Saturday, December 10, 2022
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समाजवादी नेता मधु लिमये को श्रद्धांजलि: हरीश खन्ना

हरीश खन्ना


आज समाजवादी नेता मधु लिमये की पुण्य तिथि है। 8 जनवरी, 1995 को उनका निधन हुआ था। महाराष्ट्र में जन्मे मधु जी चार बार बिहार के मुंगेर और बांका से लोकसभा के सदस्य रहे। वह ऐसे सांसद थे जिन के यहां न फ्रिज था , न टेलीविजन , न एयर कंडीशन, न कूलर, न गाड़ी। एक ऐसा इंसान जिसने अंग्रेज सरकार की जेल काटी, गोवा मुक्ति आंदोलन में पुर्तगाल सरकार की जेल काटी और आपात काल में भी जेल काटी सच्चे गांधी वादी और लोहियावादी ।कभी भी मंत्री पद ग्रहण नहीं किया। 1977 में केंद्र में जनता पार्टी की सरकार बनने के वक्त उनका नाम मंत्री पद के लिए आया तो उन्होंने ठुकरा दिया । बाद में चौधरी चरण सिंह की कैबिनेट में उनको विदेश मंत्रालय का कार्यभार संभालने का न्यौता दिया गया तो उसे भी उन्होंने विनम्रता पूर्वक मना कर दिया। अपने उसूलों के पक्के थे। जनता पार्टी की सरकार के वक्त यह पार्टी के जनरल सेक्रेटरी थे और चौधरी साहब की सरकार के वक्त भी यह पार्टी के जनरल सेक्रेटरी रहे । 1980 के बाद इन्होंने सक्रिय राजनीति से अपने को अलग कर लिया और केवल पढ़ने लिखने तथा अख़बारों में लेख लिखने तक सीमित कर लिया। इनका आदर और सम्मान इतना था कि विपक्ष के जितने भी बड़े नेता थे ,वह इनके यहां सलाह मशवरा करने और मिलने जुलने आते थे।

इनकी असली ताकत इनकी धर्मपत्नी चंपा लिमये थीं जो बंबई विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थीं। जो हर सुख दुःख में उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़ी रहती थीं। मधु जी शास्त्रीय संगीत के बहुत शौकीन थे । जब कभी राजनीति से दुःखी और व्याकुल होते थे तो संगीत में अपना मन लगाते थे। भीम सेन जोशी, कुमार गंधर्व, पंडित जसराज शायद ही उस ज़माने का कोई ऐसा गायक होगा जिसका प्रोग्राम सुनने के लिए यह न पहुंचे हों। उस ज़माने के जितने भी प्रतिष्ठित शास्त्रीय गायक थे, वह सब भी उनको जानते थे। मुझे उनके साथ इस तरह के कार्यक्रमों में जाने का कई बार सौभाग्य मिला। मुझे गर्व है कि ऐसे ईमानदार व्यक्ति के साथ रहकर उनके समाजवादी परिवार का मैं हिस्सा रहा। क़िस्से और स्मृतियां बहुत सी है । फिर कभी विस्तार से लिखूंगा। पर ऐसे ईमानदार और नेक राजनेता आज कहां मिलेंगे ? दिल की गहराईयों से मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।

हरीश खन्ना
1952 में दिल्ली में जन्मे प्रोफेसर हरीश खन्ना दिल्ली विश्वविद्यालय के श्याम लाल कालेज के पूर्व प्राध्यापक व दिल्ली विधानसभा के पूर्व सदस्य रह चुके हैं। हरीश खन्ना ने जाकिर हुसैन दिल्ली कालेज से स्नातक व स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। इसके बाद पीएचडी भी दिल्ली विवि से की। घूमने के शौक़ीन हरीश खन्ना के पास देश-विदेश की यात्राओं के कई अनुभव हैं। लेखक के अनुसार यह घुम्मकड़ प्रवृत्ति ही इनकी ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। अठारह वर्ष दिल्ली विवि शिक्षक संघ की राजनीति में सक्रिय रहे। DUTA के सचिव, उपाध्यक्ष और दो बार अकादमिक काउंसिल के सदस्य भी रहे। के बाद 2013 में तिमारपुर विधानसभा से चुनाव लड़े और जीते भी, लेकिन आम आदमी पार्टी व कांग्रेस की गठबंधन की सरकार ज्यादा नहीं चल सकी। फिर हरीश खन्ना ने दोबारा चुनाव न लड़कर कालेज ज्वाइन कर लिया और श्याम लाल कालेज से 2017 में सेवानिवृत हुए। विभाजन के समय इनके पिता पाकिस्तान के पेशावर से दिल्ली आए थे। हडसन लेन में शरणार्थियों को बसाया गया था, प्रारंभिक जीवन वहीं बीता। भक्ति आंदोलन में संत चरित आख्यान मानवतावाद और जाति संरचना तथा Media and the new World Order नाम से इन्होंने दो पुस्तको का सम्पादन भी किया है। सम्पर्क: 9810015641 ईमेल: harishkhanna93@yahoo.com
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