समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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कविता

अमरजीत कौंके की कविताओं में आम आदमी का जीवन और संघर्ष प्रमुखता से झलकता है।

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निरंजन श्रोत्रिय अमरजीत कौंके मूलतः पंजाबी भाषा के कवि हैं। उन्होंने पंजाबी-हिन्दी के बीच अनुवाद की महत्वपूर्ण आवाजाही की है। इन सबके साथ वे हिन्दी...
कविता

सरिता संधू की कविताएँ व्यवस्था की आँखों में झाँकती संवेदनाएँ हैं

हीरालाल राजस्थानी सरिता संधू पिछले दो सालों से दलित लेखक संघ से जुड़ी हुई हैं। उनकी विशेषता है कि संगठन के प्रति अपने कर्तव्यों का...
ख़बर

दिल्ली विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर विस्थापन: एक सुनियोजित त्रासदी

दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों का संयुक्त प्रेस सम्मेलन हिन्दू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के समरवीर सिंह की संस्थागत हत्या की पृष्ठभूमि में बड़े पैमाने...
कविता

आनंद बहादुर की कविताएँ जीवन की अंतर्यात्रा को उकेरती हैं

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विनय सौरभ   नहीं होने ने जो थोड़ी सी जगह खाली की है वह मैं हूँ एक दिन नहीं होना किसी जगह से आएगा और...
कविता

पुरू मालव की कविताएँ एक आत्मीय आग्रह के साथ बड़े सवालों पर बात करती हैं

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निरंजन श्रोत्रिय   युवा कवि पुरू मालव की आसान-सी दिखने वाली ये कविताएँ हमारे भीतर एक फोर्स के साथ खुलती हैं। वह चाहे विस्थापन का...
कविता

मोहन कुमार डहेरिया की कविताएँ व्यक्तिगत और सामूहिक अभिव्यक्ति को सशक्त और बेचैन होकर ज़ाहिर करती हैं

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पीयूष कुमार आत्मा के पेड़ पर बैठा कवि मोहन कुमार डहेरिया की कविताओं में मनुष्यविरोधी समय का अतियथार्थ अपनी विकलताओं और भावसघनाओं के साथ आता...
कविता

जोगेन चौधुरी की कविताएँ चित्रकला सा वितान रचती हैं

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मीता दास मैंने ‘उजाले और अँधेरे में एक फूल’  नाम से एक पुस्तक का अनुवाद किया जिसमें शीर्षस्थ समकालीन भारतीय कलाकार जोगेन चौधरी की मूल...
जनमत

राहुल गांधी की  संसद की सदस्यता का रद्द होना- लोकतंत्र पर सर्जिकल स्ट्राइक

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 अघोषित आपातकाल का दायरा तेजी से फैल रहा है। अगर संघ-भाजपा के अतीत के कारनामों पर चर्चा न भी करें, तो  2014 के बाद मोदी-शाह...
जनमत

पीयूष कुमार की कविताएँ प्रकृति, प्रेम और सरोकारों की बानगी हैं

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रजत कृष्ण किसी भी रचनाकार की उपस्थिति से प्रचलित साहित्य धारा में उसके जीवन सरोकार, भाव संवेदना, सौंदर्य दृष्टि और तत्कालीन जीवन संघर्ष आदि में...
कविता

अनिल अनलहातु की कविताएँ हमारी हताशा और जिजीविषा का अन्तर्द्वन्द्व हैं

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प्रभात मिलिंद अनिल अनलहातु हमारे समय के विरल और अनिवार्य कवि हैं. कविताओं में वक्रोक्तियों का कारुणिक प्रयोग कैसे संभव हो सकता है, व्यंग्य में...
कविता

शिरोमणि महतो की कविताओं की प्रकृति देशज है।

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निरंजन श्रोत्रिय युवा कवि शिरोमणि महतो की इन कविताओं में भाषा और अनुभवों की ताजगी साफ देखी जा सकती है। इन कविताओं मे कवि ने...
जनमत

गन्ना मिल मालिक, सरकार और किसान- एक

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जयप्रकाश नारायण  महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन में दूसरा बड़ा राज्य है। यूपी में लगभग 120 चीनी मिलें हैं। जिसमें अधिकांश अब निजी...
कविता

उर्मिल मोंगा की कविताएँ स्वप्न और उम्मीद जगाती हैं

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कौशल किशोर कहा जाता है कि मानवीय दर्द का एहसास व अनुभूति तथा मुक्ति की कलात्मक अभिव्यक्ति ही आज की कविता है। भाव, विचार व...
कविता

यूनुस ख़ान की कविताएँ जीवन और समय की जटिलताओं को दर्ज करती हैं

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निरंजन श्रोत्रिय सरलता का शिल्प सबसे जटिल होता है। जीवन और समय की जटिलताओं को कविता के जटिल शिल्प में ढाल देना एक रूपान्तरण हो...
कविता

बोधिसत्व की कविताएँ सच सरेआम कहने के हुनर का शिल्प हैं

समकालीन जनमत
भरत प्रसाद बोधिसत्व की पहचान 90 के दशक के प्रमुख कवि के तौर पर बनी, जो आजतक कायम है। हम जो नदियों का संगम हैं-2002...
कविता

सुनीता ‘अबाबील’ की कविताएँ स्त्री पीड़ा की अंतर यात्रा हैं

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हीरालाल राजस्थानी बेशक ही दलित व हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श को स्थान मिलता रहा है। खासतौर पर कविता विधा में, जहाँ शुरुआती दौर में...
स्मृति

गोरख स्मृति दिवस की पूर्व संध्या पर हैदराबाद विश्वविद्यालय में कार्यक्रम

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कल 28 जनवरी गोरख स्मृति दिवस की पूर्व संध्या पर हैदराबाद विश्वविद्यालय में गोरख को उनकी कविताओं एवं गीतों के माध्यम से याद किया गया।...
कविता

रमेश ऋतंभर की कविताओं में सामूहिकता की भावना शिद्दत से अभिव्यक्त होती है

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पंकज चौधरी समकालीन हिन्दी कविता में दो तरह की कविताएँ अधिक प्रामाणिक और विश्वसनीय कही जा सकती हैं। एक तो वे कविताएँ, जिन्हें लिखने वाले...
कविता

श्याम अविनाश की कविता: अदृश्य से जन्मता है दृश्य

समकालीन जनमत
आनंद बहादुर   …दूर नीम का एक पेड़ भींग रहा है या नहीं दूर से दिखता नहीं है किसी का भींगना… मांदल की आवाज के...
कविता

दीपेश कुमार की कविताएँ सामाजिक विषमताओं की थाह लेती हैं

समकालीन जनमत
विपिन चौधरी युवा कवि दिपेश कुमार की कलम अभी नई है इन्होंने अपनी इन चारों कविताओं में भारतीय समाज के उस हिस्से को केंद्र बनाया...
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