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भाषा

उर्दू की क्लास : “ख़िलाफ़त” और “मुख़ालिफ़त” का फ़र्क़

( युवा पत्रकार और साहित्यप्रेमी महताब आलम  की श्रृंखला ‘उर्दू की क्लास’ की सातवीं  क़िस्त में “ख़िलाफ़त” और “मुख़ालिफ़त” के फ़र्क़ के मायने के बहाने उर्दू भाषा के पेच-ओ-ख़म को जानने की कोशिश . यह श्रृंखला  हर रविवार प्रकाशित हो रही है . सं.)

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अकसर लोग विरोध  के लिए “ख़िलाफ़त” लफ्ज़ का इस्तेमाल करते हैं , जो की मुनासिब  (उचित) नहीं है।ख़िलाफ़त का मतलब होता है : इस्लामी शासन व्यवस्था, जिसका प्रमुख ख़लीफ़ा कहलाता है। इसीलिए जब “विरोध” के लिए “ख़िलाफ़त” शब्द का इस्तेमाल किया जाता है तो उसका “अनर्थ” भी निकल सकता है। जैसे कोई ये कहे या लिखे कि : मैंने ऐसा उनकी “ख़िलाफ़त” में किया।

उर्दू में “विरोध” के “मुख़ालिफ़त” शब्द है और “विरोधी” के लिए “मुख़ालिफ़”. उदहारण : मैं उसके ख़िलाफ़ (विरोध में) हूँ। मैं उसका “मुख़ालिफ़” (विरोधी) हूँ या फिर मैं उसके इस प्रस्ताव की मुख़ालिफ़त (विरोध) करता हूँ।

इसी बात पर “सादिक़ हुसैन” का ये शेर सुनिये :

“तुंदी-ए-बाद-ए-मुख़ालिफ़ से न घबरा ऐ उक़ाब

ये तो चलती है तुझे ऊँचा उड़ाने के लिए”

 

“बाज़ी” और “बाजी” का फ़र्क़

“मेरा दिल था अकेला

तूने खेल ऐसा खेला

तेरी याद मे जागूं रात भर

बाज़ीगर ओ बाज़ीगर

तू है बड़ा जादूगर

बाज़ीगर ओ बाज़ीगर

तू है बड़ा जादूगर…”

बाज़ीगर (1993) फ़िल्म का ये गाना तो सुना ही होगा आपने और “बाज़ीगर” का मतलब भी जानते होंगे : तमाशा करने वाला, धोका देने वाला, रिस्क लेने वाला, जुआरी या अंग्रेजी में कहें तो juggler या gambler.

लोग इसे “बाजीगर” लिखते और बोलते देखे गए हैं। जैसे : “आज का दिन : जब हार कर भी ‘बाजीगर’ बनीं भारतीय महिला क्रिकेट टीम” ,”महाराष्ट्र की राजनीति के बाजीगर शरद पवार लॉकडाउन में अपनी बेटी सुप्रिया सुले को भी शतरंज में दे रहे हैं मात”।

इन दोनों वाक्यों में ‘बाजीगर’ शब्द का इस्तेमाल उसी सेंस में हुआ है। अलबत्ता ज के नीचे “नुक़्ता” न लगे होने की वजह से confusion का इमकान (संभावना) रहता है क्योंकि नुक़्ता न लगे होने की वजह से इसे बाजीगर पढ़ा जायेगा जिसका कोई ‘सेंस नहीं बनता’।

वो इसलिए क्योंकि उर्दू में “बाजी” का मतलब होता है बड़ी बहन और “बाजीगर” जैसा कोई शब्द नहीं है जिसका मतलब भी “बाज़ीगर” वाला हो।  कहने का मतलब ये है कि “बाज़ी” और “बाजी” दो अलग अलग शब्द हैं।

 

इसी तरह “बाज़” और “बाज” भी अलग अलग शब्द हैं।  “बाज़” का मतलब eagle या hawk जबकि “बाज” का मतलब है कर, चुंगी या tax, duty, cess.

वैसे “बाज़” का एक मतलब “कुछ”, “चंद”, “कोई-कोई”,”कभी” या few, some भी होता है। जैसे उर्दू में लिखते/बोलते हैं : “बाज़ दफ़ा/बाज़ औक़ात ऐसा होता है” मतलब कई बार या कभी कभी ऐसा होता है या फिर “बाज़ हल्क़ों (कुछ क्षेत्रों) के नताएज (नतीजा का बहुवचन) से ऐसा मालूम होता है कि…”।

लेकिन उर्दू में दोनों का “हिज्जे” (spelling) अलग-अलग होता है। चिड़या मतलब वाले “बाज़” का हिज्जे “باز” होता है जबकि कुछ मतलब वाले बाज़ का हिज्जे “بعض” होता है। “बाज़” के कुछ और meanings भी होते हैं लेकिन उस पर कभी और।

 

(महताब आलम एक बहुभाषी पत्रकार और लेखक हैं। हाल तक वो ‘द वायर’ (उर्दू) के संपादक थे और इन दिनों ‘द वायर’ (अंग्रेज़ी, उर्दू और हिंदी) के अलावा ‘बीबीसी उर्दू’, ‘डाउन टू अर्थ’, ‘इंकलाब उर्दू’ दैनिक के लिए राजनीति, साहित्य, मानवाधिकार, पर्यावरण, मीडिया और क़ानून से जुड़े मुद्दों पर स्वतंत्र लेखन करते हैं। ट्विटर पर इनसे @MahtabNama पर जुड़ा जा सकता है ।)

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इस श्रृंखला की पिछली कड़ियों के लिंक यहाँ देखे जा सकते हैं :

उर्दू की क्लास : नुक़्ते के हेर फेर से ख़ुदा जुदा हो जाता है

उर्दू की क्लास : क़मर और कमर में फ़र्क़

उर्दू की क्लास : जामिया यूनिवर्सिटी कहना कितना मुनासिब ?

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