समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

स्मृति

देवी प्रसाद चट्टोपाध्याय: भारतीय दर्शन में भौतिकवाद के अप्रतिम अध्येता

डॉ रामायन राम
देवी प्रसाद चट्टोपाध्याय ने भारतीय परंपरा मे भौतिकवाद तथा वैज्ञानिक चिंतन प्रणाली पर बहुत ही गहन शोध और लेखन किया है। भारत मे कई पीढियां...
साहित्य-संस्कृति

विभाजन को समझे बिना हल नहीं होगा सौहार्द का प्रश्न

आशुतोष कुमार
सामाजिक सौहार्द का मतलब केवल शांतिपूर्ण सहअस्तित्व नहीं होता. शांति तो ताकत और दमन से भी कायम की जा सकती है. शांति तो युद्धविराम की...
कविताजनमत

स्त्री की खुली दुनिया का वृत्त हमारे समक्ष प्रस्तुत करतीं कविताएँ

उमा राग
अच्युतानंद मिश्र निर्मला गर्ग की कविताओं में मौजूद सहजता ध्यान आकृष्ट करती है. सहजता से यहाँ तात्पर्य सरलीकरण नहीं है, बल्कि सहजता का अर्थ है...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

मुक्तिबोध मेरे लिए -अच्युतानंद मिश्र

समकालीन जनमत
अच्युतानंद मिश्र फ़िराक ने अपने प्रतिनिधि संग्रह ‘बज़्मे जिंदगी रंगे शायरी’ के संदर्भ में लिखा है, जिसने इसे पढ़ लिया उसने मेरी शायरी का हीरा...
साहित्य-संस्कृति

मुक्तिबोध आस्था देते हैं मुक्ति नहीं

समकालीन जनमत
प्रियदर्शन मुक्तिबोध और ख़ासकर उनकी कविता ‘अंधेरे में’ पर लिखने की मुश्किलें कई हैं। कुछ का वास्ता मुक्तिबोध के अपने बेहद जटिल काव्य विन्यास से...
साहित्य-संस्कृति

अंतःकरण और मुक्तिबोध के बहाने

रामजी राय
(मुक्तिबोध के जन्मदिन पर समकालीन जनमत के प्रधान संपादक रामजी राय का आलेख) 2017 में मुक्तिबोध की जन्मशताब्दी गुज़री है और 2018 मार्क्स के जन्म...
साहित्य-संस्कृति

आधुनिक सभ्यता-संकट की प्रतीक-रेखा (मुक्तिबोध और स्त्री-प्रश्न)

प्रणय कृष्ण
मुक्तिबोध जयंती पर विशेष   स्त्री स्वाधीनता और उस स्वाधीनता की अभिव्यक्ति के प्रश्न को जितनी गहनता और विस्तार मुक्तिबोध-साहित्य में मिला वैसा हिन्दी साहित्य...
कविताजनमत

घर की सांकल खोलता हुआ कवि हरपाल

उमा राग
बजरंग बिहारी   कविता जीवन का सृजनात्मक पुनर्कथन है। इस सृजन में यथार्थ, कल्पना, आकांक्षा, आशंका और संघर्ष के तत्व शामिल रहते हैं। रचनाकार अपनी प्रवृत्ति,...
स्मृति

वो सूरतें इलाही किस मुल्क बसतियाँ हैं , अब जिनके देखने को आंखें तरसतियाँ हैं

समकालीन जनमत
15वीं बरसी पर कॉ मंजू देवी की यादें   संतोष सहर   वो सूरतें इलाही किस मुल्क बसतियाँ हैं अब जिनके देखने को आंखें तरसतियाँ...
कविता

मामूली दृश्यों से जीवन का विचलित करने वाला वृत्तान्त तैयार करतीं शुभा की कविताएँ

उमा राग
मंगलेश डबराल   शुभा शायद हिंदी की पहली कवि हैं, जो अभी तक कोई भी संग्रह न छपवाने के बावजूद काफ़ी पहले विलक्षण  कवि के...
स्मृति

कामरेड शाह चाँद की याद

रामजी राय
जाने कितनी यादे हैं कामरेड शाह चाँद की। आईपीएफ और फिर इंकलाबी मुस्लिम कान्फ्रेंस में साथ काम करने की। कामरेड तकी रहीम से नोक-झोंक फिर...
साहित्य-संस्कृति

समानता का नया यूटोपिया रचती है ‘ देह ही देश ‘ – अनामिका

समकालीन जनमत
हिन्दू कालेज में प्रोफ़ेसर गरिमा श्रीवास्तव की किताब ‘ देह ही देश ‘ पर परिसंवाद  डॉ रचना सिंह   दिल्ली। ”देह ही देश” केवल यूरोप की...
स्मृति

रमाकांत द्विवेदी ‘रमता’ : क्रांति की रागिनी का गायक

सुधीर सुमन
101 वीं जयंती 30 अक्टूबर 2018 एक आलेख   ‘क्रांति के रागिनी हम त गइबे करब/ केहू का ना सोहाला त हम का करीं’, ‘हमनी...
ख़बरनाटकसाहित्य-संस्कृति

कोरस के सालाना कार्यक्रम ‘अजदिया भावेले’ में रजिया सज्जाद ज़हीर की कहानियों का पाठ एवं मंचन

समकालीन जनमत
28 अक्टूबर, पटना आज कोरस के सालाना कार्यक्रम ‘अजदिया भावेले’ की शृंखला में इस बार साहित्यकार, नाट्यकर्मी व एक्टिविस्ट रज़िया सज़्ज़ाद ज़हीर के जन्म-शती वर्ष...
कविताजनमत

प्रेम के बहाने एक अलग तरह का सामाजिक विमर्श रचती पल्लवी त्रिवेदी की कविताएँ

उमा राग
निरंजन श्रोत्रिय युवा कवयित्री पल्लवी त्रिवेदी की कविताओं को महज़ ‘प्रेम कविताएँ’ या रागात्मकता की कविताएँ कहने में मुझे ऐतराज़ है। पल्लवी की विलक्षण काव्य-प्रतिभा...
स्मृति

हृदय में व्यथा का रिसाव करती हैं सुरेश सेन निशांत की कविता

समकालीन जनमत
श्याम अंकुरम सुरेश सेन निशांत नहीं रहे. स्तब्धकारी खबर ! मेरा उनसे परिचय राजवर्धन के संपादन में कविता संकलन ‘स्वर –एकादश ‘ से हुआ था....
स्मृति

पहाड़ और नदियों ने खो दिया अपने कवि को

समकालीन जनमत
आज जब पहाड़, जंगल और जमीन सहित पूरी मानवता खतरे में है और उन्हें बचाने के लिए संघर्ष जारी है, ऐसे में एक कवि का...
कविताजनमत

नित्यानंद गायेन की कविताओं में प्रेम अपनी सच्ची ज़िद के साथ अभिव्यक्त होता है

उमा राग
कुमार मुकुल   नित्यानंद जब मिलते हैं तो लगातार बोलते हैं, तब मुझे अपने पुराने दिन याद आते हैं। कवियों की बातें , ‘कांट का...
साहित्य-संस्कृति

तेलंगाना एक बार फिर से जमींदारों के शिकंजे में कस गया है

समकालीन जनमत
एन. आर.श्याम “भारतवर्ष में समय-समय पर उत्पादन के साधनों पर मालिकाना हक, उत्पादन संबंधों में बदलाव और उत्पादन करने वाली शक्तियों की उन्नति, अभिवृद्धि के...
ग्राउन्ड रिपोर्टजनमतशख्सियतस्मृति

निराला की कविताएँ अपने समय के अंधेरे को पहचानने में हमारी मदद करती हैं: प्रो. विजय बहादुर सिंह

उमा राग
विवेक निराला    निराला की 57 वीं पुण्यतिथि पर आयोजित ‘छायावाद और निराला :कुछ पुनर्विचार’ विषय पर ‘निराला के निमित्त’ की ओर से आयोजित गोष्ठी...
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