनी कविता की यात्रा पर अकेला ही निकलता है. जब इस यात्रा के क्रम में पाठक उसके सहयात्री हो जाएँ तो समझिए...
कहानीसाहित्य-संस्कृति

फ़रज़ाना महदी और शालिनी सिंह का कहानी पाठ तथा परिचर्चा

  उषा राय     लखनऊ. प्रगतिशील लेखक संघ की ओर  से  24  अक्टूबर 2019 को 22  कैसरबाग़ इप्टा के दफ्तर में शाम 4 : 30 ...
पुस्तकसाहित्य-संस्कृति

‘ जनता का अर्थशास्त्र ’ : एक जरूरी किताब

कौशल किशोर
  भगवान स्वरूप कटियार की नयी किताब ‘जनता का अर्थशास्त्र’ ऐसे समय में आयी है जब देश आर्थिक मंदी की चपेट में है। विकास का...
पुस्तक

शैक्षणिक परिसरों की घेराबंदी: बोध-प्रतिरोध-आजादी 

समकालीन जनमत
गीतेश सिंह पीपल्स कमीशन ऑन शृंकिंग डेमोक्रेटिक स्पेस द्वारा भारत में शैक्षणिक संस्थानों पर हो रहे हमलों पर आयोजित जन अधिकरण की रिपोर्ट को किताब...
कविता

रंजना मिश्र की कविताओं में जीवन उदासी के साये में खड़ा हुआ भी जिजीविषा से भरा रहता है।

समकालीन जनमत
प्रतिमा त्रिपाठी भाषाई उठापटक, शब्दों के खेल और अर्थों के रचे हुये मायावी संसार से बोझिल होती हुई कविताओं के इस समय में रंजना मिश्रा...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

जम्हूरियत की ज़ुबान : अदम गोंडवी

आशुतोष कुमार
  फूल के जिस्म पे पहलू बदल रही तितली , पेट की आग में जलते हुए बशर की तरह . मेरे ज़ेहन में तेरी शक्ल...
ज़ेर-ए-बहससाहित्य-संस्कृति

हिंदी का दलित साहित्य: वर्तमान चुनौती और भविष्यगत सम्भावना

गोपाल प्रधान
अन्य भाषाओं के बारे में नहीं मालूम लेकिन हिंदी में दलित साहित्य को अपनी जगह बनाने के लिए शायद किसी भी साहित्यिक प्रवृत्ति से अधिक...
साहित्य-संस्कृति

‘ नज़र में कोई मंज़िल है तो मौजे-वक़्त को देखो ’

 मशहूर शायर रफ़ीउद्दीन राज़ ने ग़ज़लों और नज़्मों का पाठ किया पटना. आईएमए हाॅल, पटना में जन संस्कृति मंच ने 21 अक्टूबर को मशहूर शायर...
Fearlessly expressing peoples opinion