समकालीन जनमत
स्मृति

‘ रचना, विचार और आन्दोलन के साथी थे सुरेश पंजम ’

लखनऊ। नागरिक परिषद व पीपुल्स यूनिटी फोरम के संयुक्त तत्वावधान में साहित्यकार, शिक्षक व सामाजिक चिंतक डा. एस. के. पंजम की याद में 19 सितम्बर को स्मृति सभा का आयोजन उनके जलालपुर, राजाजीपुरम आवास के पास प्रांगण में किया गया। इस अवसर पर पंजम जी की स्मृति में एक स्मारिका का भी लोकार्पण किया गया।

स्मृति सभा की अध्यक्षता वरिष्ठ लेखक शकील सिद्दीकी ने किया। अध्यक्ष मंडल के अन्य सदस्य थे प्रो रमेश दीक्षित, जन संस्कृति मंच उत्तर प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष कौशल किशोर तथा नागरिक परिषद के राम कृष्ण सिंह । संचालन वीरेंद्र त्रिपाठी ने किया।

डा. एस. के. पंजम ने अपने जीवन में 35 पुस्तकों की रचना किया जिनमें कविता संग्रह, उपन्यास, कहानी संग्रह, व इतिहास की पुस्तकें शामिल है।
पंजम जी दस कविता संग्रह जिनमें “भीख नहीं अधिकार चाहिए” काफी चर्चित रही है। उन्होंने उपन्यास भी लिखे जिनमें दलित दहन, संघर्ष और शहादत, लालगढ़, गदर जारी रहेगा प्रमुख हैं। कहानी संग्रह- बेड़ियों पर वार, थप्पड़ है। पंजम जी ने दो प्रमुख शोधपरक पुस्तकें लिखी यथा- शूद्रों का प्राचीनतम इतिहास और संत रैदास-जन रैदास।

पंजम जी का कोरोना संक्रमण के कारण पिछले 25 अप्रैल 2021 को लखनऊ में निधन हो गया था। वे अमीनाबाद इंटर कालेज में शिक्षक थे।

स्मृति सभा में वक्ताओं ने कहा कि पंजम जी रचना, विचार और आंदोलन के साथी थे। उन्हें ऐसे समय में खोया है जब हमारे सामने बहुत सी सामाजिक, सांस्कृतिक व राजनैतिक चुनौतियां है। पंजम जी ने अपने छोटे से जीवन काल में सामाजिक जीवन के हर पहलू पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है।

वक्ताओं ने कहा कि पंजम जी के योगदानों को याद करते हुए उसे रचनात्मक रुप से आगे ले जाना चाहिए। उनका व्यक्तित्व बहुआयामी रहा है। अनेक जनवादी संगठनों से जुड़ाव रहा है। पंजम जी के असमय निधन से समतावादी समाज के निर्माण का एक निर्भीक योद्धा हमसे बिछुड़ गया। जिन स्थितियों में उनकी मौत हुई, उसे सामान्य नहीं माना जा सकता है। यह व्यवस्था के द्वारा की गई हत्या है।

स्मृति सभा में वर्कस कौंसिल के ओ. पी. सिन्हा, वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता के. के. शुक्ला, कानपुर से आये भाकपा माले के अवधेश कुमार सिंह, सत्यपाल, ननकू लाल हरिद्रोही, एम. एल. आर्या, तुहिन देव, शिवाजी राय, यादवेंद्र पाल, बिंदा पंजम, बौध्द प्रकाश पंजम, सत्य प्रकाश, प्रज्ञालता, पूर्व प्राचार्य रुपराम गौतम, प्रो. टी. पी. राही, जय प्रकाश, रामायण प्रकाश, वन्दना सिंह, साहित्यकार ज्ञान प्रकाश जख्मी, राजीव यादव सहित कई लोगों ने अपने विचार रखे, पंजम जी के साथ की यादों को साझा किया और अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए।

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