समकालीन जनमत

Category : जनमत

जनमत

जिन शहरों ने प्रवासी श्रमिकों से आँखें फेर ली थीं वही उनकी राह में आँखे बिछाये बैठे हैं

( अजीत महाले और के.वी. आदित्य भारद्वाज की यह रिपोर्ट ‘ द हिन्दू ‘ में प्रकाशित हुई है. समकालीन जनमत के पाठकों के लिए इसका...
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दिल्ली और मुम्बई के सबसे बुरे दिन अभी आने वाले हैं

समकालीन जनमत
बरखा दत्त ( वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त का यह लेख हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रकाशित हुआ है. समकालीन जनमत के पाठकों के लिए इसका हिन्दी अनुवाद...
जनमतपुस्तक

सत्य का अनवरत अन्वेषण हैं राकेश रेणु के ‘इसी से बचा जीवन’ की कविताएँ

सुशील मानव
  कविता क्या है और इसका काम क्या है- इस पर अनेक बातें हैं, अनेक परिभाषाएं हैं। लेकिन मौजूदा समय सत्य पर संकट का समय...
जनमत

इतिहास में दर्ज होगा मजदूरों का संघर्ष और साहस

अमित चमड़िया
गरीबी और गरीब को लेकर बचपन से ही हम लोग कई भ्रांतियों के शिकार होते आ रहे है I जब भी हम जैसे मध्यम वर्ग...
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आंदोलनकारियों से मुकदमा वापसी की मांग को लेकर गृहसचिव व डीजीपी से मिले वाम दल और जन संगठनों के नेता 

समकालीन जनमत
पटना. लाॅकडाउन के दौरान वाम दलों, श्रमिक संगठनों के नेताओं और नागरिक समुदाय के कई लोगों पर कोतवाली थाना प्रशासन द्वारा दर्ज किये गये मुकदमे...
कविताजनमत

रोहित ठाकुर प्रकृति की पुकार के कवि हैं

समकालीन जनमत
जसवीर त्यागी “नए ब्रांड का प्रेम उतारा था बाज़ार में /जिसने पहले/ लॉन्च किये हैं उसी कंपनी ने/ हत्या के नए उपकरण/ दाल-भात लिट्टी चोखे...
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अमेरिका में पुलिस घुटने पर बैठ जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के लिए मांग रही है मुआफ़ी

सुशील मानव
25 मई को काले नागरिक जॉर्ज फ्लोएड की गर्दन पर श्वेत घुटना गड़ाकर उसका कस्टोडियल मर्डर करने की घटना के बाद अमेरिका प्रशासन-पुलिस अब घुटनों...
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जेल में मक्खियों-मच्छरों के बीच तड़पता हूँ कि जल्द रिहा होता तो मरीज़ों की जिंदगी बचाने में लगता

समकालीन जनमत
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत मथुरा जेल में बंद बीआरडी मेडिकल कालेज के निलम्बित बाल रोग चिकित्सक डॉ कफील खान ने एक बार फिर जेल...
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अमेरिका के सामाजिक जीवन से रंगभेद कभी गायब नहीं रहा   

गोपाल प्रधान
अमेरिका के सामाजिक जीवन से रंगभेद कभी गायब नहीं हुआ. रंगभेद का सवाल नस्ल के साथ ही वर्ग से भी जुड़ा है. उनमें स्त्री के...
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यह सभ्यतागत आत्मविश्लेषण का क्षण है

समकालीन जनमत
हर्ष मंदर लाॅकडाउन के दौरान भारत के मजदूर वर्ग से पल्ला झाड़ लेना सामाजिक अपराध में सामूहिक सहभागिता है. राष्ट्रव्यापी लाॅकडाउन के लहूलुहान महीनों ने...
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क्या पीएम को भारत के सबसे बुरे मानवीय संकट की रत्तीभर भी परवाह है?

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कोरोना वायरस की महामारी का मुकाबला करने के लिये राष्ट्रव्यापी लाॅकडाउन की घोषणा उसी तरह जल्दीबाजी में की गयी जैसे नोटबन्दी की की गयी थी।...
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प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा देश की सामूहिक मानवता पर एक बदनुमा धब्बा है

समकालीन जनमत
इस महामारी से सर्वाधिक प्रभावित कौन है ? कोरोना वायरस समाज के सभी वर्गों को एकसमान रूप से प्रभावित कर रहा है, यह सोच सन्तोषप्रद...
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प्रवासी मजदूर जिनका कोई वतन नहीं

कोविड-19 को लेकर हुए लॉक डाउन के बाद हमारे देश में प्रवासी श्रमिकों की समस्या सबसे बड़े रूप  में उभर कर सामने आई है. वे...
जनमत

कोरोना और ईद-उल-फ़ित्र के बीच प्रवासी मज़दूर

समकालीन जनमत
आरफ़ा अनीस पूरी दुनिया इस वक़्त कोरोना नामक वैश्विक महामारी की चपेट में है। सीमित संसाधनों और ग़लत राजनीतिक नीतियों के बीच भारत में अब...
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निर्धन निर्माण अभिकरणों का योगदान और बेरोजगारी    

जनार्दन
मेहनत करने के बाद भी निर्धनता का विलोपन न होना अप्राकृतिक है. अप्राकृतिक निर्धनता का सर्जन शक्तिशाली संस्थाओं द्वारा होता है, जिसे वह अपनी जन-विरोधी...
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जीवन-संघर्ष का करुण कोलाहल

समकालीन जनमत
श्रमिकों की बदहाल अवस्था और उनकी दुर्दशा के बहाने पूंजीवादी व्यवस्था का वह वीभत्स रूप हमारे सामने है जहाँ निम्न वर्ग के जीवन का कोई...
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एक हौलनाक़ सफ़रनामा

समकालीन जनमत
इस त्रासद कहानी की जड़ें एक ओर मजदूरों के मालिकों और केन्द्रीय सरकार और दूसरी ओर उनके अपने राज्य की सरकारों की नाकामी में निहित...
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पैदल चले जा रहे मज़दूरों पर इतनी चुप्पी क्यों है ?

अनामिका 1960 में एक फ़िल्म आई थी, ‘उसने कहा था’. हिन्दी के सुप्रसिद्ध कहानीकार चन्द्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी पर आधारित है. फिल्म का एक...
जनमत

1857 की विरासत इस देश के गरीब, मजदूर, किसान और नौजवान के संघर्ष की सच्ची विरासत है : प्रो. चमन लाल

समकालीन जनमत
समकालीन जनमत के  फेसबुक पेज पर लाइव चल रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला में 10 मई को प्रोफेसर चमनलाल ने हिंदुस्तान की पहली जंगे आजादी पर...
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लॉकडाउन और बच्चों की मौत

देश में हर साल कुपोषण और भुखमरी से लाखों बच्चें मर जाते हैं, जबकि यहां अनाज से गोडाउन भरे पड़े हैं. ऐसे में भूख से...
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