समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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जनमत

पत्रकारों की गिरफ्तारी के खिलाफ नागरिक समाज ने किया प्रदर्शन

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इलाहाबाद दिनांक 10 अक्टूबर 2023 को नागरिक समाज के द्वारा 3 अक्टूबर को पत्रकारों पर किए गए NIA के छापेमारी के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन...
कविता

अरबाज़ खान की कविताएँ प्रेम, प्रतिरोध और पीड़ा की बानगी हैं

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पुरु मालव अरबाज़ ख़ान और उनकी कविताओं से पहला परिचय हाल ही में आए ’समय के साखी’ पत्रिका के कविता विशेषांक से हुआ। जिसका सम्पादन...
कविता

वल्लभ की कविताओं में सच का ताप है

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जन संस्कृति मंच की ओर से 30 सितंबर 2023 को फूड इंडिया, आरा के मीटिंग हॉल में कवि वल्लभ के तीसरे कविता संग्रह ‘पोतराज’ का...
कविता

नीरज नीर की कविताएँ विडबंनात्मक बोध को उजागर करती हैं

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शिरोमणि राम महतो कुछ लोग कविता बनाते हैं और कुछ लोग कविता रचते हैं। जो कविता बनाते हैं, उनकी कविताओं में बनावटीपन ज्यादा होता है...
कविता

संध्या यादव की कविताएँ समकालीन समाज की अनेक विसंगतियों से एक स्त्री की बहसें हैं

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अमरजीत कौंके फेसबुक पर जिन कवियों की कविता मुझे बहुत पसंद है और मैं जिन्हें ढूंढ कर पढ़ता हूँ, संध्या यादव उन चंद कवियों में...
जनमतशख्सियत

शेखर जोशी स्मृति आयोजन से शहर ने किया अपने प्रिय साहित्यकार को याद

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हिंदी साहित्य के सशक्त रचनाकार और इलाहाबाद शहर के गौरव शेखर जोशी के जन्मदिन के अवसर पर बीते 9-10 सितम्बर को  द्वि- दिवसीय शेखर जोशी...
कविता

जावेद आलम की कविताएँ मानवता के पक्ष में निर्भीकता से खड़ी हैं

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अशोक कुमार “स्याह वक्त कि इबारतें” युवा कवि जावेद आलम खान का पहला संग्रह है, जिसे दीपक अरोड़ा स्मृति सम्मान के तहत बोधि प्रकाशन ने...
ख़बर

बेटियों को बचाने का नारा देने वाली सरकार बलात्कारियों को बचा रही है : मीना तिवारी

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वाराणसी। अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) का 9वां राज्य सम्मेलन रानी लक्ष्मीबाई एवम सुशीला सामद हॉल सुंदरपुर, ककर्मत्ता, वाराणसी में सावित्रीबाई फुले और फातिमा...
कविता

योगेंद्र गौतम की कविताएँ अंधेरे के अज्ञात बिन्दु से प्रकाश की खोज में निकली यात्री हैं

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प्रिया वर्मा यह कवि रात्रि के किसी अज्ञात बिंदु पर खड़ा हुआ है और अंधेरे के उस अज्ञात बिंदु में प्रकाश को खोजते हुए कविता...
शख्सियत

हम लड़ेंगे कि लड़ने के बगैर कुछ भी नहीं मिलता

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सुशील सुमन पाश से हमारा पहला परिचय ‘हम लड़ेंगे साथी’ कविता से हुआ। एक कविता-पोस्टर पर पहली बार इस कविता की कुछ काव्य-पंक्तियाँ पढ़ने को...
कविता

गुंजन उपाध्याय पाठक की कविताएँ प्रेम के अभाव से पैदा अवसाद से मुक्ति के लिए प्रेम की जद्दोजहद हैं

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सुधीर सुमन  महादेवी वर्मा ने ‘शृंखला की कड़ियाँ’ में लिखा है- ‘‘स्त्री के व्यक्तित्व में कोमलता और सहानुभूति के साथ साहस और विवेक का ऐसा सामंजस्य होना आवश्यक...
साहित्य-संस्कृति

भोजली : मित्रता और प्रकृति के प्रति समर्पण की मिसाल

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पीयूष कुमार लोकसंस्कृति के मूल में प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और उसके मानवीय एकीकरण की भावना की जलधारसंचरित रहती है। छत्तीसगढ़ में इसी तरह का...
शख्सियत

104 की अमृता: आशिक और अदीब मरते कहाँ हैं

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पीयूष कुमार 2023 में अमृता एक सौ चार की हुईं। इस फानी दुनिया को तो उनके जिस्म ने 2005 में विदा कहा था पर आशिक...
कविता

सच के रास्तों ने दुर्गम ही बनाया है जीवन को : ज्योति चावला की कविताएँ

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अनुपम त्रिपाठी ‘यह उनींदी रातों का सफर है’ ज्योति चावला का नया कविता संग्रह है। इस संग्रह में उनकी पचास कविताएँ संकलित हैं जोकि उनके...
ख़बर

संयुक्त किसान मोर्चा ने क्रांति दिवस पर किया प्रदर्शन

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मऊ संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय आवाहन पर मऊ के किसान और खेतिहर मजदूर संगठनों ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की चली...
ख़बर

क्रांति दिवस पर वामदलों ने निकाला जुलूस

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आज़मगढ़ 9 अगस्त, क्रांति दिवस के अवसर पर वामदलों के तरफ से आज़मगढ़ नरौली प्राइवेट बस स्टैंड से आज़मगढ़ रिक्शा स्टैंड तक मार्च निकाला गया।...
कविता

नरेश अग्रवाल की कविताएँ जनता के संघर्षों की सहचरी हैं

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विपिन चौधरी यह संसार आश्चर्य से भरा हुआ है लेकिन अभी तक सभी आश्चर्य खोजे नहीं जा सके हैं. मगर दुख खोज लिए गए हैं।...
जनमतसाहित्य-संस्कृति

प्रेमचंद आज होते तो ‘ठाकुर का कुआं’ न लिखकर ‘ठाकुर की कुर्सी’ कहानी लिखते

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आज़मगढ़ प्रेमचंद जयंती के अवसर पर 31 जुलाई 2023 को आज़मगढ़ के रैदोपुर स्थित राहुल चिल्ड्रेन एकेडमी में एक गोष्ठी का आयोजन हुआ। गोष्ठी का...
जनमत

अमेरिका में एफर्मेटिव एक्शन की वापसी: कोटा, विविधता और विपन्नता

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अरुंधति काटजू  समानता बनाम विविधता इस निर्णय का प्रभाव केवल विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं रह गया है। अश्वेत लोगों और महिलाओं को नियुक्तियों में लाभ...
कविता

विमलेश त्रिपाठी की कविताएँ  हमारे समय में अभिव्यक्ति पर मंडराते ख़तरों की शिनाख़्त करती हैं

समकालीन जनमत
राजेश जोशी विमलेश की कविताएँ इस समय की कविता की सबसे बड़ी उलझन की ओर संकेत करती हैं। प्रोद्यौगिकी ने समय की गति को इतना...
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