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इंसानी गरिमा और मानवीय संस्कृति को बचाना है तो तार्किक समाज का सपना देखना होगा

ममता सिंह 

3 जनवरी को अग्रेसर अमेठी में सावित्री बाई फुले पुस्तकालय के पहले स्थापना समारोह में अपनी बात रखते हुए डॉ. राधेश्याम सिंह ने कहा कि डॉ.लोहिया कहा करते थे कि किसी भी सभ्य समाज के लिए पुस्तकालय और चरागाह बेहद आवश्यक हैं । वे अपने समाज को मूलतः ग्रामीण समाज मानते थे । आज गांवों में शिक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक है । गाँव के युवा को तार्किक चिंतन और प्रगतिशील सोच के बजाय हिंसा, भय और नफरत की राजनीति की ओर धकेला जा रहा है ।


उन्होंने कहा कि हमारे गुरू काशीनाथ सिंह कहते थे कि पहले पढ़ना सीखो-अच्छे बुरे की समझ धीरे धीरे विकसित हो जाएगी ।
पुस्तकें अपने ही बुजुर्गों से जीवन संवाद है । एक पुस्तकालय मनुष्य में तर्क क्षमता का विकास करता है, साथ ही साथ मेल मोहब्बत भी बढ़ाता है । ज्ञान कुछ और नहीं बल्कि मस्तिष्क का आननदोत्सव है ।
बाज़ार की दुनिया गाँधी को जिन्दा नहीं रहने देगी बल्कि नाथू को उकसा देगी । आवारा पूँजी के षड्यंत्र के खिलाफ संघर्ष में किताबें हमारी साथी हो सकती हैैं।

इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे युगतेवर के संपादक डॉ.कमल नयन पाण्डेय ने कहा कि सोचने का हुनर मनुष्यों को मिला है तो इस सोच को सही दिशा में ले जाने का प्रयास किया जाना चाहिए ।
गाँव का हर कण्ठ बोलती हुई किताब है तो हर कान जिज्ञासा का विद्यार्थी ।आज गाँवों में अनेक तरह का भय व्याप्त है, इसे कुछ राजनैतिक ताकतें अपने लाभ के लिए पैदा करती हैं । इसलिए आवश्यक है कि सही को सही और गलत को गलत कहने का साहस पैदा करने के संस्कार युवाओं में विकसित किए जाएँ ।
जाति धर्म के भेदभाव से परे एक बेहतर समाज के निर्माण में किताबें हमारी सहायक होंगी ।


इस अवसर पर कबीर और मुक्तिबोध को याद करते हुए डॉ.पाण्डेय ने कहा कि बाज़ार और पूँजी के दबाव ने पारस्परिकता, सहयोग की भावना और बात बतकही को तोड़ा है जो बड़ा संकट है ।
वरिष्ठ साहित्यकार सोमेश शेखर ने गाँव की आर्थिक हालत और सरकारी उदासीनता की चर्चा करते हुए इस प्रयास की सराहना की और कहा कि बच्चे और युवा ही तय करेंगे कि हमारा समाज कितना सौहार्दपूर्ण, वैज्ञानिक और प्रगतिशील बनेगा ।
आपने दुनिया भर के पुस्तकालयों से जुड़े अपने अनुभव भी श्रोताओं से साझा किया ।
अनेक अन्य पाठकों और विद्वानों ने भी अपनी बात रखी किन्तु सबसे महत्वपूर्ण रहा नन्हें पाठक और पुस्तकालय के संचालन में लगातार सहयोग कर रहे विवेक का अपने अनुभव साझा करना ।
अनुराग सिंह ने सभी अतिथियों और उपस्थित जन समुदाय को धन्यवाद ज्ञापित किया तथा पुस्तकालय को और समृद्ध बनाने का संकल्प भी दोहराया ।

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