समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

पुस्तक

टिकटशुदा रुक्का – जातीय विभेद पर टिके उत्तराखंडी समाज का पाखण्ड

समकालीन जनमत
टिकटशुदा रुक्का :   जातीय विभेद पर टिके उत्तराखंडी समाज का पाखण्ड चन्द्रकला*   ‘नवारुण’ से प्रकाशित नवीन जोशी के नवीनतम उपन्यास ‘टिकटशुदा रुक्का’ को पढ़ते...
स्मृति

प्रतिलिपियों से भरी इस दुनिया में चंदू मौलिक होने की जिद के साथ अड़े रहे

समकालीन जनमत
( आज जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष चंद्रशेखर का स्मृति दिवस है . 31 मार्च 1997 को सिवान में आरजेडी सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के...
पुस्तक

प्रत्यंचा : एक राजा के लोकतांत्रिक प्रयोगों की अभूतपूर्व दास्तान

सुधीर सुमन
‘प्रत्यंचा’  छत्रपति शिवाजी महाराज की उत्तराधिकार परंपरा में कोल्हापुर के राजा बने छत्रपति शाहूजी महाराज की जीवन गाथा है जिसको हिंदी के चर्चित कथाकार संजीव...
कविता

अपने ढंग से जीने के हौसले का कवि राजेश कमल

समकालीन जनमत
सुधीर सुमन राजेश कमल लगभग ढाई दशक से अधिक समय से कविताएं लिख रहे हैं, लेकिन कविता पाठ और प्रकाशन से आम तौर पर बचते...
पुस्तकसाहित्य-संस्कृति

फ़ासीवाद से लड़ाई की एक दास्तान

गोपाल प्रधान
2019 में रैंडम हाउस से कैरोलीन मूरहेड की किताब ‘ ए हाउस इन द माउनटेन्स : द वीमेन हू लिबरेटेड इटली फ़्राम फ़ासिज्म ’ का...
कवितासाहित्य-संस्कृति

स्त्री की व्यथा और सामर्थ्य के कवि विवेक चतुर्वेदी

समकालीन जनमत
जसवीर त्यागी विवेक चतुर्वेदी समकालीन हिन्दी कविता के एक बेहतरीन कवि हैं। उनकी बड़ी खूबी यह है कि उनके स्वभाव और उनकी कविता में उतावलापन...
साहित्य-संस्कृति

तबला : उत्पत्ति और घराने

तबले की उत्पत्ति और उसके नामकरण से संबंधित कई मत प्रचलित हैं. एक मत तो ये है कि एक मृदंग वादक जब प्रतियोगिता में हार...
ख़बरपुस्तक

महिलाओं की आज़ादी पर पाबन्दियाँ उन्हें सुरक्षित नहीं असुरक्षित ही बनाती हैं : कविता कृष्णन

समकालीन जनमत
(भाकपा (माले) लिबरेशन की पोलित ब्यूरो की सदस्य और अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (AIPWA) की सचिव कविता कृष्णन की किताब ‘फीयरलेस फ्रीडम’ पर उनसे...
कविता

दौरे हाजि़र पर एक गहरी नज़र हैं ग़ज़ाला की ग़ज़लें

समकालीन जनमत
नवनीत शर्मा ग़ज़ाला की ग़ज़लों में सबके अहसास अपनी लिखी कहानी को ही जी रही हूँ अब इक जैसा ही तो है मेरा किरदार ,और...
पुस्तक

मार्क्स लिखित ‘ पूंजी ’ की सीख

गोपाल प्रधान
 2020 में पालग्रेव मैकमिलन से मार्क सिल्वर के संपादन में ‘कनफ़्रंटिंग कैपिटलिज्म इन द 21स्ट सेन्चुरी: लेसन्स फ़्राम मार्क्स’ कैपिटल’ का प्रकाशन हुआ । संपादक...
स्मृति

‘मैला आंचल’ में आदिवासी संघर्ष (फणीश्वरनाथ रेणु के जन्मदिन पर विशेष)

सुधीर सुमन
‘देश हुआ आज़ाद, आदिवासियों को मिला आजीवन कारावास’ हिंदी कथा-साहित्य में आदिवासी जीवन-प्रसंग बहुत कम हैं। रेणु एक ऐसे कथाकार हैं, जिन्होंने अपने बहुचर्चित उपन्यास...
कविताजनमत

विनय कुमार की कविताएँ ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से संवलित हैं

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल यक्षिणी की भूमिका में विनय लिखते हैं – ‘…अतीत का बोध मुझे न तो गौरवान्वित करता है, न दुखी और न ही असहाय;...
साहित्य-संस्कृति

कथाकार शिवमूर्ति के गांव में जुटे साहित्यकार, देश-गांव पर बातचीत, पुस्तकालय का उद्घाटन 

कौशल किशोर
शिवमूर्ति हमारे समय के महत्वपूर्ण कथाकार हैं। इनकी विशेषता है कि इन्होंने अपने कथा साहित्य में लोकतत्वों और लोकरंजन का अच्छा-खासा समावेश किया है। आज...
सिनेमा

गहरी बहस छेड़ गया सातवाँ उदयपुर फ़िल्म फेस्टिवल

संजय जोशी
(प्रतिरोध का सिनेमा अभियान का 71वां और उदयपुर का सातवाँ फ़िल्म फेस्टिवल पूरी तैयारी के साथ उदयपुर के कुम्भा संगीत परिषद् सभागार में संपन्न हुआ...
कविताजनमत

‘रंजना के नवगीत और ग़ज़लें सृजन की धरती पर एक विराट संवेदना बो रहे हैं’

समकालीन जनमत
कल्पना मनोरमा वर्तमान के खुरदरे जीवन व्यापारों के यथार्थ से जूझती एक अकेली स्त्री का गरिमा पूर्ण आत्म परिचय इन पंक्तियों से बेहतर क्या होगा? ...
स्मृति

हुई नामवरी सुबह की सांझ….

समकालीन जनमत
हिन्दी के शीर्षस्थ शोधकार-समालोचक नामवर सिंह (जन्म: 1 मई 1927- मृत्यु: 19 फ़रवरी 2019) को युवा लेखिका अर्पिता राठौर की भावांजलि। सम्पा.   अर्पिता राठौर...
कविताजनमत

नवनीत की ग़ज़लें यथास्थितिवाद का प्रतिकार हैं

समकालीन जनमत
प्रभात मिलिंद मेरी नज़र में एक ग़ज़लगो होना और एक शायर होना दो मुख़्तलिफ़ इल्म हैं. ग़ज़लगोई एक हुनर (स्किल) है और शायरी एक तेवर...
ख़बरसाहित्य-संस्कृति

आज़ादी, अमन और लोकतंत्र के लिए प्रेरणा देते हैं फ़ैज़

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की जयंती पर उनके नज्म गाये, जन संस्कृति मंच, दरभंगा का जिला सम्मेलन आयोजित हुआ दरभंगा (बिहार). पूरी दुनिया के महकूमों एवं...
साहित्य-संस्कृति

‘ प्रेमकथा एहि भाँति बिचारहु ’

  (संत वैलेन्टाइन की तरह प्रेम के पक्षधर मगर कई मामलों में उनसे भिन्न संत रविदास थे। उनकी  रचना जगत में प्रेम एक विराट भाव...
Fearlessly expressing peoples opinion