समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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कविता

पवन कुमार वर्मा की कविताएँ समकालीनता का स्वीकार प्रस्तुत करती हैं

समकालीन जनमत
आलोक रंजन   युवा कवि पवन कुमार वर्मा की कविताएँ सामने हैं और सामने है हमारे समय की असलियतों की अभिव्यक्ति भी। इन कविताओं को...
जनमत

नामचीन लेखिका जया जादवानी बनीं जन संस्कृति मंच रायपुर की अध्यक्ष

समकालीन जनमत
लोकतंत्र, न्याय और समानता के लिए कार्यरत प्रतिबद्ध लेखिकाओं और संस्कृतिकर्मियों के हाथों में जसम रायपुर की कमान लेखिका वंदना कुमार और दिलशाद सैफी उपाध्यक्ष...
कविता

रौशन कुमार की कविताएँ जेएनयू से अर्जित सामाजिक परिवर्तन की उम्मीद से निर्मित हैं

समकालीन जनमत
नीलम युवा कवि रौशन कुमार की कविताएँ ‘ भूख हड़ताल ‘, ‘ नजीब तुम ज़िंदा हो ‘…,  ‘ क्या है जे एन यू ‘, ‘...
पुस्तक

हृषीकेश सुलभ के उपन्यास ‘दाता पीर’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
पवन करण दाता पीर एक सुनार का बेटा था। चाँद के टुकड़े जैसा सुंदर। उसने आवाज़ लगाई कि कुछ गढ़वा लो, कुछ बनवा लो। उसने...
शख्सियत

यूं ही लोग उन्हें भाभी नहीं कहते थे: प्रणय कृष्ण

01अगस्त को मीना राय के जन्मदिन पर इलाहाबाद में ‘स्मरण में है आज जीवन’ कॉम. मीना राय की स्मृति में प्रलेसं, जलेसं, जसम और समकालीन...
जनमत

अजय जी को याद करते हुए

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  अजय जी ने इस फानी दुनिया से विदा ले ली है। अपना सब कुछ इसी दुनिया में छोड़कर सीखते, समझते-बूझते और लड़ते हुए...
शख्सियत

प्रेमचंद मानवीय मूल्यों को जीवित रखने वाले रचनाकार थे: जया जादवानी

11 स्कूलों के 180 बच्चों ने ईदगाह, बूढ़ी काकी और पंच परमेश्वर को कैनवास पर उतारा  सबने माना…नफ़रत के इस भयावह दौर में बच्चों को...
जनमतसाहित्य-संस्कृति

मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर बच्चों ने बनाया चित्र

समकालीन जनमत
राजकुमार सोनी  रायपुर. जन संस्कृति मंच रायपुर और शिवम् एजुकेशन एकेडमी के संयुक्त तत्वावधान में 31 जुलाई को कथा और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की...
जनमत

‘आपरेशन सिंदूर’ पर संसद  में 16 घंटे की बहस

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  28 और 29 जुलाई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और उसके बाद घटित घटनाओं  को लेकर संसद में 16 घंटे की बहस पूर्व निर्धारित कार्यक्रम...
जनमत

भाजपा के राज में दलितों पर हमले की बढ़ी घटनाएं

समकालीन जनमत
29 जुलाई, लखनऊ। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माले ने प्रयागराज समेत उत्तर प्रदेश में बढ़ रहे दलित समाज पर उत्पीड़न के खिलाफ लखनऊ हजरतगंज लखनऊ...
पुस्तक

‘गहन है यह अंधकारा’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
पवन करण कोई भी भाषा हो वह दुर्जनों की ज़बान से बोले जाते समय कसमसाती होगी। जो ग़लत और झूठ बोला जा रहा है और...
कविता

अवंतिका सिंह की कविता यात्रा संभावनाओं भरी नई सुबह की तलाश में है।

समकालीन जनमत
प्रज्ञा गुप्ता अवंतिका सिंह की कविताएँ सामाजिक यथार्थ एवं उसकी विडंबनाओ का बोध कराती हुई हमसे संवाद करती है। अवंतिका एक ऐसा संसार रचना चाहती...
जनमत

योगी सरकार कानून-व्यवस्था के नाम पर कर रही वंचितों की जुबानबंदी

समकालीन जनमत
प्रयागराज, 22 जुलाई 2025 गत 29 जून को करछना में हुए बवाल के बाद पुलिस द्वारा असंवैधानिक व बर्बर ढंग से की गई 70 से...
कविता

अरुण देव की कविताएँ मृत्‍यु की लौकिकता का संसार रचती हैं

समकालीन जनमत
पंकज चौधरी मृत्‍यु के बाद जीवन को समाप्‍त मान लिया जाता है। माना जाता है कि मृत्‍यु के बाद जीवन की तमाम गतिविधियाँ और कारोबार...
पुस्तक

पवन करण के कविता संग्रह ‘स्त्री मुग़ल’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
अलका बाजपेयी ‘स्त्री मुगल’ ( राधाकृष्ण प्रकाशन, 2023) पवन करण जी की 100 कविताओं का एक संग्रह है जो कि मुग़ल साम्राज्य के भीतर रहने...
जनमत

सच की आवाज़ को चुप कराने की साज़िश

समकालीन जनमत
पत्रकार अजीत अंजुम पर FIR के खिलाफ जन संस्कृति मंच का बयान वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम पर बिहार में दर्ज की गई FIR कोई अलग-थलग...
पुस्तक

विमल कुमार के काव्य संग्रह ‘मृत्यु की परिभाषा बदल दो’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
पवन करण इस दौर में कवि विमल कुमार की सक्रिय रचनात्मक निरंतरता उल्लेखनीय और आश्वस्तिकारी है। ‘सपने में एक औरत’ से बातचीत से बरास्ते ‘जंगल...
कविता

उद्देश्य कुमार की कविताएँ मध्यवर्गीय जीवन की एकरसता से जूझती हैं

समकालीन जनमत
अनुराग यादव एक रचनाकार अगर वास्तव में समाज को एक नया नज़रिया, सोचने समझने का एक नया तरीका प्रदान करना चाहता है उसे अपनी दृष्टि...
पुस्तक

सुमेर सिंह राठौर की डायरी ‘बंजारे की चिठ्ठियाँ’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
पवन करण चिट्ठियाँ जो ख़ुद को भेजनी थीं, अपने डरों से लड़ने की कोशिश में, बंजारे की चिट्ठियाँ बन गईं- ‘बंजारे की चिट्ठियाँ’ पढ़ने के...

कृषि संकट को बढ़ा रही है मोदी सरकार की नीतियां

समकालीन जनमत
मुसमरिया, जालौन। मोदी सरकार की कारपोरेट परस्त नीतियां कृषि संकट को इस कदर बढ़ा रही हैं कि अब यह  राजनीतिक संकट में बदल गया है।...
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