Category : शख्सियत

शख्सियत

प्रो. तुलसी राम के चिंतन व लेखन को सामने लाना ज़रूरी है!

डॉ. रामायन राम
“जब मैं पहले दिन स्कूल पहुंचा तो नाम लिखते हुए अध्यापक मुंशी राम सूरत लाल ने पिता जी से पूछा यह कब पैदा हुआ था?...
शख्सियत

लोकतंत्र अभी भी सपनों में पलता एक इरादा है

कुमार मुकुल
(महेश्वर हिंदी की क्रांतिकारी जनवादी धारा के महत्वपूर्ण एक्टिविस्ट, पत्रकार, संपादक, लेखक, कवि और विचारक थे। वे समकालीन जनमत के प्रधान संपादक थे। महेश्वर जी...
शख्सियत

विविधता से भरा है बसु चटर्जी का फ़िल्म संसार

मुकेश आनंद
(समकालीन जनमत के लिए महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  साप्ताहिक टिप्पणी लिख रहे मुकेश आनंद याद कर रहे हैं सुप्रसिद्ध हिंदी सिने निर्देशक बसु चटर्जी को.-सं)...
शख्सियत

सभ्यता का संकट-रवींद्रनाथ टैगोर

समकालीन जनमत
(रवीन्द्रनाथ टैगोर के आखिरी व्याख्यान ‘क्राइसिस ऑफ सिविलाइजेशन’ का यह अनुवाद हम समकालीन जनमत के पाठकों के लिए दे रहे हैं । अनुवाद किया है ...
शख्सियत

छोटी कहानियों में बड़ी बात कहने वाला अफसानानिगार मंटो

सआदत हसन मंटो की यौमे पैदाइश पर ख़ास ग़ालिब का एक मशहूर शे’र है- ‘हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे कहते हैं कि...
शख्सियत

आम अवाम के शायर कैफ़ी आज़मी

कैफ़ी आज़मी की पुण्यतिथि पर 14 जनवरी 1919. मिजवां, आजमगढ़ के जमींदार परिवार सैयद फतह हुसैन रिज़्वी और कनिज़ फातमा के घर अतहर हुसैन रिज़्वी...
शख्सियत

गैरबराबरी और अन्याय के खिलाफ़ डॉ. स्वाति का जुझारू जज़्बा हमेशा आह्वान देता रहेगा

हमें इस अनोखी बात पर गौर करना चाहिए कि एक शख़्सियत ने विज्ञान और वैज्ञानिक सोच की राह पर चलते हुए सक्रिय राजनीति और समाज...
शख्सियत

वह आग मार्क्स के सीने में जो हुई रौशन

आज 5 मई को कार्ल मार्क्स के जन्मदिन पर दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी की प्राध्यापिका उमा राग की आवाज़ में प्रस्तुत हैं दो कविताएँ ।...
कविता शख्सियत

मुझें मसीहाई में यक़ीन है ही नहीं, मैं मानता ही नहीं कि कोई मुझसे बड़ा होगा

समकालीन जनमत
ममता मुझें मसीहाई में यक़ीन है ही नहीं, मैं मानता ही नहीं कि कोई मुझसे बड़ा होगा, जनकवि  रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ का जन्म 5 दिसम्बर...
शख्सियत

तुम मुझे यूं भुला न पाओगे: हसरत जयपुरी

विष्णु प्रभाकर
(उर्दू के मक़बूल शायर और हिंदी फ़िल्म संगीत की दुनिया के जाने माने नाम हसरत जयपुरी को उनके यौमे पैदाइश पर याद कर रहे हैं...
शख्सियत

डॉ. अंबेडकर और बौद्ध धम्म : मोक्षदाता नहीं, मार्गदाता की तलाश

डॉ. रामायन राम
14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में डॉ. अंबेडकर ने तीन लाख से भी अधिक लोगों के साथ बौद्ध धर्म अंगीकार किया। आधुनिक भारत के इतिहास...
शख्सियत

मोहब्बत और उम्मीद के शायर फ़िराक़ गोरखपुरी

 (उर्दू के मशहूर शायर फिराक गोरखपुरी की पुण्यतिथि पर युवा कहानीकार, आलोचक विष्णु प्रभाकर का लेख। ) उर्दू शायरी में कहन पर जियादा जोर है।...
शख्सियत

प्रेम और परिवर्तन की तड़प से भरे क्रांतिकारी कवि एर्नेस्तो कार्देनाल मार्तिनेस

समकालीन जनमत
मंगलेश डबराल रूबेन दारीओ, पाब्लो नेरूदा और सेसर वाय्यखो के बाद एर्नेस्तो कार्देनाल लातिन अमेरिकी धरती के चौथे बड़े कवि माने जाते हैं, जिनकी आवाज़...
खबर शख्सियत

शहीद चंद्रशेखर आजाद के सपनों का भारत बनाने की जिम्मेदारी लेनी होगी

के के पांडेय
(शहीद चंद्रशेखर आजाद की स्मृति को सलाम करते हुए उनके सपनों के हिंदुस्तान बनाने की जिम्मेदारी याद दिलाते हुए आज़ाद के शहादत दिवस पर यहां...
खबर शख्सियत

मेहनत और मोहब्बत के शायर मख़दूम मोहिउद्दीन

विष्णु प्रभाकर
1936 का साल अदब के लिए भी ऐसा साल रहा है जिसने अदब की दिशा और दशा को नया मोड़ दे दिया। इसी साल अंजुमन...
जनमत शख्सियत स्मृति

आम आदमी की हमसफ़र कहानियों के कहानीकार स्वयं प्रकाश

समकालीन जनमत
रत्नेश विष्वक्सेन आम आदमी की हमसफर कहानियों के कहानीकार स्वयं प्रकाश जी का इस तरह चले जाना उदास करता है।उनकी रिक्तता को उनकी कहानियां भरेंगी...
जेरे बहस शख्सियत

वंचितों और पराधीन लोगों की ओर से बोलने वाले पहले दार्शनिक थे बुद्ध– प्रो. गोपाल प्रधान

” जिसे बौद्ध दर्शन का दुःखवाद कहा जाता है उसे अगर सामान्य जीवन के अर्थों में परिभाषित करें तो क्या परिभाषा निकलती है कि दुःख...
जनमत शख्सियत स्मृति

एक हमदर्द दोस्त की तरह मिलीं स्वयंप्रकाश की कहानियाँ

सुधीर सुमन
स्वयं प्रकाश से मिलने का इत्तिफाक नहीं हुआ, पर उनकी कहानियां इत्तिफाकन जिंदगी के बेहद बेचैन वक्तों में मेरे करीब आईं और मुझे किसी हमदर्द...
जनमत शख्सियत स्मृति

क्या तुमने कभी स्वयं प्रकाश को देखा है ?

समकालीन जनमत
प्रवीण कुमार क्या तुमने कभी स्वयं प्रकाश को देखा है ? हाँ ! मेरा यही जवाब है . देखा है और तीन बार मुलाकात भी...
कविता शख्सियत साहित्य-संस्कृति

बरेली में वीरेन डंगवाल के स्मारक का लोकार्पण

समकालीन जनमत
साहित्य अकादेमी सम्मान से पुरस्कृत विख्यात हिन्दी कवि वीरेन डंगवाल की स्मृति में बरेली में एक स्मारक का लोकार्पण आज किया गया. हिन्दी के जाने-माने...