समकालीन जनमत

Category : ज़ेर-ए-बहस

ज़ेर-ए-बहस

‘ हवा में रहेगी मेरे ख़यालों की बिजली ’

डॉ हरिओम
‘   आज जब यह पक्तियां लिखी जा रही हैं तो पूरा देश शहीद-ए-आज़म भगत सिंह को उनके जन्मदिन के अवसर पर याद कर रहा...
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UPSSF का गठन : राजनीतिक निहितार्थ और ‘ सुरक्षा ’ का जुमला

समकालीन जनमत
अतुल उपाध्याय   13 सितम्बर की रात उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘ उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल अध्यादेश, 2020 ‘ को लागू करते हुए एक...
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सोशल मीडिया को जनता से दूर करने की फिराक़ में सरकार

सुशील मानव
करीब दस दिन पहले पत्रकार मित्र आरज़ू आलम से फोन पर बात हुई। पहले कोविड-19 और फिर टाई-फाईड से जूझ रहे आरज़ू से उनके स्वास्थ्य...
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जनता के जीवन और रोजगार के संकट से सरकार ने पूरी तरह अपने को “क्वारंटीन” कर लिया है

इन्द्रेश मैखुरी
इस बात की काफी चर्चा है कि संसद में मोदी सरकार ने कहा कि उसे लॉकडाउन के चलते मरने वाले मजदूरों की संख्या की जानकारी...
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समझें जीवन बूझें भाषा

अनुपमा श्रीवास्तव
मैं भी मुँह में ज़बान रखता हूँ काश पूछो कि मुद्दआ क्या है !! एक थी हिन्दी, नीम के पेड़ो के नीचे झूमती गाती अपने...
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व्यापक मानवीय हित में फेसबुक पर नकेल कसा जाना आवश्यक

इन्द्रेश मैखुरी
फेसबुक खोलिए तो वो पूछता है, “ What’s on your mind ” यानि आपके दिमाग में क्या है ! जहां तक फेसबुक का अपना सवाल...
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लोगों द्वारा महसूस की जा रही घुटन कीआवाज बने प्रशांत भूषण

रुबीना अय्याज/ संदीप पाण्डेय हमारे देश में लाखों मुकदमें सुनवाई के लिए पड़े हैं, कितने बलात्कार, कत्ल, धोखाधड़ी, जमीनों पर कब्जे के मुकदमे, लोगों के...
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हमें न तो दया की दृष्टि से देखो और न ही दैवीय दृष्टि से–शिप्रा शुक्ला

बीते रविवार कोरस के फेसबुक पेज लाइव के माध्यम से तेजपुर विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर शिप्रा शुक्ला से निशा ने ‘विकलांगता और स्त्री’ विषय पर...
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 किन्नर समुदाय: प्रचलित धारणाएँ और यथार्थ

समकालीन जनमत
रविवार 16 अगस्त 2020 को कोरस के फेसबुक लाइव ‘स्त्री संघर्ष का कोरस’ में ‘वर्तमान भारतीय संदर्भ में किन्नर समुदाय’ विषय पर  परिचर्चा की गई...
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प्रेमचंद का उपन्यास ‘प्रेमा’ और सामाजिक सुधार का प्रश्न

समकालीन जनमत
निकिता सामाजिक तथा राजनीतिक उलटफेर को यथार्थ रूप से लिखने में यदि किसी का नाम पहले आता है, तो वह प्रेमचंद हैं । खासकर, बात...
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आज का समय और मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियां: स्त्री के विशेष सन्दर्भ में

समकालीन जनमत
कोरस के फेसबुक लाइव में रविवार 9 अगस्त को “आज का समय और मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियां (स्त्री के विशेष सन्दर्भ में)” विषय पर डॉ....
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शोर ने गंभीर पत्रकारिता की जगह ले ली है और यह देश के जनतंत्र पर सबसे बड़ा खतरा है! : बी.बी.सी. पत्रकार प्रियंका दुबे

समकालीन जनमत
कोरस के फेसबुक लाइव में रविवार 26 जुलाई को बीबीसी पत्रकार प्रियंका दुबे से मीनल ने बातचीत की l प्रियंका हिंदुस्तान टाइम्स, तहलका और कारवां...
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राजनीतिक कैदियों की मोदी की सूची के बढ़ते जाने पर चुप्पी के लिये भारतीयों को पछताना पड़ेगा

( वरिष्ठ पत्रकार शिवम विज का यह लेख  ‘ द प्रिंट ’  में 29 जुलाई को प्रकाशित हुआ है। समकालीन जनमत के पाठकों के लिए...
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रसभरीः स्त्री-देह सम्बन्धी सोच को सामने लाती वेब सीरीज़

दुर्गा सिंह
हमारे हिंदी समाज का ‘नाॅर्मल’ ‘एब्नार्मल’ से बना है। इसलिए, जब कभी मनुष्यगत मूलभूत और सामान्य बात-व्यवहार, कला रचना या किसी ऐसी चीज से हमारा...
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जब कवि के गीत अस्त्र बन जाते हैं

वरवर राव तेलगु भाषा में कविता करते हैं. वे पी.एच.डी हैं. उनके पी.एच.डी. थीसिस का विषय था- तेलंगाना सशस्त्र संघर्ष और इतिहास. 40 साल तक...
ज़ेर-ए-बहस

क्लीनिकल ट्रायल पूरा हुए बिना वैक्सीन को 15 अगस्त तक बाजार में लाने की घोषणा का मकसद क्या है ?

आईसीएमआर व भारत बायोटेक द्वारा तैयार की जा रही कोरोना वैक्सीन को 15 अगस्त तक बाजार में लाने की घोषणा की जा चुकी है जबकि...
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अमेरिका में जातीय भेदभाव

अमेरिका में पिछले दिनों भारी उथल-पुथल रही. एक अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस द्वारा हत्या किए जाने का मामला सामने आने के बाद अश्वेतों के...
ज़ेर-ए-बहस

हम पितृसत्ता के खिलाफ हैं, पुरुषों के नहीं: कमला भसीन

समकालीन जनमत
(‘स्त्री संघर्ष का कोरस’ शृंखला के अंतर्गत रविवार 28 जून को कोरस के फेसबुक पेज से प्रसिद्ध नारीवादी कार्यकर्ता, कवि और समाज विज्ञानी कमला भसीन...
ज़ेर-ए-बहस

कोरोना काल में महिलाओं की दुनिया : घर और बाहर

समकालीन जनमत
डॉ.दीना नाथ मौर्य गायत्री अपने पति और बच्चों के साथ मुम्बई के धारावी इलाके में पिछले 20 सालों से रहती हैं। मूल रूप से उत्तर-प्रदेश...
कहानीज़ेर-ए-बहस

‘नमक का दरोगा’ में नमक का किरदार

Chandan Pandey
‘नमक का दरोगा’ कहानी को कैसे पढ़ा जाये, यह प्रश्न यदा-कदा कौंध जाता है. पिछले दिनों कथाकार उमाशंकर चौधरी ने इस कहानी के अंत पर...
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