समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

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झारखंड जन संस्कृति मंच का पाँचवा राज्य सम्मेलन का आरंभ

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जन संस्कृति सामूहिकता से पैदा होती है: मेघनाथ रामगढ : 4 अप्रैल 2026 आज रामगढ में आयोजित झारखंड जन संस्कृति मंच के दो दिवसीय पाँचवे...
स्मृति

साहित्य में नक्सलबाड़ी चेतना के प्रतीक थे कॉमरेड कंचन कुमार

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मनीष आज़ाद कॉमरेड कंचन कुमार से मेरी पहली मुलाकात देहरादून में हुई थी. उस वक़्त हम वर्ल्ड सोशल फोरम (WSF 2004) के खिलाफ “Mumbai Resistance”...
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नुक्कड़ लाइव थियेटर फेस्टिवल : चार नाटकों का मंचन, जन गायक कृष्ण कुमार निर्मोही का सम्मान

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बेगूसराय ( बिहार )।  रंगनायक द लेफ्ट थियेटर जसम द्वारा दिनकर कला भवन के मुख्य द्वार पर 28 फरवरी और एक मार्च को ” खामोशी...
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गजलों में छिपे हुए सच को कहने का साहस है – डॉ जीवन सिंह

डॉ डी एम मिश्र के ग़ज़ल संग्रह का लोकार्पण लखनऊ। जन संस्कृति मंच (जसम) की ओर से डॉ डी एम मिश्र के नये ग़ज़ल संग्रह...
कविता

गरिमा सिंह की कविताएँ स्मृति और अनुभव के परिष्कार से निर्मित हैं

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सुमन शेखर गरिमा सिंह की कविताएँ मूलतः स्मृति और अनुभव के परिष्कार से निर्मित एक ऐसी संवेदनात्मक भूमि है, जहाँ स्त्री-अस्मिता, अस्तित्वगत बेचैनी और काव्य-रूढ़ियों...
साहित्य-संस्कृति

वर्ग की अवधारणा को खंडित नहीं करता, बल्कि व्यापक बनाता है अस्मितावाद : डॉ रामायन राम

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अनिल सिन्हा स्मृति व्याख्यान दलित चेतना के कवि आशाराम जागरथ और सी बी भारती ने कविताएं सुनाईं लखनऊ। ” अस्मितावाद न तो सर्वहारा को विभाजित...
कविता

बलराम कांवट की कविताएँ एक समावेशी दुनिया का ख़्वाब रचती हैं

उमा राग
 मनीष कुमार यादव ”जंगल में दूर किसी टहनी पर झूलती बया अब तक इसी भरोसे पर सहती आयी है इस विपदा को कि थोड़ी देर...
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“ प्रो तुलसीराम दर्शन की मुक्तिकामी धारा के अन्वेषी चिंतक थे ”

राम नरेश राम
आजमगढ़।  प्रो तुलसीराम स्मृति आयोजन 15 फरवरी, 2026 को आज़मगढ़ के तमसा प्रेस क्लब में ‘ चिंतन की प्रतिरोधी परंपरा और प्रो. तुलसीराम ‘ विषय...
कवितानई क़लम

सत्यव्रत की कविताएँ आदिम संवेदनाओं का एक कोलाज हैं।

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विनय सौरभ सत्यव्रत की इन कविताओं से गुज़रते हुए यह स्पष्ट होता है कि ये कविताएँ आधुनिक जीवन की विडंबनाओं, महानगर के दमघोंटू यथार्थ और...
साहित्य-संस्कृति

डॉ.रामबाबू आर्य जसम दरभंगा के अध्यक्ष और समीर कुमार सचिव बने

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दरभंगा। प्रसिद्ध इंकलाबी शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की जयंती के अवसर पर 13 फरवरी को नागार्जुन नगर स्थित प्रो.राजेंद्र कुमार स्मृति सभागार (बी. एम.क्लासेज) में...
स्मृति

इलाहाबाद में प्रो. राजेन्द्र कुमार को गहरी आत्मीयता से याद किया गया

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इलाहाबाद। कवि-आलोचक प्रोफेसर राजेंद्र की स्मृति में रविवार को अंजुमन रुहे अदब परिसर में स्मृति सभा आयोजित हुई। स्मृति सभा में  प्रोफेसर राजेंद्र कुमार को...
कविता

सत्या शर्मा ‘कीर्ति’ की कविताएँ स्त्री जीवन की जटिल सच्चाइयों को सहजता से उद्घाटित करती हैं

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प्रज्ञा गुप्ता “तीस पार की नदियां” और ‘सीझते हुए सपने’ संग्रह की कवयित्री सत्या शर्मा कीर्ति की कविताओं में स्त्रियों का जीवन पूरी संवेदना के...
साहित्य-संस्कृति

शमशेर बहादुर सिंह जयंती समारोह : बात बोलेगी, हम नहीं, भेद खोलेगी बात ही

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प्रगतिशील कविता के सबसे अनोखे और प्रयोगधर्मी कवि शमशेर बहादुर सिंह के पैतृक गाँव कस्बा एलम जिला शामली में 2023 से ‘शमशेर बहादुर कला मंच’...
पुस्तक

अंचित का काव्य संग्रह ‘आधी पंक्ति’: मनुष्य और शहर के बीच संवाद के एक सेतु की निर्मिति है

उमा राग
विधान गुंजन सहजता कवि का आभूषण है। जो बात जिस तरह से कही जानी चाहिए, उसे उसी तरह कहना ही कवि को विशिष्ट बनाता है।...
पुस्तक

शिव कुमार पराग की ग़ज़लगोई :आँधियों में जलते चिराग़

उमा राग
जितेंद्र कुमार शिव कुमार पराग की दस ग़ज़लें वरिष्ठ ग़ज़लकार डॉ. डी. एम. मिश्र द्वारा संपादित ‘ग़ज़ल एकादश ‘(हिंदी श्री पब्लिकेशन, प्रथम संस्करण, 2021) में...
कविता

शम्भु बादल की कविताएँ लोक-अनुभव और वैश्विक चेतना का रसायन हैं

समकालीन जनमत
सुशील कुमार शम्भु बादल की कविताएँ समकालीन हिंदी कविता में उस धरातल का प्रतिनिधित्व करती हैं जहाँ भाषा, दृश्य और नैतिक आग्रह एकाकार होकर एक...
पुस्तक

सत्ता में समाजवाद

गोपाल प्रधान
        2023 में स्प्रिंगेर से रोलैंड बोअर की किताब ‘ सोशलिज्म इन पावर: आन द हिस्ट्री ऐंड थियरी आफ़ सोशलिस्ट गवर्नेन्स ’...
पुस्तक

पहचान की लड़ाई और विमर्श की जमीन

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अजय प्रताप तिवारी भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना में आदिवासी शब्द किसी विशेष समुदाय की संकेत सूचक ही नहीं है, बल्कि अपने समुदाय के संघर्ष, अस्तित्व...
स्मृति

अपनी वैचारिक दृढ़ता के लिए याद रखे जायेंगे राजेंद्र कुमार

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लखनऊ। हिंदी के जाने-माने कवि व आलोचक राजेंद्र कुमार को याद करते हुए 25 जनवरी को जन संस्कृति मंच की लखनऊ इकाई ने श्रद्धांजलि सभा...
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 जसम के आयोजन में लेखकों और संस्कृतिकर्मियों ने किया प्रतिरोध की रचनाओं का पाठ

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रायपुर. छत्तीसगढ़ में पिछले दिनों दक्षिणपंथी सरकार के तामझाम से भरे साहित्य उत्सव का अर्थहीन शोर-शराबा कायम था तो दूसरी तरफ़ वे लेखक, कवि, कलाकार...
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