Category : स्मृति

स्मृति

कवि बी एन गौड़: सब में बसता हूँ मैं

कौशल किशोर
86वें जन्मदिवस पर ‘मरूंगा नहीं…/क्रान्ति का इतिहास इतनी जल्दी नहीं मरता/बलिदान के रक्त की ललाई को/न धूप सुखा सकती है/न हवा और न वक्त/….इसलिए, मैं...
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सलाम चितरंजन भाई ! आप ने दमन, अत्याचार के खिलाफ संघर्ष की जो लौ लगाई, वह कभी नहीं बुझेगी

मैं जब गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्नातक की पढ़ाई कर रहा था, तभी पत्रकारिता की तरफ झुकाव शुरू हुआ. वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन शाही (अब सूचना आयुक्त,...
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याद -ए -सादेकैन

अशोक भौमिक
सादेकैन के चित्रों में हम बार-बार मेहनतकश मज़दूरों को केंद्र में देख पाते हैं जहाँ उनके साथ मेहनत करती हुई महिलाएं भी अनिवार्य रूप से...
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टूटते हुए लोगों की आवाज थे चितरंजन सिंह

समकालीन जनमत
चितरंजन सिंह हारे-शिकस्त खाए लोगों की आवाज बन बनकर सामने आए. उन्होंने हमेशा अन्याय का प्रतिरोध किया और डटकर किया. वे बार-बार जेल गए....
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आंदोलन का दूसरा नाम चितरंजन सिंह

राजीव यादव   महाश्वेता देवी के शब्दों में आंदोलन यानि चितरंजन सिंह आज आपातकाल की बरसी पर हम सबको छोड़कर चले गए. मानवाधिकार-लोकतांत्रिक अधिकार आंदोलन...
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चितरंजन सिंह का जाना एक जनयोद्धा का जाना है

कौशल किशोर
चितरंजन भाई (चितरंजन सिंह) के नहीं रहने की दुखद सूचना मिली। उनका जाना एक जनयोद्धा का जाना है। वे क्रांतिकारी वाम आंदोलन के साथ नागरिक...
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आपातकाल में जब गिरफ़्तार हुए पिता

समकालीन जनमत
अनिल शुक्ल    27 जून 1975,पूर्वाह्न। 11-साढ़े 11 बज रहे थे जब पुलिस हमारे घर आ धमकी। लोहामंडी सीओ पुलिस (लोहामंडी), एसएचओ और कोई 2...
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जीत सिंह नेगी के गीतों में पहाड़ की सतत पीड़ा है

समकालीन जनमत
जीत सिंह नेगी उत्तराखंड के पहले कलाकार थे जो गढ़वाली गीत-संगीत को रिकॉर्डिंग स्टुडियो तक ले गए. 1949 में उनका पहला ग्रामोफोन रिकॉर्ड हुआ था....
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हीरा सिंह राणा के गीतों में पहाड़ का लोक धड़कता है

समकालीन जनमत
नवेंदु मठपाल 13 जून की सुबह सुबह जैसे ही फेसबुक खोला एक मित्र की वाल पर उत्तराखण्ड के लोकगायक, कुमाउनी कवि हीरा सिंह राणा जी...
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‘ लसका कमर बांधा, हिम्मत का साथा, फिर भोला उज्याली होली, कां ले रौली राता ’  

व्यक्तिगत दुख,तकलीफ और परेशानियों की परवाह किए बगैर हीरा सिंह राणा पहाड़ के,पहाड़ के सुख-दुख और पीड़ा-वंचना के गीत गाते रहे....
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‘ कदम ’ पत्रिका के संपादक और कथाकार कैलाश चंद चौहान नहीं रहे 

राम नरेश राम
‘ कदम ‘ पत्रिका के संपादक और प्रकाशक दलित साहि‘त्य के बड़े कथाकार कैलाश चंद चौहान का 15 जून को दोपहर 12 बजे निधन हो...
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बरनवाल साहब : मेरे प्रेरक, मेरे गुरु

शिवमूर्ति.
वीरेन्द्र कुमार बरनवाल साहब 1969 में गनपत सहाय डिग्री कालेज सुल्तानपुर में अंग्रेज़ी के प्रवक्ता बन कर आये. इलाहाबाद में रह कर पढ पाना मेरे...
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शांति स्वरूप बौद्ध का निधन वंचित समाज और बौद्धिक सांस्कृतिक दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है

समकालीन जनमत
2 अक्टूबर 1949 को दिल्ली में जन्मे बहुजन साहित्य के मिशनरी प्रकाशक और प्रचारक शांति स्वरूप बौद्ध का शनिवार को कोरोना संक्रमण के कारण निधन...
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संघर्ष और स्वप्न का कवि रामेश्वर प्रशान्त

समकालीन जनमत
साहित्य की दुनिया में ऐसे भी रचनाकार हैं जिनकी साहित्य साधना जन संघर्ष का हिस्सा होती हैं। वे आत्मप्रचार से दूर रहते हैं। रामेश्वर प्रशान्त...
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असाधारण का वैभव और साधारण का सौंदर्य : बासु चटर्जी

आशीष कुमार
अनायास नहीं, कुछ संबंध सायास भी जुड़ते हैं । मुकम्मल याद नहीं मुझे, लेकिन पहली बार टेलीविजन पर ‘रजनीगंधा’ देखा था। उस समय तक मैं...
जेरे बहस स्मृति

नेहरू और फासीवाद : संघ विरोध के मायने

मुकेश आनंद
स्मृति दिवस पर विशेष 1917 ईस्वी में रूस में सम्पन्न हुई मजदूरों की क्रांति ने सारी दुनिया के समाजों के प्रतिक्रियावादी तत्वों को भयभीत, चौकन्ना...
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राजीव गांधी से एक मुलाकात

नेहरू ने जिस आत्मनिर्भर एवं समाजवादी भारत की परिकल्पना की थी, राजीव गांधी ने अपने प्रधानमंत्रित्व काल में उसे मूर्त रूप प्रदान करने की कोशिश...
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नंदकिशोर नवल : हिन्दी आलोचना की एक असमाप्त यात्रा 

आशुतोष कुमार
नवल जी हिन्दी की साहित्यिक सम्वेदना और सुरुचि को उत्पीडित साधारण-जन के संघर्ष की जरूरतों के मुताबिक़ ढालने वाले आलोचकों में अग्रणी रहे हैं.  संघर्ष...
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असगर अली इंजीनियर : सच्चा धर्मनिरपेक्ष, नायाब विद्वान और निर्भीक एक्टिविस्ट

फिरकापरस्त ताकतों के खिलाफ एकजुटता ही आज डा़ असग़र अली इंजीनियर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी....
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मैंने कैफ़ी आज़मी को देखा है, सुना है और जाना है

“बस इक झिझक है यही हाल ए दिल सुनाने में, कि तेरा जिक्र भी आएगा इस फसाने में।” जिस समय कैफ़ी साहब का इंतकाल (10...