समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

चित्रकला

फीका इमर्जिंग आर्टिस्ट पुरस्कार पाने वाले युवा चित्रकार अनुपम राॅय के 11 चित्र

समकालीन जनमत
फाउन्डेशन फॉर इंडियन कन्टेम्पररी आर्ट (फीका) ने  ‘2018-19 का इमर्जिंग आर्टिस्ट पुरस्कार (उभरते कलाकार पुरस्कार) चित्रकार अनुपम राॅय देने की घोषणा की है. भारत में...
चित्रकला

फीका का इमर्जिंग आर्टिस्ट पुरस्कार 2018 अनुपम राॅय को

समकालीन जनमत
फाउन्डेशन फाॅर इंडियन कन्टेम्पररी आर्ट (फीका) ने  ‘2018-19 का इमर्जिंग आर्टिस्ट पुरस्कार (उभरते कलाकार पुरस्कार) चित्रकार अनुपम राॅय देने की घोषणा की है. भारत में...
पुस्तक

मार्क्स कोश

गोपाल प्रधान
2011 में कांटीन्यूम इंटरनेशनल पब्लिशिंग ग्रुप से इयान फ़्रेजर और लारेन्स वाइल्डे की किताब ‘ द मार्क्स डिक्शनरी ’ का प्रकाशन हुआ। सबसे पहले लेखक...
कविता

कोमल ज़िद से एक बेहतर दुनिया के लिए बहस करती पराग पावन की कविताएँ

समकालीन जनमत
विवेक निराला पराग पावन हिन्दी-कविता की युवतर पीढ़ी के पहचाने जाने वाले कवि हैं। उनकी कविता एक ओर हमारे समकालीन यथार्थ को उघाड़ कर रखती...
स्मृति

महाद्वीप के अवाम की एकता की आवाज थीं फहमीदा रियाज

लखनऊ, 24 नवम्बर। ‘ स्मरण फहमीदा रियाज ’ में लखनऊ के साहित्यकारों व संस्कृतिकर्मियों ने फहमीदा को याद किया तथा उनके साथ बिताए दिनों को...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

पूर्वांचल के जातीय कथाकार हैं विवेकी राय

समकालीन जनमत
(कथाकार विवेकी राय का जन्मदिन 19 नवम्बर को और पुण्यतिथि 22 नवंबर को होती है । विवेकी राय की स्मृति में प्रस्तुत है युवा आलोचक...
साहित्य-संस्कृति

वर्ष 2018 का ‘वारियर एल्विन सम्मान’ पोस्तोबाला को

समकालीन जनमत
लोककला एवं संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान के लिए 'दुनिया इन दिनों' पत्रिका द्वारा दिया जाने वाला प्रसिद्ध 'वारियर एल्विन सम्मान' वर्ष 2018 के लिए पश्चिम...
सिनेमा

आनंद पटवर्धन को मिला IDFA (नीदरलैंड) का प्रतिष्ठित फ़ीचर लेंथ डाक्यूमेंटरी का बेस्ट अवार्ड

संजय जोशी
हिन्दुस्तान के शीर्ष दस्तावेज़ी फ़िल्मकार आनंद पटवर्धन को कल शाम अमेस्टरडम(नीदरलैंड) में संपन्न हुए IDFA फ़ेस्टिवल में सर्वसम्मति से वहां के शीर्ष अवार्ड ‘फ़ीचर लेंथ...
स्मृति

अलविदा फ़हमीदा रियाज़

समकालीन जनमत
प्रो. चमनलाल सोने से पहले आदतन कल रात टिवीटर/फ़ेसबुक/व्हाट्सप्प पर एक नज़र डाल रहा था कि डॉ अखलाक ने फहमीदा के न रहने का संदेश...
ख़बरस्मृति

फ़हमीदा रियाज़ का जाना

समकालीन जनमत
अशोक पांडेय “कब तक मुझ से प्यार करोगे? कब तक? जब तक मेरे रहम से बच्चे की तख़्लीक़ का ख़ून बहेगा जब तक मेरा रंग...
साहित्य-संस्कृति

न्याय के सवाल को छोड़कर सामाजिक सौहार्द की बात ही नहीं हो सकती : प्रो राजीव भार्गव

सुधीर सुमन
नई दिल्ली. ‘‘ जिस समाज में किसी एक समूह या समुदाय का वर्चस्व हो, जहां हिंसा, दमन-उत्पीड़न और शोषण हो, जहां असहिष्णुता हर नुक्कड़ पर...
स्मृति

देवी प्रसाद चट्टोपाध्याय: भारतीय दर्शन में भौतिकवाद के अप्रतिम अध्येता

डॉ रामायन राम
देवी प्रसाद चट्टोपाध्याय ने भारतीय परंपरा मे भौतिकवाद तथा वैज्ञानिक चिंतन प्रणाली पर बहुत ही गहन शोध और लेखन किया है। भारत मे कई पीढियां...
साहित्य-संस्कृति

विभाजन को समझे बिना हल नहीं होगा सौहार्द का प्रश्न

आशुतोष कुमार
सामाजिक सौहार्द का मतलब केवल शांतिपूर्ण सहअस्तित्व नहीं होता. शांति तो ताकत और दमन से भी कायम की जा सकती है. शांति तो युद्धविराम की...
कविताजनमत

स्त्री की खुली दुनिया का वृत्त हमारे समक्ष प्रस्तुत करतीं कविताएँ

उमा राग
अच्युतानंद मिश्र निर्मला गर्ग की कविताओं में मौजूद सहजता ध्यान आकृष्ट करती है. सहजता से यहाँ तात्पर्य सरलीकरण नहीं है, बल्कि सहजता का अर्थ है...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

मुक्तिबोध मेरे लिए -अच्युतानंद मिश्र

समकालीन जनमत
अच्युतानंद मिश्र फ़िराक ने अपने प्रतिनिधि संग्रह ‘बज़्मे जिंदगी रंगे शायरी’ के संदर्भ में लिखा है, जिसने इसे पढ़ लिया उसने मेरी शायरी का हीरा...
साहित्य-संस्कृति

मुक्तिबोध आस्था देते हैं मुक्ति नहीं

समकालीन जनमत
प्रियदर्शन मुक्तिबोध और ख़ासकर उनकी कविता ‘अंधेरे में’ पर लिखने की मुश्किलें कई हैं। कुछ का वास्ता मुक्तिबोध के अपने बेहद जटिल काव्य विन्यास से...
साहित्य-संस्कृति

अंतःकरण और मुक्तिबोध के बहाने

रामजी राय
(मुक्तिबोध के जन्मदिन पर समकालीन जनमत के प्रधान संपादक रामजी राय का आलेख) 2017 में मुक्तिबोध की जन्मशताब्दी गुज़री है और 2018 मार्क्स के जन्म...
साहित्य-संस्कृति

आधुनिक सभ्यता-संकट की प्रतीक-रेखा (मुक्तिबोध और स्त्री-प्रश्न)

प्रणय कृष्ण
मुक्तिबोध जयंती पर विशेष   स्त्री स्वाधीनता और उस स्वाधीनता की अभिव्यक्ति के प्रश्न को जितनी गहनता और विस्तार मुक्तिबोध-साहित्य में मिला वैसा हिन्दी साहित्य...
कविताजनमत

घर की सांकल खोलता हुआ कवि हरपाल

उमा राग
बजरंग बिहारी   कविता जीवन का सृजनात्मक पुनर्कथन है। इस सृजन में यथार्थ, कल्पना, आकांक्षा, आशंका और संघर्ष के तत्व शामिल रहते हैं। रचनाकार अपनी प्रवृत्ति,...
स्मृति

वो सूरतें इलाही किस मुल्क बसतियाँ हैं , अब जिनके देखने को आंखें तरसतियाँ हैं

समकालीन जनमत
15वीं बरसी पर कॉ मंजू देवी की यादें   संतोष सहर   वो सूरतें इलाही किस मुल्क बसतियाँ हैं अब जिनके देखने को आंखें तरसतियाँ...
Fearlessly expressing peoples opinion