Category : शख्सियत

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कविता की मुक्ति और मुक्ति की कविताः गोरख पाण्डेय का काव्य

प्रणय कृष्ण
(सन् 2005 में ‘ समय का पहिया ‘ शीर्षक से प्रकाशित गोरख पाण्डेय की चुनिंदा कविताओं के संकलन की भूमिका के रूप में लिखे इस...
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दुबले-पतले शरीर में एक मजबूत और क्रांतिकारी शख्सियत का नाम है ‘ नितिन राज ’

समकालीन जनमत
नितिन राज इस कड़ी सर्दी में जेल में हैं। पिछले वर्ष भी आज के दिन वे जेल में ही थे। नितिन राज सच्चे अर्थों में...
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‘क्यों कर न हो मुशब्बक शीशे सा दिल हमारा’ -शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी की याद

मृत्युंजय
फ़ारूक़ी साहब नहीं रहे। यह इलाहाबाद ही नहीं, समूचे हिन्दी-उर्दू दोआब के लिए बेहद अफसोसनाक खबर है। वे उर्दू के जबरदस्त नक्काद [आलोचक] थे, बेहतरीन...
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प्रिय कवि मंगलेश डबराल की याद में

कौशल किशोर
लखनऊ के लेखकों और संस्कृतिकर्मियों ने आज मंगलेश डबराल और राघव नरेश की स्मृति में शोक सभा आयोजित करके उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। शोक...
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स्मृति मंगलेश डबराल: ‘आवाज भी एक जगह है’

कौशल किशोर
साहित्य और विचार की संस्था लिखावट की ओर से ऑनलाइन गूगल मीट पर प्रसिद्ध कवि और गद्यकार मंगलेश डबराल की स्मृति में कार्यक्रम ‘आवाज़ भी...
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मंगलेश की कविताएं आने वाली पीढ़ियों को भी लंबे समय तक प्रेरित करती रहेंगी – संतोष सहर

कवि मंगलेश डबराल को जन संस्कृति मंच की श्रद्धांजलि पटना, 13 दिसंबर। स्थानीय छज्जूबाग में जन संस्कृति मंच की ओर से, विगत 9 दिसंबर को...
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क्रांतिकारी सांख्यिकीविद

समकालीन जनमत
( अंग्रेजी अखबार बिज़नेस स्टैंडर्ड में 14 नवंबर को प्रकाशित आर्चिस मोहन  के लेख का हिंदी अनुवाद, अंग्रेजी से अनुवाद : इन्द्रेश मैखुरी ) देश...
शख्सियत साहित्य-संस्कृति

मुक्तिबोध की कविताः जमाने का चेहरा भी, भविष्य का नक्शा भी

समकालीन जनमत
प्रणय कृष्ण मुक्तिबोध ने बहुत तरह से अपनी कविता को व्याख्यायित करने की कोशिश की है. वह कालयात्री है, वह जन चरित्री है, लेकिन मेरी...
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अर्नेस्तो ‘चे’ ग्वेराः नये मनुष्य के निर्माण का स्वप्न

समकालीन जनमत
संजय कुंदन बीते नौ अक्टूबर को महान क्रांतिकारी अर्नेस्तो चे ग्वेरा की शहादत को दुनिया भर में याद किया गया। इस मौके पर बीस वामपंथी...
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राजनीति में एक सूफ़ी

समकालीन जनमत
( 28 सितम्बर 1920 को इलाहाबाद के जमींदार मुस्लिम परिवार में पैदा हुए ज़िया –उल-हक़ ने अपने जीवन के सौ साल पूरे कर लिए हैं....

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