अगर कहीं मैं तोता होता, तो क्या होता ?

कई दशक पहले एक हिन्दी कवि ने एक कविता लिखी थी ‘अगर कहीं मैं तोता होता, तो क्या होता ?’ पांच वर्ष पहले सुप्रीम कार्ट ने सी बी आई को, जो देश की बसे बड़ी जांच एजेन्सी है, पिंजड़े में बन्द तोता कहा था। केन्द्रीय जांच ब्यूरों यानी सीबीआई के पूर्व निदेशक जोगेन्द्र सिंह ने 1996-97 में करीब बीस वर्ष पहले ही यह कहा था कि राजनीतिक वर्ग कभी इस संस्था को स्वतंत्रता नहीं देगा। सी बी आई का सिद्धान्त है – उद्योग, निष्पक्षता और ईमानदारी। 1941 में इसका गठन…

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आज का भारत और गांधी का भारत

  आज के भारत की कल्पना चार वर्ष पहले तक शायद ही किसी ने की थी। अहिंसा से हिंसा की ओर, सत्य से असत्य की ओर और ‘सत्याग्रह’ से मिथ्याग्रह की ओर देश बढ़ रहा है और हम सब गांधी की 150 वीं वर्षगांठ धूमधाम से मना रहे हैं। सरकारी योजनाओं की कमी नहीं है। प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के लेख समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रहे हैं। वे बापू की 150 वीं जयन्ती के आयोजनों का शुभारम्भ कर रहे हैं। उन्होंने बापू के समानता और समावेशी विकास के सिद्धान्त की…

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