सुरों के उस्ताद, सुनने की उस्तादी

दिनेश चौधरी हरिभाई यानी पंडित हरिप्रसाद चौरसिया जी हमेशा थोड़ी जल्दी में होते हैं। वे आँधी की तरह आये, बाँसुरी की तान छेड़ी, खाना खाये बगैर किसमिस के चार दाने मुंह में डाले और तूफान की तरह चले गये। गाड़ी से उतरकर मंच पर विराजने और लौटकर फिर अपने वाहन में सवार होने तक लोगों ने उन्हें घेरे रखा था। किसी को उनके आटोग्राफ चाहिये थे तो किसी को उनके साथ फोटू खिंचानी थी। कुछ लोग एक सेलिब्रिटी के साथ महज चंद पल गुजारने का सुख लूटना चाहते थे, सो…

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महात्‍मा गाँधी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय के कुलपति धमकी देते हैं -कौओं की तरह टांग दिये जाओगे

पटना/ नई दिल्ली. महात्‍मा गाँधी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय, मोतिहारी, बिहारके शिक्षक संघ ने कुलाध्‍यक्ष (राष्‍ट्रपति) को पत्र भेजकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अरविन्द कुमार अग्रवाल पर गंभीर आरोप लगते हुए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है. इस पत्र में शिक्षक संघ ने कुलपति पर  परिवीक्षा अवधि में शिक्षकों को बर्खास्‍त करने की धमकी देने, आरक्षण के नियमों का खुला उल्‍लंघन करने, कारण बताओ नोटिसों के द्वारा विश्‍वविद्यालय में आतंकी माहौल बनाने, यौन उत्‍पीड़न की झूठी शिकायतों द्वारा शिक्षकों का मानसिक उत्‍पीड़न करने, शिक्षकों के खिलाफ विद्यार्थियों का इस्‍तेमाल करने, अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी…

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पीएचएमसी, पटना में डॉ संजय कुमार के इलाज में लापरवाही, हालत बिगड़ने पर एम्स लाया गया

जानलेवा हमले में बुरी तरह घायल महात्‍मा गाँधी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय, मोतिहारी के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ संजय कुमार की हालत और बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए एम्स ले जाया गया है. पीएचएमसी, पटना में उनके इलाज में घोर लापरवाही बरती गई. इलाज के दौरान डॉ संजय 12 बार बेहोश हो हुए लेकिन चिकित्‍सकों ने बेपरवाही पूर्वक कहा कि मॉब लिंचिंग में यह सब नॉर्मल चीजें होती हैं. यही नहीं उन्हें एम्स रेफर करने में भी पीएचएमसी, पटना के जिम्मेदारों ने अड़ंगा लगाया.

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महात्‍मा गाँधी विश्‍वविद्यालय मोतिहारी के कुलपति ने पीएच.डी. डिग्री के बारे में गलत जानकारी दी

महात्‍मा गाँधी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय, मोतिहारी के शिक्षक संघ ने कुलपति प्रो. अरविन्द अग्रवाल पर पीएच.डी. के बारे में गलत जानकरी देने का आरोप लगाया है. शिक्षक संघ ने कहा है कि कुलपति प्रो. अरविंद ने अपनी पीएच.डी. उपाधि जर्मनी के प्रतिष्ठित विश्‍वविद्यालय हेडलबर्ग से दिखाई थी जबकि इनकी पीएच.डी. राजस्‍थान विश्‍वविद्यालय से है. शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय और भारत सरकार को यह जानकारी देते हुए अपनी पीएच.डी. विषयक महत्‍वपूर्ण जानकारियाँ छिपाने और गलत सूचना मंत्रालय और यूजीसी में देने के लिए कुलपति प्रो. अरविन्द अग्रवाल को अविलंब बर्खास्‍त करने और पुलिस व अदालत में उनके विरुद्ध मामला दर्ज़ कराने की मांग की है.

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प्रेमचंद का यह जो ‘हिन्दू पाठ’ है

प्रेमचंद को गलत ढ़ंग से प्रस्तुत कर संघ परिवार अपने पक्ष में हिन्दी मानस को निर्मित करने में लगा है। यह हमला एक साथ प्रेमचंद और पाठकों के मानस पर हमला है। प्रेमचंद के सामने हमेशा ‘समानता का ऊँचा लक्ष्य’ था। उन्होंने यह साफ लिखा है कि ‘धर्म और नीति का दामन पकड़ कर वहां उस लक्ष्य तक नहीं पहुंचा जा सकता’। वे पूंजीवादी सभ्यता – ‘महाजनी सभ्यता’ के विरोधी थे। प्रेमचंद के प्राचीन अध्येता गोयनका ‘महाजनी सभ्यता’ द्वारा व्यक्त आक्रोश को ‘सामाजिक’ न मानकर ‘व्यक्तिगत’ मानते थे। सवाल करते हैं ‘रहस्य’ कहानी ‘महाजनी सभ्यता’ से कहां मिलती है ?

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सरकारी खजाने से चुनावी यात्रा का औचित्य

  जावेद अनीस मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान अपने लम्बे कार्यकाल के दौरान बेहिसाब घोषणाओं, विकास के लम्बे-चौड़े  दावों और विज्ञापनबाजी में बहुत आगे साबित हुये है, वे हमेशा घोषणा मोड में रहते हैं और उनकी सरकार के चमचमाते विज्ञापन प्रदेश के साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी खुले जेब के साथ प्रसारित होते हैं जिसमें मुख्य रूप से शिवराज और उनकी सरकार की ब्रांडिंग की जाती है. अब विधान सभा चुनाव से ठीक पहले सीएम शिवराज सिंह द्वारा ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ निकली जा रही है यह पूरी तरह से एक…

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विश्व कविता : तादयूश रुज़ेविच की कविताएँ

  〈 तादयूश रुज़ेविच (9 अक्टूबर 1921-24 अप्रैल 2014) पोलैंड के कवि, नाटककार और अनुवादक थे। उनकी कविताओं के बहुत सी भाषाओं में अनुवाद हुए हैं। उनका शुमार दुनिया के सबसे बहुमुखी और सर्जनात्मक कवियों में किया जाता है। नोबेल पुरस्कार के लिए कई बार उन्हें नामित किया गया। सन 2000 में उनकी किताब ‘मदर इज लीविंग’ के लिए उन्हें पोलैंड का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ‘नाईक पुरस्कार’ प्रदान किया गया। रुज़ेविच की कविताओं में द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका साफ़  दिखाई देती है और उसे व्यक्त करते समय कवियों की…

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डॉ. संजय कुमार पर हुए बर्बर हमले के ख़िलाफ़ दिल्ली टीचर्स इनिशिएटिव का बयान

दिल्ली टीचर्स इनिशिएटिव प्रो. संजय कुमार पर हुए बर्बर हमले की कठोर शब्दों में भर्त्सना करता है. प्रो. संजय कुमार महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी, बिहार में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के पद पर कार्यरत हैं. 17 अगस्त को उन पर जानलेवा हमला किया गया. महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय शिक्षक संगठन के अध्यक्ष प्रो. प्रमोद मीणा के अनुसार कुलपति प्रो. डॉ. अरविंद अग्रवाल, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पवनेश कुमार और असिस्‍टेंट प्रोफेसर डॉ. दिनेश व्‍यास आदि के इशारे पर रचित एक षड्यंत्र के तहत अराजक तत्‍वों ने पहले डॉ. संजय कुमार के साथ…

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बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर और दिल्ली में स्वामी अग्निवेश पर हमला

सौरभ यादव   जिस समय दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अंतिम यात्रा निकाली जा रही थी, उसी दौरान बिहार के मोतिहारी जिले मे महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत, जेएनयू के पूर्व छात्र संजय कुमार पर वीसी समर्थक गुंडों ने हमला कर दिया। संजय कुमार ने थाने में दर्ज की गई अपनी शिकायत में बताया कि वो कमरे में बैठ कर अपनी पढ़ाई-लिखाई सम्बंधित कार्य कर रहे थे कि तभी 20-25 लड़को का एक झुंड आया और उन्हें पीटने…

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‘ भीड़-तंत्र’ को कैसे समझें !

कॉर्पोरेट मीडिया की अगुआई में इन दिनों सत्ता के सभी संस्थान एक हाथ से साम्प्रदायिक नफ़रत बाँट रहे हैं, दूसरे हाथ से भारत की सम्पदा-सम्प्रभुता का सौदा कर रहे हैं – देशभक्ति के नाम पर यह काम खुलेआम हो रहा है। सवाल यह है कि नफ़रत के ‘विकास’ की दक्षिणपंथी राजनीति क्या केवल अफ़वाह के दम पर संचालित है ? आमतौर पर यही माना जा रहा है जो कि पूरी तरह सही नहीं है ! हमें इस सवाल का जवाब चाहिए कि नफ़रत के ‘ ग्राहक ’ का उत्पादन कैसे हो रहा है, कहाँ हो रहा है ? दूसरी बात यह कि किसी टीकधारी को देशभक्ति की पुड़िया खिलाना इतना सरल क्यों हो रहा है ? यह ‘देशभक्त’ हिंसा हत्या की बन्द गली में ऐसे कैसे फँस जा रहा है कि असत्य-अन्याय की जयकार ही उसका कर्तव्य हो रहा है ? वैचारिक रूप से अन्धे और मानसिक रूप से बहरे इस ‘फासिस्ट’ की निर्मिति में उस राजनीति की भी कोई भूमिका बन रही है क्या – जो सामाजिक न्याय और अम्बेडकरवाद के नाम पर की जा रही है ? भक्ति भाव में पगी, देशभक्ति की सगी सामाजिक चेतना निजीकरण के किन स्रोतों से पोषित है, भेदभाव के किन मूल्यों से प्रेरित है जो इन दिनों ‘भीड़-तंत्र’ का हिस्सा बनने को अभिशप्त है.

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अटल बिहारी वाजपेयी और भारतीय दक्षिणपंथ की विकास यात्रा

आरएसएस के सिद्धांतकार गोविन्‍दाचार्य ने उन्‍हें भाजपा का उदारवादी ‘मुखौटा’ कहा था, जबकि आडवाणी भाजपा का असली चेहरा थे. वे एक ऐसे दौर में भाजपा के सर्व प्रमुख प्रतिनिधि थे जब भाजपा को अपनी साम्‍प्रदायिक फासीवादी राजनीति के लिए एक मुखौटे की जरूरत थी. प्रथम राजग गठबंधन सरकार के सहयोगियों के लिए जिन्‍हें आडवाणी या मोदी जैसे ‘कट्टर’ माने जाने वाले संघियों को समर्थन देने में असुविधा हो सकती थी, बाजपेयी का मुखौटा उनके लिए उपयोगी था.

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नुलकातोंग फर्जी मुठभेड़ : माओवादियों के नाम पर निर्दोष मूलनिवासियों की हत्या

मूलनिवासियों के साथ हमारी वृहद बातचीत और गहरी जांच-पड़ताल में यह स्पष्ट हो जाता है कि यह मुठभेड़ नहीं बल्कि मूलनिवासियों को जल-जंगल-जमीन और उनके संस्कृति से बेदखल करने के लिए ऑपरेशन प्रहार-4 था. मौके पर कोई माओवादी नहीं था बल्कि सैकड़ों की संख्या में सुरक्षा बलों के जवानों को देखकर ग्रामीण भागने और छिपने की कोशिश कर रहे थे जिन पर बिना कुछ कहे और बताए गोलियां बरसा दी गईं. मरने वालों में दो-तीन नाबालिग थे. सुकमा एसपी का बयान गलत साबित हो रहा है. पत्रकारों और सिविल सोसायटी के लोगों को स्वतंत्र रूप से इन युद्ध क्षेत्रों में जाने से पहले थाने में जानकारी देने के लिए कहा जा रहा है और बिना किसी जिम्मेदार अधिकारियों के अनुमति के जाने से रोका जा रहा है. उनके कामों में विध्न पहुंचाया जा रहा है.

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उसका भाषण था कि मक्कारी का जादू…

सौरभ यादव, शोध छात्र, दिल्ली विश्वविद्यालय 15 अगस्त, नई दिल्ली ।आज देश के 72 वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रचलित परम्परा के अनुसार प्रधानमंत्री ने डालमिया के गोद लिए लाल किले से देश को पहली बार संबोधित किया। यहां पहली बार शब्द का प्रयोग दो वजहों से किया जा रहा है । पहला तो ये कि मोदी जी को इस ‘पहली बार’ शब्द से विशेष प्रेम है, दूसरा इसलिए क्योंकि इससे पहले के प्रधानमन्त्रियों ने भारत सरकार के अधीन आने वाले लाल किले से देश को सम्बोधित किया था लेकिन हाल…

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एक और मार्क्स: वर्तमान को समझने के लिए मार्क्स द्वारा उपलब्ध कराए गए उपकरणों की जरूरत

  2018 में ब्लूम्सबरी एकेडमिक से मार्चेलो मुस्तो की इतालवी किताब का अंग्रेजी अनुवाद ‘एनादर मार्क्स: अर्ली मैनुस्क्रिप्ट्स टु द इंटरनेशनल’ प्रकाशित हुआ । अनुवाद पैट्रिक कैमिलर ने किया है । मुस्तो कहते हैं कि नए विचारों की प्रेरक क्षमता को यदि युवा होने का सबूत माना जाए तो मार्क्स बेहद युवा साबित होंगे । उनका कहना है कि पूंजीवाद के जीवन में सबसे हालिया 2008 के संकट के बाद से ही कार्ल मार्क्स के बारे में बातचीत शुरू हो गई है । बर्लिन की दीवार गिरने के बाद मार्क्स…

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नेसार नाज़ की कहानी ‘मीरबाज़ खान’

(नेसार नाज़ कथा साहित्य में बहुत परिचित नाम नहीं है | छत्तीसगढ़ के एक निहायत ही छोटे से कस्बे बैकुंठपुर (जो अब जिला मुख्यालय बन गया है) में अपनी खूबसूरत मुस्कान के साथ लंबे डग भरते इन्हें आसानी से देखा जा सकता है | आज उनकी उम्र लगभग 62 साल है, पढ़ाई के नाम पर कक्षा सातवीं पास हैं पर हैं हिन्दी, उर्दू, छत्तीसगढ़ी के उस्ताद | नेसार नाज़ का कथाकार रूप कहीं बहुत अंधेरे में खो चुका था लेकिन भला हो कवि व आईएएस अधिकारी संजय अलंग का कि…

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समय को संबोधित सुभाष राय की कविताएँ

वरिष्ठ पत्रकार एवं जनसंदेश टाइम्स के प्रधान सम्पादक सुभाष राय का कविता संग्रह भले ही देर से आया हो पर अपने समय को सम्बोधित महत्वपूर्ण कविता संग्रह है. वे लम्बे समय से लिख रहे हैं. वे एक मंजे हुए सशक्त और परिपक्व कवि हैं. उनके कविता संग्रह का शीर्षक सलीब पर सच सटीक और अपने समय को निरुपित करता है. कौन कह सकता है कि आज सच सलीब पर नहीं है. उनकी पैनी नजर अपने समय को देखती-परखती है और हर कड़वी सच्चाई को बेख़ौफ़ और बेबाकी से बयां करती है.

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स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर पटना में ‘कोरस’ द्वारा प्रतिरोध की एक शाम का आयोजन

14 अगस्त, पटना . स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कोरस द्वारा सांस्कृतिक प्रतिरोध की एक शाम का आयोजन किया गया . यह आयोजन सरकारी संरक्षण में हो रहे मुजफ्फरपुर,पटना,देवरिया समेत पूरे देश में महिलाओं पर हो रही वीभत्स यौन हिंसा के ख़िलाफ़ था. कार्यक्रम की शुरुआत 1857 के नायक अजीमुल्ला खां के गीत ‘हम हैं इसके मालिक हिंदुस्तान हमारा’ से हुई.  इसी दौरान वामदलों का कैंडिल मार्च जीपीओ गोलंबर से चलकर बुद्ध स्मृति पार्क पहुंचा . कार्यक्रम की शुरुआत 1857 के नायक अजीमुल्ला खां के गीत ‘हम हैं इसके मालिक हिंदुस्तान…

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स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर वाराणसी में निकाला गया संविधान, लोकतंत्र व आजादी बचाओ मार्च

वाराणसी। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर संविधान, लोकतंत्र व आजादी बचाओ मार्च अंबेडकर पार्क कचहरी से जिला मुख्यालय तक निकाला गया। मार्च व सभा के माध्यम से संविधान जलाने वालों को गिरफ्तार करने, उमर खालिद के हमलावरों को जेल भेजने व मिर्जापुर में दलितों पर दमन ढाने वालों पर तत्कार कार्रवाई करने की मांग उठाई गई। मार्च का आयोजन आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, इंसाफ मंच, अर्जक संघ, महिला जागृति समिति व भाकपा माले द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। सभा को संबोधित करते हुए एबीएसएस के जिला अध्यक्ष श्याम…

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उमर खालिद पर हुए हमले से उठते सवाल

दिल्ली के कन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित ‘ख़ौफ़ से आज़ादी’ नामक कार्यक्रम में शामिल होने आए जेएनयू के शोध छात्र और एक्टिविस्ट उमर खालिद पर एक पिस्टलधारी ने सोमवार को हमला कर दिया. स्वतंत्रता दिवस से ठीक दो दिन पहले कन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में हुए इस हमले से एक तरफ तो इस संवेदनशील इलाके की सुरक्षा का प्रश्न सामने आ रहा है वही दूसरी तरफ संसद मार्ग थाने पर दिल्ली पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने में की जा रही आनाकानी से इस हमले को सत्ता का संरक्षण मिलने की सम्भावना भी व्यक्त की जा रही है.

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‘कुछ नॉस्टैल्जिया तो है’ हेमंत कुमार की कहानी ‘रज्जब अली’ में

(कथाकार हेमंत कुमार की कहानी ‘ रज्जब अली ’ पत्रिका ‘ पल-प्रतिपल ’ में प्रकाशित हुई है. इस कहानी की विषयवस्तु, शिल्प और भाषा को लेकर काफी चर्चा हो रही है. कहानी पर चर्चा के उद्देश्य से समकालीन जनमत ने 22 जुलाई को इसे प्रकाशित किया था. कहानी पर पहली टिप्पणी युवा आलोचक डॉ. रामायन राम की आई जिसे हमने प्रकाशित किया है, दूसरी टिप्पणी जगन्नाथ दुबे की आई जो डॉ. रामायन राम द्वारा उठाए गए सवालों से भी टकराती है . इस कहानी पर राजन विरूप की टिप्पणी भी…

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