समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

1187 Posts - 0 Comments
ख़बर

बेटियों को बचाने का नारा देने वाली सरकार बलात्कारियों को बचा रही है : मीना तिवारी

समकालीन जनमत
वाराणसी। अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) का 9वां राज्य सम्मेलन रानी लक्ष्मीबाई एवम सुशीला सामद हॉल सुंदरपुर, ककर्मत्ता, वाराणसी में सावित्रीबाई फुले और फातिमा...
कविता

योगेंद्र गौतम की कविताएँ अंधेरे के अज्ञात बिन्दु से प्रकाश की खोज में निकली यात्री हैं

समकालीन जनमत
प्रिया वर्मा यह कवि रात्रि के किसी अज्ञात बिंदु पर खड़ा हुआ है और अंधेरे के उस अज्ञात बिंदु में प्रकाश को खोजते हुए कविता...
शख्सियत

हम लड़ेंगे कि लड़ने के बगैर कुछ भी नहीं मिलता

समकालीन जनमत
सुशील सुमन पाश से हमारा पहला परिचय ‘हम लड़ेंगे साथी’ कविता से हुआ। एक कविता-पोस्टर पर पहली बार इस कविता की कुछ काव्य-पंक्तियाँ पढ़ने को...
कविता

गुंजन उपाध्याय पाठक की कविताएँ प्रेम के अभाव से पैदा अवसाद से मुक्ति के लिए प्रेम की जद्दोजहद हैं

समकालीन जनमत
सुधीर सुमन  महादेवी वर्मा ने ‘शृंखला की कड़ियाँ’ में लिखा है- ‘‘स्त्री के व्यक्तित्व में कोमलता और सहानुभूति के साथ साहस और विवेक का ऐसा सामंजस्य होना आवश्यक...
साहित्य-संस्कृति

भोजली : मित्रता और प्रकृति के प्रति समर्पण की मिसाल

समकालीन जनमत
पीयूष कुमार लोकसंस्कृति के मूल में प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और उसके मानवीय एकीकरण की भावना की जलधारसंचरित रहती है। छत्तीसगढ़ में इसी तरह का...
शख्सियत

104 की अमृता: आशिक और अदीब मरते कहाँ हैं

समकालीन जनमत
पीयूष कुमार 2023 में अमृता एक सौ चार की हुईं। इस फानी दुनिया को तो उनके जिस्म ने 2005 में विदा कहा था पर आशिक...
कविता

सच के रास्तों ने दुर्गम ही बनाया है जीवन को : ज्योति चावला की कविताएँ

समकालीन जनमत
अनुपम त्रिपाठी ‘यह उनींदी रातों का सफर है’ ज्योति चावला का नया कविता संग्रह है। इस संग्रह में उनकी पचास कविताएँ संकलित हैं जोकि उनके...
ख़बर

संयुक्त किसान मोर्चा ने क्रांति दिवस पर किया प्रदर्शन

समकालीन जनमत
मऊ संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय आवाहन पर मऊ के किसान और खेतिहर मजदूर संगठनों ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की चली...
ख़बर

क्रांति दिवस पर वामदलों ने निकाला जुलूस

समकालीन जनमत
आज़मगढ़ 9 अगस्त, क्रांति दिवस के अवसर पर वामदलों के तरफ से आज़मगढ़ नरौली प्राइवेट बस स्टैंड से आज़मगढ़ रिक्शा स्टैंड तक मार्च निकाला गया।...
कविता

नरेश अग्रवाल की कविताएँ जनता के संघर्षों की सहचरी हैं

समकालीन जनमत
विपिन चौधरी यह संसार आश्चर्य से भरा हुआ है लेकिन अभी तक सभी आश्चर्य खोजे नहीं जा सके हैं. मगर दुख खोज लिए गए हैं।...
जनमतसाहित्य-संस्कृति

प्रेमचंद आज होते तो ‘ठाकुर का कुआं’ न लिखकर ‘ठाकुर की कुर्सी’ कहानी लिखते

समकालीन जनमत
आज़मगढ़ प्रेमचंद जयंती के अवसर पर 31 जुलाई 2023 को आज़मगढ़ के रैदोपुर स्थित राहुल चिल्ड्रेन एकेडमी में एक गोष्ठी का आयोजन हुआ। गोष्ठी का...
जनमत

अमेरिका में एफर्मेटिव एक्शन की वापसी: कोटा, विविधता और विपन्नता

समकालीन जनमत
अरुंधति काटजू  समानता बनाम विविधता इस निर्णय का प्रभाव केवल विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं रह गया है। अश्वेत लोगों और महिलाओं को नियुक्तियों में लाभ...
कविता

विमलेश त्रिपाठी की कविताएँ  हमारे समय में अभिव्यक्ति पर मंडराते ख़तरों की शिनाख़्त करती हैं

समकालीन जनमत
राजेश जोशी विमलेश की कविताएँ इस समय की कविता की सबसे बड़ी उलझन की ओर संकेत करती हैं। प्रोद्यौगिकी ने समय की गति को इतना...
ख़बरजनमत

मणिपुर की घटना पर नागरिकों ने किया मार्च

समकालीन जनमत
आज़मगढ़। मणिपुर की घटना को लेकर विपक्षी राजनीतिक दल और नागरिक मंच के तरफ से कुंवर सिंह उद्यान से मार्च निकाला गया। मार्च मे लोग,...
कविता

ललन चतुर्वेदी की कविताएँ अमानवीकरण के ख़िलाफ़ प्रतिरोध हैं

समकालीन जनमत
वसु गंधर्व कविता जीवन के भुलाए जा रहे ज़रूरी सत्यों का स्मरण भी है। यह एक प्रतिसंसार का आह्वान भी है जहाँ उस करुणा की...
कविता

मुन्नी गुप्ता की कविताएँ अपने समय की पीड़ा और परिदृश्य के सच को उजागर करती हैं

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय समकालीन युवा काव्य परिदृश्य में मुन्नी गुप्ता एक दस्तक देता हुआ नाम है। उनकी कविताओं में व्यंग्य और कटाक्ष छितरा हुआ है लेकिन...
जनमतज़ेर-ए-बहस

यूनिफ़ार्म सिविल कोड: मामला नीयत का है

समकालीन जनमत
जी.एन. देवी एक अनीश्वरवादी के लिए जो विचार ईश्वर का है, वही भारत के लिए यूनिफ़ार्म सिविल कोड के प्रस्ताव का है। स्वयं में यह...
कविता

भास्कर लाक्षाकार की कविताएँ जीवन अनुभवों से निर्मित मनुष्य की स्पोन्टेनिटी से सृजित हैं

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय क्या यह संभव है कि किसी कवि को अपने समय-समाज के तापमान का सम्यक ज्ञान हो, उसकी कविता विचार और भावनाओं से समृद्ध...
पुस्तक

स्त्रियाँ अब प्रेम नहीं करतीं’: पुरुषसत्तात्मक समाज में स्त्रियों के सवाल उठाता कविता संग्रह

समकालीन जनमत
राजेश पाल मूर्तिकार, कवि, कथाकार व दलित चिंतक हीरालाल राजस्थानी का काव्य संग्रह “मै साधु नहीं” के बाद “स्त्रियाँ अब प्रेम नहीं करती” दूसरा कविता संग्रह हैं...
कविता

अमन त्रिपाठी की कविताएँ ‘सेन्स ऑफ़ बिलॉन्गिंग’ से उपजी हैं। 

समकालीन जनमत
वर्तिका पढ़ाई से इंजीनियर अमन , समर्थ अनुवादक और कवि के तौर पर सक्रिय हैं।  शहर देखने, प्रेम में रहकर प्रेम न कर पाने के...
Fearlessly expressing peoples opinion