समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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कविता

सपना भट्ट की कविताएँ: निर्मम हक़ीक़त के मध्य जीवन की आर्द्रता बचाने की जद्दोजहद

समकालीन जनमत
मंजुला बिष्ट हमारा मौजूदा समय मानवीय संघर्ष के साथ अदृश्य स्वास्थ्य शत्रु की गिरगिटिया गिरफ्त में है। हमारे समक्ष सपनों व निर्मम हकीकत के मध्य...
कविता

संजय शेफर्ड की कविताएँ: आजकल मैं तुम्हारी हँसी ओढ़ता हूँ..

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गणेश गनी तो वह टीले दर टीले चढ़ते हुए चैहणी दर्रे के ठीक ऊपर पहुँच ही गया। बादल ठीक उसके समानांतर तैर रहे हैं। जो...
कविता

गोलेन्द्र की कविताएँ: अपनी बोली में जनता के दुखों और आक्रोश को ज़ाहिर करती नयी कलम

समकालीन जनमत
अनुपम त्रिपाठी समकालीन जनमत के लिए ‘नई कलम’ में आज बात करते हैं गोलेन्द्र पटेल की कविताओं पर। कई बार कच्चेपने की अपनी एक अलग...
कविता

शिरीष कुमार मौर्य की कविता में पहाड़ अपनी समस्त शक्ति एवं सीमाओं के साथ उपस्थित होता है

समकालीन जनमत
‘मनुष्यता के ग्रीष्म में रहता कवि- शिरीष कुमार मौर्य’ वसंत आते-आते मैं शिवालिक के ढलानों पर खिला फूल हूँ जंगली घासों का थोड़ी ही है...
शख्सियत

सूरजपाल चौहान: कच्चे अनुभव नहीं पकी हुई समझ के रचनाकार

समकालीन जनमत
दुखद खबरों का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा. इसी बीच खबर आ रही है कि हिंदी के वरिष्ठ दलित साहित्यकार सूरजपाल चौहान...
शख्सियत

कन्नड़ साहित्यकार सिद्धलिंगय्या: क्रांतिकारिता से सांस्कृतिक इयत्ता तक

समकालीन जनमत
  सर्वेश कुमार मौर्य कोरोना महामारी से लगातार जूझ रहे देश में कर्नाटक से भी एक बुरी खबर आ रही है; कन्नड़ साहित्य के प्रमुख...
कविता

स्त्री जीवन के यथार्थ को दर्शाती मंजुला बिष्ट की कविताएँ

समकालीन जनमत
सोनी पाण्डेय   मैं अक्सर सोचती हूँ कि पुरुषवादी समाज में हमेशा से औरतों का आंकलन ऐसा क्यों रहा कि वह कहने को विद्या की...
स्मृति

वरिष्ठ कन्नड़ दलित साहित्यकार सिद्धलिंगय्या को विदाई सलाम

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हीरालाल राजस्थानी वरिष्ठ कन्नड़ दलित साहित्यकार माननीय सिद्धलिंगय्या (1954 से 11 जून 2021) का जाना एक युग का बीत जाना है. कन्नड़ के जाने माने...
शख्सियत

शहीद रामप्रसाद बिस्मिल : वो क्रांतिकारी जो शोषण और ग़ैर बराबरी के ख़िलाफ़ अंत तक लड़ता रहा

समकालीन जनमत
(भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी और शहीद रामप्रसाद बिस्मिल(11 जून 1897-19 दिसम्बर 1927) के जन्मदिवस पर  उन्हें याद कर रहे हैं हर्षवर्धन और अंकुर...
स्मृति

अज़ीम कवि एवं फ़िल्मकार बुद्धदेव दासगुप्ता

समकालीन जनमत
प्रशांत विप्लवी जब फ़िल्मों का बहुत ज्यादा इल्म नहीं था तब भी बहुत सारी महत्त्वपूर्ण फिल्में देखने की क्षीण स्मृति है। विकल्पहीनता कई बार वरदान...
स्मृति

शुक्ला चौधुरी : प्रकृति से प्रेम करने वाली रचनाकार का जाना

समकालीन जनमत
मीता दास कवि व कथाकार शुक्ला चौधुरी नहीं रहीं। उनका जाना एक ऊर्जावान रचनाकार का जाना है। कोरोना से जंग थी। उनका इसे न जीत...
कविता

रामेश्वर प्रशान्त की कविताएँ जनता के रिसते ज़ख्मों का दस्तावेज़ हैं

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राणा प्रताप ________________________________________ ‘भविष्य उन लोगों का होगा जिन्हें आधुनिक समाज की आत्मा की पकड़ होगी और अत्यंत परिशुद्ध सिद्धांतों को छोड़कर जीवन की अपेक्षाकृत...
कविता

तनुज की कविताएँ

समकालीन जनमत
प्रशांत विप्लवी “कविता की नब्ज़ को छूकर हम महसूस कर सकते हैं कि उसमें हमारा कितना रक्त, कितने ताप और दबाव का प्रवाह दौड़ रहा...
कविता

फ़िरोज़ की कविताएँ इस राजनीतिक सन्निपात में एक सचेत बड़बड़ाहट हैं

समकालीन जनमत
प्रभात मिलिंद फ़िरोज़ खान की ये कविताएँ फ़ासीवाद के ख़िलाफ़ आक्रोश की कविताएँ है। काव्य-वक्रोक्ति की अनुपस्थिति में ये अपने लहज़े में थोड़ी खुली हुई...
स्मृति

मेरी मातृभूमि का कोई मुआवज़ा नहीं हो सकता: सुंदरलाल बहुगुणा

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मई 1995 में वर्तमान में उत्तराखण्ड में शिक्षक नवेंदु मठपाल टिहरी बांध आंदोलन और वहाँ के डूब क्षेत्र के गाँवों की स्थितियों को नज़दीक से...
स्मृति

प्रो. लाल बहादुर वर्मा: वे एक साथ अध्यापक और दोस्त दोनों थे

समकालीन जनमत
धर्मेंद्र सुशांत लाल बहादुर वर्मा नहीं रहे.. करीब 20–21 साल पहले पटना में उनसे पहली बार मुलाकात हुई थी गोकि जान उन्हें पहले चुका था....
स्मृति

प्रो. लाल बहादुर वर्मा: एक प्रोफ़ेसर जिसने विविधता का मतलब बताया

समकालीन जनमत
सविता पाठक ये माना जिन्दगी है चार दिन की बहुत होते हैं यारों ये चार दिन भी -फ़िराक़  प्रो लालबहादुर वर्मा नहीं रहे। ये ख़बर...
स्मृति

मेरी नींद मत लो मेरे सपने लो: मंगलेश स्मृति

समकालीन जनमत
मिथिलेश श्रीवास्तव दिल्ली शहर मंगलेश डबराल की कविता ‘मत्र्योश्का’ की तरह है ( मत्र्योश्का रूस की एक लोकप्रिय गुड़िया है जिसमें लकड़ी की बनी क्रमशः...
कविता

रवि निर्मला सिंह की कविताएँ जातिवाद की जड़ों और उसकी चोट की तल्ख़ पहचान हैं

समकालीन जनमत
हीरालाल राजस्थानी आज के युवा रचनाकार मार्क्स के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी भली भांति समझते हैं और जाति के सवालों तथा समतामूलक समाज के निर्माण...
ज़ेर-ए-बहस

भाजपा सदस्यों के नाम संगीतकार टी. एम. कृष्णा का ख़त

समकालीन जनमत
प्रसिद्ध संगीतकार टी एम कृष्णा ने आज ‘इंडियन एक्स्प्रेस’ में Dear Members of BJP शीर्षक से यह लेख/ख़त लिखा है। यहाँ उस ख़त का डॉ....
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