समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

पूर्वांचल के जातीय कथाकार हैं विवेकी राय

समकालीन जनमत
(कथाकार विवेकी राय का जन्मदिन 19 नवम्बर को और पुण्यतिथि 22 नवंबर को होती है । विवेकी राय की स्मृति में प्रस्तुत है युवा आलोचक...
साहित्य-संस्कृति

वर्ष 2018 का ‘वारियर एल्विन सम्मान’ पोस्तोबाला को

समकालीन जनमत
लोककला एवं संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान के लिए 'दुनिया इन दिनों' पत्रिका द्वारा दिया जाने वाला प्रसिद्ध 'वारियर एल्विन सम्मान' वर्ष 2018 के लिए पश्चिम...
सिनेमा

आनंद पटवर्धन को मिला IDFA (नीदरलैंड) का प्रतिष्ठित फ़ीचर लेंथ डाक्यूमेंटरी का बेस्ट अवार्ड

संजय जोशी
हिन्दुस्तान के शीर्ष दस्तावेज़ी फ़िल्मकार आनंद पटवर्धन को कल शाम अमेस्टरडम(नीदरलैंड) में संपन्न हुए IDFA फ़ेस्टिवल में सर्वसम्मति से वहां के शीर्ष अवार्ड ‘फ़ीचर लेंथ...
स्मृति

अलविदा फ़हमीदा रियाज़

समकालीन जनमत
प्रो. चमनलाल सोने से पहले आदतन कल रात टिवीटर/फ़ेसबुक/व्हाट्सप्प पर एक नज़र डाल रहा था कि डॉ अखलाक ने फहमीदा के न रहने का संदेश...
ख़बरस्मृति

फ़हमीदा रियाज़ का जाना

समकालीन जनमत
अशोक पांडेय “कब तक मुझ से प्यार करोगे? कब तक? जब तक मेरे रहम से बच्चे की तख़्लीक़ का ख़ून बहेगा जब तक मेरा रंग...
साहित्य-संस्कृति

न्याय के सवाल को छोड़कर सामाजिक सौहार्द की बात ही नहीं हो सकती : प्रो राजीव भार्गव

सुधीर सुमन
नई दिल्ली. ‘‘ जिस समाज में किसी एक समूह या समुदाय का वर्चस्व हो, जहां हिंसा, दमन-उत्पीड़न और शोषण हो, जहां असहिष्णुता हर नुक्कड़ पर...
स्मृति

देवी प्रसाद चट्टोपाध्याय: भारतीय दर्शन में भौतिकवाद के अप्रतिम अध्येता

डॉ रामायन राम
देवी प्रसाद चट्टोपाध्याय ने भारतीय परंपरा मे भौतिकवाद तथा वैज्ञानिक चिंतन प्रणाली पर बहुत ही गहन शोध और लेखन किया है। भारत मे कई पीढियां...
साहित्य-संस्कृति

विभाजन को समझे बिना हल नहीं होगा सौहार्द का प्रश्न

आशुतोष कुमार
सामाजिक सौहार्द का मतलब केवल शांतिपूर्ण सहअस्तित्व नहीं होता. शांति तो ताकत और दमन से भी कायम की जा सकती है. शांति तो युद्धविराम की...
कविताजनमत

स्त्री की खुली दुनिया का वृत्त हमारे समक्ष प्रस्तुत करतीं कविताएँ

उमा राग
अच्युतानंद मिश्र निर्मला गर्ग की कविताओं में मौजूद सहजता ध्यान आकृष्ट करती है. सहजता से यहाँ तात्पर्य सरलीकरण नहीं है, बल्कि सहजता का अर्थ है...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

मुक्तिबोध मेरे लिए -अच्युतानंद मिश्र

समकालीन जनमत
अच्युतानंद मिश्र फ़िराक ने अपने प्रतिनिधि संग्रह ‘बज़्मे जिंदगी रंगे शायरी’ के संदर्भ में लिखा है, जिसने इसे पढ़ लिया उसने मेरी शायरी का हीरा...
साहित्य-संस्कृति

मुक्तिबोध आस्था देते हैं मुक्ति नहीं

समकालीन जनमत
प्रियदर्शन मुक्तिबोध और ख़ासकर उनकी कविता ‘अंधेरे में’ पर लिखने की मुश्किलें कई हैं। कुछ का वास्ता मुक्तिबोध के अपने बेहद जटिल काव्य विन्यास से...
साहित्य-संस्कृति

अंतःकरण और मुक्तिबोध के बहाने

रामजी राय
(मुक्तिबोध के जन्मदिन पर समकालीन जनमत के प्रधान संपादक रामजी राय का आलेख) 2017 में मुक्तिबोध की जन्मशताब्दी गुज़री है और 2018 मार्क्स के जन्म...
साहित्य-संस्कृति

आधुनिक सभ्यता-संकट की प्रतीक-रेखा (मुक्तिबोध और स्त्री-प्रश्न)

प्रणय कृष्ण
मुक्तिबोध जयंती पर विशेष   स्त्री स्वाधीनता और उस स्वाधीनता की अभिव्यक्ति के प्रश्न को जितनी गहनता और विस्तार मुक्तिबोध-साहित्य में मिला वैसा हिन्दी साहित्य...
कविताजनमत

घर की सांकल खोलता हुआ कवि हरपाल

उमा राग
बजरंग बिहारी   कविता जीवन का सृजनात्मक पुनर्कथन है। इस सृजन में यथार्थ, कल्पना, आकांक्षा, आशंका और संघर्ष के तत्व शामिल रहते हैं। रचनाकार अपनी प्रवृत्ति,...
स्मृति

वो सूरतें इलाही किस मुल्क बसतियाँ हैं , अब जिनके देखने को आंखें तरसतियाँ हैं

समकालीन जनमत
15वीं बरसी पर कॉ मंजू देवी की यादें   संतोष सहर   वो सूरतें इलाही किस मुल्क बसतियाँ हैं अब जिनके देखने को आंखें तरसतियाँ...
कविता

मामूली दृश्यों से जीवन का विचलित करने वाला वृत्तान्त तैयार करतीं शुभा की कविताएँ

उमा राग
मंगलेश डबराल   शुभा शायद हिंदी की पहली कवि हैं, जो अभी तक कोई भी संग्रह न छपवाने के बावजूद काफ़ी पहले विलक्षण  कवि के...
स्मृति

कामरेड शाह चाँद की याद

रामजी राय
जाने कितनी यादे हैं कामरेड शाह चाँद की। आईपीएफ और फिर इंकलाबी मुस्लिम कान्फ्रेंस में साथ काम करने की। कामरेड तकी रहीम से नोक-झोंक फिर...
साहित्य-संस्कृति

समानता का नया यूटोपिया रचती है ‘ देह ही देश ‘ – अनामिका

समकालीन जनमत
हिन्दू कालेज में प्रोफ़ेसर गरिमा श्रीवास्तव की किताब ‘ देह ही देश ‘ पर परिसंवाद  डॉ रचना सिंह   दिल्ली। ”देह ही देश” केवल यूरोप की...
स्मृति

रमाकांत द्विवेदी ‘रमता’ : क्रांति की रागिनी का गायक

सुधीर सुमन
101 वीं जयंती 30 अक्टूबर 2018 एक आलेख   ‘क्रांति के रागिनी हम त गइबे करब/ केहू का ना सोहाला त हम का करीं’, ‘हमनी...
ख़बरनाटकसाहित्य-संस्कृति

कोरस के सालाना कार्यक्रम ‘अजदिया भावेले’ में रजिया सज्जाद ज़हीर की कहानियों का पाठ एवं मंचन

समकालीन जनमत
28 अक्टूबर, पटना आज कोरस के सालाना कार्यक्रम ‘अजदिया भावेले’ की शृंखला में इस बार साहित्यकार, नाट्यकर्मी व एक्टिविस्ट रज़िया सज़्ज़ाद ज़हीर के जन्म-शती वर्ष...
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