समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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जनमत

भाजपा के राज में दलितों पर हमले की बढ़ी घटनाएं

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29 जुलाई, लखनऊ। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माले ने प्रयागराज समेत उत्तर प्रदेश में बढ़ रहे दलित समाज पर उत्पीड़न के खिलाफ लखनऊ हजरतगंज लखनऊ...
पुस्तक

‘गहन है यह अंधकारा’ की पुस्तक समीक्षा

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पवन करण कोई भी भाषा हो वह दुर्जनों की ज़बान से बोले जाते समय कसमसाती होगी। जो ग़लत और झूठ बोला जा रहा है और...
कविता

अवंतिका सिंह की कविता यात्रा संभावनाओं भरी नई सुबह की तलाश में है।

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प्रज्ञा गुप्ता अवंतिका सिंह की कविताएँ सामाजिक यथार्थ एवं उसकी विडंबनाओ का बोध कराती हुई हमसे संवाद करती है। अवंतिका एक ऐसा संसार रचना चाहती...
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योगी सरकार कानून-व्यवस्था के नाम पर कर रही वंचितों की जुबानबंदी

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प्रयागराज, 22 जुलाई 2025 गत 29 जून को करछना में हुए बवाल के बाद पुलिस द्वारा असंवैधानिक व बर्बर ढंग से की गई 70 से...
कविता

अरुण देव की कविताएँ मृत्‍यु की लौकिकता का संसार रचती हैं

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पंकज चौधरी मृत्‍यु के बाद जीवन को समाप्‍त मान लिया जाता है। माना जाता है कि मृत्‍यु के बाद जीवन की तमाम गतिविधियाँ और कारोबार...
पुस्तक

पवन करण के कविता संग्रह ‘स्त्री मुग़ल’ की पुस्तक समीक्षा

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अलका बाजपेयी ‘स्त्री मुगल’ ( राधाकृष्ण प्रकाशन, 2023) पवन करण जी की 100 कविताओं का एक संग्रह है जो कि मुग़ल साम्राज्य के भीतर रहने...
जनमत

सच की आवाज़ को चुप कराने की साज़िश

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पत्रकार अजीत अंजुम पर FIR के खिलाफ जन संस्कृति मंच का बयान वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम पर बिहार में दर्ज की गई FIR कोई अलग-थलग...
पुस्तक

विमल कुमार के काव्य संग्रह ‘मृत्यु की परिभाषा बदल दो’ की पुस्तक समीक्षा

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पवन करण इस दौर में कवि विमल कुमार की सक्रिय रचनात्मक निरंतरता उल्लेखनीय और आश्वस्तिकारी है। ‘सपने में एक औरत’ से बातचीत से बरास्ते ‘जंगल...
कविता

उद्देश्य कुमार की कविताएँ मध्यवर्गीय जीवन की एकरसता से जूझती हैं

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अनुराग यादव एक रचनाकार अगर वास्तव में समाज को एक नया नज़रिया, सोचने समझने का एक नया तरीका प्रदान करना चाहता है उसे अपनी दृष्टि...
पुस्तक

सुमेर सिंह राठौर की डायरी ‘बंजारे की चिठ्ठियाँ’ की पुस्तक समीक्षा

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पवन करण चिट्ठियाँ जो ख़ुद को भेजनी थीं, अपने डरों से लड़ने की कोशिश में, बंजारे की चिट्ठियाँ बन गईं- ‘बंजारे की चिट्ठियाँ’ पढ़ने के...

कृषि संकट को बढ़ा रही है मोदी सरकार की नीतियां

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मुसमरिया, जालौन। मोदी सरकार की कारपोरेट परस्त नीतियां कृषि संकट को इस कदर बढ़ा रही हैं कि अब यह  राजनीतिक संकट में बदल गया है।...
कविता

रोशन टोप्पो की कविताएँ आदिवासी परम्परा और विरासत के स्वर हैं

सन्ध्या नवोदिता रोशन टोप्पो आदिवासी जमीन के कवि हैं. आज भी आदिवासियों को अपनी बात अपने ही देशवासियों तक पहुँचाने के लिये अपनी भाषा की...
जनमत

दो युद्ध और वैश्विक शक्ति संतुलन के बदलने का संकेत

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जयप्रकाश नारायण  मई और जून में एशिया में दो बड़े युद्ध लड़े गए। एक भारत और पाकिस्तान के बीच जिसे भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के...
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प्रयागराज के करछना में बवाल नहीं, दलितों के खिलाफ बड़ी साजिश हुई : जांच रिपोर्ट

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प्रयागराज, 2 जुलाई। भाकपा (माले), आइसा और इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) की संयुक्त टीम ने प्रयागराज में करछना तहसील के इसौटा गांव का मंगलवार को...
कविता

संघमित्रा राएगुरू की कविताएँ सामाजिक और सांस्कृतिक संचेतना से सराबोर हैं

शिरोमणि महतो उड़ीसा की युवाकवि संघमित्रा राएगुरू उड़िया व हिंदी साहित्य से जुड़ी हुई हैं। दोनों भाषाओं में उनका समानाधिकार है। वह मुख्य रूप से...
पुस्तक

मुस्तफ़ा ख़ान के काव्यसंग्रह ‘पत्थरों की भाषा’ की पुस्तक समीक्षा

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पवन करण भाषा पत्थरों की मगर आहत नहीं करती किसी को: मुस्तफ़ा ख़ान की कविताएँ मुस्तफ़ा ख़ान लंबे समय से कविताएँ लिख रहे हैं। समय-समय...
पुस्तक

ललन चतुर्वेदी के कविता संग्रह ‘आवाज़ घर’ की पुस्तक समीक्षा

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 अष्टभुजा शुक्ल ललन चतुर्वेदी छोटी – छोटी कविताओं के ऐसे प्रौढ़ कवि हैं जो घोषित तौर पर ‘ बड़ी कविताएँ ‘ नहीं लिख सकते। कारण...
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पूनम शुक्ला के कविता संग्रह ‘पिता का मोबाईल नंबर’ की पुस्तक समीक्षा

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पवन करण तुम्हारी बातें कुदाल-सी खोदती रहतीं हैं मेरी मिट्टी, जब मिलता है तुम्हारे नेह का जल, हरी-भरी हो जाती हूं- कवि पूनम शुक्ला के...
कविता

अपूर्वा दीक्षित की कविताएँ मन की डोर को थामे रहने की समझ से निर्मित हैं

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पीयूष कुमार संभावनाओं से भरी अपूर्वा की कविताएँ.. समकालीन कविता जहाँ साहित्यिक लोकतंत्र के विस्तार से सम्पन्न हुई है, वहीं विचारहीन युवाओं के इस स्वर्णकाल...
कविता

सबीहा रहमानी की कविताओं में सामाजिक सच्चाई से टकराने का साहस है

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मयंक खरे डॉ. सबीहा रहमानी की कविताएँ केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे एक वैचारिक प्रतिरोध, सामाजिक दृष्टि और सांस्कृतिक पुनर्पाठ की कोशिशें...
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