समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविता

स्त्री जीवन के अनचीन्हे सच को दर्ज करतीं रजनी अनुरागी की कविताएँ

समकालीन जनमत
संजीव कौशल रजनी अनुरागी की कविताओं से गुज़रना, शरीर के ताप को सीधे महसूस करना है वह ताप जिसमें धीरे धीरे एक स्त्री का जीवन...
भाषा

उर्दू की क्लास : “क़वायद तेज़” का मतलब

समकालीन जनमत
( युवा पत्रकार और साहित्यप्रेमी महताब आलम  की श्रृंखला ‘उर्दू की क्लास’ की छठी क़िस्त में “क़वायद तेज़” के मायने के बहाने उर्दू भाषा के...
भाषा

उर्दू की क्लास : “मौज़ूं” और “मौज़ू” का फ़र्क़

समकालीन जनमत
( युवा पत्रकार और साहित्यप्रेमी महताब आलम  की श्रृंखला ‘उर्दू की क्लास’ की पांचवीं   क़िस्त में “मौज़ूं” और “मौज़ू” के फ़र्क़ के बहाने उर्दू भाषा...
कविता

समवेत की आवाज़ हैं मनोज कुमार झा की कविताएँ

समकालीन जनमत
सन्तोष कुमार चतुर्वेदी अब तलक जिन क्षेत्रों को दुर्गम समझा जाता था, आज की कविता वहाँ की यात्रा सहज ही कर लेती है। अब तलक...
पुस्तक

‘ रोजा लक्जेमबर्ग : द बायोग्राफी ’

गोपाल प्रधान
2019 में वर्सो से जे पी नेट्ल की किताब ‘ रोजा लक्जेमबर्ग: ए बायोग्राफी’ का प्रकाशन हुआ । दो खंडों में लिखी इस जीवनी की...
भाषा

उर्दू की क्लास : “आज होगा बड़ा ख़ुलासा!”

समकालीन जनमत
( युवा पत्रकार और साहित्यप्रेमी महताब आलम  की श्रृंखला ‘उर्दू की क्लास’ की  चौथी  क़िस्त में “ख़ुलासा” और “बेग़म” के मायने के बहाने उर्दू भाषा...
कविता

सियाह समय से परे एक नई सुबह की दरियाफ़्त करतीं शंकरानंद की कविताएँ

समकालीन जनमत
प्रभात मिलिंद युवा कवि शंकरानंद की इन कविताओं को पढ़ना अपनी ही खोई हुई ज़मीन की तरफ़ फ़िर से लौटने, अपनी ही विस्मृत जड़ों को...
स्मृति

‘अल्लाह-ओम् ’ : पंडित जसराज की याद

समकालीन जनमत
देवराज त्रिपाठी    ‘आया है सो जाएगा ’…..सूरज उगा है तो अस्त होगा ही. लेकिन ढलते सूरज की रोशनी में कुछ पल ठहरकर ये सोचना...
फ़ोटोग्राफ़ी

2400 वर्ग फ़ीट की तस्वीर  

संजय जोशी
( प्रतिरोध का सिनेमा अभियान अपनी घुमंतू सिनेमा यात्राओं की वजह से भी आम लोगों के बीच अर्थपूर्ण सिनेमा को सार्थक तरह से  पहुंचाने में...
सिनेमा

औरतों की बहुत सी कहानियाँ हमारा इंतज़ार कर रही हैं

समकालीन जनमत
(कोविड -19 की त्रासदी ने हमारे जीवन के सभी पहलुओं पर असर डाला है . हमारी सिनेमा बिरादरी के क्रियाकलाप पर भी इसका बहुत प्रभाव...
व्यंग्य

हम ट्रिपल आज़ाद लोग

तीसरी आज़ादी अयोध्या में बाबरी मस्जिद तोड़ कर हासिल की गई ज़मीन पर राम मन्दिर का शिलान्यास करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने 5 अगस्त की...
कविता

अनुराधा अनन्या की कविताएँ आधी आबादी के पूरे सच को उजागर करती हैं

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय   युवा कवयित्री अनुराधा अनन्या की कविताओं में स्त्री-विमर्श किन्हीं सिद्धान्तों या भारी भरकम वैचारिक जुगाली के बजाय एक व्यावहारिक और यथार्थ रूप...
भाषा

उर्दू की क्लास : जामिया “यूनिवर्सिटी” कहना कितना मुनासिब ?

समकालीन जनमत
( युवा पत्रकार और साहित्यप्रेमी महताब आलम  की श्रृंखला ‘उर्दू की क्लास’ की तीसरी क़िस्त में जामिया के मायने के बहाने उर्दू भाषा के पेच-ओ-ख़म...
व्यंग्य

 चंद तस्वीर-ए-बुताँ

समकालीन जनमत
 उर्दू के प्रसिद्ध लेखक मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी का यह हास्य-व्यंग्य लेख उनकी पुस्तक ख़ाकम बदहन (मेरे मुँह में ख़ाक ) से लिया गया है. अनुवाद ...
स्मृति

आंदोलन-संघर्ष के मोर्चे पर हमेशा याद आएंगे त्रेपन भाई

इन्द्रेश मैखुरी
यह 1998 का साल था. उस साल उच्चतम न्यायालय ने 02 अक्टूबर 1994 को उत्तराखंड आंदोलन के दौरान गठित मुजफ्फरनगर कांड के संदर्भ में 1996...
स्मृति

कौमी एकता और आम अवाम के जनतांत्रिक संघर्षों की आवाज थे राहत इंदौरी : जसम

समकालीन जनमत
जन संस्कृति मंच ने सुविख्यात शायर राहत इंदौरी की कोरोना संक्रमण के दौरान हृदयाघात से हुई मौत को देश की साझी संस्कृति और हिंदुस्तानी साहित्य...
पुस्तक

विनोद पदरज के ‘देस’ की कविताओं में भारतीय लोक अपनी विडंबनाओं व ताकत के साथ व्यक्त हुआ है

कुमार मुकुल
  ‘देस’ में संकलित विनोद पदरज की कविताएँ इंडिया से अलग भारतीय लोक की सकारात्‍मक कथाओं को उनकी बहुस्‍तरीय बुनावट के साथ प्रस्‍तुत करती हैं। इन...
भाषा

उर्दू की क्लास : “क़मर” और “कमर” में फ़र्क़

समकालीन जनमत
( छापाखाने के आविष्कार के बाद तमाम चीज़ें  काग़ज़ के पन्नों में छपकर किताब की शक्ल में आने से भाषा एक नयी चाल में ढलने...
कविता

गौरव भारती की कविताएँ अपने समय और सियासत की जटिलताओं की शिनाख़्त हैं

समकालीन जनमत
निशांत कोई कवि या कविता तब हमारा ध्यान खींचती है, जब वो हमारे भीतर के तारों को धीरे से छू दे । हमारे भावलोक में...
पुस्तक

पूंजीवाद का संक्षिप्त इतिहास

गोपाल प्रधान
2017 में बाडली हेड से यनाइस वरफ़काइस की किताब ‘टाकिंग टु माइ डाटर एबाउट द इकोनामी: ए ब्रीफ़ हिस्ट्री आफ़ कैपिटलिज्म’ का प्रकाशन हुआ। ग्रीक...
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