समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविता

उर्मिल मोंगा की कविताएँ स्वप्न और उम्मीद जगाती हैं

समकालीन जनमत
कौशल किशोर कहा जाता है कि मानवीय दर्द का एहसास व अनुभूति तथा मुक्ति की कलात्मक अभिव्यक्ति ही आज की कविता है। भाव, विचार व...
स्मृति

सईद शेख : गुम हो गई एक प्रवासी की आवाज

कौशल किशोर
 सईद शेख नहीं रहे। मन-मस्तिष्क को झटका लगा। पुरानी यादें ताजा हो गईं। मेरा उनसे सजीव संबंध नहीं था। पर उनके जीवन और उनके साथ...
कविता

यूनुस ख़ान की कविताएँ जीवन और समय की जटिलताओं को दर्ज करती हैं

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय सरलता का शिल्प सबसे जटिल होता है। जीवन और समय की जटिलताओं को कविता के जटिल शिल्प में ढाल देना एक रूपान्तरण हो...
स्मृति

सी बी सिंह : आंदोलनों की आंच में तपा काॅमरेड

समकालीन जनमत
स्मृति दिवस (15 फरवरी) कॉमरेड सी बी सिंह का निधन पिछले साल आज के दिन 15 फरवरी को हुआ था। वे ‘समाज के, समाज के...
स्मृति

राजकुमार : जब तक जिया रंग भरते जिया

बलभद्र
पहले राकेश दिवाकर गए और अब राजकुमार सिंह। ये दो दो आघात बहुत भारी हैं। लगभग एक साल कैंसर से जूझते हुए राजकुमार सिंह का...
कविता

बोधिसत्व की कविताएँ सच सरेआम कहने के हुनर का शिल्प हैं

समकालीन जनमत
भरत प्रसाद बोधिसत्व की पहचान 90 के दशक के प्रमुख कवि के तौर पर बनी, जो आजतक कायम है। हम जो नदियों का संगम हैं-2002...
सिनेमा

समाज से सवाल करती फिल्में सेम्बी और वध

समकालीन जनमत
प्रशांत विप्लवी 2020 के अंतिम माह में बाल-शोषण पर दो फिल्में आईं– सेम्बी और वध। सेम्बी तमिल भाषा की फ़िल्म है और वध हिन्दी मुख्यधारा...
कविता

सुनीता ‘अबाबील’ की कविताएँ स्त्री पीड़ा की अंतर यात्रा हैं

समकालीन जनमत
हीरालाल राजस्थानी बेशक ही दलित व हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श को स्थान मिलता रहा है। खासतौर पर कविता विधा में, जहाँ शुरुआती दौर में...
साहित्य-संस्कृति

प्रतिरोध के बिना कोई कविता समकालीन नहीं हो सकती : डॉ. राकेश शर्मा

सातवें गोरख स्मृति आयोजन में कविताओं और गीतों का पाठ पटना। ‘‘जो कविता सत्ता और व्यवस्था से तथा अंधेरे से समझौता करके चलती है, वह प्रतिरोध...
साहित्य-संस्कृति

संगम नगरी में ‘ सिरजन ’

समकालीन जनमत
माही  बच्चों के समाजीकरण में तमाम संगठनों, संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यूं तो ये जिम्मा स्कूल नामक शैक्षणिक संस्थाओं का सबसे अधिक माना...
साहित्य-संस्कृति

“ मन के बाग में आजादी के फूलों के कवि हैं गोरख पाण्डेय ”

समकालीन जनमत
गिरिडीह (झारखंड)। जनकवि गोरख पांडेय की स्मृति में 29 जनवरी को रमा कॉम्प्लेक्स, मकतपुर, गिरिडीह के स्मार्ट ड्रीम एकेडमी में काव्यपाठ सह परिचर्चा का आयोजन...
स्मृति

गोरख स्मृति दिवस की पूर्व संध्या पर हैदराबाद विश्वविद्यालय में कार्यक्रम

समकालीन जनमत
कल 28 जनवरी गोरख स्मृति दिवस की पूर्व संध्या पर हैदराबाद विश्वविद्यालय में गोरख को उनकी कविताओं एवं गीतों के माध्यम से याद किया गया।...
कविता

रमेश ऋतंभर की कविताओं में सामूहिकता की भावना शिद्दत से अभिव्यक्त होती है

समकालीन जनमत
पंकज चौधरी समकालीन हिन्दी कविता में दो तरह की कविताएँ अधिक प्रामाणिक और विश्वसनीय कही जा सकती हैं। एक तो वे कविताएँ, जिन्हें लिखने वाले...
स्मृति

फूल और उम्मीद के कवि हैं गोरख पाण्डेय

कौशल किशोर
29 जनवरी गोरख पांडेय का स्मृति दिवस है। यह उनकी 34 वीं पुण्यतिथि है। उनका जन्म 1945 (पंडित के मुंडेरवा, जिला देवरिया, उत्तर प्रदेश) में...
साहित्य-संस्कृति

“ सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिंद फ़ौज ”  पुस्तक का लोकार्पण

समकालीन जनमत
दिल्ली। आईटीओ स्थित सुरजीत भवन सभागार में 23 जनवरी की शाम सुभाषचंद्र बोस की 126वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में अशोक तिवारी...
कविता

श्याम अविनाश की कविता: अदृश्य से जन्मता है दृश्य

समकालीन जनमत
आनंद बहादुर   …दूर नीम का एक पेड़ भींग रहा है या नहीं दूर से दिखता नहीं है किसी का भींगना… मांदल की आवाज के...
स्मृति

रामकृष्ण का पूरा जीवन न्याय, समानता और मानवीय गरिमा के लिये संघर्षों को समर्पित था

समकालीन जनमत
लखनऊ। नागरिक परिषद व राज-समाज के संयुक्त तत्वावधान में प्रसिद्ध सोशल एक्टिविस्ट रामकृष्ण की स्मृति में श्रध्दांजलि सभा का आयोजन 21 जनवरी को मवैया पार्क,...
साहित्य-संस्कृति

‘ शैक्षिक दखल ’ का ‘मेरे जीवन में पुस्तकालय ’ : पुस्तकालयों से आत्मीय संवाद

समकालीन जनमत
पवन चौहान ‘शैक्षिक दखल’-उस पत्रिका का नाम है जो शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर बहुत ही सुंदर तरीके के साथ बेबाकी से बात करती है।...
कविता

दीपेश कुमार की कविताएँ सामाजिक विषमताओं की थाह लेती हैं

समकालीन जनमत
विपिन चौधरी युवा कवि दिपेश कुमार की कलम अभी नई है इन्होंने अपनी इन चारों कविताओं में भारतीय समाज के उस हिस्से को केंद्र बनाया...
कविता

अरुण आदित्य वक्र उक्ति के सहज कवि हैं

समकालीन जनमत
बोधिसत्व कवि अरुण आदित्य की कविता हिंदी में कहाँ उपस्थित है इस बात का आकलन इन पंद्रह कविताओं से नहीं किया जा सकता। वे स्थापित...
Fearlessly expressing peoples opinion