कविताजनमत ज़मीनी हक़ीक़त बयाँ करतीं चंद्र की कविताएँसमकालीन जनमतFebruary 24, 2019February 24, 2019 by समकालीन जनमतFebruary 24, 2019February 24, 201902675 कुमार मुकुल चंद्र मेरी आज तक की जानकारी में पहले ऐसे व्यक्ति हैं जो खेती-बाड़ी में, मजूरी में पिसते अंतिम आदमी का जीवन जीते हुए पढ़ना-लिखना...
कविताजनमत बादलों में आकार की खोज: रमणिका गुप्ता की कविताईसमकालीन जनमतFebruary 17, 2019February 17, 2019 by समकालीन जनमतFebruary 17, 2019February 17, 20192 3210 बजरंग बिहारी तिवारी नारीवादी आंदोलन का दूसरा दौर था. ‘कल्ट ऑफ़ डोमिस्टिसिटी’ को चुनौती दी जा चुकी थी. राजनीति में स्त्री की उपस्थिति को औचित्यपूर्ण,...
कविताजनमत ज्योत्सना की कविताएँ स्त्री-मन की करुणा और सम्वेदना का समकालीन पाठ हैंसमकालीन जनमतFebruary 10, 2019February 10, 2019 by समकालीन जनमतFebruary 10, 2019February 10, 201903205 देवेंद्र आर्य ज्योत्सना की कविताएँ स्त्री-मन की करुणा और सम्वेदना का समकालीन पाठ पेश करती हैं , पर उनका समकाल विद्रूप या भौकाल बन कर...
कविता कविता के सोलह दस्तावेज़ : गोरख की भोजपुरी कविताएँमृत्युंजयJanuary 29, 2019January 29, 2026 by मृत्युंजयJanuary 29, 2019January 29, 202602759 गोरख का काव्य-संसार गहन द्वंद्वात्मक है। उसमें 70 के दशक का उद्दाम वेग और 80 के दशक का ठहराव एक साथ है। सधी हुई दिल...
कविता ‘ गोरख की यादें, उनकी रचनाएँ हम सबको जीने की वजह देती हैं ’समकालीन जनमतJanuary 29, 2019January 29, 2026 by समकालीन जनमतJanuary 29, 2019January 29, 202602866 जलेश्वर उपाध्याय कविता और प्रेम दो ऐसी चीजें हैं जहाँ मनुष्य होने का मुझे बोध होता है। प्रेम मुझे समाज से मिलता है और मैं...
कवितास्मृति गोरख के काव्य में सादगी, अभिधा का सौंदर्य है-चन्द्रेश्वरसमकालीन जनमतJanuary 28, 2019 by समकालीन जनमतJanuary 28, 20194 3126 गोरख पाण्डेय की स्मृति में लखनऊ में कार्यक्रम शीर्षस्थ कथा लेखिका कृष्णा सोबती को श्रद्धांजलि दी गई लखनऊ. हिन्दी कविता की जो सुदीर्घ परम्परा है,...
कविता स्त्री को उसके वास्तविक रूप में पहचाने जाने की ज़िद हैं शैलजा की कविताएँसमकालीन जनमतJanuary 27, 2019March 1, 2019 by समकालीन जनमतJanuary 27, 2019March 1, 20193 5200 दीपक कुमार शैलजा पाठक से परिचय मित्र पीयूष द्वारा शेयर की गई उनकी कविता ‘कुसुम कुमारी’ के माध्यम से हुआ। पहली ही नजर में इस...
कविता मानवीय रिश्तों की पहचान के कवि हैं गौरव पाण्डेयसमकालीन जनमतJanuary 20, 2019January 24, 2019 by समकालीन जनमतJanuary 20, 2019January 24, 201903765 युवतम कवि गौरव पाण्डेय की ये कविताएँ पढ़कर अचरज होता है कि इतनी महीन संवेदनाओं वाला यह कवि अब तक कहाँ गुम था! घर-परिवार और...
कविता जटिल यथार्थ का सरल कवि जसबीर त्यागीसमकालीन जनमतJanuary 13, 2019January 14, 2019 by समकालीन जनमतJanuary 13, 2019January 14, 20194 2699 संजीव कौशल जसबीर त्यागी आम जीवन में जितने सहज और सरल हैं वही सहजता और सरलता उनकी कविताओं में भी देखी जा सकती है लेकिन...
कविता माटी पानी : सत्ता और समय की पहचानसमकालीन जनमतJanuary 10, 2019June 3, 2019 by समकालीन जनमतJanuary 10, 2019June 3, 201903257 रवि श्रीवास्तव सदानंद शाही के कविता संकलन ‘माटी-पानी’ को पढ़ते हुए मिर्ज़ा ग़ालिब का एक शेर याद आया- ‘ जो उलझी थी कभी आदम के...
कविता समय की विद्रूपताओं की शिनाख़्त करतीं अनिल की कविताएँसमकालीन जनमतJanuary 6, 2019January 14, 2019 by समकालीन जनमतJanuary 6, 2019January 14, 20193 3675 निरंजन श्रोत्रिय युवा और चर्चित कवि अनिल करमेले की कविताओं से गुजरना अपने समकालीन समय-समाज की विद्रूपताओं की शिनाख्त करना है। यह दुष्कर कवि-कर्म वे...
कविता विमल किशोर की कविताएंसमकालीन जनमतJanuary 5, 2019January 6, 2019 by समकालीन जनमतJanuary 5, 2019January 6, 201903089 1980 के दशक में लखनऊ में गठित ‘महिला संघर्ष मोर्चा’ से विमल किशोर ने सामाजिक जीवन का आरम्भ किया। वे इस संगठन की सह संयोजक...
कविता कई आँखोंवाली कविताओं के कवि शशांक मुकुट शेखरसमकालीन जनमतDecember 30, 2018January 5, 2019 by समकालीन जनमतDecember 30, 2018January 5, 201903610 कृष्ण समिद्ध नये और बनते हुए कवि पर लिखना बीज में बंद पेड़ के फल के स्वाद पर लिखने जैसा है । फिर भी यह...
कविता मौजूदा समय से वाबस्ता अरुणाभ की कविताएँसमकालीन जनमतDecember 23, 2018December 23, 2018 by समकालीन जनमतDecember 23, 2018December 23, 201803614 रमण कुमार सिंह अरुणाभ सौरभ हिंदी और मैथिली के प्रखर युवा कवि हैं, जो दोनों भाषाओं में न केवल समान गति से सृजनरत हैं, बल्कि...
कविता संभावनाओं के बिम्ब गढ़ती आँचल की कविताएँसमकालीन जनमतDecember 16, 2018December 16, 2018 by समकालीन जनमतDecember 16, 2018December 16, 20184 2619 लोकेश मालती प्रकाश व्यक्ति की निजता अमानवीय सत्ताओं के निशाने पर हमेशा से रही है। ग़ुलामी की सबसे मुकम्मल स्थिति वह होती है जब ग़ुलाम...
कविता ‘ अजीब समय के नए राजपत्र ’ के विरुद्ध तनकर खड़ी कवितादीपक सिंहDecember 9, 2018December 9, 2018 by दीपक सिंहDecember 9, 2018December 9, 201815136 पंकज चतुर्वेदी बहुत ही संवेदनशील और समय-सजग रचनाकार हैं | उनकी कविताओं से गुजरते हुए जन कवि गोरख पाण्डेय की कविता पंक्तियां बार-बार मन में...
कविता वह कौन सी आग है जिससे अपने आप को बचाने का आह्वान करते हैं विद्रोहीराम नरेश रामDecember 5, 2018December 5, 2018 by राम नरेश रामDecember 5, 2018December 5, 201803266 कविता में जीवन तभी आती है जब कवि जनता के जीवन से सीधे जुड़ा हुआ हो। अकादमिक परिक्षेत्र में अक्सर वे ही कवि चर्चा के...
कविता प्रतिरोध को बयां करती है कवि कौशल किशोर की “नयी शुरुआत”समकालीन जनमतDecember 2, 2018December 4, 2018 by समकालीन जनमतDecember 2, 2018December 4, 201813808 आशीष मिश्र जब हम जवानी के दौर में परवाज़ भर रहे होते हैं तो उस वक्त देश और समाज को लेकर उसके भीतर मौजूद तमाम हलचलों...
कविता कोमल ज़िद से एक बेहतर दुनिया के लिए बहस करती पराग पावन की कविताएँसमकालीन जनमतNovember 25, 2018November 26, 2018 by समकालीन जनमतNovember 25, 2018November 26, 20185 3565 विवेक निराला पराग पावन हिन्दी-कविता की युवतर पीढ़ी के पहचाने जाने वाले कवि हैं। उनकी कविता एक ओर हमारे समकालीन यथार्थ को उघाड़ कर रखती...
कविताजनमत स्त्री की खुली दुनिया का वृत्त हमारे समक्ष प्रस्तुत करतीं कविताएँउमा रागNovember 18, 2018November 18, 2018 by उमा रागNovember 18, 2018November 18, 201803083 अच्युतानंद मिश्र निर्मला गर्ग की कविताओं में मौजूद सहजता ध्यान आकृष्ट करती है. सहजता से यहाँ तात्पर्य सरलीकरण नहीं है, बल्कि सहजता का अर्थ है...