स्मृति हृदय में व्यथा का रिसाव करती हैं सुरेश सेन निशांत की कवितासमकालीन जनमतOctober 24, 2018October 24, 2018 by समकालीन जनमतOctober 24, 2018October 24, 20185 2383 श्याम अंकुरम सुरेश सेन निशांत नहीं रहे. स्तब्धकारी खबर ! मेरा उनसे परिचय राजवर्धन के संपादन में कविता संकलन ‘स्वर –एकादश ‘ से हुआ था....
स्मृति पहाड़ और नदियों ने खो दिया अपने कवि कोसमकालीन जनमतOctober 23, 2018October 23, 2018 by समकालीन जनमतOctober 23, 2018October 23, 20185 2936 आज जब पहाड़, जंगल और जमीन सहित पूरी मानवता खतरे में है और उन्हें बचाने के लिए संघर्ष जारी है, ऐसे में एक कवि का...
कविता बादल की कविता जीवन की कविता है : रविभूषणसुधीर सुमनOctober 15, 2018October 16, 2018 by सुधीर सुमनOctober 15, 2018October 16, 201805271 बादल की कविताएं वर्गीय दृष्टि की कविताएं हैं : रामजी राय ‘शंभु बादल का कविकर्म’ पर हजारीबाग में आयोजन हजारीबाग के डीवीसी, प्रशिक्षण सभागार में...
कविता शंभु बादल का कवि कर्मकौशल किशोरOctober 15, 2018October 16, 2018 by कौशल किशोरOctober 15, 2018October 16, 201803030 हरेक कवि की अपनी जमीन होती है जिस पर वह सृजन करता है और उसी से उसकी पहचान बनती है। निराला, पंत, प्रसाद, महादेवी समकालीन...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति जबरदस्त कवि, बड़े सम्पादक, सिनेमा और संगीत के अध्येता, गंभीर पाठक, भाषाओं और यारों के धनी विष्णु खरे की यादसमकालीन जनमतSeptember 26, 2018 by समकालीन जनमतSeptember 26, 20183 2624 अशोक पाण्डे अलविदा विष्णु खरे – 1 जबरदस्त कवि, बड़े सम्पादक, सिनेमा और संगीत के अध्येता, गंभीर पाठक, भाषाओं और यारों के धनी उस आदमी...
ख़बरशख्सियतसाहित्य-संस्कृति विष्णु खरे: बिगाड़ के डर से ईमान का सौदा नहीं कियामृत्युंजयSeptember 19, 2018September 19, 2018 by मृत्युंजयSeptember 19, 2018September 19, 201813232 विष्णु जी नहीं रहे। हिंदी साहित्य संसार ने एक ऐसा बौद्धिक खो दिया, जिसने ‘बिगाड़ के डर से ईमान’ की बात कहने से कभी भी...
कविता ‘पूछूंगी अम्मी से/या फिर अल्ला से/कैसे होता है बचके रहना….!’समकालीन जनमतSeptember 14, 2018 by समकालीन जनमतSeptember 14, 20187 1685 आसिफा पर केन्द्रित दो कविता संग्रह का लोकार्पण लखनऊ. निर्भया हो या आसिफा, कठुआ हो या उन्नाव, मुजफ्फरपुर हो या देवरिया – ये स्त्रियों पर...
कविता सुभाष राय की कविताओं की सबसे बड़ी विशेषता है वाग्मिता- राजेश जोशीसमकालीन जनमतSeptember 3, 2018 by समकालीन जनमतSeptember 3, 20182 3185 डॉ संदीप कुमार सिंह लखनऊ. कविता पर एक संजीदा बहस. सुभाष राय के कविता संग्रह ‘ सलीब पर सच ’ के बहाने. आज के समय में हिंदी कविता के दो शिखर व्यक्तित्व नरेश सक्सेना और राजेश...
कविता ‘ आज की कविताएं आत्मचेतस व्यक्ति की प्रतिक्रिया है ’समकालीन जनमतAugust 29, 2018 by समकालीन जनमतAugust 29, 201802825 अनिमेष फाउंडेशन लखनऊ की ओर से फ्लाइंग ऑफिसर अनिमेष श्रीवास्तव की स्मृति में ‘आज की कविता के स्वर’ एवम कविता पाठ का आयोजन किया गया....
जनमत समय को संबोधित सुभाष राय की कविताएँसमकालीन जनमतAugust 15, 2018 by समकालीन जनमतAugust 15, 201803458 वरिष्ठ पत्रकार एवं जनसंदेश टाइम्स के प्रधान सम्पादक सुभाष राय का कविता संग्रह भले ही देर से आया हो पर अपने समय को सम्बोधित महत्वपूर्ण...
ख़बरशख्सियतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति कवि वीरेन डंगवाल के 71वें जन्मदिन पर बरस रही थी कवि की यादसमकालीन जनमतAugust 6, 2018August 6, 2018 by समकालीन जनमतAugust 6, 2018August 6, 201803135 (पांच अगस्त को हिंदी के कवि वीरेन डंगवाल का जन्म दिन होता है । देश भर में कवि की याद में हुए आयोजनों में से...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति वीरेन दा की याद: ‘नदी’ कविता के बहाने सेसमकालीन जनमतAugust 5, 2018August 5, 2018 by समकालीन जनमतAugust 5, 2018August 5, 201801915 शिव प्रकाश त्रिपाठी “ लंबे और सुरीले नहीं थे मेरे गान मेरी सांसे छोटी थी पर जब भी गाए मैंने बसंत के ही गान गाए...
शख्सियत राजेन्द्र कुमार : जैसा मैंने उन्हें देखाप्रणय कृष्णJuly 24, 2018July 24, 2018 by प्रणय कृष्णJuly 24, 2018July 24, 201813981 उनका अलंकरण मुश्किल है. उनके बारे में अतिशयोक्ति संभव नहीं. ध्यान से देखें तो उन्होंने अपने जीवन और अपनी रचना में कुछ भी अतिरिक्त, कुछ...
कविता आधुनिक जीवन की विसंगतियों के मध्य मानवीय संवेदना की पहचान की कवितायेंसमकालीन जनमतJuly 15, 2018July 15, 2018 by समकालीन जनमतJuly 15, 2018July 15, 201802761 विनय दुबे की कविताओं में सहजता और दृश्य की जटिलताओं का जो सहभाव नज़र आता है, वह उन्हें अपनी पीढ़ी का अप्रतिम कवि बनाता है....
कविता एक कविता: हिंग्लिश [शुभम श्री]मृत्युंजयJuly 14, 2018July 14, 2018 by मृत्युंजयJuly 14, 2018July 14, 201803292 शुभम श्री हमारे साथ की ऐसी युवा कवि हैं जिनकी कविताओं में बाँकपन की छब है। एक ख़ास तंज़ भरी नज़र और भाषा को बरतने...
कविताग्राउन्ड रिपोर्टजनमतसाहित्य-संस्कृति अनुपम सिंह की कविताओं पर जसम की घरेलू गोष्ठी की रपटराम नरेश रामJune 26, 2018June 26, 2018 by राम नरेश रामJune 26, 2018June 26, 201802081 अनुपम की कविताएँ अपने वक्त, अपने समाज और अपनी काया के अनुभव से उपजी हुई कविताएँ हैं- योगेंद्र आहूजा पिछली 23 जून 2018 को जसम...
कविता महेश्वर स्मृति आयोजन में युवा कवि अदनान कफ़ील दरवेश और विहाग वैभव का काव्य पाठसमकालीन जनमतJune 25, 2018June 26, 2018 by समकालीन जनमतJune 25, 2018June 26, 201804098 महेश्वर चाहते थे कि कवि-लेखकों और जनता के बीच कम से कम दूरी हो: आलोक धन्वा महेश्वर की लड़ाई को आगे बढ़ाने की जरूरत है:...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति पराजय को उत्सव में बदलती अनुपम सिंह की कविताएँसमकालीन जनमतJune 24, 2018June 19, 2019 by समकालीन जनमतJune 24, 2018June 19, 20192 3465 (अनुपम सिंह की कविताओं को पढ़ते हुए ऐसा लगता है जैसे वे अपने साथ हमें पितृसत्ता की एक बृहद प्रयोगशाला में लिए जा रहीं हैं...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति कुमार मुकुल की कविताएँ : लोकतंत्र के भगवाकरण की समीक्षासमकालीन जनमतJune 10, 2018June 10, 2018 by समकालीन जनमतJune 10, 2018June 10, 20187 3369 30 वर्षों से रचनारत कुमार मुकुल के कविता परिदृश्य का रेंज विशाल और वैविध्य से भरा है , प्रस्तुत कविताओं में आज के समय को...
कविता ‘ मृत्युंजय की कविताएं आम अवाम की बेचैनी, क्षोभ, अवसाद, दुख, पीड़ा और गुस्से का इजहार हैं ’समकालीन जनमतMay 31, 2018June 1, 2018 by समकालीन जनमतMay 31, 2018June 1, 201803446 जन संस्कृति मंच की ओर से छज्जूबाग, पटना में युवा कवि मृत्युंजय के काव्यपाठ और बातचीत का आयोजन हुआ. मृत्युंजय ने ‘यां’, ‘नश्वर-सी सुंदरता’, ‘...