समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

पुस्तक

नाउम्मीदी की राख तले ‘ उम्मीद चिनगारी की तरह ’

  प्रशांत जैन   एक कवि या लेखक, जो अपने मनुष्य होने की मूलभूत पहचान के प्रति सजग होता है, स्वभाव से ही स्वाभिमानी और...
साहित्य-संस्कृति

“ अरुण प्रकाश ने अपने युग की छोटी-छोटी अनुगूँजों को अपनी रचनाओं में सहेजा ”

बेगूसराय। जनवादी लेखक संघ, बेगूसराय जिला इकाई द्वारा हिन्दी के लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार अरुण प्रकाश के स्मृति-दिवस पर बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ भवन में सेमिनार...
साहित्य-संस्कृति

अपनी स्मृतियों को बचाना वर्तमान के संघर्ष का हिस्सा है : कौशल किशोर

समकालीन जनमत
बिहार की प्रगतिशील सांस्कृतिक विरासत और आज की चुनौतियाँ’ विषय पर केन्द्रित संगोष्ठी- सह काव्य पाठ का आयोजन बेगूसराय । जन संस्कृति मंच (जसम) और...
कविता

साहित्य, साम्राज्य और पर्यावरण

गोपाल प्रधान
2025 में द यूनिवर्सिटी आफ़ शिकागो प्रेस से अमिताभ घोष की किताब ‘ वाइल्ड फ़िक्शंस : एसेज आन लिटरेचर, एम्पायर, ऐंड द एनवायरनमेन्ट ’ का...
कविता

‘ देश द्रोह की हांडी ’ : रक्त रंजित समय में लिखी जाती है धारदार कविता

कौशल किशोर
मीता दास के कविता संग्रह ‘देशद्रोह की हांडी’ की कविताओं को पढ़ते हुए राजेंद्र यादव का एक पुराना इंटरव्यू याद हो आया जो उन्होंने कवि-लेखक...
साहित्य-संस्कृति

मज़दूर दिवस पर कविता पढ़ , गीत गाकर मेहनतकशों के योगदान को याद किया 

रायपुर. ” आज देश की बागडोर उन हाथों में चली गई है जिनका न तो आज़ादी के आंदोलन में कोई योगदान रहा है और न...
पुस्तक

संस्कृति को समझने की गंभीर कोशिश करती एक किताब

राकेश वेदा आलोक टंडन की पुस्तक ‘संस्कृति’ आज के समय में संस्कृति को समझने की एक गंभीर और विचारोत्तेजक कोशिश है। यह पुस्तक संस्कृति को...
पुस्तक

जलवायु संकट का इतिहास

2025 में वर्सो से जोएल वेनराइट की किताब ‘द एन्ड: मार्क्स, डार्विन, ऐंड द नेचुरल हिस्ट्री आफ़ द क्लाइमेट क्राइसिस’ का प्रकाशन हुआ । लेखक...
साहित्य-संस्कृति

” स्वरूप तादात्म्य से लिखी गई पुस्तक है अक्क महादेवी ” 

समकालीन जनमत
मऊ। राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ और  जन संस्कृति मंच, मऊ के तत्वावधान में 26 मई को कवि सुभाष राय की चर्चित कृति ‘दिगंबर विद्रोहिणी अक्क...
साहित्य-संस्कृति

जातिमुक्त लोकतांत्रिक भारत : बाबासाहब का विज़न

समकालीन जनमत
डॉ. आंबेडकर की 136वीं जयंती पर ‘हम देखेंगे’ : अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रतिरोध अभियान की विचारगोष्ठी रपट — सौरभ कुमार बाबासाहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की...
ख़बरजनमतसाहित्य-संस्कृति

जसम, छत्तीसगढ़ का पहला राज्य सम्मेलन सम्पन्न

समकालीन जनमत
  बुद्धिजीवी तो वहीं है, जो सूरज के धब्बे को भी उंगली दिखाकर कहेगा कि वहां धब्बा है- रामजी राय रायपुर. न्याय आज्ञाकारिता से ऊपर...
ख़बरजनमतसाहित्य-संस्कृति

फासीवाद के ख़िलाफ़ छत्तीसगढ़ जसम का पहला राज्य सम्मेलन 12 अप्रैल को

समकालीन जनमत
देश के नामचीन लेखक, साहित्यकार, प्रबुद्धजन और विचारक जुटेंगे सम्मेलन में. रायपुर. फासीवाद के ख़िलाफ़- सृजन और प्रतिरोध जैसे महत्वपूर्ण विषय पर केंद्रित जन संस्कृति...
ख़बरजनमतसाहित्य-संस्कृति

जन संस्कृति मंच, झारखण्ड का पांचवां राज्य सम्मेलन नयी कार्यकारिणी के चुनाव तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ सम्पन्न

समकालीन जनमत
सुरेंद्र बेदिया झारखंड जन संस्कृति मंच के नये सचिव, शंभु बादल अध्यक्ष और जावेद इस्लाम कार्यकारी अध्यक्ष बनाये गये 71 सदस्यीय राज्य परिषद, 25 सदस्यीय...
ख़बरजनमतसाहित्य-संस्कृति

झारखंड जन संस्कृति मंच का पाँचवा राज्य सम्मेलन का आरंभ

समकालीन जनमत
जन संस्कृति सामूहिकता से पैदा होती है: मेघनाथ रामगढ : 4 अप्रैल 2026 आज रामगढ में आयोजित झारखंड जन संस्कृति मंच के दो दिवसीय पाँचवे...
स्मृति

साहित्य में नक्सलबाड़ी चेतना के प्रतीक थे कॉमरेड कंचन कुमार

समकालीन जनमत
मनीष आज़ाद कॉमरेड कंचन कुमार से मेरी पहली मुलाकात देहरादून में हुई थी. उस वक़्त हम वर्ल्ड सोशल फोरम (WSF 2004) के खिलाफ “Mumbai Resistance”...
साहित्य-संस्कृति

नुक्कड़ लाइव थियेटर फेस्टिवल : चार नाटकों का मंचन, जन गायक कृष्ण कुमार निर्मोही का सम्मान

समकालीन जनमत
बेगूसराय ( बिहार )।  रंगनायक द लेफ्ट थियेटर जसम द्वारा दिनकर कला भवन के मुख्य द्वार पर 28 फरवरी और एक मार्च को ” खामोशी...
साहित्य-संस्कृति

गजलों में छिपे हुए सच को कहने का साहस है – डॉ जीवन सिंह

डॉ डी एम मिश्र के ग़ज़ल संग्रह का लोकार्पण लखनऊ। जन संस्कृति मंच (जसम) की ओर से डॉ डी एम मिश्र के नये ग़ज़ल संग्रह...
कविता

गरिमा सिंह की कविताएँ स्मृति और अनुभव के परिष्कार से निर्मित हैं

समकालीन जनमत
सुमन शेखर गरिमा सिंह की कविताएँ मूलतः स्मृति और अनुभव के परिष्कार से निर्मित एक ऐसी संवेदनात्मक भूमि है, जहाँ स्त्री-अस्मिता, अस्तित्वगत बेचैनी और काव्य-रूढ़ियों...
साहित्य-संस्कृति

वर्ग की अवधारणा को खंडित नहीं करता, बल्कि व्यापक बनाता है अस्मितावाद : डॉ रामायन राम

समकालीन जनमत
अनिल सिन्हा स्मृति व्याख्यान दलित चेतना के कवि आशाराम जागरथ और सी बी भारती ने कविताएं सुनाईं लखनऊ। ” अस्मितावाद न तो सर्वहारा को विभाजित...
कविता

बलराम कांवट की कविताएँ एक समावेशी दुनिया का ख़्वाब रचती हैं

उमा राग
 मनीष कुमार यादव ”जंगल में दूर किसी टहनी पर झूलती बया अब तक इसी भरोसे पर सहती आयी है इस विपदा को कि थोड़ी देर...
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